Bharatiya Rail : Desh Ki Jeevan-Rekha by Bibek Debroy , Vidya Krishnamurthi , Sanjay Chadha

SKU: 9789352664702

आधुनिक भारत को जन्म देनेवाले रेल नेटवर्क की अद्भुत कहानी
रेल ने भारत को आधुनिकता प्रदान की तथा इसके विस्तृत नेटवर्क ने इस उपमहाद्वीप के एक कोने से दूसरे कोने को आपस में मिलाया और पहले की अपेक्षा परिवहन, संचार एवं व्यापार को भी सुगम बनाया। यहाँ तक कि भारत को एक राष्ट्र का रूप देने में रेल की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। इसने यहाँ के विषम क्षेत्रों एवं लोगों को ऐतिहासिक और भौगोलिक रूप से न केवल जोड़ा, बल्कि भारतीयों के जीवन एवं विचार को भी बदला, जिससे एक राष्ट्रीय पहचान बननी संभव हो सकी।
पुरानी ऐतिहासिक घटनाओं को लघुकथाओं के माध्यम से प्रस्तुत करती, श्रमपूर्वक लिखी गई यह पुस्तक रेल-यात्राओं के रोमांच के साथ अपनी विशालकाय व्यापारिक शक्ति का भी परिचय कराती है। सन् 1890 यानी प्रथम योजना बनने के समय से भारत की स्वतंत्रता तक के रेल के विकास को विवेक देवराय और इनके सह-लेखकों ने प्रस्तुत किया है। इनके प्रयोगों से यह भी स्पष्ट होता है कि भारत में रेल नेटवर्क किस प्रकार हुआ और किस प्रकार यह ऐसी जीवन-रेखा बनी, जो संपूर्ण राष्ट्र को आज भी एक धागे में पिरोती है।
भारतीय रेल का इतिहास, उसकी परंपरा और उसके वर्तमान व भविष्य पर एक विहंगम दृष्टि डालती पठनीय पुस्तक।

Bharatiya Rajneeti Aur Hamari Soch by Rajnath Singh

SKU: 9789350480861

वैचारिक दृष्‍ट‌ि से भाजपा एक सामान्य राजनैतिक दल नहीं है जो सत्ता प्राप्‍त‌ि के स्वार्थ से जुड़कर और प्रेरित होकर अपना कार्य करते हैं। भाजपा एक ऐसा राजनैतिक दल है जो एक विशिष्‍ट विचारधारा और राजनीतिक शैली को भारत की राजनीति में स्थापित करने के लक्ष्य से प्रेरित होकर कार्य कर रही है। हम सब परिपक्व विचारधारा के प्रति समर्पित एक परिपक्व कार्यकर्ता है। हमारे अंदर लोग भारतीयता की झलक देखते हैं। और इसके माध्यम से राष्‍ट्रीय समस्याओं के समाधान की अपेक्षा करते हैं। स्वतंत्र भारत के इतिहास में देश की जनता ने किसी भी दल से इतनी अपेक्षाएँ नहीं कीं जितनी कि हमसे की हैं।
—
भाजपा का वैचारिक अधिष्‍ठान सांस्कृतिक रावाद है। विगत दो दशकों में पश्चिमी मॉडल पर जिस तेजी से आर्थिक प्रगति हो रही है, वह उतनी ही तेजी से पश्चिमी जीवन मूल्य हमारे शाश्वत सांस्कृतिक मूल्यों, सामाजिक आदर्शों और परिवार के स्वरूप पर भी आघात कर रहे हैं। अन्य राजनैतिक दल भले ही इसे गंभीरता से न लेते हों परंतु भारत और भारतीयता के प्रति समर्पित भारतीय जनता पार्टी की दृष्‍ट‌ि में यह एक गंभीर चुनौती है।
—
अनेक राजनैतिक दलों ने जहाँ जाति, पंथ और मजहब का सहारा लेकर वोट की राजनीति करने में कोई संकोच नहीं किया वहीं हमने वोट से ज्यादा अहमियत ‘राष्‍ट्र’ को दिया। हमारे सामने वोट से बड़ा राष्‍ट्र है और हमें इस बात का सुकून है कि हमने जिन बातों का विरोध किया, वह हमारा राष्‍ट्रीय कर्तव्य था। हम अपराधबोध से ग्रस्त नहीं हैं।
—इसी पुस्तक से
—
‘राष्‍ट्र सर्वोपरि’ जिस राजनीतिक दल का प्राणतत्त्व है, जिसने कभी वोट-बैंक की राजनीति नहीं की, जिसने सदा राष्‍ट्रीय अस्मिता और सुरक्षा को सबसे अधिक प्रमुखता दी है, जो ‘भय-भूख-भ्रष्‍टाचार’ से आक्रांत कोटि-कोटि भारतीयों की आशा का केंद्र है—ऐसी भारतीय जनता पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्यक्ष श्री राजनाथ सिंह के चिंतनपरक, प्रखर, ओजस्वी विचारों का पठनीय एवं प्रेरणाप्रद संकलन।

