Mahamanav Sardar by Dinkar Joshi

SKU: 9789350485842

सरदार जब भोजन के पश्‍चात् विश्राम कर रहे थे तब अचानक घनश्यामदास बिड़ला आ पहुँचे। विश्राम के बाद सरदार बैठक कक्ष में आए तब घनश्यामदासजी उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे। कल गांधीजी के साथ उनकी जो मुलाकात निश्चित हुई थी, उसके बारे में सरदार बिड़लाजी को जानकारी देना चाहते थे। पिछले कुछ दिनों में जो घटनाएँ घटित हुई थीं, उनकी वैसे तो बिड़लाजी को जानकारी थी ही। बापू के उपवास समाप्त हो गए, उसके विषय में जब बिड़लाजी ने राहत की भावना व्यक्त की तब सरदार ने कहा—
‘‘बिड़लाजी, इस उपवास से सांप्रदायिक तनाव शांत हो गया है, क्या ऐसा कोई मान सकता है।’’ इतना कहकर उन्होंने थोड़ी देर पहले ही उनके पास आए हुए निर्वासितों के समूह द्वारा वर्णित उनके अनुभव की बात बताई। ‘‘इन लोगों को हम शरणार्थियों के शिविर में पशुओं के समान बंद कर दें? विशेष रूप से जब यहाँ से पाकिस्तान चले गए मुसलमानों के मकान बंद पड़े हों और विशाल मसजिदें बिलकुल खाली हों तब ये निर्वासित कैसे शांत रह सकते हैं?’’
‘‘आप सही कह रहे हैं, सरदार!’’ बिड़लाजी ने कहा, ‘‘बापू के उपवास से किसी का हृदय परिवर्तन हुआ हो, ऐसा लगता तो नहीं।’’
‘‘क्योंकि उपवास के लिए यह बिलकुल गलत समय था।’’ सरदार ने कहा।
—इसी उपन्यास से

लौहपुरुष सरदार पटेल के जीवन के जाने-अनजाने प्रसंगों को उद्घाटित करता रोचक उपन्यास जो उस महामानव के अटल विश्वास और अद्‍भुत जिजीविषा का दिग्दर्शन कराता है।

Mahan Banane Ka Vigyan by Wallace D. Wattles

SKU: 9789389471106

सुप्रसिद्ध लेखक वॉलेस डेलोइस वॉटल्स की लिखी इस पुस्तक को वर्ष 1910 में एलिजाबेथ टाउन कंपनी ने प्रकाशित किया था। यह पुस्तक ‘एक ही सबकुछ है’ और ‘सब एक है’ (प्रस्तावना का पहला पेज) हिंदू दर्शनों पर आधारित है। यह पुस्तक जिस विचार पर आधारित है, उसे वॉटल्स ‘सोचने का खास तरीका’ कहते हैं। वॉटल्स का यह ‘खास तरीका’ उस ‘मानसिक उपचार आंदोलन’ से आया, जिसकी शुरुआत 19वीं सदी के मध्य में फिनीस पी. क्विमबी ने की थी। जैसा कि होरोविट्ज ने ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ के एक रिपोर्टर को बताया था, जब लोगों को क्विमबी की ओर से किए गए मानसिक उपायों से शारीरिक कष्ट या बीमारी से राहत महसूस होने लगी, तब वे सोचने लगे कि अगर मन की दशा का मेरी शारीरिक स्थिति पर अच्छा प्रभाव पड़ता है तो इसके और क्या-क्या फायदे हो सकते हैं? क्या इससे अमीर भी बना जा सकता है? क्या इससे मेरे घर में खुशियाँ आ सकती हैं? क्या प्यार और रोमांस की तलाश भी पूरी हो सकती है? इस तरह के सवालों का एक नतीजा वॉटल्स की ओर से पैसों के साथ ही शारीरिक समस्याओं के लिए क्विमबियाई ‘मानसिक उपचार’ की रणनीति के रूप में सामने आया।

Mahan Bharatiyaa Olympic Khiladi by Gulu Ezekiel & K. Arumugam

SKU: 9788177211139

भारत और भारतीयता
अखंड चेतना का पर्याय है भारत। यह मात्र एक भौगोलिक इकाई नहीं, जिसे नदियों, पहाड़ों, मैदानों या समुद्र-तटों से परिभाषित किया जा सके। यह तो संस्कृति की सनातन यात्रा का यायावर है। इसे हम आलोक का महापुंज भी कह सकते हैं। ‘भा’ का अर्थ प्रकाश ही तो होता है। भा+रत यानी प्रकाश में रत, प्रकाश में लवलीन, या यों कहें कि प्रकाश को अपने में समाया हुआ देश। विश्व में अनेक देश हैं—बड़े भी, छोटे भी; धनवान् भी, गरीब भी; साम्राज्यवादी भी, शोषित भी; सामंती भी और लोकतांत्रिक भी। फिर भारत की ऐसी क्या विशेषता है, जिसे हम एक अलग पहचान दे सकें? यह पहचान है आत्मप्रकाश के चिरंतन वैभव की। यह पहचान है असत्य से सत्य की ओर ले जानेवाली; अंधकार से आलोक की ओर ले जानेवाली तथा नश्वरता से अमरता की ओर ले जानेवाली उसकी अटूट सांस्कृतिक परंपरा की। शताब्दियाँ बीत गईं, पर यह पहचान अक्षुण्ण रही। परिस्थितियों के झंझावात इसे कभी भी धूमिल नहीं कर सके, न कभी कर सकेंगे।
हमारे पर्वों-त्योहारों में, हमारे पूजा और अनुष्ठानों में, हमारे लौकिक रीति-रिवाजों में, हमारे हर्ष और शोक में या यों कहिए कि हमारे संपूर्ण लोक-व्यवहार में इसी निधि की, यानी भारतीयता की अखंड छाप बनी रही। तभी तो ‘यूनान, मिस्र, रोमाँ, सब मिट गए जहाँ से/कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी।’
भारत और भारतीयता को विस्तृत आलोक में समझानेवाली एक ज्ञानपरक पुस्तक।

Mahan Chanakya Ki Jeevan Gatha by Mahesh Sharma

SKU: 9789384343088

आचार्य विष्णुगुप्‍त चाणक्य अपने गुणों से मंडित, राजनीति विशारद् आचार-विचार के मर्मज्ञ, कूटनीति में सिद्धहस्त एवं एक कठोर गुरु के रूप में विख्यात हैं और राजनीतिकारों व कूटनीतिकों के आदर्श हैं ।
मौर्यवंश की स्थापना आचार्य चाणक्य की एक महती उपलब्धि है । यह वह समय था, जब मौर्यकाल के प्रथम सिंहासनारूढ़ चंद्रगुप्‍त मौर्य शासक थे । उस समय चाणक्य राजनीति के गुरु थे । आज भी कुशल राजनीति विशारद् को चाणक्‍य की संज्ञा दी जाती है । चाणक्य ने संगठ‌ित संपूर्ण आर्यावर्त का स्वप्न देखा था, तदनुरूप उन्होंने सफल प्रयास किया ।
उन्होंने नंदवंश को समूल नष्‍ट कर उसके स्थान पर अपने सुयोग्य एवं मेधावी वीर शिष्य चंद्रगुप्‍त मौर्य को शासक पद पर सिंहासनारूढ़ करके अपनी जिस विलपर प्रतिभा का परिचय दिया, उससे समध्य विश्‍व परिचित है ।
चाणक्य चंद्रगुप्‍त मौर्य के महामंत्र गुरु, हितैषी तथा राज्य के संस्थापक 9– चंद्रगुप्‍त मौर्य को राजा पद पर प्रति‍ष्‍ठ‌ित करने का कार्य इन्हीं के बुद्धि-कौशल का परिणाम था । उन्हें भारत के एक महत् राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री के रूप में जए जाता है । उनके सिद्धांत, परिभाषाएँ, सूत्र और वचन आज भी प्रासंगिक हैं ।
ऐसे महान् रणनीतिज्ञ व समाजशास्‍त्री आचार्य चाणक्य की प्रामाणिक एवं प्रेरणाप्रद जीवनगाथा ।

