Antarctica–The Coming Impact by Arun • Indu Rani Chaturvedi

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The melting of ice at the bottom of the globe, thousands of kilometers away from you, is going to affect your profession, your livelihood, your finances, your home, your lands! And not only your life, but even the very future of your children! Shocking?? But that exactly is what is happening now!! Antarctica has an enormous 2 km thick ice-cap! Global Warming threatens to melt this vast ice-cap. What happens?! Melting Antarctic ice has potential to raise global sea levels by 70 meters, yes, 230 feet! A colossal SLOW MOTION TSUNAMI has been triggered!! In coming decades, major cities will start disappearing! And then, a second tidal wave of climate-refugees will be triggered! By 2100, about 400 crore refugees will swamp other cities!! This book gives the scientific foundation of these dire predictions; listing cities getting wiped out; hints of financial planning; and potential scientific discoveries that might still save the earth! The melting of ice will also expose a huge continent of Antarctica-where your children will settle down! The first author has decades of experience of working in Antarctica; read a first-hand story about this strange land and its coming impact on YOUR life!!

Antariksh Ki Kahani, Antariksh Yatriyon Ki Zubani by Kali Shankar

SKU: 9788177211658

अंतरिक्ष की कहानी अंतरिक्ष यात्रियों की जुबानी—काली शंकर

अंतरिक्ष अन्वेषण और अंतरिक्ष में जाकर विभिन्न प्रकार के कार्य करना, अंतरिक्ष से पृथ्वी अवलोकन इत्यादि बातें एक सामान्य व्यक्‍ति के लिए स्वप्न ही लगती हैं। अंतरिक्ष के नाम से ही एक रोमांच पैदा हो जाता है—कैसी होगी वह दुनिया, कैसे वहाँ जाया जाएगा, कैसे रहा जाएगा, खान-पान, दैनंदिन कार्य और सबसे ऊपर—वहाँ रहकर प्रयोग करना, खोज करना—एक सनसनाहट सी अनुभव करवा देता है।
‘अंतरिक्ष की कहानी, अंतरिक्ष यात्रियों की जुबानी’ में अंतरिक्ष यात्रियों ने अपनी शिक्षा के विषय में तथा शिक्षा के दौरान हुई आर्थिक परेशानियों का जिक्र किया है। स्पेस शटल की प्रथम महिला कमांडर के पिता उसे पढ़ाना चाहते थे; लेकिन उनके पास बेटी को पढ़ाने के लिए पैसे नहीं थे। बेटी ने छोटी-छोटी नौकरी करके शिक्षा के लिए धन अर्जित किया। जॉन ग्लेन एक प्लंबर के बेटे थे; सभी स्पेस शटलों से यात्रा कर चुके विख्यात सर्जन डॉ. स्टोरी मुसाग्रेव एक किसान के बेटे थे। लेकिन जीवन का यह सत्य है कि प्रतिभा पैसे की मोहताज नहीं होती। अभावों में जीवन जीने के बावजूद ये लोग विश्‍वविख्यात अंतरिक्ष यात्री बने।
इसमें अंतरिक्ष अन्वेषण के विभिन्न पहलुओं के बारे में अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा विस्तार से तथा रोचक-प्रश्‍नोत्तर शैली में बताया गया है, जो ज्ञानपरक तो है ही, रोमांचपूर्ण भी है।
अंतरिक्ष की रोचक जानकारियों से भरपूर पठनीय पुस्तक।

Antariksha Mein Jeevan by Kali Shankar

SKU: 9789382898849

अंतरिक्ष में रहना आसान नहीं है। कपड़े धोना और खाना-पीना अंतरिक्ष की भारहीनता में बहुत जटिल प्रक्रियाएँ बन जाती हैं। छोटे-से-छोटा कार्य भी अंतरिक्ष में, जहाँ पर सभी चीजें भारहीन होकर तैर रही हों, चुनौतीपूर्ण बन जाता है। प्रस्तुत पुस्तक में, अंतरिक्ष में जीवन के विभिन्न पहलुओं-भोजन, शयन, स्पेस सूट, स्पेस वॉक, तैरना, व्यायाम इत्यादि को विस्तृत रूप में चित्रों के माध्यम से समझाया गया है। अंतरिक्ष में जीवन-शैली के ऊपर एक प्रश्नोत्तरी भी प्रस्तुत की गई है, जिसके उत्तर अंतरिक्ष में जा चुके अंतरिक्ष यात्रियों और अंतरिक्ष विशेषज्ञों द्वारा दिए गए हैं। विश्वास है, यह पुस्तक विद्यार्थियों, अंतरिक्ष विज्ञान में रूचि रखनेवाले पाठकों एवं सामान्य जन के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।

Antarrashtriya Atankvad by Vinod Sehgal

SKU: 8173154465

अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद
प्रस्तुत पुस्तक में लेखक ने स्थापित तथ्यों की सरल गलियों के परे जाकर अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ युद्ध की बड़ी ही कष्टकारी झलक दिखाई है, युद्धों की बदलती प्रवृत्ति को उजागर करते हुए आतंकवादी कृत्यों से संबंधित विषमता के तत्त्व से निपटने के संबंध में वह एक नया दृष्टिकोण प्रदान करते हैं और बताते हैं कि किस प्रकार कई वैकल्पिक रणनीतियों को उपेक्षित करते राष्ट्रीय प्रतिक्रिया प्रारूप, अब भी प्रतिशोधात्मक क्षमता के अभाव तथा प्रतिशोधात्मक अति विनाशकारी क्षमता के बीच मँडराते हैं।
ऐसे क्षेत्र को खँगालते हुए, जिस पर इस विषय पर लिखनेवाले विद्वानों तथा विशेषज्ञों ने शायद ही पहले कभी ध्यान दिया है, जनरल सहगल का नवीन दृष्टिकोण, खासकर इन विषयों पर, उनके मतों में देखा जा सकता है—
 पारिभाषिक गतिरोध समाप्त करना, जिससे राष्ट्रों के समूह हिचकिचाते हैं।
 इराक से परे देखना।
 आत्मघाती हमलों का बचाव सोचना।
 अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के संकट से निपटने के लिए भावी योजनाएँ ।
यह पुस्तक सुबोध्य तरीके से उजागर करती है कि विश्व-प्रभुत्व के लिए सभ्यता संबंधी चालबाजी सैमुअल हटिंगटन की प्रसिद्ध प्राक्कल्पना के अस्तित्व में आने से काफी पहले आरंभ हो चुकी थी। जनरल सहगल की पुस्तक ‘अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद’ आतंकवाद के संबंध में संयुक्त राष्ट्र, सरकारों, कूटनीतिज्ञों, विद्वानों, नीति- निर्धारक समूहों, सैन्य तथा इंटेलिजेंस विशेषज्ञों और आम जनता के दृष्टिकोणों पर प्रभाव डालेगी।