Bharatiya Rajsatta : Kitni Samvaidhanik by Ram Lochan Singh

SKU: 9789386054746

यह पुस्तक परिश्रमपूर्वक इकट्ठी की गई शोध सामग्रियों के वैज्ञानिक विश्लेषणों के आधार पर लिखी गई एक ऐसी कृति है, जो यह दरशाती है कि स्वतंत्र भारत के संविधान की ‘प्रस्तावना’, ‘मौलिक अधिकारों’ और ‘राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों’ में प्रदत अवधारणाओं और भारतीय राजसत्ता के बीच जो विरोधाभाषी प्रवृत्ति आज पैदा हो गई है, उसका विकास किस तरह से क्रमिक गति से होता गया है। एक समाजवादी और लोक कल्याणकारी भारतीय गणतंत्र की जिस अवधारणा को स्वावलंबी आर्थिक विकास, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र की आर्थिक इकाइयों को सर्वोपरि महत्त्व के स्थान पर रखकर ‘समाजवादी ढाँचे के समाज’ के निर्माण के लिए चलाई जा रही आर्थिक-नीति में किस तरह के सैद्धांतिक भटकाव क्रमिक गति से आते गए कि उन्होंने इजारेदारियों को आगे बढ़ा दिया, सामंतवादी उत्पादन प्रणाली के अवशेषों को संपूर्णता में समाप्त करने में असपफल हो गए और सबसे बढ़कर साम्राज्यवादी वित्तीय पूँजी के साथ भारतीय राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के संबंधों को इस हद तक मजबूती प्रदान कर दी कि देश क्रमिक गति से आर्थिक तौर पर संकटग्रस्त होता चला गया। खास कर राजीव गांधी के शासन काल में नव-उदारवादी नीतियों की तरफ हुए अत्यधिक झुकाव के कारण भारत गहरे आर्थिक संकट में फँस गया। जरूरत थी पूर्व की कमजोरियों और गलतियों को ठीक करने की मगर नरसिम्हा राव सरकार ने इसके बदले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक के सामने आत्मसमर्पण की नीति को अख्तियार कर पूर्व की सर्वमान्य स्वावलंबी विकास नीति के ठीक विपरीत नव-उदारवादी आर्थिक विकास नीति को स्वीकार करके विकास प्रक्रिया को एक विपरीत दिशा में मोड़ दिया। इसके परिणामस्वरूप जिस आर्थिक आधार का निर्माण भारत में हो रहा है वह वर्तमान संविधान की आत्मा के ठीक उल्टा है। अब तो संविधान को ही बदल देने की माँग बड़ी पूँजी के तावेदार राजनीतिक दल करने लगे हैं, जो भारत को न तो समाजवादी-लोक कल्याणकारी राज्य रहने देगा न अर्थव्यवस्था पर सरकार का नियंत्राण। इससे राज सत्ता का स्वरूप ही बदल दिए जाने का खतरा है।

