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Antriksh Prashnottary by Kali Shankar
अनजाने अंतरिक्ष को जानने के लिए सामान्य मानव के मस्तिष्क में अनेक रोचक और कुतूहलपूर्ण प्रश्न उभरते रहे हैं तथा वह अंतरिक्ष के विषय में अधिकाधिक जानकारी पाने की प्रबल इच्छा रखता है ।
प्रस्तुत पुस्तक में अंतरिक्ष के विभिन्न विषयों- अंतरिक्ष स्टेशन, तारकीय / क्षुद्र ग्रहीय ” पुच्छल तारा अभियान, अंतरिक्ष परिवहन स्पेस शटल, अंतरिक्ष में प्रमोचन की प्रक्रिया, अंतरिक्ष के रिकॉर्ड, अंतरिक्ष दूरबीनें, कृत्रिम उपग्रह, स्पेस वॉक, अंतरिक्ष परिघटनाओं तथा अंतरिक्ष चयन और प्रशिक्षण का रोचक वर्णन किया गया है । आज अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में हो रहे विभिन्न अनुसंधानों -स्पेस एलीवेटर ( अंतरिक्ष परिवहन का भविष्य का सबसे सस्ता साधन), भूकंपों के पूर्वानुमान में उपग्रहों की भूमिका और सौर ऊर्जा उपग्रहों के बारे में भी रोचक व ज्ञानप्रद जानकारी दी गई है । अंतरिक्ष के दुर्लभ और रोमांचक आँकड़ों को 23 परिशिष्टों के माध्यम से स्पष्ट किया गया है । यह पुस्तक अंतरिक्ष विषय के जिज्ञासु पाठकों के कुतूहलपूर्ण प्रश्नों का समाधान करने में समर्थ सिद्ध होगी, ऐसा विश्वास है ।
Antriksha Mein Barhate Kadam by Rakesh Shukla , Kali Shankar
अंतरिक्ष अन्वेषण मानव की जिज्ञासाओं को शांत करने, ज्ञानार्जन करने तथा ब्रह्मांड की अधिकाधिक जानकारी प्राप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है। अंतरिक्ष युग के प्रथम पचास वर्षों में अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में मानव ने अच्छीड़खासी प्रगति की है। आज हमें पता चल चुका है कि कई करोड़ आकाशगंगाएँ हमारे ब्रह्मांड का निर्माण करती हैं। अंतरिक्ष अन्वेषण कार्य आज भी निरंतर जारी है।
अंतरिक्ष अन्वेषण के कार्यों से मानव अनेक क्षेत्रों—कंप्यूटर, संचार, परिवहन, चिकित्सा, घरेलू उत्पाद इत्यादि में लाभान्वित हुआ है। अंतरिक्ष यात्रा एक अत्यंत साहसिक कार्य है। इसकी प्रगति में महान् अंतरिक्ष यात्रियों के साहस और शौर्य ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।
प्रस्तुत पुस्तक ‘अंतरिक्ष में बढ़ते कदम’ अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में हुई और हो रही अभूतपूर्व प्रगति से परिचय कराती है। इसके अध्ययन से शोधार्थी, विद्यार्थी ही नहीं, जनसामान्य भी समान रूप से लाभान्वित होंगे।
Antyodaya by Prabhat Jha
देश में जब भी सामाजिक-आर्थिक चिंतन की बात की जाती है तो गांधी, जेपी-लोहिया और दीनदयालजी का नाम लिया जाता है।
सामाजिक जीवन में और समाज
के आर्थिक जीवन में यदि हमारी अर्थव्यवस्था अंत्योदय युक्त होगी तो समाज-जीवन की चिती की साधना स्वतः सफल होती जाएगी। अंत्योदय शब्द में संवेदना है, सहानुभूति है, प्रेरणा है,
साधना है, प्रामाणिकता है, आत्मीयता है, कर्तव्यपरायणता है तथा साथ ही उद्देश्य की स्पष्टता है। दीनदयालजी कहा करते थे कि ‘जब तक अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का उदय नहीं होगा, भारत का उदय संभव नहीं है’। वे अश्रुपूरित आँखों से आँसू पोंछने और उसके चेहरे पर मुसकराहट को अंत्योदय की पहली सीढ़ी मानते थे।
दीनदयालजी के अंत्योदय का आशय राष्ट्रश्रम से प्रेरित था। वे राष्ट्रश्रम को राष्ट्रधर्म मानते थे। अतः कोई श्रमिक वर्ग अलग नहीं है, हम सब श्रमिक हैं।
राष्ट्रविकास में सबको सम्मिलित कर भारत निर्माण का मार्ग प्रशस्त करनेवाली चिंतनपरक पुस्तक।
