Badlav Ke Real Hero by N. Raghuraman

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किसी भी अच्छी पहल को बस शुरू करने की जरूरत होती है। कुछ समय बाद उससे जुड़ी चीजें अपने आप अपनी जगह लेने लगती हैं और पहल को आगे ले जाती हैं, क्योंकि ऐसी पहल का मूल चरित्र होता है ‘अच्छाई’।
आपके पास जो कभी था ही नहीं, उसे बनाने के लिए आप में जुनून होना आवश्यक है, लेकिन इसे बनाए रखने के लिए आप में प्रतिबद्धता भी होनी चाहिए।
यदि आप अपने बच्चों को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ तोहफा देना चाहते हैं तो उन्हें समझाइए कि पर्यावरण और इसकी प्रजातियों की रक्षा करें। एक थीम आत्मसात् कर लें—‘गो वाइल्ड फॉर लाइफ’, यानी जिंदगी के लिए वन्य जीवन को बढ़ावा दें। अगली पीढ़ी निश्चय ही आपके इस बेशकीमती तोहफे की कद्र करेगी।
बदलाव के लिए उम्र, शिक्षा और स्थान बाधा नहीं होते। बुरे हालातों में किसी समस्या को सुलझाने के लिए मदद का इंतजार करने से बेहतर है कि बदलाव लाया जाए।
अगली पीढ़ी में धरती को बचाने और खुद को शिक्षित करने जैसी एकदम नई संस्कृति विकसित करना भी दान उत्सव का हिस्सा है।
—इसी पुस्तक से
—1—
ये सूत्र हैं ऐसे 75 रियल हीरोज के प्रेरणाप्रद जीवन का निचोड़, जिन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ समाज को दिया। अपने कर्तृत्व में दूसरों को दिशा दी और सफलता का मार्ग प्रशस्त किया।
आज के निराशा भरे समय में पथ-प्रदर्शक नायकों की प्रेरणाप्रद कहानियाँ।

Bahaav by Himanshu Dwivedi

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बहाव

वे दिन अब सिर्फ इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं, जब किसी अगस्त्य को अपने विचार और वाणी को दिक्दिगंत तक फैलाने के लिए पूरा-का-पूरा समुद्र पी जाना पड़ता था। फाह्यान या अलबरूनी की तरह अब यात्राएँ करने और उन्हें लिपि में सँजोने के लिए मशक्कत नहीं करनी पड़ती। आप देख रहे हैं कि यह धरती एक ग्लोबल विलेज में तब्दील होती जा रही है और देशों की दूरियाँ हवाईजहाजों में सिमटकर रह गई हैं। ऐसे बहुत से लोग दिखाई पड़ते हैं, जो सुबह का नाश्ता एक देश में करते हैं और रात का भोजन दूसरे देश में। फिर भी यात्राओं ने अपना रोमांच नहीं खोया है और घुमक्कड़ी की इनसानी प्रवृत्ति कुछ नया देखने के लिए बेताब रहती है। युवा संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी के यात्रा-संस्मरणों की यह पुस्तक ‘बहाव’ इसका जीता-जगता उदाहरण है।
इस पुस्तक में जापान, थाईलैंड, अमरीका, पाकिस्तान, ग्रीस, दक्षिण कोरिया, पोलैंड, जर्मनी, ब्राजील जैसे देशों की यात्रा के अनुभव हैं। इस पुस्तक की खास बात यह है कि इसमें हिमांशु की आँखों से देखी हुई दुनिया के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के दो राजनेताओं की विदेश यात्राओं के अनुभव भी हैं। राजनेताओं ने जिस तरह अपनी विदेश यात्राओं का जिक्र हिमांशु से किया, उसे उन्होंने अपने पाठकों के लिए प्रस्तुत किया। इस पुस्तक में ये दोनों अनुभव गुँथे हुए हैं।
यह पुस्तक सुधी पाठकों को दुनिया को देखने का एक नया नजरिया, दुनिया के तमाम देशों के साथ भारत के रिश्तों को समझने की समझ तो देगी, साथ ही अपनी जीवंत भाषाशैली के कारण उन्हें उस देश में ही पहुँचा देगी।

