Bharat Ke Mahan Sangeetagya by Mohananand Jha

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भारत के महान् संगीतज्ञ—मदन मोहन झा

भारतीय संस्कृति के विविध उपादानों में संगीत की अपनी विशिष्‍ट भूमिका रही है। वैदिक ऋचाओं की सस्वर अभिव्यक्‍ति एवं सामवेद का संगीत-प्रधान शास्‍‍त्र होना इस तथ्य को संपुष्‍ट करता है। जवानी हो या बुढ़ापा, दु:ख हो अथवा सुख, एकांत हो या समूह, जीवन के प्रत्येक मोड़ पर संगीत मानव को अनुप्राणित व प्रोत्साहित करता है।
संगीत की अभिव्यक्‍ति में संगीत शिल्पकारों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। संगीत-शास्‍‍त्री, गीतकार, संगीतकार के संग प्रस्तोता के रूप में गायक, वादक एवं नर्तक संगीतज्ञों के विविध स्तंभ हैं। संगीत के अभिज्ञान में इन संगीत शिल्पियों के जीवन-चरित, इतिहास और संगीत के क्षेत्र में इनके महत्त्वपूर्ण अवदानों की जानकारी विशेष महत्त्व रखती है।
संगीत संस्थाओं, विद्यालयों तथा विश्‍वविद्यालयों के संगीत विषयक पाठ्यक्रम में संगीतज्ञों की जीवनी और उनके सांगीतिक कार्यों का अध्ययन होता है, साथ ही संगीत रसिकों को संगीत से संबद्ध व्यक्‍तियों के बारे में कुछ जानने की प्रबल जिज्ञासा रहती है। इन्हीं समस्त स्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस पुस्तक में प्राचीन एवं वर्तमान काल के प्रमुख लोकप्रिय संगीतज्ञों के बारे में रोचक जानकारी प्रस्तुत की गई है। आशा है, संगीत शिक्षार्थियों के साथ सामान्य संगीत-प्रेमी जन भी इस पुस्तक से लाभान्वित होंगे।

Bharat Ke Mahan Sant by Baldev Vanshi

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भारत के महान् संत
सभ्यता के प्रभातकाल से ही मानवीय, संवेदनात्मक, प्रेमिल, सहिष्णु, त्याग, क्षमा, दया, सद्व्यवहार को महत्त्व देनेवाले लोग, साधु-संन्यासी और फकीर-औलिया इस भारत-भू पर अवतरित होते रहे हैं, जो अपना संपूर्ण जीवन जनमानस की सुप्‍त आत्मा को जगाने, उसे उन्नत करने, परमार्थ एवं समाजड़कल्याण में सहर्ष लगाते रहे हैं।
संतों की संस्कृति वेदना-संवेदना की संस्कृति है, यथार्थ की धरती पर अवतरित अध्यात्मभाव की संस्कृति है। घोर कष्‍टों, संकटों, अभावों और घोर अपमानों को सहकर दूसरों को उठाने, खड़ा करने और उन्हें सद्मार्ग दिखाने का महाकर्म है— संतों का जीवन।
‘भारत के महान् संत’ में संतों की पूरी पाँत—कबीर, नामदेव, रैदास, दादू, नानक, मलूक, मीरा, फरीद, तिरुवल्लुवर इत्यादि के परोपकारी जीवन का सांगोपांग वर्णन है। विद्वान् लेखक का मानना है कि भारतीय संतों की समुज्ज्वल परंपरा आज भारत ही नहीं, विश्‍व के संकटों के निवारण में महती सहायक हो सकती है। संत परंपरा ही संपूर्ण विश्‍व को तमाम विघ्न-कष्‍टों से बचाकर वास्तविक विकास के मार्ग पर अग्रसर कर सकती है।
जीवन के आध्यात्मिक विकास एवं तात्त्विक भाव उत्पन्न करने में सहायक प्रेरणाप्रद पुस्तक।