Mahan Karmayogi : Jannayak Karpoori Thakur (1) by Dr. Bheem Singh

SKU: 9789350485576

सागरवत् गंभीर, आकाशवत् विशाल, दिशावत् विस्तीर्ण एवं गंगावत् पवित्र जननायक श्री कर्पूरी ठाकुर का जन्म 24 जनवरी, 1924 को बिहार के समस्तीपुर जिलांतर्गत पितौझिआ ग्राम में हुआ। उन्होंने 1940 में मैट्रिक की परीक्षा पटना विश्‍वविद्यालय से द्वितीय श्रेणी में पास की। 1942 का असहयोग आंदोलन छिड़ गया तो उसमें कूद पड़े। परिणामस्वरूप 26 महीने तक भागलपुर कैंप जेल में जेल-यातना भुगतने के उपरांत 1945 में रिहा हुए।
1948 में आचार्य नरेंद्रदेव एवं श्री जयप्रकाश नारायण के समाजवादी दल में प्रादेशिक मंत्री बने। सन् 1967 के आम चुनाव में कर्पूरी ठाकुर के नेतृत्व में संसोपा संयुक्‍त विधायक दल बड़ी ताकत के रूप में उभरी। 1970 में उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बनाया गया। 1973-77 में वे लोकनायक जयप्रकाश के छात्र-आंदोलन से जुड़ गए। 1977 में समस्तीपुर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से सांसद बने। 24 जून, 1977 को पुन: मुख्यमंत्री बने। फिर 1980 में मध्यावधि चुनाव हुआ तो कर्पूरी ठाकुर के नेतृत्व में लोक दल बिहार विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरा और कर्पूरी ठाकुर नेता बने।
कर्पूरी ठाकुर सदैव दलित, शोषित और वंचित वर्ग के उत्थान के लिए प्रयत्नशील रहे और संघर्ष करते रहे। उनका सादा जीवन, सरल स्वभाव, स्पष्‍ट विचार और अदम्य इच्छाशक्‍त‌ि बरबस ही लोगों को प्रभावित कर लेती थी और लोग उनके विराट व्यक्‍त‌ित्व के प्रति आकर्षित हो जाते थे। बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में उसे प्रगति-पथ पर लाने और विकास को गति देने में उनके अपूर्व योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा।
कर्मयोगी कर्पूरी ठाकुर के समर्पित, त्यागमय, समाजोपयोगी प्रेरणाप्रद जीवन का दिग्दर्शन कराता ग्रंथ।

Mahan Karmayogi : Jannayak Karpoori Thakur (2) by Dr. Bheem Singh

SKU: 9789350485583

सागरवत् गंभीर, आकाशवत् विशाल, दिशावत् विस्तीर्ण एवं गंगावत् पवित्र जननायक श्री कर्पूरी ठाकुर का जन्म 24 जनवरी, 1924 को बिहार के समस्तीपुर जिलांतर्गत पितौझिआ ग्राम में हुआ। उन्होंने 1940 में मैट्रिक की परीक्षा पटना विश्‍वविद्यालय से द्वितीय श्रेणी में पास की। 1942 का असहयोग आंदोलन छिड़ गया तो उसमें कूद पड़े। परिणामस्वरूप 26 महीने तक भागलपुर कैंप जेल में जेल-यातना भुगतने के उपरांत 1945 में रिहा हुए।
1948 में आचार्य नरेंद्रदेव एवं श्री जयप्रकाश नारायण के समाजवादी दल में प्रादेशिक मंत्री बने। सन् 1967 के आम चुनाव में कर्पूरी ठाकुर के नेतृत्व में संसोपा संयुक्‍त विधायक दल बड़ी ताकत के रूप में उभरी। 1970 में उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बनाया गया। 1973-77 में वे लोकनायक जयप्रकाश के छात्र-आंदोलन से जुड़ गए। 1977 में समस्तीपुर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से सांसद बने। 24 जून, 1977 को पुन: मुख्यमंत्री बने। फिर 1980 में मध्यावधि चुनाव हुआ तो कर्पूरी ठाकुर के नेतृत्व में लोक दल बिहार विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरा और कर्पूरी ठाकुर नेता बने।
कर्पूरी ठाकुर सदैव दलित, शोषित और वंचित वर्ग के उत्थान के लिए प्रयत्‍नशील रहे और संघर्ष करते रहे। उनका सादा जीवन, सरल स्वभाव, स्पष्‍ट विचार और अदम्य इच्छाशक्‍त‌ि बरबस ही लोगों को प्रभावित कर लेती थी और लोग उनके विराट व्यक्‍त‌ित्व के प्रति आकर्षित हो जाते थे। बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में उसे प्रगति-पथ पर लाने और विकास को गति देने में उनके अपूर्व योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा।
कर्मयोगी कर्पूरी ठाकुर के समर्पित, त्यागमय, समाजोपयोगी प्रेरणाप्रद जीवन का दिग्दर्शन कराता ग्रंथ।

Mahan Khagolvid-Ganitagya Aryabhat by Dinanath Sahani

SKU: 9789350481387

कभी-कभी सही वैज्ञानिक सिद्धांत भी सदियों तक स्वीकार नहीं किए जाते। उन्हें प्रस्तुत करनेवाले वैज्ञानिक लंबे समय तक गुमनाम और उपेक्षित रहते हैं। विज्ञान के इतिहास में इस तरह के अनेक उदाहरण मिलते हैं। ऐसा ही एक उदाहरण है—आर्यभट और गणित-ज्योतिष से संबंधित उनका क्रांतिकारी कृतित्व।
आर्यभट प्राचीन भारत के एक सर्वश्रेष्‍ठ गणितज्ञ-खगोलविद् थे। पाश्‍चात्य विद्वान् भी स्वीकार करते हैं कि आर्यभट अपने समय (ईसा की पाँचवीं-छठी सदी) के एक चोटी के वैज्ञानिक थे।
आर्यभट भू-भ्रमण का सिद्धांत प्रस्तुत करनेवाले पहले भारतीय हैं। उन्होंने सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के वैज्ञानिक कारण दिए हैं।
आर्यभट ने वृत्त की परिधि और इसके व्यास के अनुपात का मान 3.1416 दिया है, जो काफी शुद्ध मान है। इसे भी उन्होंने ‘आसन्न’ यानी ‘सन्निकट’ मान कहा है।।
त्रिकोणमिति की नींव भले ही यूनानी गणितज्ञों ने डाली हो, परंतु पाश्‍चात्य विद्वान् भी स्वीकार करते हैं कि आज सारे संसार में जो त्रिकोणमिति पढ़ाई जाती है, वह आर्यभट की विधि पर आधारित है।
‘आर्यभटीय’ भारतीय गणित-ज्योतिष का पहला ग्रंथ है, जिसमें संख्याओं को शून्ययुक्‍त दाशमिक स्थानमान पद्धति के अनुसार प्रस्तुत किया गया है। आर्यभट ने वर्णमाला का उपयोग करके एक नई अक्षरांक-पद्धति को जन्म दिया।
जिन आर्यभट को अपनी विद्वत्ता के कारण ज्योतिर्विदों में बहुत गरिमापूर्ण स्थान प्राप्‍त था, उन्हीं के जीवन और कृतित्व का कांतिकारी दस्तावेज है यह पुस्तक।

Mahan Krantiveer Rasbehari Bose  by  swatantra Kumar

SKU: 9789384343606

रासबिहारी बोस भारत के एक क्रांतिकारी नेता थे, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध गदर षड्यंत्र एवं आजाद हिंद फौज के संगठन में महत्त्वपूर्ण काम किए। वे बचपन से ही देश की स्वतंत्रता के स्वप्न देखा करते थे। क्रांतिकारी गतिविधियों में उनकी गहरी दिलचस्पी थी। उन्होंने न केवल भारत में कई क्रांतिकारी गतिविधियों का संचालन करने में अग्रणी भूमिका निभाई, अपितु विदेश में रहकर भी वे भारत को स्वतंत्रता दिलाने के प्रयासों में आजीवन लगे रहे। दिल्ली में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड चार्ल्स हार्डिंग पर बम फेंकने की योजना बनाने, गदर की साजिश रचने और बाद में जापान जाकर इंडियन इंडिपेंडेंस लीग और आजाद हिंद फौज की स्थापना करने में रासबिहारी बोस की प्रभावी भूमिका रही। स्वतंत्रता संग्राम में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। क्रांतिकारी जतिन मुखर्जी की अगुवाई वाले ‘युगांतर’ नामक क्रांतिकारी संगठन के अमरेंद्र चटर्जी से परिचय हुआ और वे बंगाल के क्रांतिकारियों के साथ जुड़ गए। बाद में श्रीअरबिंद घोष के राजनीतिक शिष्य रहे जतींद्रनाथ बनर्जी उर्फ निरालंब स्वामी के संपर्क में आने पर संयुक्त प्रांत (वर्तमान उत्तर प्रदेश) और पंजाब के प्रमुख आर्य समाजी क्रांतिकारियों के संपर्क में आए।
भारतीय स्वातंत्र्य समर की हुतात्माओं की लंबी शृंखला की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी में प्रमुख रासबिहारी बोस की प्रेरक जीवनगाथा।

