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Aaj Ki Taaza Khabar by Rajendra Mohan Bhatnagar
आज की ताजा खबर—राजेंद्रमोहन भटनागर
ये मेरी नहीं, हजारों हजार उन लोगों की कहानियाँ हैं, जिन्होंने इन कहानियों को जिया है, पर जो उन्हें लिख नहीं सके।
इन कहानियों में अबूझे जन अपने को भूले-भटके तलाशते मन और उदासी में तल्लीनता ढूँढ़ते क्षण स्वयं से संवाद कर उठे हैं।
वे रहें या न रहें, परंतु उनकी इन यादों में अकेली साँझ, मौन में सोई सुबह और पत्थर कूटती दोपहरी चुपचाप बतियाती, आपबीती सुनाती जब-तब जरूर दस्तक देती जान पड़ेगी।
विलुप्त होती जा रही इनसानियत, रास्ता भटकी धूप-छाँव, वैश्विक समाज की छिन्न-भिन्न होती आवरण गाथा एवं उद्वेलित होती नृशंसता पुनः आत्म-चेतना की झिलमिल रोशनी में अपने आपको पहचानने की दावत देती है।
Aaj Samaaj
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Aakarshan Ka Niyam by William Walker Atkinson
अपने आपको काम में व्यस्त कीजिए और अपने जीवन को एक स्वरूप दीजिए। यह मत सोचिए कि कुछ करने से पहले आपको ब्रह्मांड की तमाम पहेलियों को सुलझाना जरूरी है। उन पहेलियों की चिंता मत कीजिए और अपने सामने पड़े काम पर ध्यान दीजिए। अपने अंदर छिपे उस महान् जीवन-सिद्धांत को उसमें लगा दीजिए, जो प्रकट होने के लिए लालायित है। इस भ्रम में मत रहिए कि आपके शिक्षक या गुरु ने उस पहेली को सुलझा लिया है। यदि कोई उसे सुलझा लेने की बात करता है तो वह झूठ बोल रहा है और साहस बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
अबूझ पहेलियों और सिद्धांतों की चिंता मत कीजिए, काम कीजिए और जीना शुरू कीजिए। इन सिद्धांतों के बुलबुलों को फोड़ने का सबसे नायाब तरीका है—हँसना। हँसी एक ऐसी चीज है, जो हमें पागलपन से बचाती है। हास्य रस इनसान के लिए प्रभु का सर्वोत्तम उपहार है।
चाँद बनना छोड़ दीजिए; प्रतिबिंब बनाना बंद कर दीजिए। काम करने के लिए सक्रिय हो जाइए और अपने आपको सूर्य बनाइए। यह आपकी शक्ति है। हर व्यक्ति के अंदर सूर्य बनने के गुण होते हैं। कार्य प्रारंभ कीजिए और खुद को प्रकट कीजिए। अपनी रीढ़ को मजबूत और सिर को ऊँचा कीजिए।
—इसी पुस्तक से
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अपने भीतर छिपी शक्ति और मानसिक दृढ़ता को पहचानकर सफलता के द्वार खोलनेवाली प्रेरक पुस्तक।
Aakash-Sanket by Manoj Das
आकाश-संकेत
“चलिए, अब आप मुझे मेरे अगले सवाल का जवाब दीजिए। आपके बकरे का नाम क्या था?”
“जी?”
“देखिए, यहाँ जितने भाई खड़े हैं, उन सबने अपने-अपने पालतू जानवरों को कुछ-न-कुछ नाम दिया होगा। प्यारा-प्यारा नाम। है न? उदाहरण के तौर पर…”
एक ग्रामीण, जो हर बात को मजाक में उड़ाने में माहिर था, झट से बोला, “मैं अपनी बिल्ली को ‘महारानी’ कहकर पुकारता हूँ और अपने बैल की जोड़ी को ‘दुधिया’ और ‘लकदक’!”
“यह हुई न बात! अब छाकू भाई, तुम भी अपने प्यारे दिवंगत बकरे का नाम बताओ। यह तो बहुत बढ़िया होना चाहिए।”
छाकू की गरदन लटक गई।
“तुम इससे कितना प्यार कतरे थे—यह तो अब साफ हो ही गया है। दूसरे, क्या हमें यह बताने की कृपा करोगे कि कल तुमने अपने इस अति विशिष्ट बकरे को क्या खिलाया था?”
छाकू के हाथ-पाँव फूले दिख हरे थे।
“पनीर का केक? पुलाव? प्लेट भरकर रसगुल्ले? आखिरी चीज तुमने इसे क्या खिलाई थी? बताओ जरा?”