Bahar Main Main Andar by Shri Amit Srivastava

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अमित इधर कविता के इलाके में कदम रखनेवाले प्रतिभावान युवा हैं। ‘बाहर मैं…मैं अंदर…’ उनका पहला संग्रह है। दो हिस्से हैं इसके, जिसमें ‘मैं अंदर’ की शीर्षकविहीन कविताएँ हैं, वह कवि का आत्म है, उसका व्यक्तित्व ही उन कविताओं का शीर्षक हो सकता था। इस ‘अंदर’ में छटपटाहट बाहर के दबावों की भी है। इस अंदर में वह खुद अपना ईश्वर है। हमारे भीतर के कई हमों को व्यक्त करती ये कविताएँ सामाजिक बयानों से उतनी दूर भी नहीं, जितना कवि ने अपने आमुख में बताया है। वहाँ उसे हिचकियाँ आती हैं, वहाँ फूटती बिवाइयों को बिना किसी दया के आग्रह के वह न सिर्फ एक नमकीन निराशा के साथ रहने देना चाहता है, बल्कि चाकू लेकर छीलने भी बैठ जाता है।
‘बाहर’ की कविता में अमरीका की दादागिरी के नाम एक क्षोभ पत्र है। कश्मीर से एक हालिया मुलाकात का ब्योरा है, जिसमें कश्मीरियों की गरीबी, झील की झल्लाहट और उस सुंदर प्रकृति की बेबसी के कई दुःखद बिंब हैं—यहाँ कश्मीर एक बेवा है, जो पानी के पन्ने पर तारीखें काढ़ा करती है और एक नाव वाला पूछता है कि अपने बच्चों को खाना किसे अच्छा लगता है…संग्रह में ऐसी और कितनी ही कविताएँ हैं, जो बताती हैं कि कवि जब बाहर होता है तो उसका तआल्लुक वैचारिक संघर्ष के किस संसार से है—पाठक स्वयं उनमें
प्रवेश करेंगे।
अमित की कविताओं में दर्ज अनुभव और विचार भरोसा दिलाते हैं कि यह युवा लंबे सफर पर निकला है। अमित की कविता कहीं से भी समतल में चलने की हामी नहीं लगती, वह भरपूर जोखिम उठाती है।
—शिरीष कुमार मौर्य

Bahata Pani by Aabid Surti

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मुसलमान पछता रहे थे। गुमनाम अजनबी बेगम शबाना की खोज होते हुए भी काफिरों ने उस पर हिंदू नाम थोप अपना अधिकार जता दिया था। क्या कोई ऐसी तरकीब नहीं सोची जा सकती कि आनंदीलाल अवतार घोषित हो, उससे पहले मोमिन घोषित हो जाए? गाँव के पुरोहित माखनलाल ने जरी के किनारेवाली धोती के पल्लू से चेहरे को हवा देते हुए सोचा, अब अधिक देर भली नहीं। यही अवसर है उसे कृष्णावतार घोषित कर बरगद तले के जमघट से उड़ा ले जाने का, मगर उनकी मुराद उनके मन में ही जलभुनकर राख हो गई। स्याह चोगे पर सुनहरी हरी पगड़ी बाँधे मुसलमानों के रहबर जनाब रब्बानी ‘मुल्ला’ ने ऐसी टाँग अड़ा दी कि चौराहेचौपाल पर फुसफुसाहट शुरू हो गई—‘मूलत : आनंदीलाल मुसलमान है।’ अब करो तहकीकात और उतारो ससुरे का पायजामा!
वह कुलियों और रिक्शा चालकों की मंडली में बैठ चरसगाँजे के दम लगाता था, शराब के नशे में धुत् होकर शोरशराबा करता, ऊधम मचाता और पिटता था। उसने एक साल की सजा भी काटी थी। ये सब जानकर यकीनन आपके मनमस्तिष्क में किसी लुच्चेलफंगे, आवारा, भ्रष्ट, पाखंडी शख्स की छवि उभरी होगी। क्षमा करें, वह इस दौर का मसीहा है। उसका नाम है आनंदीलाल ‘मौजूद’। ‘बहता पानी’ उसी रमता जोगी के रंगीन जीवन की दास्तान है।