Mahan Rashtravadi Dadabhai Nauroji by Prakhar Kundan

SKU: 9789384344610

‘द ग्रैंडमैन ऑफ इंडिया’ के नाम से विख्यात दादाभाई नौरोजी ऐसे व्यक्तित्व के धनी थे कि जो भी उनके संपर्क में आता, वह उनसे प्रभावित हुए बिना न रहता था। यह कहना अप्रासंगिक न होगा कि वे एक साधारण परिवार में जनमे असाधारण व्यक्ति थे।
दादाभाई ने न केवल एक शिक्षाविद् के रूप में, बल्कि एक समाजसुधारक के रूप में भी कार्य किया। उन्होंने भारतीयों के हितों और अधिकारों की आवाज ब्रिटेन की संसद् में भी उठाई। यही नहीं, बल्कि वे ऐसे प्रथम भारतीय भी बने, जिन्हें ब्रिटेन की संसद् का सदस्य चुना गया। यह दादाभाई के व्यक्तित्व का ही प्रभाव था कि भारतीय ही नहीं, बल्कि अंग्रेज भी उनका बहुत सम्मान किया करते थे।
दादाभाई नौरोजी ही वे पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने ‘स्वराज्य’ का नारा देकर स्वशासन की माँग की थी। दादाभाई ही वे पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने अपनी विलक्षण योग्यता से भारत में प्रति व्यक्ति आय का आकलन किया और संपन्न भारत के गरीब भारतीयों की दयनीय दशा स्पष्ट करते हुए अंग्रेज शासकों द्वारा किए जा रहे शोषण की पोल खोली।
भारत माँ के अमर सपूत दादाभाई नौरोजी के प्रेरक जीवन पर प्रकाश डालती पठनीय जीवनगाथा।

Mahaparakrami Maharana Pratap by Acharya Mayaram ‘Patang’

SKU: 9788194444091

महाराणा प्रताप का नाम बहादुर राजाओं की सूची में स्वर्ण अक्षरों में उत्कीर्ण है, जिन्होंने अपने जीवन का बलिदान देकर इस देश के राष्ट्र, धर्म, संस्कृति और स्वतंत्रता की रक्षा की।
महाराणा प्रताप के शासनकाल के समय दिल्ली में अकबर मुगल शासक था। उसकी नीति अन्य राजाओं को अपने नियंत्रण में लाने के लिए हिंदू राजाओं की ताकत का उपयोग करना था। कई राजपूत राजाओं ने अपनी गौरवशाली परंपराओं को त्यागते हुए अपनी बेटियों और बहुओं को पुरस्कार व सम्मान पाने के उद्देश्य से अकबर के हरम में भेजा।
महाराणा प्रताप की एकमात्र चिंता अपनी मातृभूमि को मुगलों के चंगुल से तुरंत मुक्त करना था। इसलिए उन्होंने घोषणा की कि, ‘मैं शपथ लेता हूँ कि जब तक चित्तौड़ को मुक्त नहीं करा लेता, तब तक सोने-चाँदी की प्लेटों में भोजन नहीं करूँगा, नरम बिस्तर पर नहीं सोऊँगा और महल की बजाय पत्ता-थाली पर खाना खाऊँगा, फर्श पर सोऊँगा और झोंपड़ी में रहूँगा। मैं तब तक दाढ़ी नहीं बनाऊँगा, जब तक चित्तौड़ को मुक्त नहीं कर दिया जाता।’’
22,000 सैनिकों की महाराणा प्रताप की सेना हल्दीघाट में अकबर के 2,00,000 सैनिकों के सामने आ डटी।
उनके वफादार घोड़े चेतक ने भी अपनी जान जोखिम में डालकर अपने स्वामी की जान बचा ली और स्वयं अमर हो गया।
महाराणा प्रताप पहाड़ों, जंगलों और घाटियों में भटकते रहे। भामाशाह ने उनकी मदद की। महाराणा प्रताप ने मेवाड़ को बचाने के लिए 12 साल तक संघर्ष किया। उन्होंने बहुत कष्ट झेला, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं किया।
एक महायोद्धा की अविस्मरणीय गाथा।

Mahapurushon Ka Bachpan by Mohandas Namishray

SKU: 9789386870131

बचपन जीवन की ऐसी आधारशिला है, जहाँ से निर्माण प्रक्रिया की शुरुआत होती है। किसी भी महापुरुष के व्यक्तित्व और कृतित्व में सकारात्मक तत्त्व जुड़ते हैं, जो उसे आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होते हैं। व्यक्ति गाँव में रहे या शहर में, गरीब हो या अमीर, हर व्यक्ति के जीवन में घटनाएँ होती ही हैं और दुर्घटनाएँ भी। लेखक ने इस पुस्तक में ऐसे महापुरुषों के बचपन को बेबाकी से रेखांकित किया है, जिन्होंने गरीबी की मार को झेलने के साथ-साथ सामाजिक विषमता को भी भोगा है। बावजूद इसके उन्होंने जीवन के मूल्य को समझते हुए अपने पथ का निर्माण किया, जो बाद की पीढ़ी के लिए प्रेरक और आदर्श बना।
चूँकि नैमिशराय लेखक और पत्रकार के साथ सामाजिक कार्यकर्ता भी रहे हैं, इसलिए उन्होंने ऐसे महापुरुषों के त्रासदी झेलते हुए बचपन को अपने शोध और लेखन का केंद्र बनाया, जिनके कार्यों का विश्लेषण न सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर हुआ, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जगत् में भी उन्हें ख्याति मिली। ऐसे महापुरुषों के बचपन की गतिविधियों से पाठक अवश्य ही रूबरू होंगे।
सच कहा जाए तो लेखक ने ‘महापुरुषों का बचपन’ नामक इस पुस्तक के माध्यम से ऐसे रचना-संसार को बच्चों के सामने रखने का प्रयास किया है, जिससे आज का बचपन महापुरुषों के कल के बचपन से अवश्य ही रिश्ते बनाएगा और उनके जीवन-आदर्शों को अपनाकर प्रगति पथ पर भी अग्रसर होगा।

Mahapurushon Ki Shikshaprada Balkathayen by Surendra Singh Negi

SKU: 9789386936103

संसार में जितने भी सफल व्यक्ति अथवा महापुरुष हुए हैं, इसलिए नहीं कि वे अलौकिक प्रतिभा के धनी थे अथवा साधन-संपन्न थे, बल्कि इसलिए कि वे महान् व्यक्तित्व के स्वामी थे। विश्व में महापुरुषों और सफल व्यक्तियों की जीवनियाँ हमें बताती हैं कि सभी ने अपने व्यक्तित्व का विकास कर जीवन को अनुशासित किया और मानव-कल्याण का संदेश दिया।
महाभारत काल के एक अत्यंत गरीब व साधनहीन बालक एकलव्य में व्यक्तित्व निर्माण के सभी गुण मौजूद थे। उसमें सर्वश्रेष्ठ धनुर्धारी बनने की इतनी ललक थी कि वह अपनी सकारात्मक सोच के साथ अंधकार से प्रकाश की किरण का आभास करता हुआ एकाग्रचित्त और कड़े अम्यास के बलबूते पर ही जीवन के उद्देश्य तक पहुँचने में सफल हुआ था।
प्रस्तुत पुस्तक ‘महापुरुषों की शिक्षाप्रद बालकथाएँ’ में साहित्यकारों, राजनेताओं, दार्शनिकों, समाज-सुधारकों की प्रेरक कथाओं को समाहित किया गया है। ये कथाएँ मानवीय गुण, यथा परोपकार, सदाचार, सेवा, कर्मशीलता, धैर्य आदि का संचार करेंगी।
विश्वास है कि यह कथा-संकलन सभी पाठकों के जीवन में नई स्फूर्ति का संचार करते हुए उनमें आत्मविश्वास पैदा करेगा।

Maharshi Arvind Ghosh by Kaushal Kishor

SKU: 9788177211934

अरविंद घोष का जन्म 15 अगस्त, 1872 को कलकत्ता में हुआ था। उनके पिता का नाम कृष्णधन और माता का नाम स्वमलता था। बंगाली साहित्य के जाने-माने विद्वान् राज नारायण बोस अरविंद के नाना थे। धार्मिक गुण और साहित्यिक क्षमताएँ उन्हें अपनी माता के वंश से विरासत में मिलीं। उनके पिता ने इंग्लैंड से डॉक्टरी पढ़ी थी।
अपने पिता की इच्छा-पूर्ति करते हुए उन्होंने भारतीय सिविल सर्विस (ICS) की परीक्षा दी और अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हुए; लेकिन घुड़सवारी की परीक्षा में असफल हो जाने के कारण उन्हें भारत सरकार की सेवा का अवसर नहीं मिला।
वर्ष 1908 से वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने लगे। उन्होंने अंग्रेजी दैनिक ‘वंदे मातरम्’ का संपादन किया और अपने बेबाक आलेखों से देश को जाग्रत् करने का कार्य किया। उन्होंने ब्रिटिश सामान, ब्रिटिश न्यायालय और अन्य वस्तुओं का खुलेआम बहिष्कार किया।
अलीपुर बम केस उनके जीवन का एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। उन्हें एक साल के लिए अलीपुर जेल में डाल दिया गया। वहाँ उन्होंने भगवद्गीता का गहन अध्ययन किया और अपने भावी आध्यात्मिक जीवन की नींव रखी।
श्रीअरविंद ने मानव जाति की सहायता के लिए विश्व-प्रसिद्ध आश्रम की स्थापना की।
एक कवि, विद्वान्, योगी, बहुमुखी प्रतिभा के धनी अरविंद सदैव मनुष्यमात्र के जीवन-उत्थान में लगे रहे।
प्रस्तुत है आध्यात्मिक क्षेत्र में भारत का मस्तक ऊँचा करनेवाले, उच्च कोटि के दार्शनिक, स्वतंत्रता-सेनानी और एक सच्चे योगी की अनुकरणीय-प्रेरणास्पद जीवनी।

