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Bharat Mein Angrezi Raaj by Sundarlal
भारत के स्वतंत्रता-संग्राम में बौद्धिक प्रेरणा देने का श्रेय पंडित सुंदरलाल, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के सह-संस्थापक और प्रथम उप कुलपति और ऑल इंडिया पीस काउंसिल के अध्यक्ष इलाहाबाद के सुप्रसिद्ध वकील जैसे उन कुछ साहसी लेखकों को भी है, जिन्होंने पद या परिणामों की चिंता किए बिना भारतीय स्वाधीनता का इतिहास नए सिरे से लिखा। ‘भारत में अंग्रेजी राज’ में गरम दल और नरम दल दोनों तरह के स्वाधीनता संग्राम योद्धाओं को अदम्य प्रेरणा दी।
सर्वज्ञात है कि 1857 के पहले स्वाधीनता संग्राम को सैनिक विद्रोह कहकर दबाने के बाद अंग्रेजों ने योजनाबद्ध तरीके से हिंदू और मुसलिमों में मतभेद पैदा किया। ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति के तहत उन्होंने बंगाल का दो हिस्सों पूर्वी और पश्चिमी में, विभाजन कर दिया। पंडित सुंदरलाल ने इस सांप्रदायिक विद्रोह के पीछे छिपी अंग्रेजों की कूटनीति तक पहुँचने का प्रयास किया। इसके लिए उन्होंने प्रामाणिक दस्तावेजों तथा विश्व इतिहास का गहन अध्ययन किया; उनके सामने भारतीय इतिहास के अनेक अनजाने तथ्य खुलते चले गए। इसके बाद वे तीन साल तक क्रांतिकारी बाबू नित्यानंद चटर्जी के घर पर रहकर दत्तचित्त होकर लेखन और पठन-पाठन में लगे रहे। इसी साधना के फलस्वरूप एक हजार पृष्ठों का ‘भारत में अंग्रेजी राज’ नामक ग्रंथ स्वरूप ले पाया।
Bharat Mein Digital Kranti by Pradeep Thakur
अंकीय क्रांति (डिजिटल रेवोल्युशन) को ‘तीसरी औद्योगिक क्रांति’ के रूप में जाना जाता है। यह सादृश्य (एनालॉग), यांत्रिक (मेकैनिकल) व विद्युत् (इलेक्ट्रॉनिक) प्रौद्योगिकियों से अंकीय प्रौद्योगिकी (डिजिटल टेक्नोलॉजी) में बदलाव की क्रांति है।
भारत सरकार ‘डिजिटल इंडिया’ को अंकीय रूप से सशक्त समाज व ज्ञान अर्थव्यवस्था के विकास के बहूद्देशीय कार्यक्रम के रूप में तेजी से आगे बढ़ा रही है। प्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम को आई.टी. (इंडियन टैलेंट/भारतीय प्रतिभा) + आई.टी. (इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी/सूचना प्रौद्योगिकी) = आई.टी. (इंडिया टुमारो/ कल के भारत) के रूप में अनोखे तरीके से परिभाषित किया था। ‘डिजिटल इंडिया’ परियोजना को तब भारी बल मिला था, जब 11 मार्च, 2016 को, ‘आधार (वित्तीय व अन्य अनुवृत्तियाँ, लाभों व सेवाओं की लक्षित पहुँच) अधिनियम, 2016’ लोकसभा में पारित किया गया था। उसके बाद 8 नवंबर, 2016 को विमुद्रीकरण और 1 जुलाई, 2017 से वस्तु एवं सेवा कर (जी.एस.टी.) को लागू कर भारत सरकार ने ‘डिजिटल इंडिया’ के महत्त्वाकांक्षी सपने को साकार करने की दिशा में क्रांतिकारी कदम उठाया। इस प्रकार भारत में ‘अंकीय क्रांति’ तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन अभी भी इसकी राह में कई चुनौतियाँ हैं।
विश्वास है कि ‘भारत में डिजिटल क्रांति’ सभी सुधी पाठकों को इससे जुड़ी जटिल प्रक्रिया को समझने में भरपूर मदद करेगी।
Bharat Mein Europeeya Yatri by Ravi Shankar