Bahuaayami Jeevan Ke Dhani : Pt. Gopal Prasad Vyas by Dr. Santosh Matta

SKU: 9788177212419

स्वनिर्मित व्यक्तित्व एवं कृतित्व के धनी पंडित गोपाल प्रसाद सच्चे अर्थों में हिंदीसेवी थे। व्यासजी महात्मा गांधी के आदेश से ही स्वाधीनता आंदोलन में न कूदकर ‘कलम के धनी’ बने और दिल्ली में ‘हिंदी भवन’ निर्माण के लिए राजर्षि पुरुषोत्तमदास टंडनजी से की गई प्रतिज्ञा को पूर्णता तक पहुँचाया।
ब्रजभाषा के सीमित प्रदेश से निकल खड़ी बोली में भी गद्य और पद्य विधाओं में सिद्धहस्त व्यासजी ने खूब लिखा। इतना ही नहीं, हिंदी भाषा, साहित्य, समस्त भारतीय भाषाओं तथा शिक्षासंस्कृति के बहुआयामी विकास हेतु साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्रियाकलापों के कार्यान्वयन हेतु विशाल सभागार तथा साहित्यकार सदन का सपना साकार कर ‘हिंदी भवन’ निर्माण के केंद्रबिंदु बने। राजधानी दिल्ली में हिंदी की पताका फहरानेवाले वे हिंदीभवन की नींव बन सर्वदा के लिए हिंदी का पथ प्रशस्त कर गए। सच ही तो है—‘जयन्ति ते सुकृतिनः येषां यशःकाये जरामरणजं भयं नास्ति’। निश्चित ही उनकी यशकाया सभी भारतीय भाषाओं को उन्नति के शिखर पर पहुँचाती रहेगी।
सच्चे देशभक्त, कलम के सिपाही, निस्स्वार्थी, दृढ़संकल्प के धनी, प्रतिभासंपन्न और मनीषी पंडित गोपाल प्रसादजी का जीवनचरित इस लघु पुस्तक के माध्यम से सदैव गतिशील रहने की प्रेरणा देता है।

Bahuroopee Gandhi by M. K. GANDHI

SKU: PP-02020-0003-86

This book is for children. But I am sure that many grown-ups will read it with pleasure and profit.
Already Gandhiji has become a legend. Those who have not seen him, especially the children of today, must think of him as a very unusual person, a superman who performed great deeds. It is desirable, therefore, for the common aspects of his life to be placed before them, as is done by this book.

Bal Ganesh by Mukesh Nadan

SKU: 9789383110896

भगवान् गणेश की पूजा सभी देवी-देवताओं में सबसे पहले की जाती है। यह तो तुम सभी जानते ही होगे, यदि नहीं तो इस पुस्तक में अवश्य पढ़ोगे। भगवान् गणेश अपने अनेक रूपों में पूजे जाते है, जैसे—वक्रतुंड, एकदंत, महोदर, गजानन, लंबोदर आदि। इन्हीं रूपों से संबंधित उनकी अनेक कथाएँ प्रचालित हैं। उन्होंने अपनी बाल्यावस्था में अनेक चमत्कारी कार्य भी किए हैं। उन्हीं के बाल जीवन से जुड़ी कुछ प्रमुख कथाएँ सरल भाषा एवं चित्रों के द्वारा हम इस पुस्तक में प्रस्तुत कर रहे हैं। हमें पूर्ण विश्वास है कि बाल पाठकों के अतिरिक्त प्रत्येक पाठक-वर्ग के लिए पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी।
‘इसी पुस्तक से’

Bal Gangadhar Tilak by Sachin Sinhal

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“Independence (home-rule) is our birthright and I will have it”, the slogan that reverberated during the earlier phases of our freedom struggle was given by Lokmanya Bal Gangadhar Tilak. He was born on 23rd of July , 1856 in Ratnagiri, a place famous for it mangoes in Maharashtra. His father , Gangadhar Rao, was a learned scholar of Sanskrit and grammar . He was also the principal of a Marathi school in Ratnagiri.

Bal Hanuman by Mukesh Nadan

SKU: 9789383110865

किसी-न-किसी से तुमने ‘रामायण’ की कहानियाँ तो अवश्य ही सुनी होंगी। इन कहानियाँ में राम, सीता, रावण, विभीषण जैसे अनेक पात्रों ने अपनी-अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं। इसी ‘रामायण’ में एक मुख्य पात्र ‘हनुमान’ ने ही माता सीता का पता लगाकर श्रीराम को लंका पर विजय दिलाई थी। इतना ही नहीं, भक्त हनुमान अपने स्वामी श्रीराम की भक्ति में हमेशा ही दृढ़ संकल्प रहे। ‘रामायण’ में इनके बाल रूप का वर्णन बडे़ ही सुंदर ढंग से किया गया है। इनके बचपन से जुड़ी अनेक कथाएँ आज भी हनुमान-भक्तों द्वारा सुनी जा सकती हैं। ऐसी ही कुछ कथाओं को सरल भाषा एवं सुंदर चित्रों सहित हमने इस पुस्तक में प्रस्तुत किया है। ये कथाएँ अवश्य ही बाल पाठकों के लिए रोचक एवं ज्ञानवर्द्धक सिद्ध होगी।
‘इसी पुस्तक से’