Antarrashtriya Mudra Kosh (Icwa) by V. Srinivas

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भारत के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी द्वारा भारत के आर्थिक इतिहास में महत्त्वपूर्ण पलों का व्यावहारिक विश्लेषण और भावी वैश्विक संकट के समाधान का निर्णय कर सकनेवाले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में बहुपक्षीयता का भविष्य।
यह पुस्तक वी. श्रीनिवास भारत सरकार के विशिष्ट अपर सचिव, कार्यकारी निदेशक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पूर्व सलाहकार और भारत के वित्तमंत्री के निजी सचिव द्वारा 17 माह के शोध और साक्षात्कार के आधार पर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ भारत के संबंधों की अनेक बड़ी घटनाओं का व्यापक विश्लेषण है।
इसमें अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के संस्थापक सदस्य के रूप में भारत की भूमिका का परिदृश्य है। यह भारत के 1966, 1981 और 1991 अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष कार्यक्रमों, 2010 में आई.एम.एफ. से भारत द्वारा स्वर्ण क्रय, जी20 के उदय और विश्व में तीव्र गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में भारत के उद्भव के बारे में अंतर्दृष्टि प्रदान करती है। वी. श्रीनिवास ने अंतिम ऋणदाता के रूप में आई.एम.एफ. की भूमिका, सदस्य देशों के साथ निपटने में असीमित शक्ति की एक संस्था के रूप में आई.एम.एफ. 2008 के बाद वैश्विक वित्तीय संकट में आई.एम.एफ. की वृहत्तर भूमिका और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा में चीन के उदय पर अंतर्दृष्टि प्रदान की है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ भारत के संबंध के परिप्रेक्ष्य में पहले 25 वर्षों पर व्यापक शोध है, जिसके बारे में गहन अध्ययन और शोध करके समस्त जानकारियाँ संकलित की गई हैं, जिन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

Antarrashtriya Sangathan by Anish Bhasin

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अंतरराष्‍ट्रीय संगठन ऐसे संगठन होते हैं, जो एकांतिक रूप से किसी विशेष राष्‍ट्र या राज्य के न होते हुए भी अंतरराष्‍ट्रीय संबंधों के संचालन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जैसे संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ, उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो), दक्षेस/सार्क, आसियान, एपेक, यूरोपीय संघ, राष्‍ट्रमंडल, अरब लीग, अफ्रीकी संघ, ओपेक, विश्‍व बैंक, विश्‍व व्यापार संगठन इत्यादि।
विगत दशक में अंतरराष्‍ट्रीय संगठनों पर अनेक ग्रंथ अंग्रेजी में प्रकाशित हुए हैं, किंतु हिंदी में इस विषय पर एक संपूर्ण पुस्तक का सर्वथा अभाव रहा है। अत: इसी अभाव की पूर्ति हेतु इस ग्रंथ ‘अंतरराष्‍ट्रीय संगठन विश्‍वकोश’ का सृजन किया गया है। प्रस्तुत पुस्तक में सौ से अधिक अंतरराष्‍ट्रीय संगठनों का सांगोपांग वर्णन है। प्रत्येक संगठन के अंत में उससे संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्यों को कोष्‍ठक में दिया गया है। पुस्तक की विषयवस्तु को उपयोगी बनाने हेतु अंतरराष्‍ट्रीय संगठनों से संबंधित कई पुस्तकों से संदर्भ भी लिये गए हैं।
आशा है, यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के परीक्षार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।

Anthem by Ayn Rand

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First published in 1938, ‘Anthem’ is a dystopian fiction novel by British writer Ayn Rand. It takes place at some unspecified future date when mankind has entered another dark age. Technological advancement is now carefully planned and the concept of individuality has been eliminated.

Anthony Adverse by Hervey Allen

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The tale moves swiftly through the latter years of the Eighteenth and the early decades of the Nineteenth Centuries to delve deep amid the roots of the modern era. Anthony Adverse – begotten in France, born in the Alps, raised in Italy and flung by fortune to the West Indies, Africa, and finally to America-unlocks with the key of action the diverting experiences of his journey in body and thought from one hemisphere to another. Filled with memorable events, with affairs of the heart, the purse, and the mind in many lands and famous cities, this huge novel with hundreds of colorful people is interesting every step of the way. It has gusto, wise humor, beauty, and pathos.

Anti-imperialist Writings

This audiobook is a collection of Mark Twain’s anti-imperialist writings (newspaper articles, interviews, speeches, letters, essays and pamphlets). (Summary by Vineshen Pillay)

Anticipations by H. G. Wells

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Now, this age is being constantly described as a “Democratic” age; “Democracy” is alleged to have affected art, literature, trade and religion alike in the most remarkable ways. It is not only tacitly present in the great bulk of contemporary thought that this “Democracy” is now dominant, but that it is becoming more and more overwhelmingly predominant as the years pass. Allusions to Democracy are so abundant, deductions from its influence so confident and universal, that it is worth while to point out what a very hollow thing the word in most cases really is, a large empty object in thought, of the most vague and faded associations and the most attenuated content, and to inquire just exactly what the original implications and present realities of “Democracy” may be. The inquiry will leave us with a very different conception of the nature and future of this sort of political arrangement from that generally assumed. We have already seen in the discussion of the growth of great cities, that an analytical process may absolutely invert the expectation based on the gross results up-to-date, and I believe it will be equally possible to show cause for believing that the development of Democracy also is, after all, not the opening phase of a world-wide movement going on unbendingly in its present direction, but the first impulse of forces that will finally sweep round into a quite different path. Flying off at a tangent is probably one of the gravest dangers and certainly the one most constantly present, in this enterprise of prophecy. —From the Book

Antigone by Sophocles

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Antigone is a tragedy by Sophocles written in or before 441 BCE. Of the three Theban plays Antigone is the third in order of the events depicted in the plays, but it is the first that was written.

Antim Satya Tatha Anya Kahaniyan by Himanshu Joshi

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प्रसिद्ध कथाकार हिमांशु जोशी की इन कहानियों में वैविध्य देखने को मिलता है। अचरज होता है-इतना वैविध्य एक ही व्यक्ति की रचनाओं में एक साथ कैसे संभव हो सकता है? छह दशक से अधिक के अपने कहानी लेखन में हिमांशु जोशी ने लगभग दो सौ कहानियाँ लिखीं। कई स्तरों को छूती आम आदमी की इन कहानियों में अदृश्य आग है, तपिश है, पीड़ा है, छटपटाहट है, और घुटन भी है। दर्द की ये तसवीरें मनुष्य-मन की व्यथा ही नहीं, आज के जी रहे मानव के अंतहीन अंतर्विरोधों को भी उजागार करती हैं।
कहानी मात्र कहानी न रहकर एक यथार्थ भी बन जाए, यह स्वयं में कम बड़ी उपलब्धि नहीं। जिए हुए यथार्थ की ये कहानियाँ कहानियाँ ही नहीं, दस्तावेज भी हैं–विसंगतियों से जूझ रहे अभिशप्त आदमियों के लिए। कहानी शुरू तो कहीं से भी हो सकती है यहाँ, लेकिन प्रायः इन कहानियों का अंत मास्टर स्ट्रोक के साथ होता है।
सुप्रसिद्ध कथाकार कमलेश्वर ने हिमांशु जोशी के विषय में लिखा है कि ‘स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कहानी को हिमांशु जोशी की कहानियों के बगैर पहचाना नहीं जा सकता। हिंदी कहानी ने जितनी भी रचनात्मक मंजिलें तय की हैं, उन रचनायात्राओं और मंजिलों पर हिमांशु जोशी की कोई-न-कोई कहानी साथ चलती या मंजिल पर मौजूद मिलती है।’

Antiquities of the Jews by Flavius Josephus

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Those who undertake to write histories, do not, I perceive, take that trouble on one and the same account, but for many reasons, and those such as are very different one from another. For some of them apply themselves to this part of learning to show their skill in composition, and that they may therein acquire a reputation for speaking finely: others of them there are, who write histories in order to gratify those that happen to be concerned in them, and on that account have spared no pains, but rather gone beyond their own abilities in the performance: but others there are, who, of necessity and by force, are driven to write history, because they are concerned in the facts, and so cannot excuse themselves from committing them to writing, for the advantage of posterity; nay, there are not a few who are induced to draw their historical facts out of darkness into light, and to produce them for the benefit of the public, on account of the great importance of the facts themselves with which they have been concerned. Now of these several reasons for writing history, I must profess the two last were my own reasons also; for since I was myself interested in that war which we Jews had with the Romans, and knew myself its particular actions, and what conclusion it had, I was forced to give the history of it, because I saw that others perverted the truth of those actions in their writings.