Bharatiya Sainya Shakti by Gen. V. P. Malik

SKU: 9789350489925

भारतीय सेना ने राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता किसी भी अन्य लोकतांत्रिक विकासशील देश की अपेक्षा बेहतर तरीके से बनाए रखी है। परंतु इन सफलताओं का श्रेय उसके उच्चतर रक्षा प्रबंधन को कम, सामरिक आयोजना एवं उसके निष्पादन के लिए जिम्मेदार सैन्य कर्मियों को अधिक जाता है। लेकिन कई बार भारत भारी कठिनाइयों को झेलने के बाद मिली सामरिक उपलब्धियों को दीर्घकालिक व सामरिक सफलताओं में बदलने में नाकाम रहा है।
ऐसा क्यों होता है? हम सैन्य-संघर्ष से पहले और उसके दौरान राजनीतिक निर्णय किस तरह लेते हैं? रक्षा आयोजना और प्रबंधन में सुधार के लिए क्या किया जाना चाहिए? इन सब प्रश्नों के समाधान के साथ-साथ नए मार्ग प्रशस्त करनेवाली इस पुस्तक में भारत के सैन्य-संघर्षों के कुछ ताजा उदाहरण प्रस्तुत किए गए। इनमें ‘ऑपरेशन पवन’, जिसके दु:खद परिणाम हुए थे, का विवरण आँखें खोल देनेवाला है, और साथ ही मालदीव में किया गया ‘ऑपरेशन कैक्टस’ एक त्वरित कमांडो काररवाई भी दी गई है, जिसमें भारतीय सेना ने चौबीस घंटे के भीतर तख्तापलट का प्रयास विफल कर दिया था।
पूर्व भारतीय थल सेनाध्यक्ष जनरल वेदप्रकाश मलिक के व्यावहारिक अनुभवों से नि:सृत ये प्रामाणिक, वस्तुनिष्ठ वृत्तांत और आकलन हमें निर्णय-प्रक्रिया की आंतरिक जानकारी देते हैं। इस कृति में भारत के उच्चतर रक्षा प्रबंधन के भावी परिप्रेक्ष्य का आकलन भी दिया गया है। ये विवरण समसामयिक हैं और हर उस व्यक्ति को मुग्ध कर देंगे, जिसका भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से कुछ भी सरोकार है।

Bharatiya Sanskar by Indu Veerendra

SKU: 8188266728

धन चला गया, कुछ नहीं गया। स्वास्थ्य चला गया, कुछ चला गया। चरित्र चला गया तो समझो सबकुछ चला गया।’ यानी संस्कार चरित्र-निर्माण के मूलाधार हैं।
संस्कार घर में ही जन्म लेते हैं। इनकी शुरुआत अपने परिवार से ही होती है। संस्कारों का प्रवाह बड़ों से छोटों की ओर होता है। बच्चे उपदेश से नहीं, अनुकरण से सीखते हैं। वे बड़ों की हर बात का अनुकरण करते हैं।
बालक की प्रथम गुरु माता ही होती है, जो अपने बच्चे में आदर, स्नेह, अनुशासन, परोपकार जैसे गुण अनायास ही भर देती है। परिवार रूपी पाठशाला में बच्चा अच्छे-बुरे का अंतर बड़ों को देखकर ही समझ जाता है।
आज की उद‍्देश्यहीन शिक्षा-पद्धति बच्चों का सही मार्ग प्रशस्त नहीं करती। आज मर्यादा और अनुशासन का लोप हो रहा है। ज्ञान की उपेक्षा तथा सादगी का अभाव होता जा रहा है। प्रकृति में विकार आ जाने तथा सामाजिक वातावरण प्रदूषित हो जाने के कारण आज संस्कारों की बहुत आवश्यकता है।
प्रस्तुत पुस्तक में संस्कारों की व्याख्या अत्यंत सुबोध भाषा में समझाकर कही गई है। आज की पीढ़ी ही नहीं, हर आयु वर्ग के पाठकों के लिए एक पठनीय पुस्तक।