Bal Krishna by Nirupama

SKU: 9789383110872

भगवान् कृष्ण से तो तुम भली प्रकार परिचित होगे। उनकी लीलाएँ तथा उनके अनेक चमत्कार हमें सुनने और पढ़ने को अकसर मिल ही जाते हैं। भगवान् कृष्ण ने अपनी बाल्यवास्था में जहाँ माखन चुराया तथा गोपियों को सताया, वहीं उन्होंने अनेक असुरों का संहार भी किया। इसी के साथ ‘महाभारत’ में द्रौपद्री की लाज बचाई और अर्जुन को ‘गीता’ का उपदेश भी दिया। इस पुस्तक में हम उन्हीं भगवान् श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन कर रहे हैं। सरल भाषा तथा चित्रों द्वारा पुस्तक को रोचक व ज्ञानवर्धक बनाने का पूर्ण प्रयास किया है। हमें आशा ही नहीं, अपितु पूर्ण विश्वास है कि यह पुस्तक केवल बाल पाठकों के लिए ही नहीं बल्कि प्रत्येक वर्ग के पाठकों के लिए उपयोगी होगी।
‘इसी पुस्तक से’

Balram Ki Lokpriya Kahaniyan by Balram

SKU: 9789386300614

बलराम की कहानियों में एक तरफ प्रेमचंद जैसी आम बोलचाल की सहज-सरल भाषा है तो दूसरी तरफ फणीश्वनाथ रेणु जैसी आंचलिकता। उनके बीच से उन्होंने अपनी नई राह बनाई। भारतीय जनजीवन को समग्रता में अंकित करनेवाले बलराम ऐसे कथाकार हैं, जिनकी कहानियाँ एक तरफ दूरदर्शन के इंडियन क्लासिक का हिस्सा बनीं तो दूसरी तरफ साहित्य अकादेमी के लिए कमलेश्वर ने उन्हें कालजयी कहानी के रूप में चुना। लगभग सभी वरिष्ठ कथाकारों-समालोचकों ने अपने कहानी-संचयनों में इनकी कहानियाँ शामिल की हैं। बलराम जितने अच्छे कहानीकार हैं, उतने ही अच्छे समीक्षक और संपादक भी हैं। ‘लोकायत’ के स्तंभ ‘आखिरी पन्ना’ ने इन्हें साहित्यिक पत्रकारिता के शिखर पर पहुँचा दिया, जो हर आम और खास की पहली पसंद बन गया, जिसकी वजह से पाठक ‘लोकायत’ को उसके पहले पन्ने से नहीं, ‘आखिरी पन्ने’ से पढ़ने लगे। ऐसे चर्चित लेखक की दो दर्जन कहानियों का यह संचयन सुधी पाठकों को रुचेगा, ऐसी उम्मीद हमें है।

Band Mutthiyon Ke Sapne by Shyam Sunder Bhatt

SKU: 9788177211641

बंद मुट्ठियों के सपने—श्याम सुंदर भट्ट

”डीकरा! तुम्हारे सिर पर गांधी की टोपी है, इसलिए तू कैसा भी हो, बेईमान नहीं हो सकता।’ ’ इससे पूर्व कि मैं उससे कुछ कहूँ, वह जा चुकी थी। उसके गहनों का थैला मेरे हाथ में अटका हुआ था। कुछ क्षणों पूर्व घायल बहनों के हाथों में झंडे देखे थे। गिरते- पड़ते भी उनके मुँह से ‘भारतमाता की जय’ के स्वर फूट रहे थे। लाठियाँ खाने के बावजूद जुलूस आगे जा चुका था। और अभी-अभी वह महिला मुझे बेईमान न होने का सबक सिखाकर जा चुकी थी। गांधी पर भाषण देना और गांधीजी को इस रूप में देखना बड़ा ही अद‍्भुतअनुभव था। जीवन में पहली बार समझा कि गांधी क्या है? गांधी भावराज्य के तंतुओं का एक मकडज़ाल है, जो व्यक्‍ति के मन को बाँधता है। जो भी एक बार इस परिधि में आ जाता है, उसका निकल पाना कठिन हो जाता है। गांधी मानव के मन की उस सीमा तक पहुँच गया था, जो ईमानदारी को गांधी टोपी जैसे प्रतीक से जोड़ रहा था।
(इसी उपन्यास से)