Mahashakti Bharat by A P J Abdul Kalam

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महाशक्ति भारत
क्या भारत एक महाशक्ति बन सकता है? इस प्रश्न के उत्तर में राष्ट्रपति डॉ. कलाम ने महाशक्ति भारत के स्वरूप की जो रूपरेखा, योजनाओं का जो खाका प्रस्तुत किया है वह व्यावहारिक है। पिछले कुछ वर्षों में देश भर के पाँच लाख से अधिक छात्रों से भेंट कर उनसे ‘महाशक्ति भारत’ के स्वप्न को रचनात्मक कार्यों द्वारा साकार करने का आह्वान किया है और बताया है कि वे कौन से कारक हैं जिनसे भारत विकसित राष्ट्र बनने की राह पर चलता हुआ एक महाशक्ति के रूप में उभरकर सामने आने वाला है।
विश्व के पाँच विकसित राष्ट्रों में भारत एक हो, इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत देशवासियों के लिए डॉ. कलाम की योजनाएँ और दिशा-निर्देश विकसित भारत के उनके स्वप्न को साकार करने में मदद करते हैं।
अनेक महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत की वर्तमान स्थिति का आकलन करते हुए एक नया लक्ष्य निर्धारित करके उसे प्राप्त करने के उपायों का विश्लेषण करने के साथ ही देश के समग्र विकास में व्यक्तिगत और संस्थागत स्तर पर देशवासियों द्वारा निभाई जा सकनेवाली भूमिका को पुस्तक में रेखांकित किया गया है।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में, जब भारत की युवा शक्ति के समक्ष विकास के विभिन्न महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों—कृषि, उद्योग, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी में कार्य करने के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं, प्रस्तुत पुस्तक की महत्ता और बढ़ जाती है।
राष्ट्रपति डॉ. कलाम की पूर्व-प्रकाशित लोकप्रिय पुस्तकों की ही भाँति सभी छात्रों व युवाओं हेतु प्रेरणाप्रद और उपयोगी पुस्तक।
ा भारत एक महाशक्ति बन सकता है? इस
प्रश्न के उत्तर में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम ने महाशक्ति भारत के स्वरूप की जो रूपरेखा, योजनाओं का जो खाका प्रस्तुत किया है वह व्यावहारिक है। पिछले कुछ वर्षों में देश भर के पाँच लाख से अधिक छात्रों से भेंट कर उनसे ‘महाशक्ति भारत’ के स्वप्न को रचनात्मक कार्यों द्वारा साकार करने का आह्वान किया है और बताया है कि वे कौन से कारक हैं जिनसे भारत विकसित राष्ट्र बनने की राह पर चलता हुआ एक महाशक्ति के रूप में उभरकर सामने आने वाला है।
अनेक महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत की वर्तमान स्थिति का आकलन करते हुए एक नया लक्ष्य निर्धारित करके उसे प्राप्त करने के उपायों का विश्लेषण करने के साथ ही देश के समग्र विकास में व्यक्तिगत और संस्थागत स्तर पर देशवासियों द्वारा निभाई जा सकनेवाली भूमिका को पुस्तक में रेखांकित किया गया है।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में, जब भारत की युवा शक्ति के समक्ष विकास के विभिन्न महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों—कृषि, उद्योग, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी में कार्य करने के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं, प्रस्तुत पुस्तक की महत्ता और बढ़ जाती है।
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम की पूर्व-प्रकाशित लोकप्रिय पुस्तकों की ही भाँति सभी छात्रों व युवाओं हेतु प्रेरणाप्रद और उपयोगी पुस्तक।

Mahashweta by Sudha Murthy

SKU: 9788173153372

श्रीमती सुधा मूर्ति कन्नड साहित्य की सुधी लेखिका हैं। प्रस्तुत उपन्यास ‘महाश्वेता’ मानवीय संवेदना और सामाजिक संबंधन की एक अनूठी और सफल कृति है। अनुपमा और आनंद के दांपत्य-सूत्र में बँधने के बाद अनेक संघननशील घटनाएँ घटित होती हैं। विवाह के तुरत बाद आनंद मेडिकल की ऊँची पढ़ाई के लिए इंग्लैंड चला जाता है। इसी बीच अनुपमा को श्वेत कुष्ठ हो जाता है । अभिशप्त दांपत्य के दंश दोनों ओर चुभने लगते हैं। आनंद और अनुपमा के अलग- अलग चिंतन-अनुचितन के माध्यम से मानवीय अंतश्चिंतन और कठोरतम व्यथा- यात्रा का विश्वसनीय कथासूत्रण इस उपन्यास में किया गया है। शिल्प और स्थापत्य की दृष्टि से यह उपन्यास ‘सचल-सवाक्वत्’ सिद्ध हुआ है।
इस उपन्यास को पढ़कर एक युवक श्वेत कुष्ठग्रस्त एक कन्या से विवाह का प्रस्ताव किया और उस विवाह में सम्मिलित होने के लिए लेखिका को सादर आमंत्रित किया। इस उपन्यास की शिखर-सफलता और विनियोग-शक्ति का इससे बड़ा लोक- प्रमाणपत्र और क्या हो सकता है!

Mahatma Buddha Ki Kahaniyan by Bharat Lal Sharma

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महात्मा बुद्ध ने नश्वर संसार के ताप-कष्टों को दूर करने तथा जीवन का रहस्य जानने के लिए गृहत्याग किया और लंबे समय तक काया-कष्ट सहकर ज्ञान प्राप्त किया; उन्हें जीव-जगत् का बोध हुआ, इसलिए वे ‘बौद्ध’ कहलाए। उन्होंने मानवता को अहिंसा का उपदेश दिया।
कोई गूढ़ या ज्ञान की बात कितनी भी सरल भाषा में कही जाए, तो भी संपूर्ण समझ में नहीं आ पाती है; लेकिन उसे कहानी का रूप दे दिया जाए तो वह सहज ही हमेशा के लिए याद हो जाती है। महात्मा बुद्ध की ये कहानियाँ ऐसी ही हैं। इसमें उनके जीवन की घटनाओं तथा शिक्षाओं को सीधी-सरल भाषा में कहानियों के माध्यम से बताया गया है। ये छोटी-छोटी कहानियाँ अपने आप में अलग-अलग हैं और एक-दूसरी से जुड़ी हुई भी। लेकिन फिर भी कथा- रस से भरपूर हैं।
इस संकलन में संकलित अहिंसा, सदाचार, परोपकार और मानवीय मूल्यों को बतानेवाली रोचक-प्रेरक कहानियों का पठनीय संकलन।

Mahatma Gandhi Ki Jharkhand Yatra by Anuj Kumar Sinha

SKU: 9789353223199

यह संयोग है कि पिछले तीन साल से यानी 2016 से 2019 के बीच गांधीजी की चर्चा और बढ़ी है। 2016 में चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष की शुरुआत हुई, 2017 में सत्याग्रह शताब्दी वर्ष पर आयोजनों का सिलसिला चला। 2018 में गांधीजी के 150वें जयंती वर्ष की शुरुआत हुई है। अक्तूबर 2018 से अक्तूबर 2019 तक पूरी दुनिया में गांधीजी को केंद्र में रखकर विविध आयोजन होने हैं, हो रहे हैं। इस क्रम में गांधीजी के विविध आयामों से जुड़ी पुस्तकों को, दस्तावेजों को देखने की कोशिश की—खरीदकर, लाइब्रेरी से फोटोकॉपी करवाकर। साथियों-प्राध्यापकों-शोधार्थियों-पत्रकारों-विद्वज्जनों के सहयोग से। चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष पर बिहार को केंद्र में रखकर भी कई नई पुस्तकें आईं। प्रायः अधिसंख्य पुस्तकों को देखने का मौका मिला, लेकिन एक बात खटकती रही कि देश-दुनिया में गांधीजी पर इतनी बातें हो रही हैं, उनकी गतिविधियों से जुड़े छोटे-छोटे दस्तावेज भी बड़े रूप में, बड़े फलक पर सामने आ रहे हैं, पर गांधीजी के उन दिनों के दक्षिण बिहार (अब झारखंड) की यात्राओं का अध्याय क्यों छूटता जा रहा या नहीं आ पा रहा, जबकि चंपारण सत्याग्रह आंदोलन को एक आकार देने में दक्षिण बिहार, यानी अब का झारखंड एक अहम केंद्र की तरह था।
इस किताब में अनुज सिन्हा ने एक अहम इतिहास का दस्तावेजीकरण किया है। इतिहास जानना इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है कि भविष्य के सपनों या भविष्य की भव्य इमारत इतिहास की पुख्ता नींव पर ही खड़ी हो सकती है। इस दृष्टि से यह उल्लेखनीय काम है।

