Hindi Literature
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Ganitiya Akash Ke Nakshatra Dr. Dharma Prakash Gupta by Shashi Prakash
वे तो एक प्रतिभाशाली, मेधावी व परिश्रमी छात्र थे। वे तो गगनचुंबी विश्ववियात, महान् गणितज्ञ थे। सदैव आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर रहते थे। बस, पठन-पाठन में ही पूरा जीवन लगाया। कहते थे कि ये 24 घंटे के ही दिन-रात यों होते हैं, 48 घंटे के यों नहीं होते? बस, प्रतिपल कार्यरत रहना चाहते थे। निद्रा से दूर भागते थे। उनका बहुत बड़ा परिवार था, आज भी है। जहाँ-जहाँ भी रहकर पढ़े, सभी को अपने स्वभाव से, मधुर भाषा से सम्मोहित किए रहते थे। सभी के आदर्श थे वे। सभी के प्रेरणास्रोत थे प्रकाश। सबके प्रति अगाध प्रेम तो कूट-कूटकर भरा था उनके हृदय में। मृदुभाषी थे। जिससे भी 2 मिनट बात की, बस उन्हीं का हो जाता था। सांस्कृतिक कार्यक्रम व वार्षिक कार्यक्रम भी चलते थे, सभी धर्मों में भाग लेते थे। शेसपियर के ‘मर्चेंट ऑफ वेनिस’ ड्रामे में इन्होंने पोर्शिया की भूमिका निभाई थी। वार्षिक स्पोर्ट्स भी होते थे, उनमें भी भाग लेते थे। किसी भी कला क्षेत्र से दूर नहीं थे।
बी.एस-सी. की परीक्षा निकट थी कि फिमरबोन के पास खूब बड़ा सा फोड़ा निकल आया। बहुत चिंता थी कि अब या होगा? प्रैटिकल पास आ गए थे, खड़े नहीं हो पा रहे थे। धैर्य नहीं खोया था, दृढ़निश्चयी थे। आत्मबल, आत्मविश्वास, सब कुछ बटोरा और यह सोचकर कि कुछ भी असंभव नहीं है, मैं परीक्षा अवश्य ही दूँगा और पै्रटिकल का दिन आ गया। बी.एस-सी. फाइनल में फर्स्ट डिवीजन, फर्स्ट पोजीशन पाई थी।
Gaon-Gaon Ki Kahaniyan by Dr. Pramod Kumar Agrawal
‘गाँव-गाँव की कहानियाँ’ डॉ. प्रमोद कुमार अग्रवाल का द्वितीय कहानी-संग्रह है। प्रस्तुत कहानी संग्रह में सोलह कहानियाँ संकलित हैं, जिसमें कुछ लंबी, कुछ मध्यम तथा कुछ छोटी कहानियाँ हैं। सभी कहानियों का विषय पृथक्-पृथक् है। इन कहानियों में लेखक ने हिंदी साहित्य के कुछ अनछुए विषयों को चुना है। ‘ग्राम प्रधान की प्रेमिका’, ‘पट्टादार ननुआ’, ‘बटाईदार काने खाँ’, ‘विडंबना’, ‘वृद्धा’, ‘सूरज ’ कहानियाँ ग्रामीण भारत को सजीव उपस्थित करती हैं, जबकि ‘नगेन सब्जीवाला’ तथा ‘इस्माइल मिस्त्री’ कहानियाँ महानगरीय परिवेश पर आधारित हैं। ‘राजू-ऑपरेटर ’ तथा ‘चाय की दुकान’ कहानियों में कस्बे की पृष्ठभूमि का स्पंदन है।
‘सत्तर वर्षीय मुकदमा’ तथा ‘न्याय की खोज में अन्याय’ कहानियाँ भारतीय न्याय-व्यवस्था पर कटाक्ष हैं। ‘अरावली और ऐरावत’ और ‘रणनीति’ क्रमशः हाथियों तथा बंदरों के जीवन पर आधारित हैं। सभी कहानियों में लेखक का वैविध्यपूर्ण अनुभव, विज्ञान का स्पर्श तथा जीवन के प्रति उनका सकारात्मक दर्शन प्रतिबिंबित होता है। वे अपनी कहानियों के माध्यम से हिंदी साहित्य में लोक संग्रहात्मक कहानियों का नया दौर आरंभ कर रहे हैं, जो कुछ समय से विलुप्त सा हो रहा था।
Garbh Evam Prasav Gyan by Shanti Roy
प्रसूति विज्ञान चिकित्सा शास्त्र की उस शाखा का नाम है, जिसका संबंध स्त्री जननांग, गर्भावस्था, प्रसव तथा प्रसवोत्तर काल से होता है। इस शास्त्र का उद्देश्य है—‘स्वस्थ माँ और स्वस्थ नवजात’। माँ और बच्चे के स्वास्थ्य के माध्यम से ही किसी देश की स्वास्थ्य संबंधी गुणवत्ता की पहचान होती है। वहाँ की चिकित्सा सेवा कितनी अच्छी है, इसका अंदाजा वहाँ के मातृ मृत्यु-दर एवं शिशु मृत्यु-दर से ही लगाया जाता है। विकसित देशों में मातृ एवं शिशु मृत्यु-दर पहले ही काफी कम हो चुकी है।
गर्भ एवं प्रसव विज्ञान पर अधिकांश पुस्तकें अंग्रेजी में हैं, जिन्हें पढ़ना और समझना हमारी सामान्य जनता के लिए संभव नहीं है। प्रस्तुत पुस्तक सरल-सुबोध भाषा में लिखी प्रामाणिक जानकारी लिये है। इसकी भाषा और बातें हमारी जनता पढ़ सकेगी, समझ सकेगी तथा अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रह सकेगी।