Banda Singh Bahadur by Maj Gen Suraj Bhatia

SKU: 9789389471199

बंदा बहादुर ने अपना प्रारंभिक जीवन एक वैरागी के रूप में बिताया। यह लगभग सत्रह वर्ष चला। अधिकांश समय उन्होंने दक्षिण भारत में गोदावरी नदी पर स्थित नंदेड़ नामक नगर में अपने आश्रम में तपश्चर्या करते बिताया। उन्होंने हिंदू शास्त्रों तथा योग एवं प्राणायाम विद्याओं का गहन अध्ययन किया। कुछ लोग मानते हैं कि वे तंत्र विद्या के भी ज्ञाता थे।
गुरु गोविंद सिंह ने उन्हें गले से लगाया, उन्हें अमृत छकाकर सिख बनाया, उनका नाम बंदा सिंह बहादुर रखा और उन्हें पंजाब से मुगल राज्य की जड़ें उखाड़ फेंकने की जिम्मेदारी सौंपी।
इसके बाद उन्होंने पंजाब में मुगलों के शहर, गढ़ और किले आक्रमण करके अपने अधीन करने का कार्यक्रम शुरू किया। बंदा ने ऐलान किया कि वे जमींदारों को हटाकर सभी जमीन खेतिहर गरीब किसानों में बाँटेंगे।
महमूद गजनी और मुहम्मद गौरी के दिनों के बाद इतनी सदियाँ बीत जाने के बाद पहली बार उत्तर भारत में किसी गैर-मुसलमानी शक्ति ने एक बड़े और बेशकीमती भू-भाग पर अपना आधिपत्य जमाया। अंततः मुगलों ने बंदा बहादुर को पकड़कर बेडि़यों में डाल लोहे के पिंजड़े में बंद कर दिया गया। हथकडि़यों और पाँव की साँकलों में बंदा को महीनों तक जेल में बंद रख, मुसलमान जल्लादों के हाथों जो अमानवीय यातनाएँ दी गईं, वे अनुमान और कल्पना से परे हैं।
वीर, क्रांतिकारी, हुतात्मा, धर्मपारायण, राष्ट्रनिष्ठ वीर बंदा सिंह बहादुर की जाँबाजी और पराक्रम का गौरवगान करती यह पुस्तक हर राष्ट्राभिमानी के लिए पढ़नी आवश्यक है।

Bandhu Bihari by Sankarshan Thakur

SKU: 9789351868842

लालू यादव और नीतीश कुमार यानी चूना और पनीर। एक करिश्माई लेकिन दागी लोकप्रिय नेता, और दूसरा चालाक और अंतर्मुखी। दोनों को मिला दें तो आकर्षक जोड़ी बनती है। कुछ के लिए नायक, तो कुछ के लिए खलनायक; वंचितों के समर्थक, लेकिन स्वभाव से अभिमानी; युवाओं के मित्र लेकिन अधेड़ों के शत्रु। एक चौथाई शताब्दी से ये दोनों ही बिहार का भाग्य बना-बिगाड़ रहे हैं।
बिहार के लिए लालू और नीतीश का मतलब क्या है? इस पुस्तक में पहली बार संकर्षण ठाकुर की इन दोनों की व्यापक रूप से प्रशंसित जीवनियों की पुनर्लिखित और नवीन तथा विस्तृत जीवनियाँ प्रस्तुत की जा रही हैं। देश के सर्वश्रेष्ठ पत्रकारों में से एक संकर्षण ठाकुर ने यह शानदार लेखन किया है। इसमें जहाँ कुछ व्यक्तिगत स्मृतियाँ शामिल हैं, तो कुछ राजनीतिक चित्रण और कुछ कठोर विचार भी हैं, जिस वजह से बिहार को समझने के लिए यह पुस्तक पढ़ना अनिवार्य हो जाता है।

Bankim Chandra Chatterjee by Anil Kumar

SKU: 9789351861188

Bankim Chandra Chatter jee , the composer of our National Song V ande Mataram, is known as the king of literature . He was famous as a great novelist during his lifetime. He made a significant contribution to the development of Bengali language and literature . He is considered to be a great novelist, not only in Bengali literature , but also in Indian literature .

Banks and Exchange Companies by George Kinnear

SKU: 6235989716214

You know that, although my life has been spent in the active practice of business, I have had no experience in explaining the theory, and that I can make no pretension to the learning or talent necessary for an author. It is, therefore, with considerable pain that I feel myself called before the public; but I am neither afraid nor ashamed to answer publicly for myself when I am publicly accused. I do not pretend to instruct either you or the public, but only to answer for myself and the Company of which I am Manager. If you find me somewhat prolix and indistinct, I hope you will make some allowance for my inexperience ; and even if you cannot approve of the practice which I defend, I hope you will not find that it proceeds from any principles or motives which you will condemn.