Mahatma Gandhi Ki Prerak Gathayen by Renu Saini

SKU: 9788189573768

पृथ्वी पर कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो एक मिसाल बन जाते हैं। सदियाँ गुजर जाती हैं, लेकिन ऐसे महान् व्यक्तियों की गाथाएँ और उनके प्रेरक विचार दिनप्रतिदिन सूरज की रोशनी की तरह पूरे विश्व में चमकते रहते हैं। मनुष्य को गलतियों का पुतला कहा जाता है। लेकिन कई मनुष्य जीवन में गलतियों से लगातार सीख लेते हुए कामयाबी की ओर बढ़ते रहते हैं और पूरे विश्व के सामने एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। महात्मा गांधी का व्यक्तित्व ऐसा ही है, जिनके बारे में मात्र कुछ शब्द कहना उसी प्रकार होगा, जिस प्रकार सूरज को दीपक दिखाना। उनकी अनेक ऐसी घटनाएँ और प्रसंग हैं, जो बच्चों और बड़ों को समान रूप से शिक्षा देते हैं। गांधीजी के जीवन से जुडे़ अनेक प्रसंग पढ़कर जहाँ रोमांच होता है, वहीं उन्हें श्रध्दावश नमन करने को हाथ स्वतः ही जुड़ जाते हैं। जाने कितने बरसों में गांधीजी जैसी शख्सियत का जन्म होता है।
वर्तमान समय में तो उनके विचारों और अहिंसक नीति का बच्चों और बड़ों तक पहुँचना और भी जरूरी है, क्योंकि आज स्वार्थ की भावना इस कदर बढ़ गई है कि लोगों के हृदयों से संवेदनाएँ समाप्त हो गई हैं। उन संवेदनाओं और अहिंसात्मक नीति को बचाए रखना आवश्यक है, तभी देश दिनप्रतिदिन प्रगति की ओर बढ़ पाएगा। गांधीजी के अनुकरणीय जीवन की घटनाएँ अवश्य ही पाठकों को प्रेरित करेंगी और उनमें जीवनमूल्यों को स्थापित करेंगी। इसलिए उनके जीवन की चुनिंदा घटनाएँ यहाँ पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं।

Mahatma Gandhi Sahityakaron Ki Drishti Mein by Aarsu

SKU: 9788177212501

इतिहासकार, राजनीतिज्ञ, दार्शनिक, आध्यात्मिक आचार्य तथा समाजशास्त्रियों ने गांधीजी का मूल्यांकन अपनेअपने ढंग से किया है। भले ही गांधीजी कारयित्री प्रतिभा के उज्ज्वल साहित्यकार नहीं थे, तथापि उस श्रेणी के कई श्रेष्ठ साहित्यकारों ने गांधीजी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला है। समकालीन साहित्यकारों ने एक युगस्रष्टा के रूप में उन्हें अंगीकार किया था। टैगोर ने उन्हें ‘महात्मा’ पुकारा था। गांधीजी ने टैगोर को ‘गुरुदेव’ माना था। वह लेखकराजनीतिज्ञ के परस्पर आदर का युग था।
राष्ट्रीय आंदोलन के युग के हिंदी साहित्यकारों की गांधीस्मृतियाँ इधरउधर बिखरी पड़ी हैं। वह समताममता का युग था। आदर्श का आलोक उस युग के साहित्य की खूबी थी। कई साहित्यकार गांधीजी के संपर्क में आ सके थे। इसलिए उनकी रचनाओं में युग बोल उठा था। वे मानवीय मूल्यों के संरक्षक बन सके थे। कई प्रकार के फूल इधरउधर बिखरे पड़े हों तो उनका महत्व हम समझ नहीं पाएँगे। एक साधक आकर एक धागे में उन फूलों को कलात्मक ढंग से पिरो देता है तो हमें एक माला मिलती है। यह पुस्तक 20वीं सदी के कई महान् साहित्यकारों की गांधीस्मृतियों का पुष्पहार बन गई है।
विश्व भर के शांति प्रेमी आज आशान्वित होकर गांधीमार्ग की ओर देख रहे हैं। इसलिए उनके बारे में नई पीढ़ी को अनूठी सामग्रियों की जरूरत है! आशा है, यह पुस्तक सबके लिए एक प्रकाशस्तंभ बनेगी।

Mahaveer by Sanjay Krishna

SKU: 9789353221713

देश की आजादी में पत्र-पत्रिकाओं ने भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उस समय के आंदोलनों के दस्तावेजीकरण का काम इन पत्र-पत्रिकाओं ने बखूबी किया। जाने-अनजाने एक तरह से ये पत्रिकाएँ ‘इतिहास’ लेखन कर रही थीं। इन्हीं पत्रिकाओं में एक है बिहार से प्रकाशित साप्ताहिक—‘महावीर’। इस पत्रिका के बारे में जो जानकारी मिलती है, वह पर्याप्त नहीं, आधी-अधूरी है। लेकिन इस एक अंक में जो जानकारी मिलती है, वह दुर्लभ है। इस पत्रिका के बारे में पत्रकारिता के इतिहास की पुस्तकें भी सर्वथा मौन हैं।
लघु पत्रिकाओं के साथ यह दिक्कत तब भी थी, आज भी है। साधनों का अभाव और समय पर लेखकों का पर्याप्त और अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाने के बावजूद जो अंक निकला, वह कम महत्त्वपूर्ण नहीं है। दुर्भाग्य से ‘महावीर’ का यह ‘सत्याग्रह’ विशेषांक ही उपलब्ध है।
बिहार और झारखंड में स्वाधीनता आंदोलन का प्रामाणिक दस्तावेज है यह संकलन।

Mahavrati : Karmayogi Pracharak Sohan Singh by  gopal Sharma

SKU: 9789386231642

परम पूजनीय सरसंघचालक माननीय मोहनराव भागवतजी का उनके बारे में कथन ही उनके जीवन का निचोड़ है। विश्व-कल्याण, राष्ट्रधर्म, कार्यकर्ता और मनुष्यत्व के लिए समर्पित सोहन सिंहजी महाव्रती के रूप में उभरकर आते हैं। वीरव्रती और कर्मयोगी सोहन सिंहजी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उन नींव के प्रस्तर—अभेद्य दीवार बने वरिष्ठ प्रचारकों में शामिल हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय मूल्यों की स्थापना के लिए अपना सारा जीवन तपस्वी की भाँति गला दिया। जब संपूर्ण विश्व में आतंकवाद अट्टहास कर रहा है, भारत में राष्ट्रीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा किया जा रहा है, वैयक्तिक स्वार्थ समाज-जीवन पर हावी होते जा रहे हैं और इन सबके मुकाबले ईश्वरीय और सकारात्मक शक्ति के रूप में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का संवाहक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ही दिखाई देता है। ऐसे में सोहन सिंहजी का स्मरण और उनके द्वारा रखे गए आदर्श का अनुसरण अति सामयिक है, राष्ट्र-निर्माण के संकल्प के लिए प्रेरणा है।

Mahayogi Gorakhnath by Dr. Phoolchand Prasad Gupt

SKU: 9789353226183

महायोगी गुरु श्री गोरखनाथ के लोकपावन चरित्र के बहुआयामी उपदेश लोक-जीवन को अनुप्राणित करते हैं। गोरखनाथजी के जीवन-चरित और उनके लोक-संदेशों को लेकर डॉ. फूलचंद प्रसाद गुप्त की पुस्तक ‘महायोगी गोरखनाथ’ अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। पाठक इसके माध्यम से महायोगी गोरखनाथ को जान समझ सकेंगे।