यूरोप के ज्ञात इतिहास में भारत उनके लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। भारत की यात्रा और भारत के साथ संबंधों का विस्तार यूरोप के विविध कालांडों के बीच एकसूत्रता का विषय-बिंदु है। यही कारण है कि यूरोप से भारत आनेवाले हर यात्री ने भारत की यात्रा के पश्चात् अपने अनुभव, भारत की अपनी समझ और भारतीय समाज-संस्कृति एवं सभ्यता को अपने-अपने ढंग से प्रस्तुत करने की कोशिश की है। भारत का इतिहास लिखनेवाले आधुनिक इतिहासकारों ने इन यात्रियों के यात्रा- वृतांत को अपने इतिहास-लेखन हेतु महवपूर्ण प्रामाणिक स्रोत स्वीकार करते हुए तथा इसको आधार बनाकर भारत में भारत का एक ऐसा चित्र रचा है, जो भारत नहीं है।
ईसाइयत की विश्वदृष्टि से अलग भारत इनकी समझ से बाहर था, योंकि न इनके पास भारत के यथार्थ का अध्ययन था और न ही भारत को समझने का अवकाश। भारत में आए यूरोपीय यात्रियों के उद्देश्य, उनके वर्णनों के आधार और उनके द्वारा रचे गए मजहबी छलछद्म पर भारत के अध्येताओं के द्वारा गंभीर अध्ययन नहीं हुआ है। यह पुस्तक इस दृष्टि से एक साहसिक प्रयास है। यूरोपीय यात्रियों के वर्णनों के पीछे छिपे मंतव्य, यात्रियों की पूर्व मान्यता और यात्रा के वास्तविक उद्देश्यों की ओर इंगित करती इस पुस्तक में भारतीय दृष्टि से यथार्थ को देने की कोशिश की गई है, साथ ही यूरोप के संगठित यात्रा अभियानों के निहितार्थ को बेबाकी से उकेरा गया है।
Bharat Mein Panchayati Raaj by Pramod Kumar Agrawal
भारत में पंचायती राज’ एक विश्लेषणात्मक, जानकारीपरक एवं अत्यंत महत्वपूर्ण कृति है, जिसमें पंचायती राजतंत्र के सभी पहलुओं का विस्तृत विवेचन किया गया है। भारतीय लोकतंत्र में पंचायतें आज विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका के बाद शासन प्रणाली के चतुर्थ स्तंभ के रूप में उभरी हैं। पंचायतें भविष्य में और भी सक्षम और सुदृढ़ होंगी। भारत में विद्यमान जटिल समस्याओं का सीधा समाधान पंचायत-संस्थाओं के माध्यम से ही संभव है।
‘ भारत में पंचायती राज’ इस विषय पर एक समग्र कृति है, जो कि नीति- निर्धारकों, प्रशासकों, पंचायत- प्रतिनिधियों और जनता के बीच संवाद का माध्यम बनेगी तथा सभी के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।
Bharat Mein Paryatan by Rajesh Kumar Vyas
हमारे देश में जितनी विविधता है, उतनी विश्व के किसी भी अन्य देश में नहीं है। हिमाच्छादित पहाड़ियाँ, हिमखंड, गरम जल के फव्वारे, गुफाएँ, सम्मोहित करनेवाली झीलें, दूर तक पसरा रेगिस्तान, समुद्र तट, खान-पान, रहन-सहन, त्योहारों के आकर्षण आदि के बारे में जितना कहा जाए उतना ही कम है। यही वह देश है जहाँ सभी रुचियों के पर्यटकों के लिए वैविध्यपूर्ण छटा के पर्यटन स्थल हैं। यही नहीं, पर्यटन के लिहाज से भारत को एकमात्र ऐसा देश भी कहा जा सकता है जिसमें पर्यटक दूसरे देशों के मुकाबले सिर्फ एक तिहाई या इससे भी कम खर्च पर घूमने-फिरने का आनंद उठा सकते हैं।
तेजी से फैल रहे एशियाई बाजारों को देखते हुए भारत के लिए पर्यटन के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण भागीदारी निभाने का यही सही समय है। इस दायित्व की पूर्ति के लिए आवश्यक है पर्यटन शिक्षा। पर्यटन शिक्षा की भी उपादेयता यही है कि इसके जरिए राष्ट्रें में बेहतर पर्यटन वातावरण निर्मित किया जा सके। ऐसा यदि होता है तो पर्यटन के जरिए आतंकवाद, हिंसा, आंदोलन, जातिवाद जैसी समस्याओं से स्वत: ही निजात पाई जा सकती है। पर्यटन परस्पर सौहार्द और जीवन स्तर को उत्कर्ष पर ले जाने का बेहतरीन माध्यम बन सकता है