Antriksh Prashnottary by Kali Shankar

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अनजाने अंतरिक्ष को जानने के लिए सामान्य मानव के मस्तिष्क में अनेक रोचक और कुतूहलपूर्ण प्रश्‍न उभरते रहे हैं तथा वह अंतरिक्ष के विषय में अधिकाधिक जानकारी पाने की प्रबल इच्छा रखता है ।
प्रस्तुत पुस्तक में अंतरिक्ष के विभिन्न विषयों- अंतरिक्ष स्टेशन, तारकीय / क्षुद्र ग्रहीय ” पुच्छल तारा अभियान, अंतरिक्ष परिवहन स्पेस शटल, अंतरिक्ष में प्रमोचन की प्रक्रिया, अंतरिक्ष के रिकॉर्ड, अंतरिक्ष दूरबीनें, कृत्रिम उपग्रह, स्पेस वॉक, अंतरिक्ष परिघटनाओं तथा अंतरिक्ष चयन और प्रशिक्षण का रोचक वर्णन किया गया है । आज अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में हो रहे विभिन्न अनुसंधानों -स्पेस एलीवेटर ( अंतरिक्ष परिवहन का भविष्य का सबसे सस्ता साधन), भूकंपों के पूर्वानुमान में उपग्रहों की भूमिका और सौर ऊर्जा उपग्रहों के बारे में भी रोचक व ज्ञानप्रद जानकारी दी गई है । अंतरिक्ष के दुर्लभ और रोमांचक आँकड़ों को 23 परिशिष्‍टों के माध्यम से स्पष्‍ट किया गया है । यह पुस्तक अंतरिक्ष विषय के जिज्ञासु पाठकों के कुतूहलपूर्ण प्रश्‍नों का समाधान करने में समर्थ सिद्ध होगी, ऐसा विश्‍वास है ।

Antriksha Mein Barhate Kadam by Rakesh Shukla , Kali Shankar

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अंतरिक्ष अन्वेषण मानव की जिज्ञासाओं को शांत करने, ज्ञानार्जन करने तथा ब्रह्मांड की अधिकाधिक जानकारी प्राप्‍त करने का सबसे सशक्‍त माध्यम है। अंतरिक्ष युग के प्रथम पचास वर्षों में अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में मानव ने अच्छीड़खासी प्रगति की है। आज हमें पता चल चुका है कि कई करोड़ आकाशगंगाएँ हमारे ब्रह्मांड का निर्माण करती हैं। अंतरिक्ष अन्वेषण कार्य आज भी निरंतर जारी है।
अंतरिक्ष अन्वेषण के कार्यों से मानव अनेक क्षेत्रों—कंप्यूटर, संचार, परिवहन, चिकित्सा, घरेलू उत्पाद इत्यादि में लाभान्वित हुआ है। अंतरिक्ष यात्रा एक अत्यंत साहसिक कार्य है। इसकी प्रगति में महान् अंतरिक्ष यात्रियों के साहस और शौर्य ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।
प्रस्तुत पुस्तक ‘अंतरिक्ष में बढ़ते कदम’ अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में हुई और हो रही अभूतपूर्व प्रगति से परिचय कराती है। इसके अध्ययन से शोधार्थी, विद्यार्थी ही नहीं, जनसामान्य भी समान रूप से लाभान्वित होंगे।

Antyodaya by Prabhat Jha

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देश में जब भी सामाजिक-आर्थिक चिंतन की बात की जाती है तो गांधी, जेपी-लोहिया और दीनदयालजी का नाम लिया जाता है।
सामाजिक जीवन में और समाज
के आर्थिक जीवन में यदि हमारी अर्थव्यवस्था अंत्योदय युक्त होगी तो समाज-जीवन की चिती की साधना स्वतः सफल होती जाएगी। अंत्योदय शब्द में संवेदना है, सहानुभूति है, प्रेरणा है,
साधना है, प्रामाणिकता है, आत्मीयता है, कर्तव्यपरायणता है तथा साथ ही उद्देश्य की स्पष्टता है। दीनदयालजी कहा करते थे कि ‘जब तक अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का उदय नहीं होगा, भारत का उदय संभव नहीं है’। वे अश्रुपूरित आँखों से आँसू पोंछने और उसके चेहरे पर मुसकराहट को अंत्योदय की पहली सीढ़ी मानते थे।
दीनदयालजी के अंत्योदय का आशय राष्ट्रश्रम से प्रेरित था। वे राष्ट्रश्रम को राष्ट्रधर्म मानते थे। अतः कोई श्रमिक वर्ग अलग नहीं है, हम सब श्रमिक हैं।
राष्ट्रविकास में सबको सम्मिलित कर भारत निर्माण का मार्ग प्रशस्त करनेवाली चिंतनपरक पुस्तक।

Anubhav Ke Bol by Ramji Bhai

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परिवार और समाज प्रबोधन में कथाओं का विशेष महत्त्व है। अनेक गुण एवं जीवन-मूल्य कहानियों के माध्यम से समाज और व्यक्तियों के जीवन में उतरते हैं।
महापुरुष, संत या समाज के प्रभावी लोगों की कथाओं की एक विस्तृत-विलक्षण धारा भारत में है, किंतु कभी-कभी सहज, सरल, निरक्षर या कभी-कभी तो बालकों की कहानियाँ भी बड़ी प्रेरणादायक और दिशा-दर्शक होती हैं, ऐसा सभी का व्यापक अनुभव है। वेद और उपनिषदों में उल्लिखित अनेक महत्त्व के तत्त्व एवं सत्य को सामान्य लोगों तक पहुँचाने के उद्देश्य से अपने यहाँ पुराणों की रचना की गई है। संत, महात्मा या कथाकार द्वारा रोचक कहानियों के माध्यम से वेद और उपनिषदों में निहित गहन तत्त्व जनसामान्य तक पहुँचाने की परंपरा आज भी चल रही है।
‘अनुभव के बोल’ संग्रह की कहानियाँ परिवार-प्रबोधन और लोक-प्रबोधन की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगी। अनेक कहानियाँ पढ़ते समय हृदय को झकझोरती हैं, छू जाती हैं, आँखें नम कर जाती हैं। जिन महान् जीवन-मूल्यों के कारण मानवता समृद्ध होती है, ऐसे चिरकाल तक चलनेवाले समयातीत मूल्यों की शिक्षा सहज ही इन कहानियों को पढ़ने से होगी।