हम अपने ही शरीर से बिल्कुल अनजान हैं। इस पुस्तक में जननांगों की बनावट एवं जनन-क्रिया को संक्षेप में बताया गया है। भ्रूण के विकास की क्रिया और उसको दुष्प्रभावित करनेवाले कारकों को बताया गया है। गर्भ तथा प्रसव की सामान्य एवं असामान्य स्थितियों की भी चर्चा की गई है। अन्य बीमारियों से पीडि़त माताओं को गर्भावस्था में क्या सावधानियाँ रखनी होंगी, नवजात की सही देखभाल कैसे की जाए, यह सब इस पुस्तक में वर्णित है।
हर घर-परिवार के लिए पठनीय एवं उपयोगी पुस्तक।
Garbhawati Ki Dekhbhal by Parvesh Handa
आमतौर पर यह देखा जाता है कि गर्भावस्था में गर्भवती की उचित और आवश्यक देखभाल न हो पाने के कारण अनेक ऐसी शारीरिक परेशानियाँ आ खड़ी होती हैं, जो जच्चा-बच्चा दोनों के स्वास्थ्य को कुप्रभावित करती हैं। गर्भवती की आवश्यक देखभाल न हो पाने का कारण इस संबंध में जानकारी का अभाव है। यह पुस्तक इस अभाव की पूर्ति करती है। इसमें गर्भवती के स्वास्थ्य की दृष्टि से उसके खान-पान, रहन-सहन, वातावरण आदि पर बड़ी ही कुशलता से अनुभवपरक जानकारियाँ दी गई हैं। गर्भवती का आहार-विहार कैसा हो, शारीरिक परिवर्तनों की स्थिति में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, साधारण और विशेष परिस्थिति में क्या करें तथा स्त्रा् जननांगों एवं स्त्रा् रोगों से संबंधित ढेरों व्यावहारिक जानकारियाँ ‘स्वस्थ माता, स्वस्थ शिशु’ की परिकल्पना को साकार करने में मदद करेंगी।
आमतौर पर यह देखा जाता है कि गर्भावस्था में गर्भवती की उचित और आवश्यक देखभाल न हो पाने के कारण अनेक ऐसी शारीरिक परेशानियाँ आ खड़ी होती हैं, जो जच्चा-बच्चा दोनों के स्वास्थ्य को कुप्रभावित करती हैं। गर्भवती की आवश्यक देखभाल न हो पाने का कारण इस संबंध में जानकारी का अभाव है। यह पुस्तक इस अभाव की पूर्ति करती है। इसमें गर्भवती के स्वास्थ्य की दृष्टि से उसके खान-पान, रहन-सहन, वातावरण आदि पर बड़ी ही कुशलता से अनुभवपरक जानकारियाँ दी गई हैं। गर्भवती का आहार-विहार कैसा हो, शारीरिक परिवर्तनों की स्थिति में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, साधारण और विशेष परिस्थिति में क्या करें तथा स्त्रा् जननांगों एवं स्त्रा् रोगों से संबंधित ढेरों व्यावहारिक जानकारियाँ ‘स्वस्थ माता, स्वस्थ शिशु’ की परिकल्पना को साकार करने में मदद करेंगी।
Garhen Apna Jeewan by Mukul Kanitkar
क्या ऐसी कोई विधि हो सकती है, जिसमें आंतरिक व सामाजिक दोनों स्तरों पर सफलता पाई जा सकती है? इसी विधि को लिपिबद्ध करने का विनम्र प्रयास है यह पुस्तक—गढें अपना जीवन। व्यक्तित्व विकास के समग्र आयामों को इसमें संकलित किया गया है। यह पुस्तक व्यक्तित्व के पूर्ण विकास की मार्गदर्शिका बनाने का एक प्रयास है। चरित्र का गठन हो गया तो चरितार्थ की चिंता नहीं रहेगी। पद, पैसा और प्रतिष्ठा स्वयं ऐसे सार्थक व्यक्तित्व के पीछे भागेंगे। ‘गढें अपना जीवन’ केवल कुछ युक्तियाँ नहीं हैं, यह एक वैज्ञानिक विधि है।
इस पुस्तक में जीवन को सार्थक बनाने का जो तंत्र सुझाया है, वह भी समय की कसौटी पर बार-बार परखा हुआ है। यह विधि-समस्त शिक्षा पद्धति का आधार बननी चाहिए। जैसा इस पुण्यभू भारत में समय-समय पर होता रहा है, चरित्र-निर्माण एक सामान्य जीवन-प्रक्रिया बन जाए। उदात्त चरित्र के लोग अपवाद में नहीं, अपितु समाज का प्रत्येक व्यक्ति ही उदात्त चरित्र का बने। यह पुस्तक उन तत्त्वों व उनके व्यावहारिक प्रयोग को बताने का विनम्र प्रयास है, जो ऐसे आदर्श समाज-रचना का आधार बने।
Gathbandhan Ki Rajneeti by N.M. Ghatate