Bansuri Samrat Hariprasad Chaurasia by Surjit Singh

SKU: 9788173157349

बाँसुरी सम्राट हरिप्रसाद चौरसिया—सुरजीत सिंह
सत्तर की देहरी पर कदम रखने से बेहतर अपनी जिंदगी पर मुड़कर देखने का समय और क्या होगा! इस पुस्तक में पं. हरिप्रसाद चौरसिया अपनी जीवन-कथा अपने चिर-प्रशंसक व संगीत अनुरागी सुरजीत सिंह को जैसी है, जैसी थी, वैसी ही सुनाते हैं। संस्मरणों और घटना-वृत्तांतों से भरपूर इस पुस्तक में उनके एक पहलवान के पुत्र से संगीतज्ञ होने तक की यात्रा का विवरण अत्यंत रोचक शैली में है। आगे जारी रहते हुए यह वृत्तांत बताता है कि कैसे वह आकाशवाणी के स्टाफ आर्टिस्ट से फिल्म स्टूडियो के वाद्य-संगीतज्ञ, संगीत निर्देशक और फिर अंतरराष्ट्रीय गुरु बने। बाँसुरी जैसे मामूली साज को शास्त्रा्य संगीत समारोहों का अनुपम वाद्य बनानेवाले कलाकार की जीवन-यात्रा का सर्वथा पठनीय वृत्तांत। संगीत-इतिहास के एक महत्त्वपूर्ण अंश का मूल्यवान् दस्तावेज।

Bapu Ke Kadamon Mein by Dr Rajendra Prasad

SKU: 9788173157455

बापू के कदमों में
भारतवासियों का एक बड़ा कर्तव्य यह है कि महात्माजी के अधूरे काम को वे पूरा करें। इसीलिए महात्माजी ने ग्यारह व्रतों का प्रतिपादन किया था, जिन्हें प्रार्थना के समय वह बराबर दोहराया करते थे। वे व्रत हैं—अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, असंग्रह, आत्मनिर्भरता, शरीर-श्रम, अस्वाद, सर्वधर्म समानता, स्वदेशी, स्पर्श-भावना। ये सब वे ही धर्म और नियम हैं, जो हमारे शास्‍‍त्रों में बताए गए हैं।
बापू ने हमें व्यक्‍तिगत, सामाजिक और राष्‍ट्रीय स्वतंत्रता दिलाने का प्रयत्‍न किया। हमको सिखाया कि व्यक्‍तिगत जीवन में और सामाजिक तथा राष्‍ट्रीय जीवन में कोई अंतर नहीं है। इसलिए जो कुछ व्यक्‍ति के लिए अहितकर है अथवा निषिद्ध है, वह समाज और राष्‍ट्र के लिए भी।
आज हम अपने जीवन को तभी सार्थक बना सकते हैं, जब अपने हृदय के हर कोने को टटोलकर देख लें कि उसमें कहीं गांधीजी की शिक्षा के विरुद्ध कोई छिपी हुई कुवृत्ति तो काम नहीं कर रही है!
जिन्होंने गांधीजी के आदर्शों और सिद्धांतों को सही मायने में आत्मसात् किया, ऐसे देशरत्‍न डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा लिखित बापू के अमिट पदचिह्नों का अद‍्भुत वर्णन है बापू के कदमों में।

BAPU-MY MOTHER by MANUBEHN GANDHI

SKU: PP-02020-0003-124

In this booklet Kumari Manu Gandhi describes a few incidents with Gandhiji. They throw light upon some aspects of Gandhiji’s character and activities.
Manu is a grandniece of Gandhiji. But he had constituted himself her ‘Mother’. Shortly after he had entered upon the last great mission of his life – namely, Hindu- Muslim Peace – in Noakhali (East Bengal) in September 1946, Manu joined him and was his only constant companion thenceforth till his martyrdom on the 30th January 1948. As such, these pen pictures will be read with great interest. They were first contributed to the Bhavnagar Samachar, a Gujarati weekly of Saurashtra – Kathiawad. They have been rendered into English by her friend.

Barbarians by Robert W. Chambers

SKU: 6235989715586

o this is what happened to the dozen-odd malcontents who could no longer stand the dirty business in Europe and the dirtier politicians at home.
There was treachery in the Senate, treason in the House. A plague of liars infested the Republic; the land was rotting with plots.
But if the authorities at Washington remained incredulous, stunned into impotency, while the din of murder filled the world, a few mere men, fed up on the mess, sickened while awaiting executive galvanization, and started east to purge their souls.

Barchester Towers  by Anthony Trollope

SKU: 9788184306330

First published in the year 1857, the present book ‘Barchester Towers’ by Anthony Trollope is part of his series known as the “Chronicles of Barsetshire”. Among other things it satirises the then raging antipathy in the Church of England between High Church and Evangelical adherents.