Bharatiya Sanskriti Ka Samvahak Indonesia by Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’

SKU: 9789353226244

हजारों साल बाद भी भारतीय संस्कृति का जीवंत रूप देखना है तो इंडोनेशिया जाना चाहिए। नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर और विशिष्ट संस्कृतिवाला इंडोनेशिया बड़े वर्ग को आकर्षित करता है। न केवल इंडोनेशिया ने अपने को भारत की अमर सनातन संस्कृति से जोड़ा है, बल्कि उसे समृद्ध बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
धर्म, संप्रदाय, भाषा, क्षेत्र और जाति की परिधि में अपने को समेटकर हम लालच में पड़कर नैतिकता को छोड़ पतन की तरफ जा रहे हैं। ऐसे में इंडोनेशिया ने न केवल भारतीय संस्कृति को सहेजकर रखा है, बल्कि उसे संरक्षित, संवर्धित करने में सफलता पाई है।
इस पुस्तक में इंडोनेशिया-भारत की प्रगाढ़ मित्रता, सामरिक साझेदारी का उल्लेख है, वहीं इंडोनेशिया के भौगोलिक, आर्थिक, सामाजिक पक्ष को सुधी पाठकों के समक्ष रखा है। इसमें इंडोनेशिया की संस्कृति, शिक्षा, परंपराओं, इतिहास और इस देश की विकास की कहानी को पाठकों से साझा किया गया है। बदलते विश्व परिदृश्य में भारत-इंडोनेशिया की सामरिक मित्रता, बढ़ते व्यापारिक रिश्तों के साथ-साथ एशिया में इंडोनेशिया-भारत की बढ़ती भूमिका और दक्षिण-पूर्व प्रशांत क्षेत्र में विश्व शांति की स्थापना में दोनों देशों की साझी नीतियों और उनके योगदान की चर्चा की है। इस कृति से दोनों देशों के लोगों को एक-दूसरे के निकट आने में मदद मिलेगी।

Bharatiya Sanskriti Ke Anvarat Upasak Dr. Shyam Bahadur Verma by Dharmendra Verma

SKU: 9789352666942

डॉ. श्याम बहादुर वर्मा का जन्म 10 अप्रैल, 1932 को हुआ। 1945 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क में आने के बाद उनमें राष्ट्र-प्रेम की भावना अजस्र रूप से बहने लगी। 1948 में संघ पर प्रतिबंध के विरोध में आंदोलन कर जेल गए। तेजस्वी श्यामजी ने अपनी ओजस्वी भाषण शैली के माध्यम से सन् 1952 में बरेली कॉलेज, छात्र संघ के चुनाव में धनी एवं प्रभावी कांग्रेसी परिवार के युवक को हराया।
सन् 1953 में अपने धर्म-संस्कृति के प्रखर ज्ञान के तीव्र प्रहारों से नारायणनगर, अल्मोड़ा के मेले में ईसाई प्रचार में वर्षों से रत मिशनरी कैंप को उखाड़ फेंका। 200 मील लंबी पद यात्रा में नेपाल एवं तिब्बत भी गए। मार्ग में दैवीय कृपा भी मिली। संघ की अनेक शाखाओं को प्रारंभ किया और संघकार्य को ग्रामीण अंचलों तक पहुँचाया।
दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी के लोकप्रिय प्राध्यापक रहे। इस कालखंड में ‘बृहत् विश्व सूक्ति कोश’ (तीन खंडों में) तथा ‘बृहत् हिंदी शब्दकोश’ (दो खंड़ों में) जैसे अप्रतिम शब्दकोश की रचना कर हिंदी भाषा के अध्ययन एवं अध्यापन में अभूतपूर्व एवं अविस्मरणीय योगदान दिया। अनेक कालजयी रचनाओं से न केवल हिंदी साहित्य को समृद्ध किया, अपितु समाज में राष्ट्रीय गौरव व देशप्रेम की अलख जगाने का सफल प्रयास किया।
हिंदी अकादमी, दिल्ली ने 28 अक्तूबर, 1998 को उन्हें ‘साहित्यकार सम्मान’ से सम्मानित किया।
सामाजिक स्तर पर ‘भारतीय अनुशीलन परिषद, बरेली’ के माध्यम से 40 वर्षों तक भारतीय धर्म, संस्कृति एवं इतिहास की अलख जगाकर हजारों बाल, युवा एवं प्रौढ़ों को संस्कारित किया।