Anubhav Ke Bol by Ramji Bhai
परिवार और समाज प्रबोधन में कथाओं का विशेष महत्त्व है। अनेक गुण एवं जीवन-मूल्य कहानियों के माध्यम से समाज और व्यक्तियों के जीवन में उतरते हैं।
महापुरुष, संत या समाज के प्रभावी लोगों की कथाओं की एक विस्तृत-विलक्षण धारा भारत में है, किंतु कभी-कभी सहज, सरल, निरक्षर या कभी-कभी तो बालकों की कहानियाँ भी बड़ी प्रेरणादायक और दिशा-दर्शक होती हैं, ऐसा सभी का व्यापक अनुभव है। वेद और उपनिषदों में उल्लिखित अनेक महत्त्व के तत्त्व एवं सत्य को सामान्य लोगों तक पहुँचाने के उद्देश्य से अपने यहाँ पुराणों की रचना की गई है। संत, महात्मा या कथाकार द्वारा रोचक कहानियों के माध्यम से वेद और उपनिषदों में निहित गहन तत्त्व जनसामान्य तक पहुँचाने की परंपरा आज भी चल रही है।
‘अनुभव के बोल’ संग्रह की कहानियाँ परिवार-प्रबोधन और लोक-प्रबोधन की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगी। अनेक कहानियाँ पढ़ते समय हृदय को झकझोरती हैं, छू जाती हैं, आँखें नम कर जाती हैं। जिन महान् जीवन-मूल्यों के कारण मानवता समृद्ध होती है, ऐसे चिरकाल तक चलनेवाले समयातीत मूल्यों की शिक्षा सहज ही इन कहानियों को पढ़ने से होगी।
Anubhuti by Chiranjeev Sinha, Harshashree
ढाई अक्षर का शब्द रिश्ता एक गजब का गैरमामूली जादुई शब्द है। रिश्ते दरअसल खुशी और गम के सच्चे साझीदार होते हैं। अपनों से दिल के तार जुड़ने पर जहाँ ये मुसकराने की वजह बन जाते हैं, वहीं उनसे बिछुड़ने पर हमारी आँखों की कोरों को धीरे से नम कर जाते हैं।
हर रिश्ते की अपनी एक अलग सुगंध होती है, क्योंकि हर रिश्ता उस व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति के साथ किए गए विशिष्ट संव्यवहार से अपने तरीके से पुष्पित-पल्लवित होता है।
रिश्तों और शब्दों का संबंध बेहद करीबी है। व्यक्ति और अक्षर क्रमशः रिश्ते और शब्दों के संरचनात्मक अवयव हैं। हमारी कोमल भावनाएँ जब शब्दों के रूप में छोटी सी पाती का आकार ग्र्रहण कर रही होती हैं तो ऐसा लगता है कि हम बिना किसी अवरोध के अपने प्रिय के दिल में गहरे तक उन्मुक्त पंछी की तरह प्रवेश कर रहे हों। इसलिए शब्दों से बुनी हुई कहानियाँ पाठकों के अंतस में संवेदना और आपसी लगाव का भाव जगाकर वर्तमान समय में तेजी से दरककर बिखर रहे रिश्तों को सहेजने का एक अत्यंत प्रभावी माध्यम हैं।
प्रस्तुत कहानी-संग्रह में लेखकद्वय की प्रत्येक कहानी इसी भावना को लिये हमारे आस-पास के समाज में बिखरे रिश्तों में समाए उस अनूठे संसार को कागज पर प्रतिबिंबित करती है, जहाँ एक-दूसरे के लिए समर्पण है, चिंता है, तड़प है और कभी-कभी मौन रहकर भी दिल के रास्ते भावनाओं का संपूर्ण संप्रेषण है।
Anupam Kahaniyan by Yashwant Mande
अनुपम कहानियाँ
अनुपम कहानियाँ संग्रह की कहानियों की विशेषता इनकी विविधता है। सारी कहानियाँ ऐसे विषयों पर हैं जिन पर आज तक कहानियाँ नहीं लिखी गई हैं। ‘सम्राट्’ कहानी शिवाजी के आगरा से भाग जाने की घटना का रोमांचक वर्णन है। ‘आतंक’ कहानी उग्रवाद को एक चामत्कारिक रूप देती है। वसिष्ठ श्रीरामचंद्र के गुरु थे और ‘वसिष्ठ’ कहानी उनके जीवन पर नया प्रकाश डालती है। ‘सह्याद्रि’ कहानी पाठकों को अपने साथ पर्यटन पर ले जाती है और फिर पाठकों को वर्तमान जीवन के संघर्ष पर विचार करने के लिए विवश कर देती है। इसी तरह सारी कहानियों में ताजगी और नयापन है।
