Autobiography by John Stuart Mill

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It seems proper that I should prefix to the following biographical sketch some mention of the reasons which have made me think it desirable that I should leave behind me such a memorial of so uneventful a life as mine. I do not for a moment imagine that any part of what I have to relate can be interesting to the public as a narrative or as being connected with myself. But I have thought that in an age in which education and its improvement are the subject of more, if not of profounder, study than at any former period of English history, it may be useful that there should be some record of an education which was unusual and remarkable, and which, whatever else it may have done, has proved how much more than is commonly supposed may be taught, and well taught, in those early years which, in the common modes of what is called instruction, are little better than wasted.

Autobiography of a Child by Hannah Lynch

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The picture is clear before me of the day I first walked. My mother, a handsome, cold-eyed woman, who did not love me, had driven out from town to nurse’s cottage. I shut my eyes, and I am back in the little parlour with its spindle chairs, an old-fashioned piano with green silk front, its pink-flowered wall-paper, and the two wonderful black-and-white dogs on the mantelpiece. There were two pictures I loved to gaze upon—Robert Emmett in the dock, and Mary Stuart saying farewell to France. I do not remember my mother’s coming or going. Memory begins to work from the moment nurse put me on a pair of unsteady legs.

Autobiography of a Yogi by Paramahansa Yogananda

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Autobiography of a Yogi introduces the reader to the life of Paramahansa Yogananda and his encounters with spiritual figures of both the East and West. The book begins with his childhood family life, to finding his guru, to becoming a monk and establishing his teachings of Kriya Yoga meditation. The book continues in 1920 when Yogananda accepts an invitation to speak in a religious congress in Boston, Massachusetts, USA. He then travels across America lecturing and establishing his teachings in Los Angeles, California. In 1935 he returns to India for a yearlong visit. When he returns to America, he continues to establish his teachings, including writing this book.

The book is an introduction to the methods of attaining God-realization and to the spiritual thought of the East, which had only been available to a few in 1946. The author claims that the writing of the book was prophesied long ago by the nineteenth-century master Lahiri Mahasaya.

Autobiography of Andrew Carnegie by Andrew Carnegie

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This is the autobiography by the richest man of his time, after Rockfeller, who donated most of his fortune to establish schools and universities in many countries.

Autobiography of Satan by John R. Beard

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As this book is intended not so much for scholars as the general public, I have not attempted more than a series of readable sketches. The same, consideration has led me to adopt the autobiographical form, which, with the supposition of an intelligent companion, gives me some of the advantages of a conversational style.

Automobile Biographies by Lyman Horace Weeks

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Writers of that day recorded with a great deal of particularity the experimenting with boilers, engines, machinery and carriages, and the promoting of companies for the transportation of passengers and the hauling of goods. Modern students and historians of this subject find themselves greatly indebted to the writers of that epoch, like Gordon, Herbert and others, who preserved, with such painstaking care, for future generations, as well as for their own time, the account of the lives and labors of such men as Watt, Trevithick, Maceroni, Hancock and others. Every modern work upon this subject draws generously from those sources.

Avachetan Man Ki Shakti by Joseph Murphy

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‘अवचेतन मन की शक्ति’ अब तक की एक सर्वाधिक लोकप्रिय प्रेरणादायी पुस्तक है, जो यह दिखाती है कि आप अपने विचार की पद्धति को बदल लें तो अपने जीवन में किस प्रकार के आश्चर्यजनक सुधार कर सकते हैं। व्यावहारिक, समझने में सरल तकनीकों और वास्तविक जगत् के मामलों का उपयोग करते हुए डॉ. जोसेफ मर्फी जीवन के सभी पहलुओं—पैसा, संबंध, नौकरी, खुशी पर अवचेतन मन के व्यापक प्रभावों से परदा उठाते हैं और बताते हैं कि आप अपने लक्ष्यों और सपनों को पूरा करने के लिए इसे कैसे लागू कर सकते हैं तथा इसकी शक्ति को सही दिशा दे सकते हैं। इस पुस्तक के माध्यम से डॉ. मर्फी पाठकों को इस प्रकार के साधन उपलब्ध कराते हैं, जिनसे वे अपने अवचेतन मन की अद्भुत शक्तियों को उन्मुक्त कर सकते हैं। कोई भी इसे अपनाकर अपने संबंधों, वित्तीय स्थिति और तंदुरुस्ती सुधार ला सकता है। यदि व्यक्ति एक बार इस अविश्वसनीय रूप से शक्तिशाली बल का उपयोग सीख जाए,
तो ऐसा कुछ भी नहीं, जिसे वह प्राप्त नहीं कर लेगा।

Avachetan Mann Ki Shaktiyan by N.K. Sharma

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यह कृति हमारे अवचेतन मन की शक्तियों के छिपे रहस्यों के संबंध में है। यह ईश्वर प्रदत्त शक्ति जीवन के सभी क्षेत्रों में हमारी सफलता का सबसे बड़ा साधन बन सकती है। आधुनिक उन्नत वैज्ञानिक युग में भी इस विषय को स्कूलों या कॉलेजों में पढ़ाने के कदम नहीं उठाए गए हैं। सामान्य जन को इस विषय की शिक्षा देने के अभाव के कारण अन्य वैकल्पिक संस्थानों की बाढ़ सी आ गई है, जो उन लोगों की आवश्यकता को पूरा कर रहे हैं। इन विषयों में रुचि रखनेवाले लोग सम्मोहन, एन.एल.पी., आकर्षण के नियम की गुप्त बातों, रचनात्मक दृश्यांकन, मन की शक्ति और अवचेतन मन की प्रोग्रामिंग की कार्यशालाओं के माध्यम से प्रयास कर रहे हैं और सीख रहे हैं। लेकिन ऐसा करनेवाले विश्व की आबादी के एक प्रतिशत भी नहीं हैं। अपने मन की शक्ति को कोई जितना ही जानता और उसकी तलाश करता है, विशेष रूप से चेतन और अवचेतन मन की, वह ज्ञान के पथ पर उतना ही आगे बढ़ता चला जाता है। यह पुस्तक एक सामान्य मनुष्य को उसकी अज्ञानता से बाहर लाने और उसकी इच्छा के अनुसार मन को वश में रखने में निश्चित रूप से मदद करेगी।

