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Basketball : Khel Aur Niyam by Surendra Shrivastava
बास्केटबॉल
बास्केटबॉल एक टीम खेल है, जिसमें 5 सक्रिय खिलाड़ियों वाली दो टीमें होती हैं, जो एक-दूसरे के खिलाफ एक 10 फीट (3.048 मीटर) ऊँचे घेरे (गोल) में संगठित नियमों के तहत एक गेंद डालकर अंक अर्जित करने की कोशिश करती हैं। यह विश्व के सबसे लोकप्रिय और व्यापक रूप से देखे जानेवाले खेलों में से एक है।
गेंद को ऊपर से टोकरी के आर-पार फेंककर (शूटिंग) अंक बनाए जाते हैं; खेल के अंत में अधिक अंकोंवाली टीम जीत जाती है। गेंद को कोर्ट में उछालते हुए (ड्रिब्लिंग) या साथियों के बीच आदान-प्रदान करके आगे बढ़ाया जाता है। बाधित शारीरिक संपर्क (फाउल) को दंडित किया जाता है और गेंद को कैसे सँभाला जाए, इसके भी नियम हैं।
सन् 1932 में अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल महासंघ का गठन, आठ संस्थापक देशों, यथा—अर्जेंटीना, चेकोस्लोवाकिया, ग्रीक, इटली, लातविया, पुर्तगाल, रोमानिया और स्विट्जरलैंड द्वारा किया गया था। इस समय, संगठन केवल शौकिया खिलाड़ियों का निरीक्षण करता है।
पुरुषों के बास्केटबॉल को सर्वप्रथम 1936 में बर्लिन ओलंपिक खेलों में शामिल किया गया। इस प्रकार की ढेरों जानकारियों से युक्त यह पुस्तक खेल-प्रेमियों को अवश्य पसंद आएगी।
Batte Se Dabi Taareekhen by Lata Kadambari
इस संकलन में जहाँ एक ओर शृंगार रस के संयोग और वियोग, दोनों रूप दिखाई देते हैं, वहीं जीवन के प्रति आशावादी दृष्टकोण भी दिखाई देता है। सामाजिक बुराइयाँ, जैसे—कन्याभ्रूण हत्या, नारी की अवमानना, सामाजिक विषमताएँ तथा पर्यावरण का विनाश जैसी बुराइयों से द्रवित मन की पीड़ा भी इन कविताओं में व्यक्त है।
यह नारी जीवन का दर्द ही तो है, जिसकी सारी प्रतिभाएँ—चौका-चूल्हा, रीति-रिवाज, रिश्ते-नाते तथा पूजापाठ में दबकर रह जाती हैं। शायद इसलिए मुझे इस कविता संकलन का शीष्र्ाक ‘बट्टे से दबी तारीखें’ विष्ायवस्तु को देखते हुए सटीक लगा।
Batukeshwar Dutt Aur Krantikari Andolan by Bhairab Lal Das
शहीद-ए-आजम भगत सिंह के अनन्य सहयोगी, विप्लवी बटुकेश्वर दत्त का जन्म पश्चिम बंगाल के ओआड़ी नामक गाँव में हुआ था। सन् 1928 में गठित ‘हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी’ के वे सक्रिय सदस्य थे। 8 अप्रैल, 1929 को दिल्ली की सेंट्रल असेंबली में बम विस्फोट के बाद भगत सिंह एवं बटुकेश्वर दत्त जन-जन के नायक बन गए। यह बम विस्फोट औपनिवेशिक शासन व्यवस्था की नींव पर चोट करनेवाला साबित हुआ। कारावास में की गई लंबी भूख-हड़ताल भारत के इतिहास में नजीर बनकर सामने आई। अंडमान जेल में ‘कालापानी’ की सजा के बाद भी बटुकेश्वर दत्त ने किसान आंदोलन, 1942 क्रांति और उसके बाद के स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न आंदोलनों में भाग लिया और जेल की यातनाएँ सहीं। 3 अक्तूबर, 1963 से 6 मई, 1964 तक वे बिहार विधान परिषद् के सदस्य भी रहे। उनकी अंतिम इच्छा यही थी कि मृत्यु के बाद उनका अंतिम संस्कार वहीं हो, जहाँ ‘सरदार’ (भगत सिंह) की समाधि है। 20 जुलाई, 1965 को दिल्ली में उनकी मृत्यु होने के बाद फिरोजपुर के हुसैनीवाला में सरदार भगत सिंह की समाधि के निकट ही उनका अंतिम संस्कार किया गया। जीवन भर भगत सिंह के साथ रहनेवाले बटुकेश्वर दत्त मृत्यु के बाद भी भगत सिंह के साथ ही रहे।
Bauddha Dharma Aur Paryavaran by Dhrub Kumar