Anubhuti by Chiranjeev Sinha, Harshashree

SKU: 9789353228453

ढाई अक्षर का शब्द रिश्ता एक गजब का गैरमामूली जादुई शब्द है। रिश्ते दरअसल खुशी और गम के सच्चे साझीदार होते हैं। अपनों से दिल के तार जुड़ने पर जहाँ ये मुसकराने की वजह बन जाते हैं, वहीं उनसे बिछुड़ने पर हमारी आँखों की कोरों को धीरे से नम कर जाते हैं।
हर रिश्ते की अपनी एक अलग सुगंध होती है, क्योंकि हर रिश्ता उस व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति के साथ किए गए विशिष्ट संव्यवहार से अपने तरीके से पुष्पित-पल्लवित होता है।
रिश्तों और शब्दों का संबंध बेहद करीबी है। व्यक्ति और अक्षर क्रमशः रिश्ते और शब्दों के संरचनात्मक अवयव हैं। हमारी कोमल भावनाएँ जब शब्दों के रूप में छोटी सी पाती का आकार ग्र्रहण कर रही होती हैं तो ऐसा लगता है कि हम बिना किसी अवरोध के अपने प्रिय के दिल में गहरे तक उन्मुक्त पंछी की तरह प्रवेश कर रहे हों। इसलिए शब्दों से बुनी हुई कहानियाँ पाठकों के अंतस में संवेदना और आपसी लगाव का भाव जगाकर वर्तमान समय में तेजी से दरककर बिखर रहे रिश्तों को सहेजने का एक अत्यंत प्रभावी माध्यम हैं।
प्रस्तुत कहानी-संग्रह में लेखकद्वय की प्रत्येक कहानी इसी भावना को लिये हमारे आस-पास के समाज में बिखरे रिश्तों में समाए उस अनूठे संसार को कागज पर प्रतिबिंबित करती है, जहाँ एक-दूसरे के लिए समर्पण है, चिंता है, तड़प है और कभी-कभी मौन रहकर भी दिल के रास्ते भावनाओं का संपूर्ण संप्रेषण है।

Anupam Kahaniyan by Yashwant Mande

SKU: 8173156875

अनुपम कहानियाँ
अनुपम कहानियाँ संग्रह की कहानियों की विशेषता इनकी विविधता है। सारी कहानियाँ ऐसे विषयों पर हैं जिन पर आज तक कहानियाँ नहीं लिखी गई हैं। ‘सम्राट्’ कहानी शिवाजी के आगरा से भाग जाने की घटना का रोमांचक वर्णन है। ‘आतंक’ कहानी उग्रवाद को एक चामत्कारिक रूप देती है। वसिष्‍ठ श्रीरामचंद्र के गुरु थे और ‘वसिष्‍ठ’ कहानी उनके जीवन पर नया प्रकाश डालती है। ‘सह्याद्रि’ कहानी पाठकों को अपने साथ पर्यटन पर ले जाती है और फिर पाठकों को वर्तमान जीवन के संघर्ष पर विचार करने के लिए विवश कर देती है। इसी तरह सारी कहानियों में ताजगी और नयापन है।
यशवंत मांडे की शैली और प्रस्तुतीकरण आकर्षक है। भाषा का प्रयोग कहानी के विषय के अनुसार और सरल है। इन कहानियों में किसी प्रकार की अश्लीलता नहीं है और इसे बच्चे, बूढ़े और स्‍त्रियाँ सभी पढ़ सकते हैं।
ये कहानियाँ वास्तव में अनुपम हैं और हमें आशा है कि पाठकों को पसंद आएँगी।

Anuvad Aur Anuprayog by Dinesh Chamola ‘Shailesh’

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अनुवाद का संबंध भाव, विचार, सृजन एवं रचना की प्रारंभिक प्रक्रिया से स्वतः ही जुड़ जाता है। यद्यपि अनुवाद कही हुई बात अथवा ज्ञात उक्ति का पुनर्कथन है, लेकिन क्या भावों का अनुवाद विचार; विचारों का अनुवाद रचना नहीं है? अनुभूति ही दूसरे अर्थों में अनूदित अथवा अंतरित होकर अन्यान्य अभिव्यक्तियों का रूप ग्रहण कर चिंतनधारा को विस्तारित करती आई है।
अनुवाद वस्तुतः किसी एक भाषा में बहुप्रचलित अथवा अत्यल्प प्रचलित भाव, ज्ञान अथवा किसी भी प्रकार की संपदा का अधिकाधिक श्रोताओं, उपभोक्ताओं व पाठकों तक संबंधित ज्ञान, भाव, विचार अथवा सामग्री के प्रचार-प्रसार का एक प्रभावी माध्यम है।
अनुवाद आज के सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक, राजनैतिक, आर्थिक व व्यावहारिक जीवन का ही नहीं, बल्कि समेकित जीवन पद्धति की अपरिहार्य अपेक्षा हो गई है। इसके अभाव में जीवन में अभिव्यक्ति व बहुविध ज्ञानार्जन की कल्पना नहीं की जा सकती।
अनुवाद आज के ज्ञान-प्रसार का प्राण-तत्त्व है। इस पुस्तक में विभिन्न मंत्रालयों, कार्यालयों तथा साहित्य के अन्यान्य क्षेत्रों में प्रयुक्त व हस्तगत, संगृहीत विगत दशकों की बिखरी शब्द संपदा को अलग-अलग अनुप्रयोगों के संदर्भ में सहेजने का एक विनम्र प्रयास किया गया है। कार्यालयीन संदर्भों के साथ-साथ यह लेखक, विद्यार्थी एवं विश्वविद्यालय के अनुवाद से जुड़े शोधार्थियों के लिए भी समान रूप से उपादेय है।

Apana Paraya by Dr. Ramesh Pokhriyal ‘Nishak’

SKU: 9788173158896

अपना पराया एक सामाजिक उपन्यास है, जिसमें सुप्रसिद्ध उपन्यासकार डॉ. रमेश पोखरियाल ‘िनशंक’ बड़े कौशल से पर्वतीय अभावमय जीवन, सामाजिक विसंगतियों, अनमेल विवाह, विधवा-समस्या, सास-बहू-संबंध, वर्तमान शहरी प्रभाव, शिक्षा-स्वास्थ्य-िबजली-पानी-सड़क आदि और अन्य कई ग्रामीण समस्याओं का चित्रण कर उनका समाधान पाठक के ऊपर छोड़ देते हैं। कुछ समस्याओं-शैक्षिक आत्मनिर्भरता, संशोधित घराट योजना आदि का वह समाधान भी प्रस्तुत करते हैं।
उपन्यास मानवीय संबंधों और संवेदनाओं को उजागर करने में समर्थ है। आत्मीयता, विश्वास, आस्था और स्नेह-प्रेम के भाव पराए को भी अपना बना लेते हैं और इनके अभाव में अपना भी पराया-सा लगता है। ग्रामीण मुहावरेदार और लोकोक्तिपरक वाक्य- रचना उपन्यास के आंचलिक वैशिष्ट्य को सामने लाती है।
पहाड़ के रीति-िरवाज एवं सांस्कृतिक जीवन-मूल्यों का दिग्दर्शन कराता एक मर्मस्पर्शी, संवेदनशील उपन्यास!