Avadh Narayan Mudgal Ki Lokpriya Kahaniyan by Avadh Narayan Mudgal

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कुत्ता कान-पूँछ हिलाने के साथ-साथ कूँ-कूँ भी करने लगा, जैसे डाँटकर और जोर देकर कह रहा हो, ‘‘…चुप, झूठे कहीं के। मेरी जीभ और नाक झूठी नहीं हो सकती। मुझे दुनिया में उन पर सबसे अधिक विश्वास है, तुमसे भी अधिक। मैं नहीं मान सकता कि…’’
मैंने बहुत समझाया, कसमें खाईं, लेकिन उसके कान-पूँछ का हिलना बंद न हुआ।
उसी समय, असावधानी या घबराहट में मुन्ना का दायाँ पैर कुत्ते के दूधवाले तसले में गिर गया। कुत्ते ने पैर में दाँत गड़ा दिए, जैसे मेरी बात पर बिल्कुल विश्वास न हो, मुन्ना का खून मेरे खून से मिलाना चाहता हो। मुझे लगा—मेरे पैर में दाँत गड़ गए हों। क्रोध में मेरी फुँकार छूट गई, जैसे कहा हो, ‘‘इतना विश्वास!’’ और उठकर दूध का तसला कुत्ते के सिर पर दे मारा। कुत्ता कें-कें करने लगा, मुन्ना की ऐं-ऐं और बढ़ गई।
—इसी संग्रह से
अपने समय के शीर्ष संपादक व लेखक श्री अवध नारायण मुद्गल की पठनीय कहानियों का संकलन। ये रचनाएँ समाज में फैली विसंगतियों और विद्रूपताओं को आईना दिखाने का सशक्त माध्यम रही हैं।

Average Americans by Theodore Roosevelt

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All our lives my father treated his sons and daughters as companions. When we were not with him he wrote to us constantly. Everything that we did we discussed with him whenever it was possible. All his children tried to live up to his principles. In the paragraphs from his letters below, he speaks often of the citizens of this country as “our people.” It is for all these, equally with us, that the messages are intended.

Avinash Zinda Hai by Aanad Sharma

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गीता कुछ गंभीर हो गई थी, ‘‘अविनाश! मुझे तुमसे कुछ बातें करनी हैं। तुम्हारे बारे में मन में घुमड़ते कुछ प्रश्नों के उत्तर लेने हैं। चलो, कहीं बैठकर बातें करते हैं।’’
‘‘तो ठीक है। तुम्हारे कॉलेज की कैंटीन में ही बैठकर बातें करते हैं।’’
‘‘अरे! दिमाग खराब हो गया तुम्हारा। वह गर्ल्स कैंटीन है। कोई लड़का वहाँ नहीं जा सकता।’’
वह अपने खिलंदड़ी अंदाज में हँसा, ‘‘चलो, चलकर देखते हैं। हमें कौन रोकता है।’’
गीता बौखला गई, ‘‘अविनाश! तुम वाकई पागल हो। यह भी नहीं सोचा कि लड़कियों से भरी कैंटीन में मुझे तुमसे बातें करते देख पूरे कॉलेज में मेरी बदनामी हो जाएगी।’’
अविनाश खिलखिलाकर हँस पड़ा, ‘‘अरे! कृष्ण की पवित्र गीता हजारों सालों में बदनाम नहीं हुई, तो कैंटीन में अविनाश कृष्ण के साथ चाय पीने से कैसे बदनाम हो जाएगी?’’
‘‘अविनाश! तुम वाकई पागल हो। मैं तुम्हारे साथ कॉलेज कैंटीन में जाने का रिस्क नहीं ले सकती। हाँ, किसी और रेस्टोरेंट में चलने में मुझे एतराज नहीं है।’’
—इसी पुस्तक से
ईर्ष्या-प्रेम, राग-द्वेष के भँवर में फँसे मानव संबंधों को बारीकी से अध्ययन कर लिखी गई अत्यंत रोचक कहानियों का पठनीय संकलन।

Awadhi Lok Sahitya Mein Prakriti Pooja by Vidya Vindu Singh

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लोक अपनी नैसर्गिक स्थितियों में स्वयं प्रकृति का पर्याय है। लोक दृष्टि का विकास प्रकृति के सहजात संस्कारों का परिणाम ही है। लोक और प्रकृति के अंर्तसंबंधों के संदर्भ में विकसित हमारे जीवन के अनेक सांस्कृतिक आयामों में प्रकृति और मनुष्य के बीच जो अभेद दृष्‍ट‌ि है, वह मानती है कि जैसे मनुष्य रक्षणीय है, वैसे ही प्रकृति रक्षणीय है।
प्रकृति और मानवीय सरोकारों से संबद्ध मूल्य चेतना हमारे लोक साहित्य में, लोक संस्कारों में और आचारों-व्यवहारों में निरंतर अभिव्यक्त होती रही है। लोक-विद् डॉ. विद्या विंदु सिंह ने प्रस्तुत कृति में इसी मूल्य दृ‌ष्‍ट‌ि का उन्मोचन किया है। लोक परंपरा में उपस्थित प्रकृति की जीवंत हिस्सेदारी जिन विश्‍वासों और जिन आस्थाओं में प्रकट होती है—उनका सम्यक् और सार्थक निर्वचन प्रस्तुत कृति में संभव हुआ है।
आज जब हम प्रकृति के साथ जुड़़े रागानुबंध को तोड़कर नितांत अकेले पड़ते जा रहे हैं और इस परिदृश्य से उत्पन्न अनेक खतरों को झेल रहे हैं—तब हमें प्रकृति के साथ होने का अहसास यह कृति दिलाती है। अपनी सहज संवेद्यता में यह कृति समकालीन जीवन की अनेक जड़ताओं को भंग करने में अपनी भूमिका का निर्वाह करेगी।
—डॉ. श्यामसुंदर दुबे
निदेशक, मुक्‍त‌िबोध सृजनपीठ
डॉ. हरिसिंह, गौर केंद्रीय विद्यालय सागर (म.प्र.)