मनुष्य जन्म लेता है और एक दिन इस नश्वर शरीर को त्यागकर पंचतत्वों में स्वाभाविक रूप से विलीन हो जाता हैं। प्रत्येक जीव-जंतु की यही प्राकृतिक जोगन प्रक्रिया है, किंतु क्या यही पर्याप्त है? शायद नहीं ! अन्य जीव-जंतुओं को प्राकृतिक रूप से कुछ-न-कुछ ऐसा कार्य मिला हुआ है कि उसका जीवन अपना कार्य करते-करते अपने समय पर पूर्ण हो जाता है और वह अपनी सार्थकता सिद्ध कर जाता हैं, जैसे गाय को देखें तो वह मनुष्यों को अपना दूध पिलाकर अपने जीवन का औचित्य सिद्ध कर देती हैं, उसी प्रकार साँड़ खेतों में हल द्वारा उन्हें जोतकर अपनी उपयोगिता सिद्ध करता है। तात्पर्य यह है कि प्रत्येक जीव जंतु को प्रकृति ने कोई न कोई कार्य ऐसा दे दिया है, जिससे उसके जीवन की सार्थकता सिद्ध होती हैं।
ढाई हजार वर्ष पूर्व महात्मा बुद्ध ने भौगोलिक प्राकृतिक और सामाजिक पर्यावरण को शुद्ध रखने पर बल दिया और इसके साथ ही भवन निर्माण में पर्यावरण और परिस्थिति की शुद्धता पर भी बल दिया। यह अद्भुत है।
वर्तमान में जिस प्रकार पर्यावरण समस्या बढ़ती ही जा रही हैं, ऐसे में बौद्ध धर्म में अभिव्यक्त पर्यावरण संबंधी सुझावों पर ध्यान देना अनिवार्य हो जाता है, तभी मनुष्य एवं प्रकृति स्वस्थ रह पाएगी। मनुष्य को चाहिए प्रकृति में पेड़, पौधों एवं तमाम जौव-जंतुओं के साथसाथ नदी-नहरों में बहते जल को स्वच्छ रखें और उनकी रक्षा करे, तभी मनुष्य स्वयं भी स्वस्थ रह सकेगा।
Bauddha Dharma Ki Kahaniyan by Mozej Michael
बौद्ध धर्म की कहानियाँ—मोजेज माइकेल
”ठहरो श्रमण, ठहर जाओ!’ ’
”मैं तो ठहरा हुआ हूँ, आवुसं। तुम्हीं अस्थिर हो। तुम भी ठहर जाओ और रोक दो अपना यह पाप-कर्म।’ ’
अंगुलिमाल विस्मित हो तथागत की ओर देखने लगा। उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था। अद्भुत था यह श्रमण, अद्भुत थी उसकी उपस्थिति! वह जैसे जड़ हो गया।
”अच्छा, ऐसा करो, मुझे उस पेड़ से एक पत्ती तोड़कर दो।’ ’
अंगुलिमाल ने तुरंत पत्ती तोड़ दी।
”अब इसे वापस उसी पेड़ पर लगा दो।’ ’
”क्या?’ ’
”हाँ, अब इसे वापस उसी पेड़ पर लगा दो।’ ’
”यह कैसे संभव है, भंते! यह नहीं हो सकता। भला डाल से टूटी पत्ती वापस कैसे लगाई जा सकती है!’ ’
”इसका यह अर्थ हुआ कि तुम जब पत्ती को वापस जोड़ नहीं सकते तो तुम्हें उसे तोडऩा भी नहीं चाहिए था। इसी प्रकार अंगुलिमाल, जब तुम किसी को जीवन दे नहीं सकते तो तुम्हें किसी का जीवन लेने का भी अधिकार नहीं है। सन्मार्ग पर चलो।…’ ’
—इसी पुस्तक से
बौद्ध धर्म बल्कि यह कहें कि मानव-धर्म के विविध आदर्शों—क्षमा, शील, परोपकार, सदाचार, नैतिकता और सदï्गुणों का दिग्दर्शन करानेवाली प्रेरक पुस्तक, जिसे पढ़कर पाठक अपने जीवन को उच्ïच स्तर पर ले जा सकेंगे।
Beauty Tips by Reeta Grover
आज का समाज सौंदर्य सजग समाज है। इस समाज में प्रत्येक क्षेत्र में सर्वप्रथम महत्त्व सौंदर्य का है। प्रस्तुत पुस्तक में हमारे तन, मन और व्यक्तित्व के सभी पक्षों के सौंदर्य और उसके महत्त्व की चर्चा की गई है। इसमें सौंदर्य क्या है? सौंदर्य उपचार क्या और कौन से हैं? उनमें समय के साथ आई विविधताएँ क्या हैं? सौंदर्य को निखारने की विधियाँ, उसकी देखरेख, रखरखाव आदि सभी पक्षों की जानकारी दी गई है। यह जानकारी केवल चेहरे के सौंदर्य तक ही सीमित नहीं है अपितु नख से शिख तक शरीर के सभी भागों को लेकर है। शारीरिक सौंदर्य के साथ-साथ इसमें व्यक्तित्व, जो सौंदर्य का अभिन्न अंग है, जिसके निखार और तराश के बिना सर्वोत्तम सौंदर्य भी अधूरा रहता है, उस पर भी विस्तृत जानकारी दी गई है।
यह पुस्तक प्रत्येक आयु वर्ग, महिला-पुरुष आदि सभी के लिए उपयोगी है। कॉलेज के छात्र-छात्राएँ हों या नौकरीपेशा महिला-पुरुष, बच्चे हों या अधेड़, सामान्य जन हों अथवा सौंदर्य क्षेत्र में व्यावसायिक रूप से कार्यरत, अथवा इसमें प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे छात्र-छात्राएँ—सभी के लिए यह पुस्तक लाभदायक है। सौंदर्य के महत्त्व व उपचार आदि से अनभिज्ञ लोग इससे ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं और जानकार लोग अपनी जानकारी में वृद्धि कर सकते हैं। सौंदर्य शास्त्र पर एक संपूर्ण पुस्तक।