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Aasmaan Se Aage by Vineet Bajpai
एक उद्यमी के रूप में जिसने जमीन पर एक-एक ईंट रखकर एक सुदृढ़ किला तैयार किया है, मैं इन राज-रहस्यों तक सीमित, किंतु बहुमूल्य पहुँच बनाने में सफल रहा हूँ। एक मैनेजमेंट लेखक और गाइड के रूप में मैं अपना यह कर्तव्य समझता हूँ कि इस सीमित किंतु अमूल्य बुद्धिमत्ता को अपने उन तमाम साथी उद्यमियों, कारोबारियों और छोटी कंपनियों के कर्मचारियों से साझा करूँ, जो इन सिद्ध हथियारों के बूते सफलता की रोशनी देखने में सक्षम बनें।
यह पुस्तक तमाम गुप्त संहिता को उजागर कर पाएगी या नहीं, लेकिन यह आपको वह कॉरपोरेट योद्धा बनने में मदद करेगी, जो एक दिन विजयी बनेगा। न तो मैं आराम करूँगा और न ही आपको आराम करने दूँगा।
मैं यहाँ जो स्थापित करने की कोशिश कर रहा हूँ, वह न केवल उद्यमियों, बल्कि उन तमाम कारोबारी लोगों, चाहे वे स्व-निर्मित उपक्रम या पारिवारिक कंपनियाँ चलाते हों या वे इन कंपनियों में कर्मचारी हों या बड़े संगठनों में मैनेजर हों—के छोटे और मँझोले कारोबारों को विशाल निगमों और धीमी रफ्तार वाले विभागों को लाभकारी इंजनों में तब्दील करने की शाश्वत खोज है। और हाँ, यह साधारण कॅरियरों को चमकदार व सफल कहानियों में रूपांतरित करने की चाहत है। आसमान से आगे यह दिखाने का एक प्रयास है कि ऐसा कैसे किया जा सकता है।
—इसी पुस्तक से
व्यापार को चमकदार बनाने के व्यावहारिक नुस्खे और सूत्र बतानेवाली यह पुस्तक न केवल छोटे एवं मँझोले व्यापार-मालिकों, उनके कर्मचारियों और तमाम तरह के उद्योगों के मैनेजरों, बल्कि युवा कार्याधिकारियों एवं मैनेजमेंट के विद्यार्थियों को चमकदार कॉरपोरेट कॅरियर बनाने में समान रूप से उपयोगी है।
Aatamvishwas Safalta Ki Seedhi
Aatmavishvaas kee shakti aur kshamata ko aaj sabanei pahachaan liya hai, yahee vah tattv hai, jo vyakti ke unnati mein kaaragar bhumika nibhaata hai. Saahas aatmavishvaas ka puurak hai. Aatmaheenata se grast vyakti kabhee nidar aur saahasee naheen ho sakata.
Aapakee kaaryakshaitra main to isaka mol sarvaadhik hai. Aap kitanee hee vipattiyon see kyoon na ghiree hon, yadi aap mein aatmavishvaas hai; to barde se-bade chunautiyan bhee aapaka kuchh naheen bigaad paayeengee aur aap kisee kushal mallaah kee tarah tuuphaanoon mein ghiree naav ko kinaaree par lee hee aayeengee, aisa vishv ke mahaan maneeshiyoon ka daava hai.
Prastut pustak aatmavishvaas safalata ke seedhee ka pratyeek adhyaay paathakoon ke liye preeranaadaayak hai. Jaisee-jaisee aap aage padhate jayengeen, aapameen saahas eevan aatmavishvaas badhata jaeega.