भारतीय राजनीति गठबंधन के दौर में न केवल प्रवेश कर चुकी है, गठबंधन की सरकारों का गठन अब भारतीय लोकतंत्र का वर्तमान और आगामी अतीत नजर आ रहा है। राष्ट्रीय दलों ही नहीं, क्षेत्रीय दलों की पैठ मतदाताओं में जितनी गहरी होती जाएगी, यह चलन बढ़ेगा। क्षेत्रीय मुद्दों पर ही नहीं, राष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपने क्षेत्रीय दलों पर मतदाता का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि मतदाता चाहता है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी उसका प्रतिनिधित्व उसके क्षेत्रीय दल करें। पिछले लगभग एक दशक से मतदाताओं ने गठबंधन की सरकारों के गठन का जनादेश दिया है।
अपने प्रधानमंत्रित्व काल में श्री वाजपेयी ने जो उपलब्धियाँ हासिल की हैं उन्हें सहज शब्दों में कहा जा सकता है-जो कहा वह कर दिखाया। प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने के बाद भी उनकी कथनी और करनी एक ही बनी रही। अपनी बात को स्पष्ट और दृढ़ शब्दों में कहना अटल जी जैसे निर्भय और सर्वमान्य व्यक्ति के लिए सहज और संभव रहा है।
मुद्दा चाहे पड़ोसियों से संबंध सुधारने की दिशा में चीन यात्रा का हो, लाहौर बस यात्रा हो या कारगिल से दुश्मन को खदेड़ना, आगरा वार्ता हो या फिर से खेल संबंधों की बहाली, परमाणु परीक्षण हो या डन्ल्यू. टी. ओ. पर दो टूक राय या अमेरिका की मध्यस्थता को ठुकराने का फैसला। अटल जी के शासनकाल में देश की अर्थव्यवस्था ने नई ऊँचाइयों को छुआ है। विदेशी मुद्रा भंडार, सूचना प्रौद्योगिकी, आउट सोर्सिंग, किसान बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, ग्रामीण सड़क योजना, स्वर्ण चतुर्भुज राजमार्ग, नदियों का एकीकरण, सागर माला, दूरसंचार सुविधाओं का विकास, ऊर्जा क्षेत्र का विस्तार जैसी दर्जनों योजनाएँ हैं जो अटल जी के कार्यकाल में शुरू हुई और जो आगामी अतीत में भारत को विकसित देशों की पंक्ति में स्थान दिलाने में सफल होंगी।
भारतीय राजनीति को अटल जी का योगदान है-समन्वय की राजनीति, सामंजस्य की राजनीति, मिल- जुलकर राष्ट्रहित में आगे बढ़ने की दिशा देना।
Gathbandhan Rajaneeti Mein Bihar: Double Engine Sarkar by Kumar Dinesh
वर्ष 2013-17 के बीच बिहार ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन को टूटते-बनते देखा। इन दो बड़े राजनीतिक विखंडनों का शासन, समाज और अर्थव्यवस्था पर कितना गहरा दुष्प्रभाव पड़ा, यह तो शोध का विषय है, लेकिन इतना तय है कि गठबंधन राजनीति के कई-कई पाटों के बीच कोई अमृत कोश अक्षुण्ण रहा, जिससे बिहारी समाज की सात्त्विक चेतना साबुत बची रही। उसकी संजीवनी से कला, विज्ञान और सामाजिक बदलाव जैसे कई क्षेत्रों में उपलब्धियों के फूल भी खिलते रहे। नीतीश कुमार के भाजपा से फिर हाथ मलाने के बाद बिहार के लिए केंद्र से टकराव का दौर समाप्त हुआ। जुलाई 2017 में 27 साल बाद पटना और दिल्ली में एक ही गठबंधन की सरकार बनी। इस संयोग को हमारे पिछड़े राज्य के विकास की गति बढ़ानेवाले बदलाव के रूप में देखा गया। पटना को मेट्रो रेल मलने का रास्ता साफ हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दोनों विकास की राजनीति के आइकन बन चुके हैं। बिहार इस समय डबल इंजनवाली राजग सरकार पर सवार है। पुस्तक का शीर्षक इस तथ्य का रूपक है। पुस्तक में हर आलेख से पहले आचार्य चाणक्य के नीति श्लोक उद्घृत किए गए हैं, ताकि पाठक स्वयं परख सकें कि आज की राजनीति कितनी नीतिपरक रह गई है।
Gauravshali Bharat by Ed. Prabhat Jha