Apane Bheetar Ka Meghdoot by Amarendra Khatua

SKU: 9789380823683

‘आत्मा बेचारी कितनी गहराई में होती है
हाड़-मांस-चर्म की पोशाक पहन,
इंद्रियों का साम्राज्य बना
सामने की दुनिया में खुद को
प्रकट और नामित कर।’

‘याद रखो
जो सुख का है वह सबका है
जो दु:ख का है सिर्फ अपना है।’

‘वजह हो या न हो मेरी कविता में
मेरे समय के और बाद के
हर कवि की कविता के अणुओं और
परमाणुओं में
हो प्रचुर शक्‍ति।’

‘अपनी अंगिक असफलता समझने को
कवि के पास नहीं होते शब्द।’

‘अभव के इस चकित महापर्व से ही तो
जन्म लेते हैं हमारे अल्पायु संबंध।

‘इतनी गहरी यातना को
क्या घाव की तरह
नहीं पहना जा सकता
रोजाना की पोशाक के नीचे?’

Apane Chanakya Swayam Banen by Smt. Renu Saini

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चाणक्य ने अपने पिता की हत्या के बाद बचपन से ही जीवन का उद्देश्य बना लिया था मगध को एक नेक, सुशील, ईमानदारी और प्रतापी राजा प्रदान करना। अपने इस संकल्प को पूर्ण करने के लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिया। उन्होंने सदाचारी और पराक्रमी युवराज खोजने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया और चंद्रगुप्त को ढूँढ़ निकाला। चंद्रगुप्त का पूरा व्यक्तित्व चाणक्य के द्वारा ही गढ़ा गया था। उन्होंने अपने अनेक शिष्यों को जीवन के पाठ पढ़ाए। वे यहीं तक नहीं रुके अपितु अपने ज्ञान को ‘अर्थशास्त्र’ पुस्तक में समेट दिया। अर्थशास्त्र का ग्रंथ आज अनेक रूपों में समाज के पास उपलब्ध है; बस आवश्यकता है तो उस ग्रंथ को गहनता से पढ़ने की, समझने की और जानने की।
चाणक्य ने अपने बुद्धि-कौशल से हर तरह की बाधा से पार पाने के उपाय निकाले हुए थे, जो आज भी उपयोगी हैं। सफलता पाने के लिए यथेष्ट है कि व्यक्ति चाणक्य के व्यक्तित्व को पढ़ें, समझें, जानें और फिर खुद को पहचानें। ऐसा करके प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को एक नए बिंदु पर ले जा सकता है। वह नया बिंदु संतुष्टि, सुख, खुशी, स्वास्थ्य, समृद्धि सबकुछ प्रदान करता है।
यह पुस्तक आचार्य चाणक्य के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने को उनके अनुरूप ढालकर सफलता के शिखर छूने का एक प्रबल माध्यम है।

Apharan by Ramdev Shukla

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‘हम लोग अपनी शैक्षिक योग्यता प्रमाणित कर चुके हैं। जवान हैं, मेहनत कर सकते हैं। कोई कमी नहीं है, किंतु आपकी महान् व्यवस्था हमारे लिए दैनिक मजूर के बराबर वेतन का भरोसा भी तो हमें नहीं दे पाती। हम क्या करें अपनी योग्यता का? हम क्या करें अपनी ऊर्जा का? क्या करें अपने खौलते लहू का? और अपने उबलते हुए गुस्से का क्या करें? हमारे साथ पढ़नेवाले फिसड्डी लड़के पाँच सितारा जिंदगी जी रहे हैं, सिर्फ इसलिए कि वे किसी मंत्री के बेटे हैं या आई.ए.एस. अफसर के दामाद हैं या बड़े तस्कर के सपूत हैं!’
‘जिन्होंने हमें पहचाना, हमारे माथे पर लगा बेरोजगार का दाग पोंछ दिया, हमें बीस, तीस, कभी-कभी चालीस हजार रुपए महीने तक वेतन देते हैं, वे कौन हैं, हम नहीं जानते? जानने की उत्सुकता न रखना ही हमारी ‘योग्यता’ है। आपकी न्याय-व्यवस्था देश को बेचकर स्विस बैंक भरनेवालों को गंदा नहीं कहती। भूख से बिलबिलाता बच्चा होटल से रोटी चुराकर खा ले तो उसके लिए जेल की सजा है और देश को हर तरह से लूटनेवालों के लिए है सार्वजनिक अभिनंदन-समारोह।’
—इसी संग्रह से

‘अपहरण’ की कहानियाँ समाज में व्याप्‍त सामाजिक-आर्थिक असमानता, कुरूपता और विसंगतियों को तो उजागर करती ही हैं, साथ ही राजनीति, चुनाव और मानवीय संबंधों का गहराई से विश्‍लेषण करती हैं। पठनीयता से भरपूर सुरुचिपूर्ण कहानियाँ।

Apna Deepak Swayam Banen by Sudha Murthy

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प्रख्यात कन्नड़ लेखिका श्रीमती सुधा मूर्ति साहित्य एवं समाज-सेवा के क्षेत्र में अपने अनुपम योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अपने बचपन में सुनी कहानियों में से कुछ कहानियों में निहित आदर्शों को अपने अनुभव के आधार पर इस पुस्तक की कहानियों में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। अपने कार्य के दौरान वे अनेक बच्चों से मिली हैं, जो अपने मन में कई सपने, कई आकांक्षाएँ सँजोए रहते हैं।
हमारे देश में विभिन्न धर्मों, भाषाओं, बोलियों एवं संस्कृति को विशाल और बृहत् रूप में देखा जा सकता है। ये सभी आपस में एकसूत्र में गुँथे हुए हैं।
प्रस्तुत पुस्तक ‘अपना दीपक स्वयं बनें’ में सदाचार, ईमानदारी, कर्तव्यपरायणता आदि शिष्‍टाचार सिखानेवाली अनुभवजन्य कहानियाँ संकलित हैं। लेखिका ने अपने अध्यापकीय जीवन के सच्चे एवं जीवंत अनुभवों को इसमें उड़ेलने का महती प्रयास किया है।
हमें विश्‍वास है, यह पुस्तक बच्चों को ही नहीं, बड़ों को भी सच्चरित्र, निर्णय-सक्षम, उदार बनाने एवं जीवन-पथ पर प्रगति की राह में अग्रसर रहने में उनका मार्गदर्शन करेगी।