Maheep Singh Ki Lokpriya Kahaniyan by Maheep Singh

SKU: 9789351869016

‘‘ओह! बड़े ही नेक बंदे थे! खुदा उन्हें अपनी दरगाह में जगह दे!’’ उनमें से एक ने अफसोस प्रकट करते हुए कहा। कुछ क्षणों के लिए सब में खामोशी छा गई।
‘‘भरजाई, तेरे बच्चे कैसे हैं?’’
‘‘वाहेगुरु की किरपा है, सब अच्छे हैं?’’ माँ ने धीरे से कहा।
‘‘अल्लाह उनकी उम्र दराज करे।’’ कई आवाजें एक साथ आईं।
‘‘भरजाई, तुम अपने बच्चों को लेकर यहाँ आ जाओ।’’ किसी एक ने कहा और कितनों ने दुहराया, ‘‘भरजाई, तुम लोग वापस आ जाओ… वापस आ जाओ।’’ प्लेटफॉर्म पर खड़ी कितनी आवाजें कह रही थीं—
‘‘वापस आ जाओ।’’
‘‘वापस आ जाओ।’’
मैंने सुना, मेरे पीछे खड़े मामाजी कुढ़ते हुए कह रहे थे, ‘‘हूँ…बदमाश कहीं के! पहले तो हमें मार-मारकर यहाँ से निकाल दिया, अब कहते हैं, वापस आ जाओ…लुच्चे!’’
प्लेटफॉर्म पर खड़े लोगों ने उनकी बात नहीं सुनी थी। वे कहे जा रहे थे—
‘‘भरजाई, तुम अपने बच्चों को लेकर वापस आ जाओ। बोलो भरजाई, कब आओगी? अपना गाँव तो तुम्हें याद आता है? भरजाई, वापस आ जाओ…।’’
—इसी संग्रह से
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सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. महीप सिंह की लेखनी से निःसृत कहानियों ने मानवीय संवेदना, सामाजिक सरोकार, जातीय संघर्ष, पारस्परिक संबंधों का ताना-बाना प्रस्तुत किया। पठनीयता से भरपूर इन कहानियों ने वर्ग-संघर्ष और सामाजिक कुरीतियों का जमकर विरोध किया।
प्रस्तुत है उनकी लोकप्रिय कहानियों का संग्रहणीय संकलन।

Mahila Adhikar Aur Manav Adhikar by Mamta Mahrotra

SKU: 9789380183374

महिला अधिकार और मानव अधिकार—ममता महरोत्रा

भारतीय संस्कृति में नारी को एक महान् शक्‍ति के रूप में आदर-सम्मान दिया जाता रहा है। वैदिक काल में इस देवभूमि की नारी सामाजिक-धार्मिक व आध्यात्मिक क्षेत्रों में पुरुष की सहभागिनी रहती थी।
महिलाओं को भारतवर्ष में कानून-प्रदत्त तमाम अधिकार प्राप्‍त हैं। महिलाओं को घरेलू मामलों संबंधी, जायदाद संबंधी, कार्यक्षेत्र संबंधी, व्यक्‍तिगत सुरक्षा-संरक्षण संबंधी, पंचायती राज व्यवस्था में भागीदारी संबंधी और भी तमाम हितकारी कानूनों का संरक्षण प्राप्‍त है; लेकिन परिवार व रिश्तों को सँजोने-सँवारने का महत्त्वपूर्ण दायित्व निभानेवाली आम महिला आज भी अपने अधिकारों से वंचित है। जागरूकता व शिक्षा के अभाव में आम महिला के साथ पारिवारिक स्तर पर सबकुछ ठीक-ठाक नहीं है।
‘महिला अधिकार और मानव अधिकार’ महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद‍्देश्‍य की प्रतिपूर्ति हेतु सृजित की गई है। क्योंकि जानकारी और जागरूकता के अभाव में हम चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते।
आशा है, कामकाजी महिलाओं सहित गृहिणियों, व्यवसायी एवं तरक्कीपसंद महिलाओं के लिए भी यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी।

Main Albert Einstein Bol Raha Hoon by Ed. Ashutosh Garg

SKU: 9789383111497

अल्बर्ट आइंस्टाइन दुनिया के सबसे बुद्धिमान लोगों में से एक थे। विज्ञान के क्षेत्र में उनका योगदान विलक्षण एवं अविस्मरणीय है। उनकी सोच अपने समय से इतनी उन्नत थी कि उनके द्वारा किए गए शोध एवं अन्य कार्य आज भी विज्ञान एवं ऊर्जा के क्षेत्र में कार्यरत वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
आइंस्टाइन की वैज्ञानिक उपलब्धियों के अतिरिक्त उनके शोध-पत्रों एवं दस्तावेजों के माध्यम से उनकी मानवीय विशेषताओं की भी पर्याप्त जानकारी प्राप्‍त होती है, जिनसे पता चलता है कि सादगी, शांतिप्रियता और आडंबररहित जीवन उनके व्यक्‍त‌ित्व के चारित्रिक गुण थे। इसके अतिरिक्‍त वे मजाकिया स्वभाव के थे और जीवन की छोटी-छोटी बातों में भी हास्य-विनोद खोज लिया करते थे।
प्रस्तुत पुस्तक में अल्बर्ट आइंस्टाइन के विभिन्न विषयों पर व्यक्‍त विचारों को वर्णानुक्रम में संकलित किया गया है। इन विचारों से ज्ञान, विज्ञान, समाज और मानवता के विविध विषयों पर उनकी अंतर्दृष्टि जानने को मिल सकेगी।

Main Amit Shah Bol Raha Hoon by Amit Shah

SKU: 9789351862543

अमित शाह भाजपा के अब तक के सबसे सफल रणनीतिकार हैं। वे लगातार भाजपा की जीत की पटकथा लिख रहे हैं। कोई उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘तुरुप का पत्ता’ कहता है तो कोई भाजपा का ‘चाणक्य’। जहाँ भाजपा कमजोर है, उन राज्यों में पार्टी का कोनेकोने तक विस्तार ही उनका इकलौता मिशन है। अमित शाह राजनीति के रसायनशास्त्र से वाकिफ हैं। वे खाँटी स्वयंसेवक हैं, पर विचारधारा में पगे कठमुल्ला नहीं। सफलता के लिए साम, दाम, दंड, भेद उनके औजार हैं। चुनावी रणनीति में मर्यादा उनके आड़े नहीं आती। इसे इत्तेफाक ही कहेंगे कि गुजरात विश्वविद्यालय के केमिस्ट्री के इस छात्र को राजनीति और समाज की केमिस्ट्री बूझना आता है। उत्तर प्रदेश में भाजपा की कामयाबी से तो यही लगता है। अमित शाह भाजपा के महानायक साबित हो रहे हैं। उनकी हिम्मत, निजी सोच और जोखिम लेने का जज्बा उनकी संभावनाओं को अंतहीन बनाता है। यह पुस्तक अमित शाह के कुछ साक्षात्कारों का संकलन है; जिनसे उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता, संगठनकौशल और देशराग का अनुमान हो पाएगा।

Main Aryaputra Hoon by Manoj Singh

SKU: 9789390315161

‘‘हे आर्य! कोई बाहरी आक्रमणकारी जब किसी अन्य देश में प्रवेश करता है तो बाहर से भीतर आता है या भीतर से बाहर जाता है?’’
‘‘यह कैसा प्रश्न हुआ, आर्या! स्वाभाविक रूप से बाहर से भीतर
आता है।’’
‘‘और इसी स्वाभाविक तर्क के आधार पर ही मैं भी एक प्रश्न पूछना चाहूँगी। अगर यह मान लिया जाए कि हम आर्य बाहर से आए थे तो पश्चिम दिशा से प्रवेश करने पर सर्वप्रथम सिंधु के तट पर बसना चाहिए था और फिर पूरब दिशा की ओर बढ़ना चाहिए था। लेकिन वेद और पुरातत्त्व के प्रमाण कहते हैं कि हम आर्य पहले सरस्वती के तट पर बसे थे, फिर सिंधु की ओर बढ़े। यही नहीं, सरस्वती काल से भी पहले हम आर्यों का इतिहास विश्व की प्राचीनतम नगरी शिव की काशी और मनु की अयोध्या से संबंधित रहा है। और ये दोनों नगर भारत भूखंड के भीतर सरस्वती नदी की पूरब दिशा में हैं अर्थात् हम आर्य पूरब से पश्चिम दिशा की ओर बढ़े थे।…तो फिर ये कैसे बाहरी (?) आर्य थे जो भीतर से बाहर (!!) की ओर बढ़े थे।…झूठ के पाँव नहीं होते हैं आर्य, ये झूठे इतिहासकार आपके प्रामाणिक प्रश्नों के उत्तर क्या ही देंगे, जब ये मेरे इस सरल तर्क और सामान्य तथ्य पर बात नहीं कर सकते।’’
‘‘असाधारण तर्क आर्या!’’