भीड़ में खड़े कुछ ज्यादा होशियार लोगों को लगा कि इस बात पर थोड़ा हँस देना चाहिए और उन्होंने वैसा ही किया।
—इसी उपन्यास से
मनोज दास ऐसे लेखक हैं जो पाठक का मनोरंजन करते हुए उसे हँसा या रुला सकते हैं, प्रसन्न या उदास कर सकते हैं। ऐसी ही विशेषताओं से संपन्न प्रस्तुत उपन्यास ‘आकाश-संकेत’ वर्तमान समाज की विद्रूपताओं, उठा-पटक, आम आदमी की दयनीयता तथा सफेदपोश समाज के काले कारनामों का पर्दाफाश करता है।
Aakhiri Baazee by S. Hussain Zaidi
हर कहानी के दो पहलू होते हैं…
मुंबई में हुए 26/11 के आतंकी हमलों के ग्यारह साल बीत चुके थे, लेकिन उसके जख्म अब तक नहीं भरे थे। खास तौर पर पुलिस अधीक्षक विक्रांत सिंह के। आजकल राष्ट्रीय जाँच एजेंसी के साथ जुड़े, विक्रांत भारत के दौरे पर आए, पाकिस्तानी उच्चायुक्त जाकिर अब्दुल रऊफ खान से किसी तरह एक मुलाकात तय कर लेते हैं। जहाँ तक विक्रांत का दावा है, वह केवल खान से यह अपील करना चाहते हैं कि अपराधियों को पकड़ने की प्रक्रिया को तेज किया जाए, लेकिन मुलाकात का अंत उच्चायुक्त के मुँह पर पड़े एक मुक्के से होता है। इस बीच, भोपाल में, इंडियन मुजाहिदीन के पाँच सदस्य, जिन्हें विक्रांत ने मुंबई में आतंकवादी हमले की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया था, सेंट्रल जेल से भाग निकलते हैं। हाल ही में राजनयिक के साथ हुई झड़प के मामले में निलंबित विक्रांत से, भागे हुए आतंकियों का पता लगाने में, अनाधिकारिक रूप से मदद करने को कहा जाता है।
देश के एक दूसरे हिस्से में, एक रिटायर्ड प्रोफेसर, टूटे दिल वाला एक पूर्व सैनिक और अपनी ही मुसीबतों से घिरी एक युवती अपने बारे में गहराई से सोचने के लिए मुंबई से लक्षद्वीप जा रहे एक क्रूज लाइनर पर एक यात्रा पर निकल पड़ते हैं। हालाँकि, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, और क्रूज लाइनर को हाईजैक कर लिया जाता है। रहस्य, रोमांच, सस्पेंस, राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और ऐसे अनेक पहलूओं की अनूठा मिश्रण है यह पुस्तक जो पाठक को बाँधे रहेगी और फिल्म देखने का आनंद देगी।
मसालेदार और दिलचस्प, हुसैन जैदी का जवाब नहीं।
Aakhiri Khwahish by Ajay K. Pandey
उसके पिता की हद से ज्यादा उम्मीदों ने हर विफलता के साथ उसके आत्मविश्वास को और भी डगमगा दिया। उसके जीवन में उसकी पत्नी उम्मीद की एक किरण लेकर आई, जिसका व्यक्तित्व इतना करिश्माई था कि वह जहाँ जाती खुशियाँ बिखेर देती थी। सबकुछ योजना के मुताबिक चल रहा था कि तभी अँधेरे ने दस्तक दे दी।
उसे पता चला कि उसकी पत्नी चंद दिनों की ही मेहमान है और उसने ठान लिया कि वह सारी मुश्किलों से लड़ेगा—यहाँ तक कि अपने परिवार से भी, अगर इससे उसके इलाज में मदद मिल जाए। उसके पिता को लगता है कि उनकी मदद करने से वह भी अपने पाप से मुक्त हो जाएँगे। वैसे भी उन्हें मालूम है कि उनका बेटा इस जंग को तभी जीतेगा जब अपनी पत्नी के लिए, अपनी पत्नी के साथ मिलकर लड़ेगा।
क्या एक हारा हुआ बेटा खुद को एक अच्छा पति साबित कर पाएगा?
क्या पिता-पुत्र की जोड़ी किस्मत के लिखे को मिटा पाएगी?
‘आखिरी ख्वाहिश’ प्रेम, संबंधों और त्याग की एक प्रेरक कहानी है, जो एक बार फिर साबित करती है कि एक अच्छी पत्नी बहुत अच्छे पति को बनाती है।
अजय के पांडे इससे पहले बेहद लोकप्रिय पुस्तक ‘यू आर द बेस्ट वाइफ’ लिख चुके हैं, जो उनके अपने जीवन की घटनाओं और दृष्टांतों पर आधारित है। इस पुस्तक ने न केवल कई दिलों को छू लिया है, और आज भी सर्वाधिक बिकनेवाली सूची में शामिल है।