Apne Bachche Ko Vijeta Banayen by Suman Vajpayee

SKU: 9789380186061

अभिभावक की भूमिका बच्चों की सोच को दिशा देने में बहुत महत्त्व रखती है। माता-पिता उनकी सोच में सकारात्मक बदलाव लाकर बच्चों के जीवन में परिवर्तन ला सकते हैं। केवल सोच ही वह चीज है, जो हार को भी जीत में बदल देती है।
चींटी दीवार पर चढ़ने के प्रयास में बार-बार गिरती है, पर फिर भी वह हिम्मत नहीं हारती। लगातार प्रयास करते हुए अंतत: वह दीवार पर चढ़ने में सफल हो जाती है, हालाँकि वह तो इतना नन्हा प्राणी है कि उसे तो पहले ही प्रयास में निराश हो जाना चाहिए था, पर ऐसा नहीं होता है। फिर एक बालक, जिसमें काम करने की लगन हो, बुद्धि हो, शक्ति हो, तब वह निराशा को क्यों गले लगाए?
अभिभावक बच्चे की हर सफलता पर उसे आश्वस्त करें कि उसमें क्षमता है, योग्यता है। हारने पर भी अपने प्यार में कमी न आने दें, अत्यधिक अपेक्षाएँ भी उससे न रखें। अत: एक अभिभावक के नाते आप अपने बच्चे के मार्गदर्शक, पालक, संरक्षक एवं सुरक्षा-कवच बनें।
बच्चों को आत्मनिर्भर, अनुशासित, दृढ़ इच्छाशक्तिवाला एवं विजेता बनानेवाली एक व्यावहारिक दिशा-निर्देशक पुस्तक, जो माता-पिता ही नहीं सभी आम और खास के लिए पठनीय है।

Apni Ekaagrata Kaise Badhaye by Vijay Prakash

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प्राचीनकाल से ही भारतीय शैक्षिक प्रक्रियाओं में एकाग्रताविकास को बहुत महत्त्व दिया गया। आश्रमों में आचार्य अपने शिष्यों को विविध योगाभ्यासों के जरिए एकाग्रता के गुर सिखाते थे। आधुनिक शिक्षाप्रणाली में एकाग्रताविकास के इस महत्त्वपूर्ण पक्ष की पूरी तरह से उपेक्षा कर दी गई है। हमने बच्चों के ऊपर सूचनाओं का बोझ बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। नतीजतन बच्चों की उपलब्धि का स्तर नीचे आ गया है और वे महज रट्टू तोते बनकर रह गए हें। यदि हमें रटंत विद्या को छोड़कर सृजनवादी शिक्षा को प्रोत्साहित करना है तो यह आवश्यक है कि हम नवाचारी ढंग से सोचें। एकाग्रताविकास में ही सृजनवादी शिक्षा की कुंजी है। बिना एकाग्रता के हम किसी कार्य में सफल नहीं हो सकते। सभी मनुष्य के लिए, चाहे वह दुनिया में किसी देश का निवासी हो या किसी पेशे में हो, एकाग्रता विकास की जरूरत रहती ही है। अतः यह आवश्यक है कि हम शिक्षापद्धति में एकाग्रताविकास को सर्वाधिक महत्त्व दें।
पुस्तक में एकाग्रताविकास के तरीके भी सुझाए गए हैं। कक्षा में आसानी से खेले जानेवाले खेलों और संपन्न किए जानेवाले कार्यकलापों के संबंध में भी पर्याप्त सुझाव दिए गए हैं। इन्हें घर में भी किया जा सकता है। अतः यह पुस्तक केवल विद्यालय जानेवाले बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि विद्यालय नहीं जा सकनेवाले बच्चों के लिए भी उपयोगी है।

Apni Personality Ko Pehchane by Dr. Ashutosh Karnatak

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व्यक्ति की पर्सनैलिटी और व्यक्तित्व की पहचान कराती है उसकी राशि, सूर्य चिह्न, अंक विज्ञान, हस्ताक्षर तथा मुखाकृति।
वर्गों के आधार पर समुचित विश्लेषण के पश्चात् अपनी पहचान पाठक कर सकते हैं कि उनका व्यक्तित्व एवं जीवनक्रम किस तरह का रहेगा। उसी आधार पर वे अपने जीवन का प्रबंधन कर सकते हैं। यदि व्यक्ति विशेष सामाजिक, सफल व प्रबंधन में सक्षम है तो उस गुण के अनुसार कार्य में लगाने से सफलता मिल सकती है। यदि कोई कर्मचारी नेतृत्व क्षमता रखता है तो उसके गुण का प्रयोग ऐसे समय में किया जा सकता है, जिस समय उसकी आवश्यकता हो।
अभिभावकगण अपनी संतानों के गुणों के आधार पर उनकी शिक्षा इत्यादि की व्यवस्था कर सकते हैं, जबकि पति-पत्नी अपने जीवनसाथी के गुणों को जानकर अपना जीवनयापन कर सकते हैं। कर्मचारी अपने अफसर के गुणों को जानकर अपनी कार्यप्रणाली नियत कर सकते हैं। किसी संस्था का प्रबंध निदेशक अपने सहयोगियों के गुणों के आधार पर उनको समुचित स्थान दे सकता है।
विश्वास है, इस पुस्तक का अध्ययन कर पाठक अपने गुणों का समुचित विश्लेषण कर, उसका समुचित लाभ उठाकर इस छोटी सी जीवन-अवधि को सफल बनाएँगे तथा समाज में अपनी पहचान बनाएँगे।

Apni Soch Se Ameer Baniye by Napoleon Hill

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विश्वप्रसिद्ध सेल्फ-हेल्प प्रेरणादायक पुस्तकों के लेखक नेपोलियन हिल की ‘थिंक ऐंड ग्रो रिच’ का प्रथम प्रकाशन 1937 में हुआ था। इस पुस्तक के लिए नेपोलियन हिल ने करीब 500 पूँजीपतियों के साथ किए साक्षात्कारों का गहन अध्ययन किया है। इन पूँजीपतियों का उदाहरण देकर उन्होंने सफलता के कुछ ऐसे सिद्धांतों का गठन किया है, जिन्हें अपनाने और उनके नियमित अभ्यास से कोई भी व्यक्ति जीवन में सफलता पा सकता है। इस पुस्तक में दिए गए सिद्धांतों के माध्यम से व्यक्ति न केवल अपने कारोबारी मसले, अपितु जीवन की किसी भी परिस्थिति में संयम बनाए रख सकता है। इसके माध्यम से नेपोलियन हिल ने लोगों को विश्व आर्थिक मंदी से निपटने का रास्ता दिखाया था और यह पुस्तक आज भी पूँजी कमाने की दिशा में सर्वोच्च मानी जाती है।

Apology, Crito and Phaedo of Socrates by Plato

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Apple Growing by M. C. Burritt

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In the preparation of this book I have tried to keep constantly before me the conditions of the average farm in the Northeastern States with its small apple orchard. It has been my aim to set down only such facts as would be of practical value to an owner of such a farm and to state these facts in the plain language of experience. This book is in no sense intended as a final scientific treatment of the subject, and if it is of any value in helping to make the fruit department of the general farm more profitable the author will be entirely satisfied.