Bharatiya Sanskriti Ke Rakshak Sant by Justice Shambhu Nath Srivastava

SKU: 9789387968110

सनातन भारतीय संस्कृति सृष्टि के आदिकाल से ही अपने चिरंतन मानवीय मूल्यों के साथ प्रवाहित रहती है। विश्व के अधिकांश देशों में जहाँ इसलाम पहुँचा, वहाँ के निवासी मुसलिम बना दिए गए। भारत में 712 ई. से सत्रहवीं शताब्दी तक इसलाम का शासन विभिन्न क्षेत्रों में था, परंतु 1000 वर्ष के इस विदेशी मुसलिम शासन काल में भारतीय जनमानस पर विदेशी आक्रमण की समस्त क्रूर विद्रूपताओं के बावजूद अपने चिरंतन उदात्त मानवीय मूल्यों के संवाहक संतों के कारण यह भारतीय संस्कृति आज भी अजस्र रूप से प्रवाहित हो रही है। इस राजनीतिक पराभव काल में भारत के महान् संतों ने संपूर्ण भारत के गाँव-गाँव में हिंदू जनता को सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं आध्यात्मिक रूप से पूरी तरह सुरक्षित रखा।
प्रस्तुत पुस्तक में ऐसे स्वनामधन्य पूज्यपाद संतों व उनके जीवन चरित का उल्लेख किया गया है, जिनके कारण भारतीय संस्कृति आज भी संरक्षित है।
गौरवशाली भारतीय संस्कृति के ऐसे रक्षक संतों का पुण्य स्मरण है यह पुस्तक, जिनका प्रेरणाप्रद जीवन हर हिंदू के धर्म-आस्था-श्रद्धा और विश्वास को बल एवं शक्ति देता है।

Bharatiya Sena Ke Shoorveer by Maj. Gen. Shubhi Sood

SKU: 9789351864691

देश के वीरों का दृढ़ निश्चय अपने देश के प्रति प्रेम और भक्ति को दरशाता है। रणभूमि की ये घटनाएँ उन देशवासियों को अवश्य प्रेरित करेंगी और उन्हें सोचने पर मजबूर करेंगी, जो स्वयं को धनी बनाने के लिए कई प्रकार के गलत रास्ते अपनाते हैं। विगत में सामने आए घोटालों की बहुलता के बीच यह जान लेना उचित होगा कि ये मूढ़ दिमाग गलत सबक सीख रहे हैं।
बाल अपराधों के तेजी से बढ़ने के साथसाथ अपराध करने के तौरतरीके भी बदल रहे हैं। यदि इन बच्चों का ध्यान सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च बलिदान कर देनेवाले या निश्चित मौत के मुँह से बिना खरोंच के लौट आए उन अनेक शूरवीरों की हैरान कर देनेवाली शौर्यमयी घटनाओं तथा उनके पीछे के जज्बे पर केंद्रित हो जाए तो यह बच्चों को ऐसे शूरवीरों के नक्शेकदम पर चलने के लिए उनके भीतर उपजे प्रेरणादायक विचार की एक खुराक का काम कर सकता है। जहाँ पाँच गोरखा राइफल्स के सूबेदार किशनबीर सिंह नगरकोटी ने चार बार आई ओ एम जीतकर इतिहास रचा, वहीं सारागढ़ी के युद्ध में 21 सिख जवानों को प्रथम श्रेणी आईओएम से सुसज्जित किया जाना अपने आप में दुर्लभ, गौरवशाली और अप्रतिम घटना है।
यह पुस्तक देश के स्कूली बच्चों को ध्यान में रखकर लिखी गई है। जो उनमें देशभक्ति, शूरवीरता, निडरता और परस्पर सहयोग की भावना जाग्रत् करेगी।

