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Best Of Omprakash Aditya by Omprakash Aditya
बेस्ट ऑफ ओमप्रकाश आदित्य
मैंने लिक्खा पानीपत का
दूसरा युद्ध भर सावन में
जापान-जर्मनी बीच हुआ
अठारह सौ सत्तावन में।
राणा प्रताप ने मोहम्मद गोरी को
दस बार हराया था
अकबर ने हिंद महासागर
अमरीका से मँगवाया था
महमूद गजनबी उठते ही
दो घंटे रोज नाचता था
औरंगजेब रंग में आकर
औरों की जेब काटता था।
तैमूर लंग हर इक जंग में
दुश्मन की टाँग तोड़ता था
कहते हैं चैम्सफोर्ड घर में
सौ चिलमें रोज फोड़ता था।
इस तरह अनेकों भावों के
फूटे भीतर से फव्वारे
जो-जो सवाल थे याद नहीं
वे ही परचे पर लिख मारे।
हो गया परीक्षक पागल-सा
मेरी कॉपी को देख-देख
बोला—इन सारे छात्रों में
बस होनहार है यही एक।
—इसी संकलन से
हास्य-व्यंग्य के जाने-माने हस्ताक्षर और हास्य शिरोमणि श्री ओमप्रकाश आदित्य की सर्वश्रेष्ठ कविताओं का ऐसा संकलन, जिनका रसपान कर सुधी पाठक आनंद की मस्ती में झूम-झूम जाएँगे।
Best Of Pradeep Chaubey by Pradeep Chaubey
हिंदी मंचों के धुरंधर हास्यकवियों में प्रदीप चौबे का नाम अग्रणी है। वे ‘हास्यगैस सिलेंडर’ कहे जाते हैं। नॉन स्टॉप ठहाकों की गारंटी माने जाते हैं। हँसाने की उनकी शैली और अंदाज़ेबयाँ सबसे अलग एवं अनूठा है। भारतप्रसिद्ध मुंबई के हास्य समारोह के आयोजक स्व. रामावतार चेतन ने उनके सम्मान में मिर्जा गालिब का एक पैरोडी शेर कहा है—
‘हैं और भी हँसनवर भारत में बहुत अच्छे,
कहते हैं कि चौबे का है अंदाज़ेबयाँ और।’
हास्यरस प्रदीप चौबे को विरासत में मिला है। उनके बड़े भाई हास्य के महापंडित कवि स्व. शैल चतुर्वेदी को कौन नहीं जानता! परंतु जैसे हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, प्रदीप चौबे का दूसरा पहलू है कि वे एक मँजे हुए शायर भी हैं और बहुत खूबसूरत गज़लें कहते हैं, और इसे ही वे अपना असली चेहरा मानते हैं। इस संग्रह में उनकी कुछ श्रेष्ठ हास्यव्यंग्य गज़लें भी संकलित की गई हैं।
इन दिनों मंचों और फेसबुक पर उनकी माइक्रो कविताएँ ‘आलपिन’ के रूप में का़फी धूमधड़ाका कर रही हैं।
Best Of Prem Kishore ‘Patakha’ by Prem Kishore ‘Patakha’
प्रेम आध्यात्मिक चिंतन को उजागर करता है, किशोर बालमन को आकर्षित करता है और पटाखा हास्यव्यंग्य के रंग की आतिशबाजी अपने रंगों से खिलखिलाती है। हर उम्र और हर पड़ाव के पाठकों को लेखन से अपनी ओर आकर्षित करने में पटाखाजी की लोकप्रियता है। विगत पचास वर्षों से अधिक समय से लेखन से जुडे़ हैं। बताते हैं, एक काव्य मंच पर सन् 1962 में हाथरस में काका हाथरसी ने पटाखा नाम दिया, बोले, ‘हम काका, तुम पटाखा दोनों मिलकर डालें डाका।’ सन् 1980 के बाद पटाखाजी की तूती पूरे भारत वर्ष में पटाखों की तरह धमाके करने लगी। एच.एस.बी. रिकॉर्ड्स बनानेवाली कंपनी ने आपके ग्रामोफोन रिकॉर्ड्स बनाए। टीसीरीज ने ऑडियो कैसेट और ईगल वीडियो ने वीडियो बनाकर हास्यप्रेमियों को ठहाकों की दुनिया से जोड़ा। एक के बाद एक आपकी सत्तर के लगभग पुस्तकें बाजार में नजर आने लगीं। टी.वी. के अनेक चैनलों पर आपकी खिलखिलाती कविताएँ दर्शकों को गुदगुदाने लगीं।
अब उसी गुदगुदाहट को लेकर पटाखाजी की लोकप्रिय हास्यव्यंग्य रचनाएँ आप पढें़पढ़ाएँ और दूसरों को भी मुसकराहटें लुटाएँ।
Best Of Shail Chaturvedi by Shail Chaturvedi
हमने कहा, ‘‘भगवान् जाने
देश की जनता का क्या होगा?’’