Bahut see loog yoogy, anubhavee aur pratibhaashaalee hootee hain, leekin aatmavishvaas kee kamee ke kaaran ve apanee pratibha ka samuuchit upayoog naheen kar paatee. Aakhir mein ve kunthit hookar svayan ko doshee maan baithatai hain, jabaki yah sachchaai naheen hai. Unheen apane bheetar supt aatmavishvaas ko jagaakar apane unnati ka maarg prashast karana chaahiye.(How you feel about yourself is a key issue in achieving anything in life. A self-confident person has high self-esteem, self-respect, and belief in him. By developing your self-confidence, you can achieve your goals; take opportunities that come your way and also have the strength to overcome any obstacles. Self-confidence is very important for having a successful career. When attending job interviews or hoping for a promotion, the way you behave and believe in yourself will ultimately create a win or a lose situation. This book shows the way by citing examples of people who accomplished success through self-belief. ) #v&spublishers
Aatank Ke Saye Mein by Smt. Garima Sanjay
धमाकों के शुरू होते ही सारी चहलपहल ठहर गई थी। जो जहाँ था, वहीं रह गया। आतंकियों ने इतनी तेजी से पूरे होटल की अलगअलग जगहों को निशाना बनाया था कि किसी को कुछ सोचनेसमझने का मौका ही न मिला। सुरक्षाकर्मचारियों ने फिर भी बड़ी मुस्तैदी से अपना काम सँभाला, और जितना संभव हो सका, मेहमानों को उनके कमरों में, या किसी अन्य सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया। अधिकतर कमरों, रेस्टोरेंट, किचेन आदि को मजबूती से बंद कर दिया गया, ताकि उसके अंदर लोग सुरक्षित रह सकें। होटल के कर्मचारियों को भी सुरक्षित स्थानों पर ही बने रहने की हिदायत दे दी गई। कमरों में अँधेरा कर देने के निर्देश दे दिए गए, ताकि किसी परछाईं से भी आतंकियों को यह आभास न हो सके कि किसी कमरे में कोई है।
—इसी उपन्यास से
आज दुनिया के देश भय और आतंक के साये में जी रहे हैं। आतंकवाद विकास और तरक्की की राह में सबसे बड़ा अवरोध है। अतिवादियों से मानवता पीडि़त है। निरपराध लोग, यहाँ तक कि बच्चे भी इन दुर्दांतों की गोलियों का शिकार बन रहे हैं। मानवता की बलि चढ़ रही है, हिंसा का तांडव हो रहा है। प्रस्तुत उपन्यास में इस विभीषिका का सजीव चित्रण है। संभवतः ऐसी रचनात्मक कृतियाँ आतंक और हिंसा फैला रहे आतंकवादियों के दिलों को छू सकें, किसी हद तक उन्हें प्रभावित कर उनका हृदयपरिवर्तन कर सकें, ताकि मानव जाति का विनाश रुक सके।
‘आतंक के साये में’ ऐसा प्रयास है, जिसमें आतंकवाद की समस्या से लेकर सामाजिक, पारिवारिक एवं भीतरी भावनात्मक आतंक तक का विश्लेषण किया गया है।
Aatank Ki Dahashat by Tej N. Dhar
वर्ष 1990 के शुरू का कश्मीर, जब घाटी में आतंकी हिंसा चरम सीमा पर थी। हत्याएँ, आगजनी और आतंकियों का प्रकोप काले धुएँ की तरफ फैल गया था। इसलामिक और आजादी के नारे चारों ओर गूँज रहे थे। पंडितों को कश्मीर से जाने की चेतावनी दी जा रही थी और उन्हें मजबूर करने के लिए रोज एक या कई पंडितों को क्रूरता-बर्बरतापूर्वक मारा जाता था। यही सब इस डायरी रूपी उपन्यास में पूरी तरह से दरशाया गया है और आतंकियों तथा खुदगर्ज राजनीति नेताओं के फैलाए हुए झूठ कि पंडितों को जगमोहन ने निकाल दिया, को नंगा कर दिया है। बहुत ही सटीक और मार्मिक घटनाओं में पंडितों की बेबसी और मजबूरी को उजागर किया है।
डायरी का नायक अकेला है और मानसिक तनाव से ग्रस्त भी। खौफ के माहौल में अपनी पुरानी यादें भी जीता है, जिससे उसका आज और भी भयानक तरीके से उभर आता है। अंत तक इसी द्वंद्व में रहता है कि घाटी में रहना चाहिए या जाना चाहिए। इसी उधेड़बुन में उसका अंत भी होता है, पर यह सवाल भी उठता है कि या उसे कश्मीरियों की तरह अपने घर में रहने का हक है या नहीं। यह मार्मिक कथा भारत के इतिहास में एक काले धबे से कम नहीं है।
Aatma Samman Kyun Aur Kaise Badhyein
The Author, in this book, has laid out the ways to increase and maintain one’s self-respect. Without Self-Respect, a person is like a living corpse, having no sense of himself and others. The Author has given detailed study of why we lose respect for ourselves and what are the factors that influence our self-image in our eyes. He has also mentioned ways of maintaining our self respect and living a happy life. A book meant for anyone and everyone, it is a must read for you and your family.
Aatmvishwas Hai Jahan, Safalta Hai Wahan by Atmaprakash
दुनिया में शायद ही कोई ऐसा मिले, जिसे खुद पर विश्वास होते हुए भी जीवन में सुख और सफलता न मिली हो। हाँ, ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है, जिनके पास योग्यता और कौशल तो है, बावजूद इसके आत्मविश्वास की कमी के कारण वे जीवन में सफलता की दौड़ में पिछड़ जाते हैं। वास्तव में, हम सब यह जानते और सुनते आए हैं कि आत्मविश्वास सफलता के लिए सबसे जरूरी है; लेकिन यह आत्मविश्वास एक दिन या किसी एक मामले में नहीं आ सकता। यह एक जरूरी आदत है, जिसे हमें खुद विकसित करना होता है। हमारे हर क्रिया-कलाप में, हमारी बातों में, हमारे व्यवहार में और हमारी जीवन-शैली में आत्मविश्वास झलकना चाहिए। आत्मविश्वास है तो हर सपने को साकार किया जा सकता है। अगर आत्मविश्वास है तो आपको सफल होने से कोई रोक नहीं सकता।