Bargad Baba Ka Dard by Anuj Kumar Sinha

SKU: 9789350488102

बरगद बाबा का दर्द एक ऐसी पुस्तक है, जिसमें कहानी के माध्यम से पर्यावरण की महत्ता को बताने का प्रयास किया गया है। बरगद बाबा इसके मुख्य पात्र हैं, जो कि एक यात्री को कहानी सुनाते हैं। वे बताते हैं कि कैसे पेड़ काटे जा रहे हैं, कैसे जंगल नष्‍ट हो रहे हैं, कैसे पहाड़ों को खत्म किया जा रहा है, कैसे जंगली जानवरों और पक्षियों का जीवन खतरे में है, कैसे नदियाँ प्रदूषित हो गई हैं। लेकिन किसी को चिंता नहीं है।
बाबा बताते हैं कि कैसे ग्लेशियर के पिघलने से समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है और दुनिया के कई शहरों का अस्तित्व भी खतरे में है। पुस्तक में बरगद बाबा ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र करते हैं। महापुरुषों के बारे में बताते हैं। लोगों के ज्ञान को बढ़ाने का प्रयास करते हैं। वे यह संदेश देना चाहते हैं कि कैसे जल, जंगल, जानवर, पहाड़, नदी का मनुष्य से गहरा रिश्ता है, कैसे ये सब मनुष्यों के लिए आवश्यक हैं, इनके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती।
पुस्तक में बरगद बाबा वही भूमिका अदा करते हैं जो आम घरों में एक बुजुर्ग निभाता है। वे अपनी पीड़ा का बखान करते हैं। साथ ही पर्यावरण की उपेक्षा न करने के लिए आग्रह करते हैं। बरगद बाबा उदाहरण देते हैं, कहानी कहते हैं, घटनाओं का जिक्र करते हैं और उसे समाज की मूल समस्या से जोड़ते हैं। बाबा समस्या के साथ-साथ उसका समाधान भी बताते हैं कि कैसे पानी बचाएँ, कैसे खेती करें, कैसे पर्यावरण की रक्षा करें। पर्यावरण के बारे में मानव मात्र को जागरूक करनेवाली उपयोगी पुस्तक।

Bargad Ke Saaye Mein by Acharya Janaki Vallabh Shastri

SKU: 9789350485644

हिंदी गीत के शिखरपुरुष् आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री बडे़ गद्य-लेखक भी हैं। उनके द्वारा विरचित आलोचना, ललित निबंध, संस्मरण, नाटक, उपन्यास की कई पुस्तकें आईं और हिंदी-जगत् में ख्यात हुईं। रवींद्र, निराला, प्रसाद की श्रृँखला में एक विलक्षण गद्यकार के रूप में शास्त्रीजी को जो सम्मान ‌म‌िलना चाहिए, वह हद तक मलकर भी नहीं मिल पाया।
हिंदी समाज का बड़ा पाठक वर्ग जानकीवल्लभ शास्त्री के गद्य-लेखन का स्वाद लेता रहा है। उनके बीच कथा साहित्य की विशेष चर्चाएँ भी जमकर हुईं। शास्त्रीजी अपनी कथात्मक संघटना और काव्यात्मक संरचना में ऐसा गहरा तालमेल बनाते हैं, जिसमें कहानी भी नहीं छूटती है और शिल्प का नया कौशल सौंदर्य-आलोक से उद्दीप्‍त हो निखर उठता है।
कवि का भावावेश मर्मस्पर्शी दृश्यों से उभरता है, मगर समाज-संवेद्य चिंतक उसे व्यापकता देने में लिजलिजी संवेदना का नहीं, अपितु संयमित विचारों का संतुलित आधार प्रदान करता है। ‘बरगद के साये में’ जानकीवल्लभ शास्त्री के कहानी संग्रहों ‘कानन, अपर्णा, बाँसों का झुरमुट’ की कहानियों का एकत्र संग्रह है।
ये कहानियाँ परिवार, समाज और व्यक्‍त‌ि की त्रासद, संघर्षमयी तथा चारित्रिक विभिन्न मनोदशाओं को उद्‍घाटित करती हैं। निरंतर बिगड़ते और विघटित होते मूल्यों के बीच साहित्य के यथार्थ को प्रस्थापित करती, स्वाद का अनचखा बोध करानेवाली इन कहानियों में आज का समय प्रतिबिंबित है। बाँकपन और निजता के कारण इनकी अनुभूतियाँ सर्वथा अलग हैं।
—संजय पंकज

Barnaby Rudge by Charles Dickens

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The late Mr Waterton having, some time ago, expressed his opinion that ravens are gradually becoming extinct in England, I offered the few following words about my experience of these birds.
The raven in this story is a compound of two great originals, of whom I was, at different times, the proud possessor.