वे बोले, ‘‘जनता दर्द का खजाना है
आँसुओं का समंदर है,
जो भी उसे लूट ले
वही मुकद्दर का सिकंदर है।’’
हमने पूछा, ‘‘देश का क्या होगा?’’
वे बोले, ‘‘देश बरसों से चल रहा है
मगर जहाँ का तहाँ है
कल आपको ढूँढ़ना पड़ेगा
कि देश कहाँ है
कोई कहेगा—ढूँढ़ते रहिए
देश तो हमारी जेब में पड़ा है
देश क्या हमारी जेब से बड़ा है?’’
—इसी पुस्तक से
हास्यव्यंग्य मंच के सिरमौर कवि शैल चतुर्वेदी ने अपनी रचनाओं से देश की सामाजिकराजनीतिक परिस्थितियों पर मारक प्रहार किया और समाज को जागरूक करने का महती कार्य किया। यहाँ प्रस्तुत हैं उनकी सर्वश्रेष्ठ रचनाएँ, जो उनके विराट् कविरूप का दिग्दर्शन कराएँगी और आपको हँसागुदगुदाकर लोटपोट कर देंगे
Beti Bachao by Shakuntala Sharma
वरिष्ठ साहित्यकार और छत्तीसगढ़ी भाषा की प्रथम कवयित्री के रूप में प्रतिष्ठित शकुन्तला शर्मा की यह पंद्रहवीं कृति है। ‘बेटी बचाओ’ नामक इस गीत-संग्रह में कवयित्री ने न केवल देश के विभिन्न भागों, बल्कि दुनिया के अनेक क्षेत्रों में भ्रमण के दौरान विकलांग बच्चियों की जो हालत देखी, उसे आख्यान गीतों के रूप में बड़े ही सरल, सुगम और सुबोध ढंग से प्रस्तुत किया है। उन्होंने इन गीतों में बताया है कि विकलांग बच्चियाँ भी खुद या दूसरों का, परिवार का और समाज का सहारा पाकर आगे बढ़ सकती हैं, पढ़-लिख सकती हैं और अपने पैरों पर खड़ी हो सकती हैं तथा अपनी आजीविका अर्जित कर शान से जी सकती हैं। इस पुस्तक में 51 आख्यान गीत हैं, जो अलग-अलग बच्चियों की जिंदगी का सटीक वर्णन करते हैं। इन गीतों को पढ़कर लोगों का, समाज का विकलांगों के प्रति खासकर विकलांग बच्चियों के प्रति विचार और सोच बदलेगा तथा एक रचनात्मक समाज का निर्माण होगा, जहाँ सद्भाव, समभाव और समरसता हो, तभी यह गीत-संग्रह अपने उद्देश्य में सफल होगा, ऐसी उम्मीद है।
Beti Ki Sacchhi Saheli Maa
It is a worldwide accepted fact that a daughter is an image of her mother only. She gets her power from her mother only. So it is the mother’s obligation to make her daughter’s life strong and meaningful. In such a case, the mother only becomes her daughter’s true friend and solves all her queries and doubts through and through. The book has given guidelines about the most important heritage of society – from mother to her daughter. By reading and adopting the practices mentioned in this book, each mother will be able to fulfil her obligation of shaping the personality of her daughter and improving her lifestyle.
Beticket Muzrim Se Arabpati Banne Ki Kahani by Rajiv Singh
एक वास्तविक समयकाल के समांतर राजनीतिक और आर्थिक-सामाजिक परिदृश्य में स्थित यह उपन्यास, सपने की शक्ति, विश्वास की शक्ति और प्यार की शक्ति की असाधारण कहानी है। यह कहानी है गाँव के एक वंचित लड़के की, जिससे उसके सपने पूरे करने का प्रत्येक अवसर छीन लिया जाता है, लेकिन जीवन में अनेक मुश्किलों का सामना करते हुए भी वह अपने सपने का पीछा करना नहीं छोड़ता। वर्ष 1978 में उत्तर प्रदेश के एक पिछड़े गाँव में जिला कलेक्टर का दौरा गरीब, श्रमिक परिवार के ग्यारह वर्षीय गोदना को आई.ए.एस. अफसर बनने के लिए प्रेरित करता है।
क्या वह अपना सपना पूरा कर पाता है या परिस्थितियों के आगे हार मान लेता है? या फिर वह और अधिक ऊँचाइयाँ प्राप्त कर लेता है? क्या जाति आधारित आरक्षण नीतियों से उसे मदद मिलती है? क्या जाति आधारित राजनीति उसे आकर्षित कर पाती है? क्या वह अपने खिलाफ चली गईं चतुर कॉरपोरेट चालों और साजिशों का सामना कर पाता है?