Main Atal Bihari Vajpayee Bol Raha Hoon by Rajasvi

SKU: 9789386001887

विलक्षण प्रतिभा के धनी पूर्व प्रधानमंत्री जननायक अटल बिहारी वाजपेयी को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारतरत्न’ से सम्मानित किया गया। उनके बहुआयामी व्यक्तित्व और कृतित्व का स्मरण आना अत्यंत सहज और स्वाभाविक है। वे न केवल मंत्रमुग्ध कर देनेवाले वक्ता और कुशल प्रशासक रहे, अपितु अपने राजनीतिक विरोधियों का भी सम्मान करनेवाले और उनसे सम्मान पानेवाले नेता हैं।
प्रस्तुत पुस्तक को तीन खंडों में विभाजित कर पाठकों के लिए उपयुक्त और सरल ढंग से पाठ्य-सामग्री को समायोजित करने का प्रयास किया गया है। खंड-1 में अटलजी का ‘संक्षिप्त परिचय’ और अटलजी के प्रधानमंत्रित्व काल में उनके मीडिया सलाहकार रहे अशोक टंडनजी द्वारा वाजपेयीजी की कार्यशैली पर लिखा गया लेख दिया गया है। खंड-2 में वाजपेयीजी ने विभिन्न अवसरों पर सदन में, सदन से बाहर अथवा समाचार-पत्रों आदि में जो लिखा, उसके आधार पर ‘मैं अटल बिहारी वाजपेयी बोल रहा हूँ’ दिया गया है। खंड-3 में अटलजी को ‘भारतरत्न’ मिलने पर प्रतिक्रियाएँ प्रस्तुत की गई हैं। मुख्यतः पुस्तक का खंड-2 ही इसका शीर्षक ‘मैं अटल बिहारी वाजपेयी बोल रहा हूँ’ है, जबकि अन्य दोनों खंड अटलजी को समझने, उन्हें आत्मसात् करने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
सर्वप्रिय कविहृदय अटलजी के स्पष्ट विचार, दूरदर्शिता, चुटीली शैली और मर्म को छू लेनेवाली ओजस्वी वाणी के विशाल सागर की एक झलक मात्र देती है यह पठनीय पुस्तक।

Main Bhagat Singh Bol Raha Hoon by Anil Kumar

SKU: 9789380823249

भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन की धधकती ज्वाला के बिंब शहीद-ए-आजम भगत सिंह से सब परिचित हैं। युवावस्था में ही मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी। अपने जाँबाज साथियों के साथ उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ क्रांति का एक ऐसा मोरचा खोला कि अंग्रेजी शासन की चूलें हिल गईं।
भगत सिंह न केवल प्रखर क्रांतिकारी थे, अपितु एक दूरदर्शी व्यक्ति, गहन अध्येता व कुशल वक्ता भी थे। उनके विचार समाज एवं राष्ट्र को नई दिशा देनेवाले थे।
यह संकलन भारत माँ के वीर सपूत क्रांतियोद्धा भगत सिंह के सुविचारों से हमारा परिचय कराएगा और मार्ग प्रशस्त करेगा।

Main Bill Gates Bol Raha Hoon by Mahesh Sharma

SKU: 9789383111770

व्यापार, राजनीति और समाजसेवा के समृद्ध इतिहास से संपन्न सिएटल के एक परिवार में जनमे और पलेबढ़े बिल गेट्स ने सॉफ्टवेयर में अपनी रुचि को छोटी उम्र में ही पहचान लिया और कंप्यूटरों की प्रोग्रामिंग तेरह वर्ष की अवस्था में ही शुरू कर दी। सन् 1973 में बिल गेट्स हार्वर्ड विश्वविद्यालय में दाखिल हुए और वहाँ रहते हुए उन्होंने एम.आई.टी.एस. अल्तेयर में प्रथम माइक्रो कंप्यूटर के लिए प्रोग्रामिंग की एक भाषा ‘बेसिक’ विकसित की। अपने बचपन के मित्र पॉल ऐलन के साथ मिलकर सन् 1975 में खोली गई कंपनी ‘माइक्रोसॉफ्ट’ में अपनी संपूर्ण ऊर्जा लगाने के लिए उन्होंने अंततः हार्वर्ड छोड़ दिया।
आज अपनी दूरदर्शी सोच, कठोर परिश्रम और नवाचार के बल पर बिल गेट्स लोककल्याण के भी पर्याय बन चुके हैं। जैसे उद्यमशीलता उनका विशिष्ट गुण है, वैसे ही परोपकार भी उतना ही वैशिष्ट्यपूर्ण पक्ष है उनके व्यक्तित्व का।
प्रस्तुत पुस्तक में लाखों लोगों के प्रेरणास्रोत बिल गेट्स की प्रेरणाप्रद संक्षिप्त जीवनी और उनके अनमोल वचन संकलित हैं। यह पुस्तक सभी सुधी पाठकों के लिए संग्रहणीय एवं उपयोगी सिद्ध होगी।

Main Dalai Lama Bol Raha Hoon by Ed. Rajeev Mehrotra

SKU: 9789383111480

परम पावन दलाई लामा विश्‍व में नैतिकता और सदाचार के उच्चस्थ केंद्र हैं। तिब्बतियों के मानवाधिकारों और उनकी संस्कृति के संरक्षण के प्रयास में परम पावन राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं चाहते। वे तो समझौते की माँग भी नहीं करते, बल्कि ‘महान् चीनी जनता’ के साथ मिल-जुलकर काम करने की प्रतिबद्धता और सच्ची स्वायत्तता चाहते हैं। वे एक धार्मिक नेता हैं, जिनको लाखों लोग बुद्ध का अवतार मानते हैं।
मानवता के प्रति उनकी गहरी आस्था, उन्मुक्‍त हँसी, आत्मिक आनंद तथा स्वभावगत हास्य का अनुभव उनके सान्निध्य में रहकर ही किया जा सकता है। उनकी शांत, आश्‍वस्त करनेवाली ऊष्म ऊर्जा के सतत प्रवाह को शब्दों में बाँधना संभव नहीं।
परम पावन दलाई लामा बड़ी सहजता से अपने विचार रखते हैं। वे बोलते हैं तो उनके शब्द उनके व्यक्‍त‌िगत ज्ञान की गहनता, अंतर्दृष्‍ट‌ि और अपने जीवनकाल में प्राप्‍त अनुभव से परिपूर्ण होते हैं।
प्रस्तुत पुस्तक में समय-समय पर दिए गए उनके उद्बोधनों, संवाद तथा परिचर्चा से निकले सार को सूक्ति रूप में दिया गया है। ये सूक्तियाँ मानवता, नैकितकता, सामाजिकता और आदर्शों की अंतर्दृंष्टि देकर जीवन का आनंद बढ़ाने में मदद करेंगी।

Main Dale Carnegie Bol Raha Hoon by Mahesh Dutt Sharma

SKU: 9789386001955

महान् विचारक और उनके प्रेरक विचार सदा से ही मानव सभ्यता के दिग्दर्शक रहे हैं। इनके अनुभूत मौलिक चिंतन ने सदैव ही समाज और राष्ट्र-निर्माण की दिशा में महान् कार्य किया है। आज से वर्षों पहले इनके द्वारा कही-लिखी गई बातें आज भी उतनी ही प्रासंगिक और शाश्वत हैं, जितनी तब थीं।
दुनिया भर में महान् विचारकों की एक बृहत् शृंखला है। सुकरात, अरस्तु, प्लूटो, कन्फ्यूशियस, पाइथागोरस इत्यादि वे नाम हैं, जो विश्व-दर्शन में उच्च स्थान रखते हैं। इनके विचार व्यक्ति और व्यक्तित्व में आमूल-चूल परिवर्तन लाने में समर्थ हैं।
प्रस्तुत पुस्तक में विश्व में एक महान् विचारक डेल कारनेगी की संक्षिप्त जीवनी और उनके मौलिक विचारों का संकलन किया गया है, जो निश्चित ही हमारे मर्म को गहरे प्रभावित करने में सक्षम है। इनका अनुकरण हमारे जीवन को सार्थकता देने व राष्ट्र-निर्माण में योगदान करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

Main Deendayal Upadhyay Bol Raha Hoon by Amarjeet Singh

SKU: 9789383111695

‘कमल कीचड़ में ही खिलते हैं,’ यह उक्ति पं. दीनदयाल उपाध्याय पर ठीक बैठती है। निर्धनता में जन्म लेकर राष्ट्रचिंतक के शीर्ष पद पर सुशोभित होकर उन्होंने यह सिद्ध कर दिया। बाल्यकाल से ही दीनदयालजी कुशाग्र बुद्धि और अध्ययनशील प्रवृत्ति के रहे। दीनदयालजी जैसी कुशाग्रता, बौद्धिकता, कर्मठता, सहृदयता और अनुशासनप्रियता का बेजोड़ समुच्चय किसी में नहीं था। इसके चलते वे सभी के प्रिय प्रचारक बन चुके थे। इन्हीं विशेषताओं को देखकर एक बार परम पूजनीय श्रीगुरुजी ने उनकी सराहना करते हुए कहा था, ‘‘दिल को गरम तथा दिमाग को ठंडा रखने की कला केवल दीनदयाल को ही ज्ञात है। वे इसमें पूर्णतः निपुण हैं। दिल की गरमी ऊपर चढ़कर उनके दिमाग का संतुलन नहीं बिगाड़ सकती तथा दिमाग की ठंडक में नीचे आकर उनके दिल की गरमी को ठंडा करने की सामर्थ्य नहीं है।’’
दीनदयालजी जिस क्षेत्र में गए, वहाँ समर्पण भाव से कार्य किया और अभूतपूर्व सफलता पाई। पत्रकारिता में उन्होंने ज्वलंत लेख लिखकर ख्याति प्राप्त की।
चिंतक, मनीषी, कुशल राजनीतिज्ञ, अद्वितीय संगठनकर्ता एवं राष्ट्रचेता पं. दीनदयालजी की संपूर्ण जीवनकथा, जो हर चिंतनशील भारतीय के मनमस्तिष्क को राष्ट्रवाद के भाव से ओतप्रोत कर देगी।