हुआ यूँ कि हम गणतंत्र और आजादी के पर्व मनाते रहे, पर आकलन के पर्व से दूर रहे। हम जहाँ नहीं पहुँचे, वहाँ हम आँकड़ों से पहुँच गए और आँकड़ों की जुगाली में देश पिसता रहा। आजादी के समय उत्पन्न सवाल आज भी जस के तस, मसला अनुच्छेद-370 या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का मामला हो या पूर्वोत्तर की समस्या हो या राष्ट्रभाषा, राष्ट्रगान या राष्ट्रधर्म की बात हो, ये सवाल समाप्त नहीं हुए। गंगा खतरे में, यमुना सूख गई, सरस्वती लुप्त हो गई, वंशवाद के थपेड़ों से कराह रहा लोकतंत्र, संवैधानिक संस्थाओं की आस्था पर राजनैतिक चोट, गरीबी में अव्वल, भ्रष्टाचार में शिखर पर, जैसे अहम सवाल आज भी उत्तर की तलाश में भटक रहे हैं।
इन समस्याओं का समाधान संभव है, उसके लिए अद्भुत जिजीविषा और अदम्य इच्छाशक्ति चाहिए। ‘गौरवशाली भारत’ ग्रंथ ऐसे शब्दसाधकों, सरस्वती के उपासकों और भारतमाता को वैभव पर पहुँचाने का स्वप्न देखनेवाले मनीषियों की सृजनशीलता और रचनाधर्मिता के व्यापक अनुभवों का खजाना है जो एक समर्थ, सशक्त, सबल, स्वाभिमानी भारत के पथ को आलोकित करेगा।
Gautam Buddha by Arun Kumar Tiwari
ईसा पूर्व छठी शताब्दी में आनंद-प्राप्ति की खोज व जिज्ञासा के कारण विश्व में ऐसा प्रबुद्ध वर्ग सामने आया, जिसने अपने पूर्वजों के विचारों से भिन्न नए-नए विचार प्रतिपादित किए। वस्तुतः ज्ञान की दृष्टि से यह ऐसा युगांतरकारी समय था, जब चीन में कन्फ्यूशियस और लाओ-त्से, फारस में जोरोस्त्र, यूनान में पाइथागोरस तथा भारत में महावीर एवं बुद्ध जैसी महान् विभूतियों ने नए युग का सूत्रपात किया। भले ही उनकी शिक्षाएँ भिन्न-भिन्न थीं, लेकिन उनका एकमात्र लक्ष्य मानव ज्ञान को नई दिशा की ओर अभिमुख करना था।
ऐसे ही एक युग प्रवर्तक थे महात्मा बुद्ध, जिनका जन्म लुंबिनी (कपिल वस्तु) में हुआ। उनका विवाह यशोधरा से हुआ, जिसे वह गोपा कहा करते थे। उनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था। जीवन के दर्दनाक दृश्यों को देखकर सिद्धार्थ को यौवन से मोहभंग हो गया और वे गृह त्याग कर शांति की तलाश में निकले। अनेकों वर्ष तप करने के बाद उन्हें ज्ञान का प्रकाश मिला। उन्होंने दुनिया में घूम-घूमकर मानव जाति को अहिंसा पर चलने की सीख दी, अपनी शिक्षाओं का प्रसार किया। अपने पुत्र-पुत्री को भी विदेशों में अहिंसा का प्रचार करने भेजा।
प्रस्तुत संग्रह में शांति के अग्रदूत गौतम बुद्ध के जीवन और दर्शन का बृहद् विवेचन है, जो हर आयु वर्ग के पाठकों का मार्ग प्रशस्त करेगी।
Gautam Buddha Ki Prerak Kahaniyan by mukesh Nadan
गौतम बुद्ध तथागत नाम से भी जाने गए। गौतम बुद्ध ने अपने सिद्धांतों के प्रचार-प्रसार में जाति व्यवस्था का भी घोर विरोध किया था। उन्होंने मानव-मानव की समानता पर बल दिया। उन्होंने जन्म को न मानकर बुद्धि तथा चरित्र के आधार को छोटे-बड़े होने का मापदंड माना है। उन्होंने घोषणा भी की थी कि मनुष्य जन्म से नहीं, अपितु कर्म से ब्राह्मण अथवा शूद्र होता है।
गौतम बुद्ध द्वारा अनेक ऐसी बातों का प्रचार किया गया, जो आज भी मानव को एक-दूसरे से प्रेम, सद्भाव, दया और भाईचारे का संदेश देती हैं। इन्हीं संदेशों से प्रेरित गौतम बुद्ध की अनेक कथाएँ समाज-जीवन में प्रचलित हैं, जो मानव को असीम ज्ञान की ओर प्रेरित करती हैं।
प्रस्तुत पुस्तक में ऐसी भी कुछ कथाओं को संगृहीत किया गया है, जो गौतम बुद्ध के जन्म से लेकर निर्वाण तक की घटनाओं का वर्णन करती हैं तथा उनके आचार-विचार से ओतप्रोत हैं। अपने शिष्यों को समय-समय पर उपदेश देते हुए उन्होंने अनेक कथाओं को उदाहरणार्थ समझाने का प्रयास किया और उन्हीं कथाओ का प्रचार-प्रसार उनके शिष्यों ने भी आगे किया। कथाएँ पूर्ण रूप से शिक्षात्मक एवं संस्कारित हैं।
हमें आशा ही नहीं, अपितु पूर्ण विश्वास है कि गौतम बुद्ध की ये पठनीय कथाएँ अवश्य ही प्रत्येक वर्ग के पाठकों को ज्ञान का बोध कराने में सहायक सिद्ध होंगी और समरस समाज बनाने का मार्ग प्रशस्त करेंगी।