Awadhi Lokgeet Virasat by Dr. Vidya Vindu Singh

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वाचिक साहित्य अर्थात् लोक-साहित्य की सुदीर्घ परंपरा और उसके विश्वव्यापी विस्तार से आज बुद्धिजीवी वर्ग और साहित्यकार भी न केवल परिचित हुए हैं वरन् उसका महत्त्व भी स्वीकार करने लगे हैं। लोक-साहित्य की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी सुदीर्घ और समृद्ध है। इसके माध्यम से सांस्कृतिक विकास और सभ्यता के उत्थान-पतन का इतिहास समझा जा सकता है। मानवीय जीवन-मूल्यों के प्रति बदलती दृष्टियाँ और उसकी शाश्वत उपस्थिति सबका प्रामाणिक दस्तावेज भी इसमें सुरक्षित रहता है।
अवधी की वाचिक परंपरा में लोकगीतों के रूप में पद्य विधा जितनी समृद्ध है, उतनी ही लोककथाओं के रूप में गद्य विधा भी है। गद्य-पद्य मिश्रित विधा लोकगाथाओं (फोक वैलेड्स), लोक सुभाषित, लोक मुहावरे और लोकोक्तियों की भी समृद्ध परंपरा अवधी में है। कुछ लोक विश्वास, रीति-रिवाज, व्रत-पर्व-त्योहारों की परंपरा भी वाचिक साहित्य के माध्यम से ही पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती रहती है।
अवधी लोक-साहित्य की वाचिक परंपरा में शास्त्र के वे सभी उद्देश्य समाहित हैं, जिन्हें ऋषि-मुनियों ने अपने ज्ञान के फल के रूप में अपने विचारों के माध्यम से जनहित में अभिव्यक्त किया है। वह ज्ञान लोक चेतना में संचरित होते हुए लोक व्यवहार में उतरता रहा है। उसकी वर्जनाएँ और स्वीकृति दोनों को अवधी लोक-साहित्य ने अभिव्यक्त किया है। अवधी लोकगीतों की यह विरासत पठनीय ही नहीं, संग्रहणीय भी है।

Awadhi Muhavare Evam Lokoktiyan by Dr. G.S. Shrivastava

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प्रस्तुत पुस्तक अवधी भाषा के प्रचलित मुहावरे और लोकोक्तियों का संग्रह है। यह पुस्तक न तो सऌपूर्ण मुहावरों का वृहद्कोश है और न हम ऐसा दावा करते हैं। मुहावरे भाषा की जीवंतता को दरशाते हैं। किसी बात को सही तरीके से बताने के लिए मुहावरे और लोकोक्तियों का सहारा लिया जाता है। प्रायः किसी बात के मर्म को बताने के लिए लऌंबे विवरण के बजाय मुहावरे या लोकोक्तियों के द्वारा सुगमता से और शुद्ध रूप में बताया जा सकता है। मुहावरे समाज की स्थितियाँ भी बताते हैं। मुहावरे और लोकोक्तियों में भेद किया जा सकता है। मुहावरे छोटे और किसी विशेष बात के संदर्भ, दृष्टांत या निष्कर्ष से बने होते है और धीरे-धीरे प्रचलित हो जाते हैं, जिनका उपयोग भाषा में सऌंप्रेषण के साथ-साथ चुटीलापन भी प्रदान करता है। लोकोक्ति किसी पूर्व घटना की उपमा या दृष्टांत होने के साथ-साथ कुछ उपदेश या ज्ञान की बात भी बताती है। मुहावरे आज भी गढे़ जा रहे हैं, जो प्रायः मीडिया व फिल्म के माध्यम से लोगों तक पहुँचते हैं, पर वही मुहावरे जीवित रह पाते हैं, जो लोगों की जबान पर चढ़ जाते हैं।
प्रस्तुत पुस्तक में ठेठ अवधी मुहावरों के साथ-साथ हिंदी-उर्दू में प्रचलित मुहावरों का भी समावेश किया गया है। पुस्तक के अंतिम अध्याय में इन सभी मुहावरों और लोकोक्तियों को अक्षरानुसार सूचीबद्ध किया गया है, जिससे किसी भी मुहावरे को ढूँढ़ने में आसानी रहे। यह पुस्तक सामान्य पाठकगण, भाषाविद् तथा भाषा के शोध छात्रों में समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।

Awesome Stories from World History by A.K. Gandhi

SKU: 9788184305221

The world’s history is a treasure trove of great many accounts, which have shaped the world towards its voyage in assuming the present shape. Such accounts are so numerous that it is impossible to narrate them all in a book of this size, so we have chosen only 25 of them which we think are amongst the most thrilling and awesome. We have chosen these stories from different shades of qualities that man displays, so as to provide the readers with a comprehensive read; this is the reason that you will find yourself face to face with the Trojan Horse to Opium Wars to Christmas Truce to spectacular adventures on the sea; and don’t forget the adventures of Robin Hood.

Ayodhya Ka Chashmadeed by Hemant Sharma

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अयोध्या का मतलब है, जिसे शत्रु जीत न सके। युद्ध का अर्थ हम सभी जानते हैं। योध्य का मतलब, जिससे युद्ध किया जा सके। मनुष्य उसी से युद्ध करता है, जिससे जीतने की संभावना रहती है। यानी अयोध्या के मायने हैं, जिसे जीता न जा सके। पर अयोध्या के इस मायने को बदल ये तीन गुंबद राष्ट्र की स्मृति में दर्ज हैं। ये गुंबद हमारे अवचेतन में शासक बनाम शासित का मनोभाव बनाते हैं। सौ वर्षों से देश की राजनीति इन्हीं गुंबदों के इर्द-गिर्द घूम रही है। आजाद भारत में अयोध्या को लेकर बेइंतहा बहसें हुईं। सालों-साल नैरेटिव चला। पर किसी ने उसे बूझने की कोशिश नहीं की। ये सबकुछ इन्हीं गुंबदों के इर्द-गिर्द घटता रहा। अब भी घट रहा है। अब हालाँकि गुंबद नहीं हैं, पर धुरी जस-की-तस है। इस धुरी की तीव्रता, गहराई और सच को पकड़ने का कोई बौद्धिक अनुष्ठान नहीं हुआ, जिसमें इतिहास के साथ-साथ वर्तमान और भविष्य को जोड़ने का माद्दा हो, ताकि इतिहास के तराजू पर आप सच-झूठ का निष्कर्ष निकाल सकें। उन तथ्यों से दो-दो हाथ करने के प्रामाणिक, ऐतिहासिक और वैधानिक आधार के भागी बनें।