Bharatiya Sena Ke Shoorveeron Ki Shauryagathayen by Shiv Aroor, Rahul Singh

SKU: 9789352665938

भारत के सैन्य बलों की सच्ची वीरता की कहानियाँ, सेना के मेजर, जिन्होंने नियंत्रण रेखा के पार आतंकवादियों के लॉन्च पैड पर बहुचर्चित सर्जिकल स्ट्राइक की; एक सैनिक, जिसने 11 दिनों में 10 आतंकवादियों को मार गिराया; नौसेना का एक अधिकारी, जिसने समुद्र के रास्ते एक खतरनाक बंदरगाह तक का सफर किया और युद्ध की विस्फोटक स्थिति से सैकड़ों लोगों को बचाया; वायुसेना का एक लहूलुहान पायलट, जो आग का गोला बन चुके जेट को उड़ा रहा था।
यह उनके ही या उनके साथ अंतिम पलों में मौजूद लोगों की ओर से सुनाए गए वृत्तांत हैं।
‘भारत के सबसे निडर’ (इंडियाज मोस्ट फियरलेस) में असाधारण साहस और निडरता की चौदह सच्ची कहानियाँ हैं, जो उस वीरता की झलक दिखाती हैं, जिनका परिचय भारत के सैनिक अकल्पनीय विपरीत और गंभीर उकसावे की परिस्थितियों में देते हैं।

Bharatiya Senadhyakshon Ka Prerak Jeevan   by  a.K. Shori

SKU: 9789351869726

निस्संदेह भारतीय सेना विश्व की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में से एक है। हमारा आयुधागार, हमारी सामरिक क्षमता, हमारी परमाण्विक सामर्थ्य, हमारा सैन्य कौशल और हमारी रेजीमेंट्स की वीरता विश्व स्तर पर हमें यदि सर्वश्रेष्ठ नहीं तो सर्वश्रेष्ठ से कम भी नहीं बनाती हैं। स्वतंत्रता के अनंतर भारतीय सेना ने पाकिस्तान के खिलाफ 1948, 1965, 1971, फिर कारगिल में भी तीन युद्ध जीते हैं।
इन सभी युद्धों में एक विशेष तथ्य सामने आया, जो भारत की शांतिप्रिय राष्ट्रीयता का परिचायक भी है कि इनमें से कोई भी युद्ध भारत के द्वारा शुरू नहीं किया गया था। दूसरे शब्दों में कहें तो ये सभी युद्ध भारत पर थोपे गए थे। भारतीय सेनाध्यक्षों ने हर युद्ध में अपने सैन्य कौशल का श्रेष्ठ परिचय दिया और भारत के शौर्य व स्वाभिमान की लाज रखी।
युद्ध तथा शांतिकाल, दोनों में ही अपनी अद्भुत कार्यक्षमता, नेतृत्व-कौशल और अनुपम आदर्शों से उन्होंने भारतीय थलसेना के जवानों और अधिकारियों का हौसला बुलंद किया, उन्हें सदा प्रेरित किया तथा भारवासियों को सदा आश्वस्त किया कि हमारी सीमाएँ और हम भारतीय सुरक्षित हैं।
भारतीय सेनाध्यक्षों का प्रामाणिक जीवनवृत्त प्रस्तुत करती पुस्तक, जिसे पढ़कर न केवल भारतीय सेना के प्रति हमारा सम्मान बढ़ेगा वरन् उसके शौर्य और पराक्रम से हम प्रेरित भी होंगे।