Apple Success Story by Pradeep Thakur

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एप्पल ‘संप्रदाय (कल्ट) ब्रांड’ माना जाता है। फोर्ब्स पत्रिका ने मई 2017 में 170 अरब डॉलर ब्रांड मूल्यांकन के साथ अपनी ‘विश्व की सबसे मूल्यवान 100 ब्रांड’ सूची में एप्पल को लगातार सातवें वर्ष भी पहले स्थान पर मजबूत बनाए रखा था। न केवल ब्रांड मूल्य में बल्कि 214.2 अरब डॉलर ब्रांड राजस्व के साथ एप्पल अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वियों गूगल (ब्रांड मूल्य 101.8 अरब डॉलर; ब्रांड राजस्व 80.5 अरब डॉलर), माइक्रोसॉफ्ट (ब्रांड मूल्य 87 अरब डॉलर; ब्रांड राजस्व 85.3 अरब डॉलर) व फेसबुक (ब्रांड मूल्य 73.5 अरब डॉलर; ब्रांड राजस्व 25.6 अरब डॉलर) से बहुत आगे चल रहा था।
किसी भी उत्पाद के लिए एप्पल जैसी उच्च स्तर की ब्रांड-निष्ठा (ब्रांड लॉयल्टी) असामान्य मानी जाती है। इसके उपयोगकर्ता किसी पंथ या संप्रदाय के भक्त सदस्यों की तरह एप्पल उत्पादों के प्रति गहरी निष्ठा को खुलेआम प्रदर्शित करते हैं। इसीलिए एप्पल को एक संप्रदाय-ब्रांड या कल्ट-ब्रांड कहा जाता है। एप्पल के प्रति उपयोगकर्ता की ब्रांड निष्ठा लगभग तीन दशक पुरानी है, जब 1984 में कंपनी ने अपने कर्मशील और दूरदर्शी युवा संस्थापक स्टीव जॉब्स की अगुवाई में क्रांतिकारी व्यक्तिगत कंप्यूटर (पर्सनल कंप्यूटर/पीसी) बाजार में उतारा था। उसके बाद से अनेक उपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, जैसे-मोबाइल फोन, आई-पैड आदि बनाकर ‘एप्पल’ ने एक तरह से इस बाजार में अपना एकाधिकार कर लिया।
छोटी सी शुरुआत करके विश्वपटल पर अपनी पहचान बनानेवाली कंपनी की ‘सक्सेस स्टोरी’ है यह पुस्तक।

Applied Psychology: Driving Power of Thought by Warren Hilton

SKU: 9788184306173

Vitalizing Influence of Certain Ideas One of the greatest discoveries of modern times is the impellent energy of thought. That every idea in consciousness is energizing and carries with it an impulse to some kind of muscular activity is a comparatively new but well-settled principle of psychology. That this principle could be made to serve practical ends seems never to have occurred to anyone until within the last few years.

Applied Psychology: Making Your Own World by Warren Hilton

SKU: 9788184306188

The present book ‘Applied Psychology: Making Your Own World’ about the application and implications of psychology was written by psychologist-writer Warren Hilton. It was first published in the year 1914.

Appreciations, with an Essay on Style by Walter Pater

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The line between real facts and facts is different, in fact, it is difficult to attract. For example, in motivational writers in Pascal, generally, how difficult it is to define a point from time to time, arguments, if it is anything else, then formed in conjunction with the facts or groups of facts should go. The theorem is no longer there, but the reader urges the writer to catch the feeling, if he does not have the expression or expression of desire, but his understanding of the specific intuition of his world about it, Change some of the future or current, or actual situation detected in faulty circumstances, to some degree.

Apratim by Dr. Anil Kumar Pathak

SKU: 9789389982909

डॉ़ अनिल कुमार पाठक का नवीनतम काव्य-संग्रह ‘अप्रतिम’ प्रेम और समर्पण के अन्यतम क्षणों का सृजन है। भारतीय संस्कृति एवं परंपरा में प्रबल आस्था रखनेवाले कवि ने इस कृति में शाश्वत मानवीय मूल्य ‘प्रेम’ को आधार बनाया है। डॉ. पाठक आध्यात्मिक विचारों से परिपूर्ण हैं, जिसका आभास इस संग्रह की रचनाओं में भी होता है। कवि के मानस-पटल पर प्रेम के उदात्त मूल्यों की अमिट छाप है, जो जीवन के झंझावातों में संबल प्रदान करता है और प्रेरणा भी देता है। संग्रह के सभी गीत निरंतर बहनेवाले झरने की तरह स्वतः प्रवाहमान हैं। बाह्य तौर पर इस संग्रह की रचनाएँ वैयक्तिक प्रतीत होती हैं, किंतु इनमें समाहित मूल्य सार्वभौमिक एवं सार्वदेशिक हैं। आज के भौतिकवादी, व्यवहारवादी युग में ‘प्रेम’ अत्यंत संकुचित रूप में ग्रहण किया जा रहा है तथा संकीर्ण रूप में ही समझा भी जा रहा है। परंतु कवि की आस्था प्रेम के उस स्वरूप में है, जो असीमित, अपरिमित, अतुलनीय, अमर व अनंत हैं। उसके लिए प्रेम शाश्वत भाव की व्यापक अनुभूति है।
‘प्रेम’ के प्रति कवि की इसी आस्था के कारण इस कृति के गीत, प्रेम की अतल गहराइयों तथा उसकी भावनात्मक ऊँचाइयों से प्रबुद्ध पाठक का परिचय कराते हैं। इस कृति के सभी गीत एक शीतल, प्राणदायक मलयानिल की तरह हैं, जो प्रेम की पवित्रता व पावनता को प्रदूषित करनेवाले वातावरण में संजीवनी प्रदान करते हैं। प्रेम की उदात्त भावनाओं को समेटे हुए इन गीतों के संग्रह का ‘अप्रतिम’ पूर्णतया चरितार्थ होता है।

Arabic Language Learning Collection, Vol. 001

This is a collection of chapters and sections from materials designed to teach the Arabic language, as well as reference materials related to Arabic, materials about the Arabic language and a selection of materials in Arabic to allow the student to practise his or her listening comprehension skills and pronunciation. The materials include course books, modern grammars and traditional Arabic grammatical works, including the Ajurrumiyyah of Ibn Ajurrum and the Mi’at Amil of Jurjani. They each focus on different aspects of the two core science of Arabic grammar, viz. nahw (syntax) and sarf (morphology). Some of the Arabic-language materials come from religious books, such as the Holy Qur??n, which has been studied by new students of Arabic for more than a thousand years, as well as al-Kit?bu?l-?Aqdas (the Most Holy Book) of Bah?u?ll?h, which comes from the most recent of the Abrahamic religions. I hope that this collection will provide the student with the tools he or she needs to begin studying the Arabic language. Listening to audio materials, however useful, must be combined with study of the writing system, reading written texts and practical exercise of the language. (Summary by Nicholas J. Bridgewater)

Arabpati Karobariyon Ke Motivational Vichar by Swati Gautam

SKU: 9788177214017

सफल और अनुभवी लोगों के सद्विचार, प्रेरक वाणी और अनुकरणीय जीवनशैली भी आपके व्यक्तित्व को आकार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस पुस्तक में संकलित एलोन रीव मस्क, जैक मा, नारायण मूर्ति, बिल गेट्स, मार्क जुकरबर्ग, रतन टाटा, रॉबर्ट कियोसाकी, वॉरेन बफे, वॉल्ट डिज्नी, सुंदर पिचाई जैसे अत्यंत कामयाब कारोबारियों के उत्साह और ऊर्जा से भरपूर मोटिवेशनल विचार आपके चिंतन को धार देंगे और सफलता के नए फलक छूने में मदद भी करेंगे—
आप एकाग्रचित्त होकर ही महान् कार्य कर सकते हैं, चाहे आप कितने ही योग्य क्यों न हों; सपने वही सच होते हैं, जिन पर विश्वास किया जाता है; समस्या के समाधान के लिए हमें खुद से क्यों पूछना चाहिए; असफलता हमारी स्वीकार्यता पर निर्भर करती है; अपनी संस्कृति को ध्यान में रखें; छोटे से शुरुआत करिए; करो और दुनिया बदल दो; सर्वश्रेष्ठ बनने के लिए हमें सर्वश्रेष्ठ के साथ खड़ा होना होगा; विश्वास किसी भी बिजनेस की पहली सीढ़ी है; हमें हमेशा सीखते और सुनते रहना चाहिए; जोखिम उठाने का साहस कीजिए; सिक्के के दोनों पहलुओं को देखें; अपने दिमाग से काम लीजिए; अपने शब्दों पर ध्यान दीजिए; रिस्क लेना सीखें; बडे़ लक्ष्य निर्धारित करें; पहली सफलता पर ही मत रुको; जोखिम के बिना सफलता नहीं मिलती।