Ayodhya Ka Ravan Aur Lanka Ke Ram by Dinkar Joshi

SKU: 9789384344023

राम के चरित्र में भगवान् राम का व्यक्ति के रूप में और उनके व्यक्तित्व के संदर्भ में केवल दो नहीं, व्यासकर्मी लेखक ने कई आँखों से निरीक्षण-दर्शन किया है। राम के बारे में वसिष्ठ की दृष्टि, विश्वामित्र का नजरिया, जनक-सुनयना-जानकी, पुरवासी, महाराज दशरथ, कौशल्यादि माताएँ, भरतादि भाई, निषाद समुदाय, गिद्धराज जटायु, असुर, सुग्रीवादि वानर समुदाय, शूर्पणखा, शबरी, मंदोदरी, स्वयं रावण—सूची बहुत लंबी हो सकती है; पर इन सबने राम को भिन्न-भिन्न दृष्टि से देखा है, अपनी-अपनी सोच एवं अवधारणाओं के आधार पर। परंतु भरे हुए एक करोड़ कुंभों में भिन्न-भिन्न प्रतीत होता सूर्य तत्त्वतः एक ही है। भगवान् राम के संदर्भ में ऐसा ही कहा-समझा जा सकता है। सबने अपनी रुचि एवं मानसिक गुण-दोष के आधार पर राम का दर्शन किया है।
—मोरारी बापू
प्रस्तुत पुस्तक में भगवान् राम के सभी रूपों के दर्शन होते हैं। उनकी लोकप्रियता तथा लोकमानस के राममय होने का रहस्य इसमें है। श्रद्धा और आस्था का तेजोमय भक्तिघट है यह पुस्तक।

Ayodhya Revisited by Kunal Kishore

SKU: 9788184303575

This work of monumental research is atreatise on Ayodhyã with utmostauthenticity and absolute accuracy. Basedon original sources and scientificinvestigation it propounds a new thesis,which demolishes many popularperceptions. It exonerates the intrepidwarrior Babur from the charge ofdemolishing a temple on the birth-site ofRãma and constructing the mosque whichhas been a source of contention anddissension for long. It further shows howinscriptions in the mosque were factitiousand Mir Baqi of inscriptions is a fictitiousperson different from Baqi Tashkindi/Shegawal of the Baburnama.The book produces incontrovertibleevidence which indubitably proves thatthere existed a Rãma temple on the Rãmajanmabhùmi.The exact birthplace ofRãma was earmarked by a rectangularBedi measuring 18 ft. 9 inches in lengthand 15ft. in width, and was located in theinner portion of the disputed shrine. Thedemolition of the temple and theconstruction of the mosque did not takeplace in 1528 A.D. but in c. 1660 A.D.when Fedai Khan was the Governor ofAurangzeb at Ayodhyã. It is a historicalfact that until the British takeover ofAwadh administration in 1858 both theHindus and Muslims used to perform pujaand offer Namaz respectively inside it.All Mughal Emperors from Babur toShah Jahan were magnanimous and liberalrulers and the Bairãgìs of Ayodhyã enjoyedpatronage of the first four Nawabs ofAwadh. However, during the long rule ofAurangzeb the country was engulfed in thefire of fanaticism. It has been shown in thisbook how an absolutely unfounded rumourin 1855 A.D. that the Hanumangarhitemple was constructed on the site of amosque created cleavage between the twocommunities, and the resultant festeringwounds have not healed despite bestefforts by saner elements of both thecommunities.The book exposes many eminenthistorians’ hypocrisy and their lack ofcertitude in writing history and it may besaid that their presentation of contrivedhistory on Ayodhya has caused irreparabledamage to the cause of harmonizingcommunal relations in the country. Incontrast, this text earnestly tries to takeaway the toxin from the polluted body ofIndian politics. For the first time a numberof unexplored documents have beenincorporated in this book as evidence, andit may be proclaimed with pride that thisbook contains much more information onAyodhya than available hitherto.Justice G.B. Patnaik, a former ChiefJustice of India, after going through themanuscript, has endorsed the author’sthesis in his Foreword. It is hoped that thebook will put a quietus to the long-standingdispute.

Ayurveda Aur Swastha Jeevan    by  t L Devraj

SKU: 9789383110964

यह पुस्तक आयुर्वेद के सभी आयामों की महत्ता को प्रकट करती है। पुस्‍तक की विषय-वस्तु में रोगों से बचाव के उपायों और उपचार दोनों पक्षों पर ध्यान दिया गया है
आयुर्वेद में जड़ी-बूटियों द्वारा उपचार, खनिज-लवणों तथा मानव शरीर को विषमुक्‍त करनेवाली बॉडी क्लींजिंग पद्धतियों के अलावा उपचार के अनूठे तरीके समाविष्‍ट है आयुर्वेदिक उपचार शारीरिक तथा मानसिक संतुलन सुनिश्‍च‌ित करता है प्रत्येक व्यक्‍त‌ि के लिए आयुर्वेद एक उत्तम मार्गदर्शक है
लेखक ने इस बात पर विशेष बल दिया है कि प्रत्येक व्यक्‍त‌ि अपने शरीर की प्रकृति के बारे में जाने और उसके अनुसार चलकर स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन प्राप्‍त करे