ÖæÚUÌ ×ð´ ÂØüÅUÙ में पर्यटन के सैद्धांतिक पक्ष को व्यावहारिक अनुभवों के साथ प्रस्तुत किया गया है। विश्वास है विश्वविद्यालय पाठ्यक्रमें, पर्यटन संगठनों, नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं को ध्यान में रखकर लिखी गई यह पुस्तक पर्यटन प्राध्यापकों, पर्यटन उद्योग में नियोजित व्यक्तियों, पर्यटकों तथा विद्यार्थियों के लिए समान रूप से लाभकारी सिद्ध होगी।
Bharat Mein Rashtrapati Pranali by Bhanu Dhamija
एक महान् समाज दुर्बल हो रहा है। भारत के नागरिक जीवन की दयनीय स्थिति और अप्रतिष्ठित सरकारी संस्थाओं से जूझ रहे हैं। इसका परिणाम है, वे नैतिक रूप से लगातार कमजोर हो रहे हैं। इस स्थिति पर शोक मनाने या केवल टिप्पणी करने के बजाय मैंने कुछ ठोस करने का निर्णय लिया। अमरीका में लगभग दो दशक रहने के बाद मैं भारत लौटा और उस प्रदेश के लिए एक दैनिक समाचार-पत्र आरंभ किया, जहाँ मैं रहने जा रहा था। सोच रहा था कि मेरे अखबार में, जो विचार और विवरण सामने आएँगे, वे जनता की राय बदलेंगे। संभवतया ऐसा हुआ भी, लेकिन मुझे एहसास हुआ कि दोष महज जागरूकता की कमी से कहीं अधिक गहरा था। इसने मेरा संकल्प और मजबूत कर दिया और उसी मंथन का परिणाम है यह पुस्तक। भारत मेरा एकमात्र ध्येय है। मेरी कोई राजनीतिक, वैचारिक या दलगत संबद्धता नहीं है।
यह पुस्तक भारत को बचाने का एक प्रयास है। हर गुजरते दिन, भारत में सरकार की मौजूदा प्रणाली लोगों के आत्मबल और नैतिक चरित्र को नष्ट कर अपूरणीय क्षति पहुँचा रही है। यह पुस्तक मात्र रोग ही नहीं बताती, इलाज सुझाती है। यह भारत को इसके कष्टों से छुटकारा दिलाने का हृदयस्पर्शी प्रयास है।
Bharat Mein Udyamita by Kalraj Mishra
आर्थिक उदारीकरण के युग के प्रारंभ होने के साथ-साथ भारत में ही नहीं, अपितु पूरे विश्व में उद्यमिता के क्षेत्र में बहुत विस्तार हुआ है। सभी विकसित व विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था में उद्यमिता, विशेष रूप से एम.एस.एम.ई. सेक्टर अहम योगदान कर रहा है। भारत में एम.एस.एम.ई. सेक्टर का योगदान आयात में 40 प्रतिशत, विनिर्माण में 45 प्रतिशत व सकल घरेलू उत्पाद में 8 प्रतिशत रहा है।
देश में बढ़ती हुई बेरोजगारी की समस्या से निपटने के लिए उद्यमिता के क्षेत्र में एम.एस.एम.ई. सेक्टर की उपलब्धियों को आम आदमी तक पहुँचाने की दृष्टि से इस पुस्तक का लेखन किया गया है। यह पुस्तक उन युवाओं के लिए, जो अपना उद्यम प्रारंभ करना चाहते हैं, मार्गदर्शक साबित होगी। इस पुस्तक के द्वारा नवउद्यमी उद्यमिता के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही विशेष योजनाओं व सरकार द्वारा दी जानेवाली विशेष सुविधाओं की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे तथा उद्यम स्थापित करने में आनेवाली विभिन्न समस्याओं का निदान पा सकेंगे।
अपना उद्यम स्थापित करने के इच्छुक पाठकों के लिए एक पठनीय कृति।