Gehoon Aur Gulab by Sri Ramvriksh Benipuri
‘गेहूँ और गुलाब’ 1948 से 1950 के बीच लिखे शब्दचित्रों का संग्रह है, जिसमें 25 शब्दचित्र हैं। इनमें समाज, परिवार, व्यक्ति, संस्कृति, प्रकृति, किसान, मजदूर, समाज के अपवंचितों—डोम, कंजर, घासवाली, पनिहारिन इत्यादि के चित्र हैं। लेखक ने उद्घोषित किया है ‘‘यह पुस्तक है और आंदोलन भी।’’ वस्तुत: इस पुस्तक के शब्दचित्र ‘हैंड कैमरा के स्नैपशॉट’ हैं—‘हाथी दाँत पर की तसवीरें’।
‘लाल तारा’ 1938 से 1939 के बीच लिखे गए शब्दचित्रों का संग्रह है, जिसके लिए लेखक ने लिखा है—‘‘लाल तारा मेरे शब्दचित्रों का पहला संग्रह है। इसका पहला रूप उस जमाने में लिखा था, जब मैं सिर से पैर तक लाल-लाल था।’’ इनमें 16 शब्दचित्र हैं। वस्तुत: निविड़ अँधकार और घने कुहासे के परदे को फाड़कर पूरब के क्षितिज पर जगमग-जगमग करने वाला लाल तारा नए प्रभात का, नए समाज का, नई मानवता का, नई संस्कृति का प्रतीक है।
‘सतरंगा धनुष’ मुख्यत: 1937 से 1939 के बीच लिखे गए ललित निबंधों का संग्रह है, परंतु बाद में 1954 में ‘बूढ़ा कुत्ता’ तथा ‘बाँसुरी बजाए जा’ जोड़ा गया था। इस पुस्तक में 11 निबंध सम्मिलित हैं। इन निबंधों में उत्तरांचल (बिहार) की मिट्टी की सोंधी महक, लोक-संस्कृति की जीवंतता, ग्राम्य परंपरओं की मूर्तता एवं प्रकृति के रंग-बिरंगे चित्र अपनी पूरी ऊर्जस्विता के साथ विद्यमान हैं। वस्तुत: यह संकलन उत्तर बिहार की उबड़-खाबड़, किंतु सहज जिंदगी की, उनकी सारी विषमताओं, रीति-रिवाजों, आस्था और विश्वासों का गद्यकाव्य है।
German Lok Kathayen by Brudars Grim
प्रस्तुत पुस्तक जर्मनी की प्रसिद्ध लोककथाओं के हिंदी अनुवाद का संकलन है । प्रख्यात जर्मन लेखक बूडर ग्रीम की इन प्रसिद्ध लोककथाओं को हिंदी में प्रस्तुत करने का मुख्य उद्देश्य भारतीय पाठकों का जर्मनी की संस्कृति, वहाँ की परंपराओं तथा लोक-जीवन की रोचक जानकारी प्रदान करना है । यह पुस्तक पाठकों को जर्मनी की भौगोलिक, सामाजिक, ऐतिहासिक व सांस्कृतिक जानकारी तो प्रदान करेगी ही, उनका मनोरंजन भी करेगी ।
Ghalib Danger by Neeraj Pandey
कामरान खान एक नौजवान उत्साही टैक्सी ड्राइवर है, जो कुछ बड़ा करने के इरादे से मुंबई पहुँचा है। लेकिन उसकी किस्मत तब करवट लेती है, जब वह मिर्ज़ा नाम के एक डॉन को मरने से बचाता है। कभी-कभी जो अच्छा लगता है, वही क्रूरता से छिन भी जाता है। एक झटके में कामरान ने वह सबकुछ खो दिया, जो भी उसका बेहद करीबी था। तभी यह हुआ कि मिर्ज़ा ने कामरान के एहसान के बदले उसे अपने विंग में शामिल कर लिया और यह नौजवान माफिया बॉस की खोज में लगी खतरनाक पुलिस और प्रतिद्वंद्वी गैंगस्टरों की दुनिया से न केवल वाकिफ होता है, बल्कि घिसटता चला जाता है; साथ ही वह इनपर हावी भी होता जाता है।
कामरान को मिर्ज़ा की फिलॉसफी भी विरासत में मिली थी कि ज़िंदगी की सारी समस्याएँ और उनके हल गालिब की शायरी में छिपे हैं। जल्दी ही मासूम टैक्सी ड्राइवर के चारों तरफ सिपाही, अपराधी, यहाँ तक कि कैबिनेट मंत्री भी उसके इशारे और फोन पर उसके लिए मौजूद थे।
और उसे अपना नया नाम भी मिल गया था—गालिब डेंजर।
Ghar Baithe Paisa Kamaye by Shikha Jain
बचपन से ही यह बात मन को व्यथित करती रही कि स्त्रियों की स्थिति कितनी भी बेहतर हुई हो, लेकिन अधिकांश ऐसी हैं, जिनके लिए कमाई करना तो दूर, अपने शौक और पैशन को समय देना भी आसान नहीं है। कभी घरेलू जिम्मेदारियों की वजह से या कभी परिवारवालों से नौकरी की अनुमति न मिल पाने के कारण उनका यह सपना अधूरा ही रह जाता है। ऐसी अनेक स्त्रियाँ हैं, जिनमें अपार क्षमताएँ हैं, लेकिन वे स्वयं ही अपनी काबिलीयत से अनजान हैं। कहीं आत्मविश्वास की कमी है, कहीं संसाधनों की, तो कहीं प्रोत्साहन की। यह पुस्तक ऐसी महिलाएँ, जो घर बैठे ही अपनी पसंद का काम कर सकें और कुछ-न-कुछ आर्थिक संबल भी पा सकें, उनके लिए एक प्रैक्टिकल हैंडबुक है। बस इसके लिए आपको निष्ठा और लगन के साथ जुट जाना होगा। आपकी इस कोशिश को कामयाब बनाने में यह पुस्तक आपकी साथी बनेगी। घर बैठे अध्यवसाय करके पैसा कमाने के व्यावहारिक तरीके बनानेवाली पंखों को मजबूत हम बनाएँगे।