Ayurveda Va Yog Dwara Vazan Ghatayen by Dr. Vinod Verma

SKU: 9789386001696

दुनिया में वजन घटाने के लिए सैकड़ों पुस्तकें और खान-पान के तरीके हैं, तो फिर एक और पुस्तक की जरूरत क्यों?, आयुर्वेद के जरिए वजन घटाने की जरूरत क्यों है? जरूरत है, क्योंकि आयुर्वेद में न केवल शरीर के साम्य पर ध्यान दिया गया है, बल्कि इसमें समग्र स्वास्थ्य के लिए मन के तीनों आयामों के संतुलन को भी बेहद महत्त्वपूर्ण बताया गया है। कई मामलों में मनोवैज्ञानिक कारणों से भी वजन बढ़ता है, इसलिए इनकी भी जानकारी महत्त्वपूर्ण है। लालच के कारण बहुत ज्यादा खाने लगना मानसिक विकार है। इस पुस्तक में वजन बढ़ाने में अहम भूमिका निभानेवाले मनोवैज्ञानिक कारकों की भी चर्चा की गई है। ये आपको अधिक खाने से होनेवाली समस्याओं के प्रति जागरूक तो करेंगे, लेकिन उनका समाधान नहीं देंगे। मन की गतिविधियों में साम्य सत्त्व (मन की पवित्रता और स्थिरता) कायम रखना चाहिए।
आयुर्वेदिक अभ्यासों और योग तथा अन्य अभ्यासों के अंतर्संबंधित शोध और संकलन से यह पुस्तक अन्य मौजूदा पुस्तकों और तरीकों से अलग है। वजन घटाने का मतलब अनचाहे वजन के बोझ से छुटकारा पाकर अधिक स्फूर्त और चुस्त महसूस करना है।
आयुर्वेद के प्राचीन ज्ञान पर आधारित यह पुस्तक लंबे समय से चली आ रही शरीर के वजन और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का सहज समाधान उपलब्ध कराएगी।

Azad Bharat Or Bose Bandhu by Sisir Kumar Bose

SKU: 9789386231017

मैने अपने दादाजी श्री शरतचंद्र बोस को कभी नहीं देखा। मेरे जन्म से छह वर्ष पूर्व ही उनका देहावसान हो चुका था। मुझे जो कुछ भी अपने पिताजी शिशिर कुमार बोस के विषय में याद है, वह बिल्कुल वैसा ही है जैसा वे स्वयं अपने पिताजी के विषय में याद करते थे, ‘‘जब मैं बहुत छोटा बच्चा था, तब से लेकर अंत तक मेरे पिता मुझे सदैव काम करते ही नजर आए।’’ मेरे पिताजी के काम के प्रति समर्पण के पीछे उनके ‘रंगाकाकाबाबू’ सुभाष चंद्र बोस का यह प्रश्न भी प्रभावी था, जब उन्होंने दिसंबर 1940 में पूछा था, ‘‘अमार एकटा काज कोरते पारबे?’’ (अर्थात् मेरा एक काम कर सकोगे?)
उस चामत्कारिक घड़ी के बाद से शिशिर कुमार बोस ने कभी भी नेताजी का काम करना बंद नहीं किया। तात्कालिक ‘काज’ या काम तो था जनवरी 1941 में भारत से नेताजी के विदेश जाने की योजना बनाना और उसे क्रियान्वित करना। स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद सन् 1957 में उन्होंने नेताजी रिसर्च ब्यूरो की स्थापना की।
नेताजी के अनुज श्री शरतचंद्र बोस का प्रेरणाप्रद जीवनवृत्त, जो कालखंड की महत्त्वपूर्ण घटनाओं पर भी प्रकाश डालता है।

Azad Hind Fauz by Dinkar Kumar

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‘आजाद हिंद फौज’ आज भी लाखों भारतवासियों के दिलों में अपना स्थान बनाए हुए है। आजाद हिंद फौज ने सन् 1944 में अंग्रेजों से आमने-सामने युद्ध किया और कोहिमा, पलेल आदि भारतीय प्रदेशों को अंग्रेजों से मुक्‍त करा लिया।
22 सितंबर, 1944 को ‘शहीदी दिवस’ मनाते हुए नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने अपने सैनिकों से मार्मिक शब्दों में कहा, ‘‘हमारी मातृभूमि स्वतंत्रता की खोज में है। तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा।’’ किंतु दुर्भाग्यवश द्वितीय विश्‍वयुद्ध का पासा पलटा और जर्मनी ने हार मान ली, साथ ही जापान को भी घुटने टेकने पड़े। ऐसे में इन देशों ने आजाद हिंद फौज की मदद करने से इनकार कर दिया। इसी समय अंग्रेजों ने नेताजी पर नकेल कसने की रणनीति बनाई। इस वजह से नेताजी को टोक्यो की ओर पलायन करना पड़ा और कहते हैं कि हवाई दुर्घटना में उनका निधन हो गया। आजाद हिंद फौज भारत के गौरवशाली और क्रांतिकारी इतिहास को सुनहरे अक्षरों में कैद किए हुए है। देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करनेवाले स्वतंत्रता सेनानियों के सच्चे इतिहास से रूबरू कराती है यह पुस्तक।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारी आंदोलन और राष्‍ट्रभक्‍त हुतात्माओं के बलिदान की प्रेरणागाथा बताती अत्यंत पठनीय पुस्तक।

Azadi Banam Phansi Athva Kalapani by Raghunandan Sharma

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संवेदनशील मन के राष्ट्रबोध की छटपटाहट जब अभिव्यक्त होने को मचलती है तब आती है ‘आजादी बनाम फाँसी अथवा कालापानी’ जैसी कृति। भारतीयों के लिए काला पानी केवल शब्द या भू-खंड की संज्ञा नहीं है। वह भारत के हुतात्माओं के बलिदानों की, ब्रिटिश साम्राज्यवाद की क्रूर यातनाओं की कहानी का जीवंत इतिहास है। निस्संदेह अहिंसक सत्याग्रह ने सामान्य जन के मन में स्वतंत्रता की ज्वाला को प्रज्वलित रखा लेकिन उन हुतात्माओं के बलिदानों की अनदेखी नहीं की जा सकती, जो हँसते-हँसते भारतमाता को स्वतंत्र कराने का सपना लेकर फँसी के फंदों पर चढ़ गए और मरते-मरते भी ‘वंदे मातरम्’ का जयघोष करते रहे। इस रक्तरंजित इतिहास का बार-बार स्मरण वही कर सकते हैं जिनके हृदयों ने राष्ट्रबोध को आत्मसात कर लिया है।
इस कृति के रचनाकार श्री रघुनंदन शर्मा उस आत्मबोध को कहते ही नहीं, स्वयं जीते भी हैं।
देश की नई पीढ़ी स्वतंत्रता संघर्ष की अनेक गाथाओं से अपरिचित है। प्रस्तुत पुस्तक उस इतिहास को सीधी सरल भाषा में उन तक पहुँचा देगी। यह इसलिए भी आवश्यक है कि हम उस पराधीन मानसिकता से मुक्त हों, जिसके कारण यह भुला दिया गया है कि भारत राजनीतिक रूप से भले ही पराधीन रहा हो, पर उसने स्वतंत्रता के मूल्य को संरक्षित रखने के लिए बडे़-से-बड़ा बलिदान देने की आत्म सजगता को बनाए रखा।
—कैलाशचंद्र पंत
(मंत्री संचालक म.प्र. राष्ट्रभाषा प्रचार समिति)