Baron Trump’s Marvellous Underground Journey by Ingersoll Lockwood

SKU: 6235989715848

As doubting Thomases seem to take particular pleasure in popping up on all occasions, Jack-in-the-Box-like, it may be well to head them off in this particular instance by proving that Baron Trump was a real baron, and not a mere baron of the mind. The family was originally French Huguenot—De la Trompe—which, upon the revocation of the Edict of Nantes in 1685, took refuge in Holland, where its head assumed the name of Van der Troomp, just as many other of the French Protestants rendered their names into Dutch. Some years later, upon the invitation of the Elector of Brandenburg, Niklas Van der Troomp became a subject of that prince, and purchased a large estate in the province of Pomerania, again changing his name, this time to Von Troomp.

Barrack Room Ballads by Rudyard Kipling

SKU: 9788184306267

The present book ‘Barrack Room Ballads’ is a collection of songs and ballads written in verses by celebrated writer Rudyard Kipling. These ballads deals with the late-Victorian British Army and mostly written in a vernacular dialect. The series contains some of Kipling’s most well-known work, including the poems “Gunga Din”, “Tommy” and “Danny Deever”, and helped consolidate his early fame as a poet.

Barren Ground by Ellen Glasgow

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The boy received the news with an indifference from which it blankly rebounded. He buried one bare foot in the soft white sand and withdrew it with a jerk that powdered the blackberry vines beside the way.

Barry Lyndon by William Thackeray

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First published in the year 1844, the present novel ‘Barry Lyndon’ by William Thackeray is about a member of the Irish gentry trying to become a member of the English aristocracy.

Bartholomew Fair by Ben Jonson

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Stage. Gentlemen, have a little patience, they are e’en upon coming, instantly. He that should begin the play, master Littlewit, the proctor, has a stitch new fallen in his black silk stocking; ’twill be drawn up ere you can tell twenty: he plays one o’ the Arches that dwells about the hospital, and he has a very pretty part. But for the whole play, will you have the truth on’t?—I am looking, lest the poet hear me, or his man, master Brome, behind the arras—it is like to be a very conceited scurvy one, in plain English. When’t comes to the Fair once, you were e’en as good go to Virginia, for any thing there is of Smithfield.

Bartleby, the Scrivener: A Story of Wall Street by Herman Melville

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I am a rather elderly man. The nature of my avocations for the last thirty years has brought me into more than ordinary contact with what would seem an interesting and somewhat singular set of men, of whom as yet nothing that I know of has ever been written:—I mean the law-copyists or scriveners. I have known very many of them, professionally and privately, and if I pleased, could relate divers histories, at which good-natured gentlemen might smile, and sentimental souls might weep. But I waive the biographies of all other scriveners for a few passages in the life of Bartleby, who was a scrivener of the strangest I ever saw or heard of. While of other law-copyists I might write the complete life, of Bartleby nothing of that sort can be done. I believe that no materials exist for a full and satisfactory biography of this man. It is an irreparable loss to literature. Bartleby was one of those beings of whom nothing is ascertainable, except from the original sources, and in his case those are very small. What my own astonished eyes saw of Bartleby, that is all I know of him, except, indeed, one vague report which will appear in the sequel.

Bartleby, the Scrivener: A Story of Wall-Street by Herman Melville

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First published in the year 1853, famous American English author Herman Melville’s short novella ‘Bartleby, the Scrivener: A Story of Wall-Street’ begins when a Wall Street lawyer hires a new clerk who, after an initial bout of hard work, refuses to make copy and any other task required of him, with the words “I would prefer not to”.

Basic Religious Books of the Hindus by Manju Sehgal

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Hinduism has an extraordi1 Inary wealth of scriptures but people have no time to read the religious books like Vedas, Puranas, Upanishads etc. Therefore, an attempt has been made to have a single volume that forms the foundation of our civilisation’s heritage to seek inspiration and a sense of direction in our lives.
The Vedas prescribe some regulations and if someone follows them, one will be free from material entanglement. The Puranas, each named after a deity Brahma, Vishnu and Shiva, are the post vedic texts which contain a complete narrative of the history on the Universe from creation to destruction. The Upanishads represent the essence of the Vedas. The Smritis explain and elaborate the Vedas, making them understandable and more meaningful to the general population. The Bhagwad Gita is in the form of a dialogue between Arjuna and Lord Krishna who teaches him to do his duty. The Mahabharata is not only an epic but tells the tale of heroic people, containing a code of life, a philosophy of social and ethical relations. The Ramcharitamanas provides the guidelines for an ideal family, an ideal king and an ideal mother.
This book gives a brief about holy books of Hinduisma must read for every Hindu and Bharatiya.