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Abhilashaa अभिलाषा
Abhilashaa ,an online Hindi e-magazine founded & edited by Abhilipsa Parhi. A P Subhakanta is the co-editor.
Abhimanyu (Hindi)
The Kauravas had made a fateful error. Lusting after their cousin’s kingdom, they underestimated young Abhimanyu’s determination and ability to defend it. Brilliantly distilled in this handsome and much-loved Pandava prince were his father Arjuna’s courage, Lord Krishna’s wisdom and the patience and the strength and gentle humility of his uncles. Even as he thwarted his enemies’ ambitions’ Abhimanyu earned their grudging admiration and a very special place in the saga of the Mahabharata.
Abhinav Sangraha by Karuna Pande
अभिनव संग्रह—करुणा पांडे
काव्य मानव जीवन का उत्सव है और प्रकृति काव्य की आत्मा। बिना प्रकृति के मानव का जीवन अपंग जैसा ही है। मानव केवल चेतनता के साथ ही जन्म नहीं लेता, वरन् वह जड़ व चेतन दोनों की अनुपम देन है। प्राचीनकाल से ही प्रकृति मानव जीवन में रची-बसी है। प्राकृतिक सौंदर्य मानव को अलौकिक आनंद प्रदान करता है।
प्रकृति के विभिन्न उपादान, यथा—रात्रि, प्रभात, पुष्प, पक्षी, जल, अंधकार, प्रकाश, समुद्र, शिला, सुगंध आदि कितने रूपों में हमारे सामने अपनी स्नेहमयी छाया बिखेरे हुए हैं। सब अपने में कितने अलौकिक गुण सहेजे हुए हैं। इनको अलग-अलग महसूस करने पर कुछ भाव मन में उठे, जो स्वतः शब्दों में ढल कविता का चोला पा गए।
इन कविताओं में विभिन्न क्षणों के विभिन्न रंग हैं। देशभक्ति का रंग है तो देश की दुर्दशा पर विलाप भी। अंतर से निकली सहानुभूति भूखे, नंगे से तादात्म्य स्थापित करने में सक्षम है।
‘अभिनव संग्रह’ की कविताएँ हृदयस्पर्शी होने के साथ-साथ विचारोत्तेजक भी हैं। भाषा भावों एवं विचारों का अनुगमन करती है। सहज भाषा में बड़ी बात कही गई है। प्रतीकों का भी प्रयोग हुआ है। विश्वास है, हिंदी जगत् में इस कविता संकलन का भरपूर स्वागत होगा।
Acharya Raghuveer by Shashibala
राष्ट्रोत्थान हेतु ज्ञानमार्ग के पुजारी आचार्य रघुवीर जन-जन को आंदोलित कर उनमें अस्मिता, आत्मगौरव और स्वाभिमान का भाव जगाकर उन्हें वैचारिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक चेतना और स्वभाषा के स्वाभिमान के मार्ग पर चला देना चाहते थे।
इस पुस्तक में भारतीय धरोहर के मनीषी आचार्य रघुवीर की अद्भुत मेधा और विचारपूर्ण चिंतन के बारे में विस्तृत जानकारी है। यूरोप में विद्यार्थी के रूप में उनका अध्ययन, अनुसंधान एवं लेखन एवं भारत लौटने पर वैदिक वाङ्मय पर किया गया अनुसंधान कार्य तथा संस्कृत के उत्कर्ष का स्वप्न आदि विषयों पर प्रकाश डाला गया है। संस्कृति के अग्रदूत के रूप में उनका व्यक्तित्व, सांस्कृतिक धरोहर के रक्षण एवं अनुसंधान हेतु सरस्वती विहार की स्थापना, एशिया के विभिन्न देशों में उनकी यात्राएँ, उनके द्वारा स्थापित सांस्कृतिक संबंध, उन देशों में किए गए कार्य तथा वहाँ से संगृहीत सांस्कृतिक निधियाँ आदि विषयों पर सचित्र वर्णन प्रस्तुत हैं।
साथ ही आचार्य रघुवीर के राष्ट्रभाषा दर्शन पर एक विशेष अध्याय के माध्यम से उनके द्वारा निर्मित पारिभाषिक एवं वैज्ञानिक शब्दावली, उनकी दृष्टि से राष्ट्रभाषा का स्वरूप, बृहत् आंग्ल-भारतीय शब्दकोश की रचना, संसदीय हिंदी की नींव, प्रांतीय भाषाओं का गौरव, राष्ट्रीय एकता का माध्यम संस्कृतनिष्ठ हिंदी, अंग्रेजी-हिंदी शब्द-कोश का निर्माण तथा देवनागरी अक्षरों का मुद्रलिख (टाइपराइटर) बनवाना आदि विषयों पर प्रकाश डाला गया है।
प्रखर चिंतक, विचारक, राष्ट्रभाषा के प्रबल पैरोकार, भविष्यद्रष्टा और उत्कृष्ट देशभक्त आचार्य रघुवीर की प्रेरणाप्रद जीवनी।