Azadi Ke Tarane (Vol. Ii) by Rajendra Patoriya

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स्वाधीनता आंदोलन के दौरान भारतीय जन-मानस को उद्वेलित कर देनेवाले प्रेरक गीत, .गज़ल एवं कविताएँ रची गईं। ये गीत-.गज़लें-तराने आज़ादी के दीवानों ने स्वयं रचे। वीर हुतात्माओं ने कारावास की भीषण यातनाओं को सहते हुए, फाँसी के फंदे को चूमते हुए इन गीतों को गुनगुनाया और हँसते-हँसते मृत्यु का आलिंगन कर लिया।
प्रस्तुत संकलन में देशप्रेम और मातृभूमि के लिए सेवा-समर्पण-त्याग की तान छेड़नेवाले तराने हैं; ऐसे गीत भी संकलित हैं, जिन्हें भयभीत ब्रिटिश सरकार ने ज़ब्त कर लिया था। आज़ादी की लड़ाई के दौर में ये तराने संजीवनी शक्‍ति का काम करते रहे।
आज़ादी के ये अमर गीत देशाभिमानी एवं निर्भीक कवियों के हैं; स्वातंत्र्य समर में अपने आपको सहर्ष समर्पित कर देनेवाले वीरों के हैं। संघर्ष के दौरान देशवासियों तक स्वाधीनता का संदेश पहुँचाने के लिए, उन्हें चैतन्य करने के लिए रचनाकार इन्हें अखबारों, परचों और पत्रिकाओं आदि के माध्यम से जनता तक पहुँचाते रहे थे। इसीलिए आज ये इतिहास एवं राष्‍ट्र की अमूल्य धरोहर हैं। काल का ग्रास बनने से बची इन रचनाओं का ऐतिहासिक दस्तावेज की तरह संरक्षण आवश्यक है। इसी दिशा में यह कृति एक स्तुत्य प्रयास है।
राष्‍ट्राभिमानियों-बलिदानियों की इस थाती के प्रकाशन का उद‍्देश्य तब ही सफल होगा जब प्रत्येक भारतीय इस पुस्तक को पढ़े और इससे राष्‍ट्र-प्रेम की प्रेरणा प्राप्‍त करे।

Azalea by Eliza W. Peattie

SKU: 9788184305412

A 1912 novel by Eliza W. Peattie, ‘Azalea’ is a story of Elia’s life-long goals, to raise her family out of poverty and to have them rise to cultural refinement. A story of real struggles that real people witness in all times, it has a heart warming ending, which no reader could let go.

Azim Premji by Prem Prakash

SKU: 9789351861164

The mantra of Azim Premji, the Chairman of Wipro, is ‘Ordinary people are capable of extraordinary things. Have the courage to think big.’ This Azim Premji closely follows in life.

Ba and Bapu by Mukulbhai Kalarthi

SKU: PP-02020-0003-133

Bapu’s betrothal with Ba took place when Bapu was only six and Ba seven. The actual marriage came off when he was thirteen years of age. Thus, they lived a long married life of sixty-two years. This means that Ba alone of all persons had the unique opportunity to see and understand Bapu’s life in all its completeness – both at its weakest and strongest. She was a close witness of Bapu’s spiritual progress from overindulgence in sensual pleasure to perfect brahmacharya. When he made a resolve to observe brahmacharya she readily accepted it as her own. Her noblest virtue, to quote Bapu’s words, was this that ‘she was never the temptress.’ Thus, as his partner in the performance of life’s duty Ba played the role of a real helpmate in the making of Bapu’s life. She never came in the way of Bapu’s efforts for his spiritual progress. Writing about it in his Autobiography Bapu says: “Willingly or unwillingly, consciously or unconsciously, she has considered herself blessed in following in my foot-steps and has never stood in the way of my endeavour to lead a life of restraint.” —From the Book

Baat Bolegi Hum Nahin by R.K. Sinha

SKU: 9789353222208

यह पुस्तक ‘बात बोलेगी, हम नहीं’ समय से सहज, सार्थक और संदेशपरक संवाद ही नहीं है, इससे कहीं ज्यादा है। पुस्तक में 62 लेख संकलित किए गए हैं। ज्यादातर लेख स्वतंत्र हैं, यानी विषय और संदर्भ की दृष्टि से उनका दूसरे लेखों से संबंध नहीं है। इसी अर्थ में वे स्वतंत्र लेख की श्रेणी में आते हैं। लेकिन कुछ लेख अपवाद भी हैं; जैसे चीन से भारत का जो सीमा विवाद है, उस पर तीन लेख हैं। इनका संबंध सीमा विवाद की घटना के क्रम और उतार-चढ़ाव से है। इसी तरह हिंदी पर दो लेख हैं। दोनों का प्रसंग अलग है। बुजुर्गों की समस्याओं पर दो लेख हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश खबरों में इसलिए छाए रहे, क्योंकि एक अनहोनी घटना उनके साथ हुई। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की उपस्थिति में उनके साथ मार-पीट उन लोगों ने की, जो साफ-सुथरी राजनीति के वादे से सत्ता में आए थे। ऐसी घटना के केंद्र में बने हुए अंशु प्रकाश पर दो लेख स्वाभाविक ही हैं। वे घटनाक्रम पर आधारित तथा दृष्टिपरक हैं।
यह पुस्तक जहाँ राजनीतिक इतिहास को अपने में समेटे हुए है, वहीं जीवन के हर क्षेत्र पर एक दृष्टिपात कर स्थायी महत्त्व की टिप्पणियों से भरी-पूरी है। इस पुस्तक के हर लेख में प्रवहमान भाषा है। इसमें विचारों की रचना का एक संसार है; मानवीय भावनाओं का संयोग और संतुलन है। इससे पुस्तक में नैयायिक बुद्धि का प्रभाव परिलक्षित होता है, जो सत्य के एक पहलू को सामने लाता है। सामयिक विषयों पर लेखन की ऐसी विधा अनुकरणीय है।