Giriraj Kishore Ki Lokpriya Kahaniyan by Giriraj Kishore
गिरिराज किशोर की कहानियों की यह विशेषता है कि इनमें समकालीन जीवन को समझने-बूझने के सूत्र प्राप्त होते हैं। ये सूत्र जीवन-जगत् के भविष्य को भी इंगित करते हैं। इन सूत्रों में रचना समय के राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक, उच्च तकनीकी (मोबाइल मैसेज संस्कृति) के श्वेत-श्यामल पक्षों, भाषिक क्षेत्रों के आंतरिक इतिहास को भी स्पष्ट देखा-परखा जा सकता है। सामयिकता से भरपूर तथा समय का अतिक्रम करने की यह क्षमता कृतिकार के सृजन को अमरत्व की ओर अग्रसर करती है।
प्रस्तुत संग्रह की कहानियों में कथाकार ने बृहत्तर समाज के कई रूपों, स्थितियों के वैयक्तिक एवं सार्वजनिक चित्र अंकित किए हैं। इस अंकन में बारीकी के साथ उन अदृश्य कारकों को भी प्रतीकात्मक ढंग से उल्लिखित किया है, जो मनुष्य और समाज की अंतर्क्रिया के फलस्वरूप अभौतिक संस्कृति को बहुत धीमे-धीमे क्षरित करते सांस्कृतिक और शाश्वत मूल्यों के अवमूल्यन अथवा पूर्णक्षरण को रेखांकित करते हुए क्रमशः अर्वाचीन मनुष्य और समाज को, प्राचीन मनुष्य और समाज से पूर्णतः पृथक् करते, सर्वथा बदले चेहरे में प्रस्तुत करके सांस्कृतिक विलंबना और विडंबना को व्याख्यायित करते हैं।
कथा-रस से भरपूर ये कहानियाँ मनोरंजन के साथ-साथ समाज-जीवन की विसंगतियों-विद्रूपताओं को उजागर करती हैं, जिससे ये पाठक को अपनी सी लगती हैं।
Girnar Ke Siddha Yogi by Anantrai G. Rawal
अनंत दास संघ शिविर में तथा संघ शिक्षा वर्ग में ‘बौद्धिक कक्ष’ में सेवारत होने के कारण संघ साधना के तपस्वी और ऋषितुल्य प्रचारकजी के संग रहे हैं। राष्ट्रभावना के संस्कार उनमें दृढ़ हो गए। महापुरुषों-तपस्वियों के जीवन चरित्रों का वाचन, लेखन, चिंतन और पूर्वाश्रम के संस्कारों के कारण भी वे कभी-कभी स्वयं का जूनागढ़ गिरनार के प्रति अतिशय आकर्षण होना बताते हैं। समय मिलते ही वे यदा-कदा गिरि-कंदराओं में जाकर साधु-संतों के संपर्क में रहते थे; वे गिरनार के प्रति गैबी-प्रेरणा का तीव्र आकर्षण बताते थे और सच ही सेवानिवृत्ति के बाद अनंत दादा ने गिरनार का पथ पकड़कर, गिरनार में निवास करने वाले श्रेष्ठ तपस्वियों, आदर्श साधु-संतों और आश्रमों में रहकर तप, साधना, विचार, वाचन, चिंतन, अनुभव एवं चमत्कारी अनुभूतियाँ प्राप्त की हैं। उनके परिणामस्वरूप और किसी गैबी शक्ति की प्रेरणा से ‘अमृत फल स्वरूप’, ‘गिरनार के सिद्ध योगी’ पुस्तक का सृजन हुआ है।
यथार्थ में, पुस्तक में ‘गिरनार’ के सूक्ष्म स्वरूप का दर्शन करवाकर सभी आध्यात्ममार्गियों की श्रद्धा को पुष्ट किया है और सद्गुरु चरित्र का सटीक वर्णन करके समाज में साधु-संतों की सुंदर पहचान करवाई है। यह पुस्तक लंबे समय तक अध्यात्ममार्गियों का मार्गदर्शन करती रहेगी, इसमें कोई शंका नहीं है।
Gita Gyan by Sirshree Tejparkhi
दुर्योधन ने अगर श्रीकृष्ण को युद्ध के मैदान में सारथी के रूप में माँगा होता तो क्या आज जो गीता बनी है, वह वैसी ही रहती? नहीं, गीता बदल जाती। वह गीता श्रीकृष्ण और दुर्योधन के बीच हुए वार्त्तालाप पर आधारित होती।
यदि दुर्योधन की गीता बन जाती, उसके अठारह अध्याय बन जाते तो आज कितने लोगों को लाभ हो रहा होता, यह आप खुद सोच सकते हैं।