Bharatiya Shiksha Ka Swaroop by Dinanath Batra

SKU: 9789350489826

नानाथ बत्राजी भारतीय शिक्षा के लिए एक समर्पित योद्धा की तरह आजीवन संघर्ष करते रहे हैं। इस लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए महान् चिंतक ही नहीं बल्कि देश के सम्मान की खातिर उन्होंने शिक्षा एक्टिविस्ट के रूप में सरकार द्वारा प्रायोजित पाठ्य-पुस्तकों एवं नीतियों में दरशाई गई मनोवृत्ति और विषयवस्तु पर सवाल उठाए।
एक चिंतक के रूप में उन्होंने सभी स्तरों पर तथा सभी आयामों में समसामयिक शिक्षा प्रणाली में मौजूद विसंगतियों के बारे में गहन विचार किया है। लंबे समय तक इनकी सोच, विचार-विमर्श महत्त्वपूर्ण देश की दीर्घ इतिहास, शैक्षिक विचारधारा, परंपरा एवं प्रक्रियाओं पर फोकस है, जिनकी जानबूझकर उपेक्षा की जाती रही है। बत्राजी भारतीय विचारधारा से शैक्षिक पहलू को पुन: जोड़ते हुए शिक्षा के स्वरूप को बदलने की दिशा में पूर्ण निष्ठा से प्रयासरत हैं।
यह पुस्तक विद्वान् लेखक के वर्षों की विचारणा शक्ति तथा अथक संघर्ष का दस्तावेज है। इस पुस्तक में भारत में शिक्षा के विभिन्न पहलुओं की पहचान करके विचार-विमर्श करने के साथ-साथ उनका विश्लेषण किया गया है। इनमें भारतीय शिक्षा के स्वरूप, चरित्र-निर्माण, लड़कियों की शिक्षा, व्यक्तित्व विकास, भारतीय विज्ञान, भारतीय गणित, प्रोफेशनल संस्थाओं में मूल्य-शिक्षण, विचारों का प्रदूषण, कुछ महान् शिक्षक, ब्रिटिश काल से पूर्व भारतीय शिक्षा, वैकल्पिक शिक्षा, मूल्यांकन और अत्यंत रोचक उपसंहार—शिक्षा की आत्मकथा जैसे विविध विषयों पर विचार व्यक्त किए गए हैं। आशा है, शिक्षा-प्रशासक, अध्यापक, विद्यार्थी तथा सामान्य जन यह पुस्तक पढ़ेंगे, क्योंकि जरूरी है कि व्यापक स्तर पर आम जनता की शिक्षा विषयक अनवरत एवं महत्त्वपूर्ण परिचर्चा में भागीदारी हो।

Bharatiya Videsh Neeti by J N Dixit

SKU: 9789352665129

प्रस्तुत पुस्तक में भारत के पूर्व विदेश सचिव श्री जे.एन. दीक्षित द्वारा पचास वर्षो की अवधि के विस्तृत फलक पर भारतीय विदेश नीति के विभिन्न चित्र सशक्‍त तथा प्रभावशाली ढंग से उकेरे गए हैं । लेखक ने 1947 को भारतीय विदेश नीति का आरंभ काल माना है । इन्होंने बताया है कि पं. जवाहरलाल नेहरू ने भारत की विदेश नीति का मूलाधार रखा तथा इसके बाद उनके उत्तराधिकारियों ने इस दिशा में किस प्रकार से व्यापक और महत्त्वपूर्ण योगदान दिया ।

Bharatiya Vyanjan

SKU: Mag-23060

The book tells in detail the process of making variety of stuff ranging from tea, bread, lentils, rice etc to snacks, sweets, ice cream and sherbet. Make this book your kitchen companion and earn accolades from your family members and guests. All leading Indian delicacies.