Baba Shekh Farid Ratnawali by Jasvinder Kaur Bindra

SKU: 9789381063583

बाबा शेख फरीद रचनावली

भारत में सूफी काव्य-परंपरा काफी समृद्ध रही है। मुसलमान कवियों ने पंजाब में सूफी काव्य की बुनियाद रखी, जिनमें शेख फरीद सर्वोपरि हैं। उनका पूरा नाम फरीदुद‍्दीन ‍मसऊद शक्करगंज है। दरअसल, शेख फरीद से ही भारतीय सूफी काव्य का आरंभ माना जाता है। फरीद का जन्म हिजरी 569 अर्थात् 1173 ईसवी में हुआ। उस दिन मोहर्रम की पहली तारीख थी। फरीद के पिता उनकी बाल्यावस्था में ही गुजर गए थे। उनकी माता ने ही उनके पालन-पोषण व शिक्षा की जिम्मेदारी पूरे फकीरी तथा दरवेशी ढंग से निभाई। उन्होंने बचपन से ही बालक फरीद को खुदापरस्ती की शिक्षा दी। पवित्र तथा संत स्वभाववाली माता की देखरेख में फरीद बचपन से ही प्रभु-भक्‍त हो गए। किशोर अवस्था में फरीद अपने सूफियाना स्वभाव के कारण कोतवाल (खोतवाल) में प्रसिद्ध हो गए थे।
प्रस्तुत पुस्तक में उनके व्यक्‍तित्व एवं उनके द्वारा विविध भाषाओं में रचित साहित्य से परिचित कराया गया है। फरीद-वाणी के दोहों तथा महला को व्याख्या सहित दिया गया है। संत साहित्य में विशिष्‍ट स्थान रखनेवाले बाबा शेख फरीद की रचनाओं का अत्यंत महत्त्वपूर्ण व संग्रहणीय संकलन।

Babbitt by Sinclair Lewis 

SKU: 9788184305511

Babbitt’, first published in 1922, is a novel by Sinclair Lewis. Largely a satire of American culture, society and behavior, it critiques the vacuity of middle-class American life and its pressure toward conformity. Sinclair Lewis received the Nobel Prize in Literature in 1930 for this book.

Baby Corn

SKU: 9788183210409

Bachchan Ke Patra : Umashankar Verma Ke Naam by Umashankar Verma

SKU: 9789350483114

बच्चनजी हिंदी काव्याकाश के एक जाज्वल्यमान नक्षत्र थे। कवि के रूप में तो वे सफल और सुख्यात थे ही, व्यक्‍ति के रूप में भी अत्यंत सहृदय और उदार थे।
अपने जीवन में उन्होंने ढेरों पत्र लिखे। बच्चनजी के द्वारा उमाशंकर वर्मा को लिखे गए इन पत्रों में अधिकतर निजी बातें ही हैं; किंतु कभी-कभी इनमें साहित्यिक, राजनीतिक एवं अन्य विषयों की भी चर्चा हुई है, जिससे बच्चनजी की रुचियों व मनोभावों पर प्रकाश पड़ता है और उनके व्यक्‍तित्व-कृतित्व के कुछ अन्य पहलू भी उजागर होते हैं।
इस संग्रह में वर्ष 1948 से 1992 तक की लगभग आधी सदी का उनका न सिर्फ अध्ययन, मनन-चिंतन वरन् जीवन ही सूक्ष्म रूप से प्रतिबिंबित है और इस दृष्‍टि से यह पत्र-संग्रह साहित्य-प्रेमियों तथा अनुसंधित्सुओं के लिए अवश्य ही महत्त्वपूर्ण व उपादेय सिद्ध होगा।

Bachchon Ke Liye Yoga by Anup Gaur

SKU: 9789382901624

जैसे-जैसे भौतिकवाद की चकाचौंध में मानव मशीन बनता जा रहा है और अस्वस्थ एवं तनावमय जीवन जीने के लिए मजबूर हो रहा है वैसे-वैसे शांतिपूर्ण, स्वस्थ और तनावरहित जीवन जीने के लिए पूरा विश्‍‍व तेजी से योग की ओर आकृष्‍ट हो रहा है ।
व्यावहारिक जीवन में पति-पत्‍नी, पिता- पुत्र, भाई-बहन इत्यादि बाह्य संबंध व साधन हैं । इनके विपरीत शरीर, मन, बुद्धि, अहंकार आदि अंतरंग साधन हैं । बाहरी साधनों की अपेक्षा आंतरिक साधन जीवन के अधिक निकट हैं । इन दोनों साधनों के संघर्ष में सदैव आंतरिक साधनों की विजय होती है । इन आंतरिक साधनों को वृत्तियों (विषयों) से दूर करने को ही ‘ योग ‘ कहा जाता है ।
शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए शिक्षार्थियों का योग मार्ग में उतरना अनिवार्य समझते हुए प्रस्तुत पुस्तक का लेखन किया गया है । इस पुस्तक को विशेष रूप से बच्चों के लिए तैयार किया गया है । योग क्या है, योग का मन व शरीर पर प्रभाव तथा योगासनों का परिचय, समयावधि एवं लाभादि को बहुत सरल व सुगमतापूर्वक बताया-समझाया गया है । पुस्तक की एक प्रमुख विशेषता है इसमें दिए गए चित्र । लेखक जो भी बताना चाहता है, वह सब चित्रों के माध्यम से साकार हो उठता है । हमें पूर्ण विश्‍वास है, यह पुस्तक पाठकों को नीरोग व प्रसन्न रखने में महत्त्वपूर्ण योगदान देगी ।

Bachchon Ko Rogon Se Kaise Bachayen by Dr. Premchandra Swarnkar

SKU: 9789384344924

बच्चों की बीमारियों के प्रति अधिक सावधानी की आवश्यकता होती है, क्योंकि वे अपनी तकलीफ बोलकर नहीं बता पाते। इसलिए लेखक ने बच्चों में कुपोषण और अकसर उनको होनेवाले रोगों के साथ ही विशेष खतरनाक रोगों, जैसे न्यूमोनिया, पोलियो, टिटेनस, डिप्थीरिया, मेनिनजाइटिस, डेंगू, मलेरिया, जापानी मस्तिष्क ज्वर, रोटा वाइरस जनित आंत्रशोथ इत्यादि की समस्त जानकारी के साथ-साथ कृमि रोग, रक्ताल्पता और खुजली आदि बच्चों को होनेवाले रोगों और उनसे सुरक्षा के लिए टीकाकरण, संतुलित भोजन एवं कुपोषण से बचाव के व्यावहारिक तरीके बताए हैं।
सरल-सुबोध भाषा में भरपूर उदाहरणों व चित्रों के साथ यह पुस्तक प्रत्येक घर और व्यक्ति के लिए अत्यंत उपयोगी है और एक आवश्यकता भी।