Bharat Ke Pavitra Teerthsthal by Narayan Bhakta

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भारत के पवित्र तीर्थ स्थल—नारायण भक्त
तीर्थ का अभिप्राय है पुण्य स्थान, अर्थात् जो अपने में पुनीत हो, अपने यहाँ आनेवालों में भी पवित्रता का संचार कर सके। तीर्थों के साथ धार्मिक पर्वों का विशेष संबंध है और उन पर्वों पर की जानेवाली तीर्थयात्रा का विशेष महत्त्व होता है। यह माना जाता है कि उन पर्वों पर तीर्थस्थल और तीर्थ-स्नान से विशेष पुण्य प्राप्त होता है, इसीलिए कुंभ, अर्धकुंभ, गंगा दशहरा तथा मकर संक्रांति आदि पर्वों को विशेष महत्त्व प्राप्त है। पुण्य संचय की कामना से इन दिनों लाखों लोग तीर्थयात्रा करते हैं और इसे अपना धार्मिक कर्तव्य मानते हैं।
पुण्य का संचय और पाप का निवारण ही तीर्थ का मुख्य उद्देश्य है, इसलिए मानव समाज में तीर्थों की कल्पना का विस्तार विशेष रूप से हुआ है। श्रीमद्भागवत में भक्तों को ही तीर्थ बताकर युधिष्ठिर विदुर से कहते हैं कि भगवान् के प्रिय भक्त स्वयं ही तीर्थ के समान होते हैं।
प्रस्तुत पुस्तक में विभिन्न धर्मों के अनुयायियों के आस्था के केंद्रों—पवित्र तीर्थस्थलों—का रोचक वर्णन है। ये न केवल आपकी आस्था और विश्वास में श्रीवृद्धि करेंगे, बल्कि आपको मानव जीवन के मर्म का सार भी बताएँगे। पढ़ते हुए आपको साक्षात् उस तीर्थ का दर्शन हो, यह इस पुस्तक की विशेषता है। यदि आपका मन निर्मल है, और हमें विश्वास है कि वह है, तो आप घर बैठे ही तीर्थ का पुण्य-लाभ प्राप्त करेंगे।

Bharat Ke Rajya by Anish Bhasin

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‘भारत के राज्य और केंद्र शासित प्रदेश’ पुस्तक की शुरुआत देश की विविधता में एकता की उन मूल संकल्पनाओं में दुहराती विशिष्‍टताओं से की गई है, जिनके चलते विश्‍व में हमारा देश एक महान् देश के रूप में प्रतिष्‍ठापित हुआ है। इसमें भारत के 28 राज्यों, 7 केंद्र शासित प्रदेशों एवं सभी जिलों का विस्तार से वर्णन किया गया है।
प्रत्येक राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेश को सात बड़े शीर्षकों—‘इतिहास’, ‘राजनीति’, ‘भूगोल’, ‘अर्थव्यवस्था, कृषि व उद्योग-धंधे’, ‘शिक्षा’, ‘कला एवं संस्कृति’, तथा ‘पर्यटन’ के तहत सुविभाजित किया गया है। प्रत्येक शीर्षक के उत्पत्ति तथ्यों व जानकारियों का संयोजन नवीनतम संदर्भ में किया गया है। प्रत्येक राज्य के अंत में उससे संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्यों को बॉक्स में भी दिया गया है।
यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं संघ व राज्य स्तरीय विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के परीक्षार्थियों हेतु विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।

Bharat Ke Rashtrapati Va Pradhanmantri by Rajendra Kumar

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भारत के राष्‍ट्रपति व प्रधानमंत्री—राजेंद्र कुमार

भारत में लोकतंत्रीय शासन पद्धति है। शासन का मुखिया राष्‍ट्रपति होता है। एक ओर जहाँ हमारे संविधान ने राष्‍ट्रपति में अनेक शक्‍तियाँ निहित की हैं। वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री ही उनकी समस्त शक्‍तियों का उपभोग करता है। हमारे यहाँ राष्‍ट्रपति सेना का सर्वोच्च कमांडर होता है। आपातकाल में राष्‍ट्रपति की शक्‍तियों में वृद्धि हो जाती है। प्रधानमंत्री का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान के द्वारा भारत की जनता द्वारा किया जाता है। विधान के अनुसार लोकसभा में बहुमत प्राप्‍त दल का नेता ही प्रधानमंत्री बनता है। पर राष्‍ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल, जिसमें समस्त संसद् सदस्य एवं विधायक शामिल होते हैं, द्वारा किया जाता है। भारत गणराज्य के अब तक तेरह राष्‍ट्रपति व तेरह प्रधानमंत्री हुए हैं।
प्रस्तुत पुस्तक में भारत के अब तक के राष्‍ट्रपति एवं प्रधानमंत्रियों का जीवन-परिचय, उनका चुनाव तथा शासन के दौरान की गतिविधियों पर विस्तृत प्रकाश डाला है। विद्यार्थी, शोधार्थी, परीक्षार्थी ही नहीं, एक आम पाठक के लिए भी समान रूप से उपयोगी जानकारीपरक पुस्तक।