Main Hoon Bharatiya by K.K. Muhammed

SKU: 9789352665549

यह पुस्तक एक पुरातत्त्वविद् की आत्मकथा है, जिन्हें अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी में पढ़ने और भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण में कार्य करने का अवसर मिला। यह पुस्तक एक प्रेरणादायी सामग्री के रूप में सामने आती है, जिसमें यह वर्णन है कि किस प्रकार उन्होंने मार्क्सवादी इतिहासकारों की संगठित ताकत का मुकाबला उनके ही गढ़ में किया, कैसे एक अकेले व्यक्ति ने साम्राज्य से भिड़ंत की। भारतीय पुरातत्त्व विभाग किस प्रकार अपने आपको प्रस्तुत करे, इस संबंध में उनके सुझाव सामान्य जन में नई सोच पैदा करते हैं और भविष्य में इस विभाग की योजना बनानेवालों को दिशा-निर्देश देते हैं। वे इस बात पर बल देते हैं कि इस विभाग की अपार संभावनाओं को एक के बाद एक आनेवाली सरकारों ने भयंकर रूप से अनदेखा किया है।
किसी सक्रिय पुरातत्त्वविद् की पहली प्रकाशित डायरी होने के कारण यह इस विषय की बारीकियों पर रोचक अंतर्दृष्टि देती है और स्पष्ट रूप से बताती है कि एक पुरातत्त्वविद् को किस प्रकार धार्मिक तथा क्षेत्रीय पक्षपातों से ऊपर उठना चाहिए।
भारतीयता और राष्ट्रवाद का बोध जाग्रत् करनेवाली पठनीय कृति।

Main Hoon Malala by Anita Gaur

SKU: 9789351864387

लड़कियों की शिक्षा की वकालत करनेवाली, तालिबानी आतंकियों के सामने न झुकनेवाली मलाला का जन्म 12 जुलाई, 1997 को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत के स्वात जिले में हुआ। मलाला के पिता स्वात में ‘खुशहाल पब्लिक स्कूल’ चलाते थे। तालिबानी स्कूलों को बंद करवा रहे थे, उस समय मलाला मात्र ग्यारह साल की थी।
ज्यादातर महिलाएँ अत्याचार बरदाश्त करती रहती हैं और उसे सहना ही अपनी नियति मान लेती हैं। परंतु इस दुनिया में मलाला जैसी बच्ची भी है, जिसने तालिबान जैसे खूँखार आतंकी संगठन का खुला विरोध किया, उसे चुनौती दी। नतीजा यह कि इस मुखर आवाज को दबाने के लिए आतंकियों ने मलाला को गोली मार दी। जीवटता की मिसाल मलाला ने जूझते हुए मौत को भी मात दे दी। आतंकियों की इस क्रूर करतूत की सारी दुनिया ने कड़ी निंदा की।
मलाला अपने साहस, अन्याय का विरोध करने और आतंकवाद के खिलाफ बिगुल बजाने तथा बच्चों के शिक्षा के अधिकार के लिए लड़ते हुए विश्व जनमानस की चहेती बन गई। संसार के लोगों ने अपनेअपने तरीके से उसके कार्य को सराहा। उसकी सोलहवीं सालगिरह संयुक्त राष्ट्र संघ में मनाई गई। सन् 2014 में उसके साहस को रेखांकित करने के लिए विश्व का सबसे प्रतिष्ठित नोबल शांति पुरस्कार भी दिया गया।
कम उम्र में ही अन्याय और आतंकवाद के विरुद्ध आवाज बुलंद करनेवाली मलाला यूसुफजई की प्रेरक जीवनगाथा, जो हर शांतिप्रिय और संवेदनशील पाठक को पसंद आएगी और उसे प्रेरित करेगी।

Main J. Krishnamurti Bol Raha Hoon by Ed. Rajasvi

SKU: 9789386001979

जिद्दू कृष्णमूर्ति का नाम आध्यात्मिक जगत् में विशेष रूप से उल्लेखनीय है। जब वे मात्र तेरह वर्ष के थे, तभी उनमें एक आध्यात्मिक गुरु होने की विशिष्टताएँ दृष्टिगोचर होने लगी थीं। उन्होंने न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी आध्यात्मिकता का परचम लहराया।
जे. कृष्णमूर्ति के विचार केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि भौतिक दृष्टि से अत्यंत महवपूर्ण हैं, जो जाति, धर्म और संप्रदाय में उलझे, असमंजस में फँसे और दिग्भ्रमित हुए लोगों का यथोचित मार्गदर्शन करते प्रतीत होते हैं।
उन्होंने मानव-जीवन के लगभग सभी पहलुओं को अपनी विचारशीलता के दायरे में लाने का सफल प्रयास किया है। किंचित् मात्र भी ऐसा नहीं लगता कि जीवन की कोई भी जटिल वीथि उनकी दृष्टि से ओझल हो गई हो। उनके जीवन का परम लक्ष्य विश्व को शांति, संतुष्टि और संपूर्णता प्रदान करना था, ताकि ईर्ष्या, द्वेष और स्वार्थ का समूल नाश किया जा सके। वे अपने जीवन-लक्ष्य में काफी हद तक सफल रहे। जो भी उनके संपर्क में आया, मानो उनका ही होकर रह गया।
उनकी प्रेरक वाणी के कुछ रत्न इस पुस्तक में संकलित हैं।

Main Jayaprakash Narayan Bol Raha Hoon by Ed. Rajaswi

SKU: 9789383111121

जेपी के नाम से प्रसिद्ध लोकनायक जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्‍तूबर, 1902 को बलिया जिले के सिताबदियारा गाँव में हुआ था। उनका लालन-पालन बडे़ लाड़-प्यार से हुआ। पढ़ने में जयप्रकाश बडे़ मेधावी थे। पटना के कॉलेजिएट कॉलेज में उनका दाखिला हुआ। उन दिनों स्वतंत्रता आंदोलन जोरों पर था। 18 वर्ष की आयु में उनका विवाह 14 वर्षीय प्रभावतीजी से हो गया। उच्च शिक्षा के लिए जयप्रकाश अमेरिका चले गए और प्रभावती साबरमती आश्रम में रहने लगीं। अमेरिका में रहते हुए उन्होंने पाँच विश्‍वविद्यालयों में अध्ययन किया।
अध्ययन के दौरान जेपी समाजवादी विचारधारा से प्रभावित हुए। स्वदेश लौटकर आजादी की लड़ाई में कूद पडे़। आजादी के बाद उन्होंने बडे़-बडे़ कार्य किए। सन् 1972 में खूँखार डाकुओं का समर्पण कराया। इंदिराजी की तानाशाही के खिलाफ 5 जून, 1974 जेपी ने ‘समग्र क्रांति’ का नारा दिया। आपातकाल के दौरान जेल में उन्हें बहुत यातनाएँ दी गई।
जेपी द्वारा विभिन्न अवसरों पर लगभग सभी विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। देश को दिशा देनेवाले इन विचारों को विभिन्न शीर्षकों के तहत प्रस्तुत पुस्तक में दिया गया है, जिससे पाठकों को जेपी और उनकी दशा-दिशा को समझने में मदद मिलेगी। क्रांतिनायक जेपी के जीवन पर आधारित एक प्रेरणास्पद पुस्तक।

Main Kabir Bol Raha Hoon by Mahesh Sharma

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महात्मा कबीर आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन अपनी कालजयी वाणी में वे युगों-युगों तक हमारे सामने परिलक्षित होते रहेंगे। उनकी वाणी का अनुसरण करके हम अपना वर्तमान ही नहीं, अपितु भविष्य भी सँवार सकते हैं।
कबीर ने सदैव निष्पक्ष होकर सत्य-पथ का अनुगमन किया और शाश्वत मानव-मूल्यों पर जोर दिया। उन्होंने चमत्कारों, अंधविश्वास, पाखंड और अवैज्ञानिक अवधारणों का कभी समर्थन नहीं किया।
कबीर ने तात्कालिक समाज में व्याप्त कुरीतियों, धार्मिक भेदभावों, असमानता और जातिवाद आदि विकारों को दूर करने का भरसक प्रयास किया और इसमें उन्हें आंशिक सफलता भी मिली। सामान्य तरीके से जन्म लेकर और एक अति सामान्य परिवार में पलकर कैसे महानता के शीर्ष को छुआ जा सकता है, यह महात्मा कबीर के आचार-व्यवहार, व्यक्तित्व और कृतित्व से सीखा जा सकता है।
इस पुस्तक में, वर्तमान प्रासंगिकता को ध्यान में रखकर, संत कबीर की अमर वाणी को सूक्तियों के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे कि पाठकों को कबीर को समझने और उनके दरशाए मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिल सके।