Arabpatiyon Jaisa Kaise Sochen? by Pradeep Thakur

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क्या आपने स्वयं से कभी कहा है—हाँ, मैं अमीर बन सकता हूँ! हो सकता है कि कहा हो या फिर नहीं भी। यही अमीर बनने की पहली व सबसे बड़ी शर्त है। यदि इस पर गंभीरता से विचार-विमर्श नहीं किया और यों ही अपने मन को समझा लिया कि ‘मैं अमीर बन सकता हूँ।’ तो असल बात बन न सकेगी। इससे पहले अमीर बनने की यात्रा शुरू हो पाना संभव नहीं है, क्योंकि यही जीवन बदलने वाली महान् यात्रा का प्रस्थान बिंदु है।
सबसे पहले आप यह मानें कि आपने सचमुच में इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार नहीं किया है और फिर पूरी सहजता से पूछें, ‘क्या मैं अमीर बन सकता हूँ?’ हाँ, यह चिंतन-प्रक्रिया थोड़ी जटिल है, इसलिए न तो मन में उठ रहे भावों की तह में जाने से घबराएँ और न ही जल्दबाजी करें। खुद को सहज व संयत रखें और बस अपने विचारों को साक्षी भाव से देखें। ‘साक्षी भाव’ वह मनोदशा है, जब हम खुद के विचारों को बिना किसी पूर्वग्रह के खुद से अलग रखते हुए ‘गवाह’ (साक्षी) की तरह देखते हैं। यह वही स्थिति है, जब आप किसी घटना को उसमें शामिल हुए बिना ही देखते हैं। जब आप ऐसा करेंगे तो सब साफ होना शुरू हो जाएगा कि आपने अब तक ‘खुद’, ‘सफलता’ में कौन-कौन सी बाधाएँ खड़ी की हुई थीं। यह भी संभव है कि आपको लगे कि आपने इस मुद्दे पर इतनी गंभीरता से पहले कभी सोचा भी नहीं था। यदि ऐसा नहीं होता तो आप अमीरी-यात्रा पर कब के निकल चुके होते। खैर, इस प्रक्रिया को अब शुरू होना था तो अब सही।

Aranya Aadim by Tarun Kanti Mishra

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इस संकलन में प्रसिद्ध ओडि़या साहित्यकार तरुणकांति मिश्र की कुल उन्नीस कहानियाँ शामिल हैं। चार से भी अधिक दशक के दौरान अलग-अलग कालखंडों में अलग-अलग मनःस्थितियों में लिखी गई ये उनकी चुनिंदा कहानियाँ हैं। इसमें लेखक के किशोरवय से जीवन के अब तक के पड़ाव की रचनाएँ संकलित हैं, जिनमें कोमल उम्र के नम्र अनुभव, यौवन के कई रंग और जीवन के अपराह्न का विमर्श निहित है। आशा और निराशा, स्वप्न और स्वप्नभंग, प्रेम और प्रेमहीनता, मृत्यु और निर्वाण, इन सबके भीतर चमक रहा है जीवन का विस्तृत रूप। तरुणकांति को असामान्य कहानी का स्रष्टा कहा जाता है। इस संकलन में संकलित हरेक कहानी इसका प्रमाण है। बहुत व्यापक है उनके गल्प की परिधि। कहानियों का जो पक्ष पाठकों को ज्यादा स्पर्श करता है, वह है चरित्रों की अंतर्मुखी अभिव्यक्ति। उनका कथ्य-वर्णन, रूप कल्प, परिवेश, यहाँ तक कि आकाश-पृथ्वी का दर्पण एक ही तत्त्व का संधान करते हैं, और वह है अंतराभिमुखी। जीवन का तिलिस्म, वास्तविकता, रहस्यमयता और जिजीविषा का निष्ठुर-निर्मम सत्य इन कहानियों में प्रस्फुटित है। पर इन सबसे ऊपर है, उनकी इनसान को प्रेम करने की भाषा। अपनी इसी सूक्ष्म दृष्टि और संवेदना के चलते समकालीन लेखकों के बीच वह अलग से नजर आ जाते हैं।

Arash Ferdowsi by Kalyani Mookherji

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The son of Iranian immigrants, Arash Ferdowsi was born on October 7, 1985 in Overland Park, Kansas. Right from his childhood, young Ferdowsi impressed people with his brilliance, especially with his expertise in computers. In 2004 he finished first in his high-school class from Blue Valley Northwest High School and then got through Massachusetts Institute of Technology. Here he came across another student, Drew Houston, and the two hit off together amidst a common fascination for computers.

Arastu by Sukesh Kumar

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अरस्तु एक प्रसिद्ध यूनानी दार्शनिक तथा प्लेटो के शिष्य और सिकंदर के गुरु थे। उनका जन्म 384 ई.पू. एथेंस के ‘स्टेगीरस’ नामक गाँव में हुआ था। बचपन से ही अरस्तु को जीवन शास्‍‍त्र का कुछ ज्ञान विरासत में मिला। अरस्तु प्लेटो के राजनैतिक दर्शन को वैज्ञानिक रूप देनेवाले पहले शिष्य थे। हर्मियस की दूसरी बेटी पीथीयस से उनका विवाह हुआ।
अरस्तु ने अपोलो के मंदिर के पास एक विद्यापीठ की स्थापना की, जो कि ‘पर्यटक विद्यापीठ’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। अरस्तु का बाकी जीवन यहीं पर बीता। अपने महान् शिष्य सिकंदर की मृत्यु के बाद अरस्तु ने भी विष पीकर आत्महत्या कर ली।
अरस्तु को दर्शन, राजनीति, काव्य, आचारशास्‍‍त्र, शरीर रचना, दवाइयों, ज्योतिष आदि का अच्छा ज्ञान था। उनके लिखे हुए ग्रंथों की संख्या 400 तक बताई जाती है। अरस्तु राज्य को सर्वाधिक अनिवार्य संस्था मानते थे। उनकी राज्य-संस्था कृत्रिम नहीं, बल्कि प्राकृतिक थी। इसे वह मनुष्य के शरीर का अंग मानते थे और इसी आधार पर मनुष्य को प्राकृतिक प्राणी कहते थे। अरस्तु ने अनेक रचनाएँ कीं; उनका दर्शन आज भी उच्च कक्षाओं में पढ़ाया जाता है।
एक महान् दार्शनिक की प्रेरणाप्रद जीवनी, जो पाठक को विभिन्न विषयों की जानकारी देगी, प्रेरित करेगी।