यशवंत मांडे की शैली और प्रस्तुतीकरण आकर्षक है। भाषा का प्रयोग कहानी के विषय के अनुसार और सरल है। इन कहानियों में किसी प्रकार की अश्लीलता नहीं है और इसे बच्चे, बूढ़े और स्त्रियाँ सभी पढ़ सकते हैं।
ये कहानियाँ वास्तव में अनुपम हैं और हमें आशा है कि पाठकों को पसंद आएँगी।
Anusanadhan: A Multidisciplinary International Journal – Volume 1 – 2016
अनुसंधान
(अंतर-अनुशासन की अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिका)
ज्ञान के विस्तार के साथ है कि मानव जीवन और ज्ञान विभिन्न विषयों की सीमा में सीमित नहीं है। इसका संबंध ज्ञान की विविध धाराओं और शाखाओं के रूप में व्याप्त है। सामाजिक विज्ञान के शोध क्षेत्र एवं विज्ञान के विविध शोध भी स्वभावतः एवं प्रवृत्तिगत रूप से अंतर अनुशासनात्मक हैं। मानव जीवन की व्यापकता और जटिलता को समझने के लिए शिक्षा और शोध क्षेत्र में अंतर-अनुशासनात्मक द्ष्टिकोण का विकास किया जाना अनिवार्य है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए एडीआर प्रकाशन ने हिन्दी में अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका अनुसंधान के प्रकाशन का निश्चय किया है। Focus and Scope इस पत्रिका में निम्नांकित क्षेत्रों के अंतर अनुशासनात्मक एवं विविध विषयों केे शोध पत्र को प्रकाशन के लिए स्वीकार किया जा सकता है।
1. समाज शास्त्र, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, मनोविज्ञान आदि, 2. भाषा, भाषा विज्ञान, तकनीकि लेखन, 3. भूगोल, भूगर्भ शास्त्र, रिमोट सेंसिंग, पर्यावरण, परिस्थितिकीय, 4. विज्ञान एवं तकनीकि, 5. कम्प्यूटर विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, 6. भौतिक विज्ञान, रसायन, गणित, मानविकीय, वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान, 7. इतिहास, धर्म, दर्शन, 8. विधि, मानव अधिकार, अंतर्राष्ट्रीय विधि, श्रम विधि, 9. प्रबंधन, संगठन, 10. चिकित्सा, आयुर्वेदज्ञान, मेडीकल, प्राकृतिक चिकित्सा, योग, वैकल्पिक चिकित्सा।
Anusanadhan: A Multidisciplinary International Journal – Volume 2 – 2017
अनुसंधान
(अंतर-अनुशासन की अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिका)
ज्ञान के विस्तार के साथ है कि मानव जीवन और ज्ञान विभिन्न विषयों की सीमा में सीमित नहीं है। इसका संबंध ज्ञान की विविध धाराओं और शाखाओं के रूप में व्याप्त है। सामाजिक विज्ञान के शोध क्षेत्र एवं विज्ञान के विविध शोध भी स्वभावतः एवं प्रवृत्तिगत रूप से अंतर अनुशासनात्मक हैं। मानव जीवन की व्यापकता और जटिलता को समझने के लिए शिक्षा और शोध क्षेत्र में अंतर-अनुशासनात्मक द्ष्टिकोण का विकास किया जाना अनिवार्य है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए एडीआर प्रकाशन ने हिन्दी में अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका अनुसंधान के प्रकाशन का निश्चय किया है। Focus and Scope इस पत्रिका में निम्नांकित क्षेत्रों के अंतर अनुशासनात्मक एवं विविध विषयों केे शोध पत्र को प्रकाशन के लिए स्वीकार किया जा सकता है।
1. समाज शास्त्र, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, मनोविज्ञान आदि, 2. भाषा, भाषा विज्ञान, तकनीकि लेखन, 3. भूगोल, भूगर्भ शास्त्र, रिमोट सेंसिंग, पर्यावरण, परिस्थितिकीय, 4. विज्ञान एवं तकनीकि, 5. कम्प्यूटर विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, 6. भौतिक विज्ञान, रसायन, गणित, मानविकीय, वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान, 7. इतिहास, धर्म, दर्शन, 8. विधि, मानव अधिकार, अंतर्राष्ट्रीय विधि, श्रम विधि, 9. प्रबंधन, संगठन, 10. चिकित्सा, आयुर्वेदज्ञान, मेडीकल, प्राकृतिक चिकित्सा, योग, वैकल्पिक चिकित्सा।