Bachchon Mein Leadership by Anuja Bhatt

SKU: 9789381063385

बच्चों में लीडरशिप-डॉ. अनुजा भट्ट

बच्चों का सर्वांगीण विकास तभी संभव है, जब टीम-भावना से काम करने का गुण उनमें हो। टीम के बिना लीडरशिप संभव नहीं होती। बच्चों का साथ-साथ खेलना, उनकी क्लास, पिकनिक और दोस्तों से मिलना-जुलना इसी टीम-भावना का परिणाम है। यदि टीम-भावना का विकास हो तो बच्चे बड़े होकर काबिल बनते हैं। अकेले काम करने की आदत बच्चों के विकास में रुकावट डालती है। इसलिए जरूरी है कि बच्चे हर काम मिल-जुलकर करें।
बच्चे उसी को रोल मॉडल समझने लगते हैं, जो उन्हें बार-बार दिखता है। ऐसे में बच्चे पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों प्रकार के रोल मॉडल्स से प्रभावित होते हैं। तब बड़ों की जिम्मेदारी बनती है कि वे बच्चों को सही-गलत का चुनाव करना सिखाएँ, उन्हें गाइड करें। आखिर हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्ïचा सफल नागरिक बने और जीवन में सफलता प्राप्‍त करे।
एक सफल लीडर के लिए सबसे जरूरी गुण है—सबको साथ लेकर चलने की क्षमता। इस गुण का विकास करने के लिए पुस्तक में अनेक व्यावहारिक उदाहरण दिए गए हैं, जिनसे प्रेरित होकर बालक अपनी क्षमताओं और प्रतिभा का विकास कर पाएँगे; उनका व्यक्‍तित्व निखरेगा और वे जीवन में सफल हो सकेंगे।
बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक बिंदुओं की एक प्रैक्टिकल हैंडबुक है यह पुस्तक—
‘बच्चों को बनाएँ लीडर’ ।

Back to Methuselah: A Metabiological Pentateuch by Bernard Shaw

SKU: 9788184305751

The renowned dramatist George Bernard Shaw’s play ‘Back to Methuselah: A Metabiological Pentateuch’ is a series of five plays which makes it a visionary epic based on Eve and Adam chapter of the Bible. These plays were written and consiquently staged during 1918-20.

Back to the Stone Age by Edgar Rice Burroughs

SKU: PP-02020-0003-67

Five hundred miles beneath the surface of the Earth lies another world – a world of eternal day and endless horizons, in which dinosaurs still roam and cavemen hunt and terrors forgotten in the outer world still survive. Lieutenant von Horst, member of an exploring expedition, was left behind in this lost land of Pellucidar. Back To The Stone Age is the thrilling story of his perilous adventures, along with the cavegirl he loved, in that primitive unknown world.

Backwoods Surgery & Medicine by Charles Stuart Moody

SKU: 6235989715224

Several years ago I stood beside a cot in a hunter’s cabin in the heart of the Bitter Root Mountains in Idaho, after a three days’ ride, and watched a valuable young life go out as the result of an unattended compound fracture of the thigh. At another time I amputated a leg to prevent the spread of gangrene from a simple cut across the instep while the camper was splitting wood, an accident which, properly treated, would have resulted at most only in a slight inconvenience. Once again, I transformed my boat into a funeral barge and conveyed a young man who had only been in10 the water three minutes back to his sorrowing parents dead, because his companions were ignorant of how to resuscitate him.

Bacon’s Essays and Wisdom of the Ancients by Francis Bacon

SKU: 9788184307095

The Essays, which are ten in number, abound with condensed thought and practical wisdom, neatly, pressly, and weightily stated, and, like all his early works, are simple, without imagery. They are written in his favorite style of aphorisms, although each essay is apparently a continued work, and without that love of antithesis and false glitter to which truth and justness of thought are frequently sacrificed by the writers of maxims. from this Book

Bacteria by George A. Newman

SKU: 9788184305217

The present volume is not a record of original work, nor is it a text-book for the laboratory. This book is of a less technical nature. It is an attempt, in response to the editor of the series, to set forth a popular scientific statement of our present knowledge of bacteria.

Baden-Powell of Mafeking by J. S. Fletcher

SKU: 9788184305395

If it seems something of an impertinence to write about the life of a man who is still alive and apparently determined to be so for many years of energy and activity, it appears to be almost in the nature of a sacrilege to draw aside the veil which ought to shroud the privacy of his family life. Most English folk, whether they show it or not, are deeply in love with the sentiment expressed in Browning’s lines,—
“A peep through my window if some should prefer,
But, please you, no foot over threshold of mine”—
but in the case of the Baden-Powell family many feet have already crossed the threshold, and many hands have drawn aside the curtain.’ -an excerpt from the novel

Badlav Ke Bol by Kailash Satyarthi

SKU: 9789352664719

विचार ही वह बीज है, जिससे बदलाव के वृक्ष उगते हैं। देश-दुनिया में जितनी क्रांतियाँ हुई हैं, उनकी कोंपलें विचारों से ही फूटी हैं। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता श्री कैलाश सत्यार्थी के क्रांतिकारी विचारों ने समाज के हाशिए पर खड़े और विकास की परिधि से बाहर उन करोड़ों उपेक्षित बच्चों को आज दुनिया के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है, जहाँ से उनकी आजादी और मुसकराहट का रास्ता खुलता है। श्री सत्यार्थी केवल एक बाल अधिकार कार्यकर्ता भर नहीं हैं, वे एक विचारक और दार्शनिक भी हैं। यह पुस्तक उनके ऐसे ही क्रांतिकारी विचारों और बदलाव के बोलों का संग्रह है।