Bhagwan Ne Kaha Tha by Suryabala

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भगवान् ने कहा था
इसके बाद भगवान् का स्वर उदास हो आया, “मेरे इस मंदिर का सोने का कलश कब से टूटा हुआ है और मुझे अच्छी तरह मालूम है कि चढ़ावा इतना तो आता ही है कि कलश पर सोने का पत्तर चढ़वा दिया जाए। लेकिन पुजारी सब आपस में ही बाँट-बूँटकर खा जाते हैं। प्रबंध न्यासी भी इसमें काफी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। और फिर प्रेस विज्ञप्‍तियों के सहारे सरकार तक अपनी गुहार पहुँचाते हैं कि मंदिर निरंतर घाटे में जा रहा है, अनुदान की राशि बढ़ाई जानी चाहिए।”
यहाँ तक आते-आते भगवान् हताश ध्वनित हुए। अपनी स्थिति पर क्षोभ व्यक्‍त करते हुए बोले, “आप ही सोचिए, कलश का पत्तर उखड़ा होने से मंदिर की और मेरी भी इमेज बिगड़ती है या नहीं? साख भी गिरती ही है। भक्‍तों को क्या दोष दें, सोचेंगे ही कि जब इस मंदिर का भगवान् अपना ही टूटा छत्तर नहीं दुरुस्त करवा पा रहा है तो हमारे उधड़े छप्पर क्या छवाएगा! हमारी बिगड़ी क्या बनाएगा!…क्यों न किसी दूसरे, ज्यादा समर्थ भगवान् के पास चला जाए।”
—इसी पुस्तक से

प्रसिद्ध लेखिका सूर्यबाला के इस विविध विषयी व्यंग्य-संग्रह में जीवन के लगभग हर क्षेत्र की विसंगतियों-विद्रूपताओं पर करारी चोट की गई है। एक ओर जहाँ ये व्यंग्य भरपूर मनोरंजन करते हैं, वहीं दूसरी ओर पाठक को कुछ सोचने-करने पर विवश करते हैं।

Bhagwan Shri Ram Ke 7 Roop by Maj. Gen. A.K. Shori

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हमारे प्राचीन ज्ञान के समृद्ध भंडार में बुद्धिमत्ता एवं ज्ञान के ऐसे अमूल्य रत्न छिपे हैं, जिनसे आज की समस्याओं को सुलझाया जा सकता है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के अपने विभिन्न रूपों में प्रत्येक मनुष्य में पुत्र, भाई, पति, योद्धा, शासक और ऋषि के रूप में अंतर्निहित हैं। इस पुस्तक में श्रीराम के ऐसे सात रंग व्याख्यायित हैं। जब सात रंगों के मधुर संगम से पूर्णता आती है, तब मनुष्य ‘पूर्ण’ मानव में परिणत होता है।
राम अपने जीवन के माध्यम से ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ के रूप में प्रेरणा का स्रोत तथा आदर्श बने। इनके जीवन से अंतर्वैयक्तिक समस्याओं को सुलझाने तथा समाज को स्वर्ग सा आनंदमय एवं परिपूर्ण बनाने में मदद मिलती है। महाकाव्य रामायण के उदात्त एवं गरिमामय रूप को जानने का यह साहसिक प्रयास है। नित्यकर्म, कर्मकांड तथा बहुमूल्य विचारों को जाग्रत् करनेवाली इस पुस्तक से पाठक निश्चित ही लाभान्वित होंगे।
श्रीराम का माहात्म्य बताकर सामान्य जन को भी उनके आदर्श जीवन से संवर्धित करनेवाली पठनीय कृति।