Anusanadhan: A Multidisciplinary International Journal – Volume 3 – 2018
अनुसंधान
(अंतर-अनुशासन की अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिका)
ज्ञान के विस्तार के साथ है कि मानव जीवन और ज्ञान विभिन्न विषयों की सीमा में सीमित नहीं है। इसका संबंध ज्ञान की विविध धाराओं और शाखाओं के रूप में व्याप्त है। सामाजिक विज्ञान के शोध क्षेत्र एवं विज्ञान के विविध शोध भी स्वभावतः एवं प्रवृत्तिगत रूप से अंतर अनुशासनात्मक हैं। मानव जीवन की व्यापकता और जटिलता को समझने के लिए शिक्षा और शोध क्षेत्र में अंतर-अनुशासनात्मक द्ष्टिकोण का विकास किया जाना अनिवार्य है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए एडीआर प्रकाशन ने हिन्दी में अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका अनुसंधान के प्रकाशन का निश्चय किया है। Focus and Scope इस पत्रिका में निम्नांकित क्षेत्रों के अंतर अनुशासनात्मक एवं विविध विषयों केे शोध पत्र को प्रकाशन के लिए स्वीकार किया जा सकता है।
1. समाज शास्त्र, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, मनोविज्ञान आदि, 2. भाषा, भाषा विज्ञान, तकनीकि लेखन, 3. भूगोल, भूगर्भ शास्त्र, रिमोट सेंसिंग, पर्यावरण, परिस्थितिकीय, 4. विज्ञान एवं तकनीकि, 5. कम्प्यूटर विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, 6. भौतिक विज्ञान, रसायन, गणित, मानविकीय, वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान, 7. इतिहास, धर्म, दर्शन, 8. विधि, मानव अधिकार, अंतर्राष्ट्रीय विधि, श्रम विधि, 9. प्रबंधन, संगठन, 10. चिकित्सा, आयुर्वेदज्ञान, मेडीकल, प्राकृतिक चिकित्सा, योग, वैकल्पिक चिकित्सा।
Anuvad Aur Anuprayog by Dinesh Chamola ‘Shailesh’
अनुवाद का संबंध भाव, विचार, सृजन एवं रचना की प्रारंभिक प्रक्रिया से स्वतः ही जुड़ जाता है। यद्यपि अनुवाद कही हुई बात अथवा ज्ञात उक्ति का पुनर्कथन है, लेकिन क्या भावों का अनुवाद विचार; विचारों का अनुवाद रचना नहीं है? अनुभूति ही दूसरे अर्थों में अनूदित अथवा अंतरित होकर अन्यान्य अभिव्यक्तियों का रूप ग्रहण कर चिंतनधारा को विस्तारित करती आई है।
अनुवाद वस्तुतः किसी एक भाषा में बहुप्रचलित अथवा अत्यल्प प्रचलित भाव, ज्ञान अथवा किसी भी प्रकार की संपदा का अधिकाधिक श्रोताओं, उपभोक्ताओं व पाठकों तक संबंधित ज्ञान, भाव, विचार अथवा सामग्री के प्रचार-प्रसार का एक प्रभावी माध्यम है।
अनुवाद आज के सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक, राजनैतिक, आर्थिक व व्यावहारिक जीवन का ही नहीं, बल्कि समेकित जीवन पद्धति की अपरिहार्य अपेक्षा हो गई है। इसके अभाव में जीवन में अभिव्यक्ति व बहुविध ज्ञानार्जन की कल्पना नहीं की जा सकती।
अनुवाद आज के ज्ञान-प्रसार का प्राण-तत्त्व है। इस पुस्तक में विभिन्न मंत्रालयों, कार्यालयों तथा साहित्य के अन्यान्य क्षेत्रों में प्रयुक्त व हस्तगत, संगृहीत विगत दशकों की बिखरी शब्द संपदा को अलग-अलग अनुप्रयोगों के संदर्भ में सहेजने का एक विनम्र प्रयास किया गया है। कार्यालयीन संदर्भों के साथ-साथ यह लेखक, विद्यार्थी एवं विश्वविद्यालय के अनुवाद से जुड़े शोधार्थियों के लिए भी समान रूप से उपादेय है।