आज विश्व में कौन से लोग ज्यादा हैं—कौरव या पांडव? दुर्योधन या अर्जुन? किसकी गीता बनना ज्यादा महत्त्वपूर्ण है? अर्जुन यानी वह इनसान, जो सत्य सुनने के लिए तैयार है और दुर्योधन यानी वह, जो सत्य सुनना ही नहीं चाहता।
युद्ध के मैदान में यदि आप होते तो आपके सवाल क्या होते? आपकी गीता कैसी होती? आपकी गीता अर्जुन से अलग होती, आपके सवाल भी अलग होते, इसलिए कहा जाता है कि हर एक की गीता अलग है, आपकी गीता अलग है। अपनी गीता ढूँढ़ने का कर्म करें, अपने कृष्ण आप बनें, यही सच्चा कर्मयोग है।
Gita Gyansagar by Sunil Bajpayee
पुस्तक पुस्तक में श्रीमद्भगवद्गीता के समस्त श्लोकों का हिंदीछंदों में रूपांतरण किया गया है। हर श्लोक के लिए एक अलग छंद की रचना की गई है। छंद की सीमित परिधि के अंदर ही मूल श्लोक का संपूर्ण अर्थ समाहित करने का प्रयास किया गया है। छंदों का अर्थ मूल श्लोकों से तनिक भी भिन्न न हो, इस बात का पूरा ध्यान रखा गया है। इस काव्य का पठन मूल ग्रंथ को पढ़ने के समान है। छंदों में गेयता है और इसका नियमित पठन मन को आनंदित करता है। इस पुस्तक के माध्यम से गीता के ज्ञान को सरलता से आत्मसात् किया जा सकता है।
Gita Mein Gyanyog by Champa Bhatia
वर्तमान में विद्यालयों में अनुशासनहीनता एवं हिंसक व्यवहार की घटनाएँ निरंतर बढ़ रही हैं। अतः अगर हम अपनी शिक्षा को मूल्य-आधारित और संस्कार-आधारित बना पाएँ तो हम इस प्रकार की सभी समस्याओं पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।
शिक्षण के मानवतावादी पहलुओं पर जोर देते हुए भारत ने अपनी नई शिक्षा नीति में यह स्पष्ट किया है कि शिक्षा का तात्पर्य अध्यापकों, किताबों से प्राप्त जानकारी और सूचनाओं का संप्रेषण मात्र नहीं है। उन मूल्यों, योग्यताओं और प्रवृत्तियों को विकसित करना भी है, जो शांतिपूर्ण, न्यायोचित, समावेशी और टिकाऊ समाज के निर्माण के लिए विश्व समुदाय को एकत्र एवं प्रेरित कर विश्व-कल्याण में योगदान देने के लिए संकल्पबद्ध कर सकें।
भारतीय ज्ञान-परंपरा में मूल्यपरक शिक्षा का बड़ा महत्त्व है। मूल्य-आधारित शिक्षा का अर्थ छात्रों को नैतिक मूल्यों, धैर्य, ईमानदारी, प्रेम, सद्भावना, दया, करुणा, मानवता, इत्यादि सार्वभौमिक मूल्यों को सिखाना है। मूल्य शिक्षा का संपूर्ण उद्देश्य विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में निहित है। मूल्य-आधारित शिक्षा से न केवल मानवीय गुणों का विकास होगा, बल्कि हम अपनी नागरिकता के प्रति जिम्मेदारी को बेहतर ढंग से समझ पाएँगे।
नैतिकता पर आधारित शिक्षा हो तो उसमें मूल्य अपने आप आ जाएँगे।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी हम मानवतावादी मूल्यों का समावेश करने हेतु कटिबद्ध हैं, जिससे कि भविष्य का भारत एक सुखी, संपन्न व मानव मात्र के लिए कल्याणकारी जीवन की अवधारणा के लक्ष्यों को पूरा करने हेतु अग्रसर हो तथा संपूर्ण विश्व में शांति, प्रेम व भाईचारे की स्थापना हेतु हम ध्वजवाहक बन सकें।
Gita Mein Management Sootra by Vinod Malhotra
भारतीय वाङ्मय के महत्त्वपूर्ण ग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता में जिन सिद्धांतों एवं व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया है, वे प्रत्येक दृष्टिकोण से एक विशिष्ट प्रबंधकीय प्रणाली के अनुरूप हैं। अब समय आ गया है कि हम प्रबंधकीय शिक्षा के ढाँचे में आधारभूत परिवर्तन करें और किसी अन्य प्रबंधकीय व्यवस्था के बारे में सोचें, जो मानव जाति एवं व्यावसायिक जगत् के लिए अधिक लाभकारी हो। इस संदर्भ में भगवद्गीता हमें एक रास्ता दिखा सकती है। गीता मुख्य रूप से मनुष्य के व्यक्तिगत विकास, उसके चरित्र-निर्माण और समाज एवं विश्व के साथ उसके संबंधों की विस्तार से समीक्षा करते हुए उसका सही मार्ग प्रशस्त करती है। आवश्यकता इस बात की है कि हम पिछले साठ-सत्तर वर्षों से प्रदत्त की जानेवाली शिक्षा के बारे में पुनर्विचार करें। गीता इस संबंध में एक विकल्प है, जिसके बताए हुए रास्ते पर चलकर वर्तमान प्रबंधकीय प्रणाली में मौलिक परिवर्तन किए जाने की संभावना है।
वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी
श्री विनोद मल्होत्रा ने गीता के ज्ञानसागर में से मैनेजमेंट के कुछ रत्न खोज निकाले हैं। विश्वास है, ये सूत्र न केवल व्यावसायिक जगत् अपितु सामान्यजन के लिए भी समान रूप से उपयोगी होंगे और जीवन जीने का मार्ग आसान बनाएँगे।
Gita Sabhi Ke Liye by Vinay Patrale
गीता भारतीय संस्कृति की आधारशिला है। इसमें अत्यंत प्रभावशाली ढंग से दैनंदिन जीवन से जुड़े बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया है। यह संपूर्ण मानव जाति के उद्धार के लिए है। इसका अध्ययन करने से हम अपने जीवन के किसी भी प्रकार के कष्ट और समस्याओं का समाधान ढूँढ़ सकते हैं। यह चरित्र-निर्माण का सबसे व्यावहारिक और उत्तम शास्त्र है।
गीता जीवन की यात्रा पर निकलते समय साथ रखने का कलेवा है। बच्चे की उँगली पकड़कर उसे स्कूल में ले जानेवाली माता गीता है।
यह पुस्तक जनसाधारण को गीता क्या बताती है, इसे समझाने के लिए लिखी गई है। गीतावाचन पुण्य प्राप्त करने के लिए नहीं, अपितु इसके संदेश को जीवन में उतारने का माध्यम है।
श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञान-सागर में से कुछ सूत्ररत्न चुनकर उन्हें सरल-सुबोध भाषा में प्रस्तुत करने का एक विनम्र प्रयास है यह पुस्तक।
बच्चे-बड़े-स्त्री-पुरुष—सबके लिए समान रूप से उपयोगी और महत्त्वपूर्ण है भगवद्गीता। इसका नियमित अध्ययन आपको जीवन के पथ पर मर्यादित ढंग से सफलतापूर्वक चलने के सूत्र बताएगी।
Gita-Mata by Mahatma Gandhi
महात्मा गांधीजी ने गीता को ‘माता’ की संज्ञा दी थी। उसके प्रति उनका असीम अनुराग और भक्ति थी। उन्होंने गीता के श्लोकों का सरल-सुबोध भाषा में तात्पर्य दिया, जो ‘गीता-बोध’ के नाम से प्रकाशित हुआ। उन्होंने सारे श्लोकों की टीका की और उसे ‘अनासक्तियोग’ का नाम दिया। कुछ भक्ति-प्रधान श्लोकों को चुनकर ‘गीता-प्रवेशिका’ पुस्तिका निकलवाई। इतने से भी उन्हें संतोष नहीं हुआ तो उन्होंने ‘गीता-पदार्थ-कोश’ तैयार करके न केवल शब्दों का सुगम अर्थ दिया, अपितु उन शब्दों के प्रयोग-स्थलों का निर्देश भी किया।
गीता के मूल पाठ के साथ वह संपूर्ण सामग्री प्रस्तुत पुस्तक में संकलित है। गीता को हमारे देश में ही नहीं, सारे संसार में असाधारण लोकप्रियता प्राप्त है। असंख्य व्यक्ति गहरी भावना से उसे पढ़ते हैं और उससे प्रेरणा लेते हैं। जीवन की कोई भी ऐसी समस्या नहीं, जिसके समाधान में गीता सहायक न होती हो। उसमें ज्ञान, भक्ति तथा कर्म का अद्भुत समन्वय है और मानव-जीवन इन्हीं तीन अधिष्ठानों पर आधारित है।
महात्मा गांधी की कलम से प्रसूत गीता पर एक संपूर्ण पुस्तक, जो जीवन के व्यावहारिक पक्ष पर प्रकाश डालकर पाठक की कर्मशीलता को गतिमान करेगी।
Gitanjali by Surendra Kumar Gambhir
गीतांजलि
‘गीतांजलि’ महान् रचनाकार नोबल पुरस्कार विजेता कवींद्र रवींद्रनाथ टैगोर का प्रसिद्ध महाकाव्य है। एक शताब्दी पूर्व जब इसकी रचना हुई, तब भी यह एक महाकाव्य था और एक शताब्दी के बाद भी यह महाकाव्य है तथा आनेवाली शताब्दियों में भी यह एक महाकाव्य ही रहेगा। इस महाकाव्य की उपयुक्तता तब तक रहेगी जब तक मानव सभ्यता जीवित है।
उन्नीसवीं सदी में विश्व साहित्य के क्षेत्र में भारतीयों की पहचान इस महाकाव्य के माध्यम से हुई। यह महाकाव्य हर भारतीय की अनुभूतियों से अंतरंग रूप से जुड़ा है। यह अपने आप में एक अनूठा महाकाव्य है, जो साधारण व्यक्ति से लेकर प्रकांड विद्वान् के लिए समान रूप से प्रेरणादायी है। इस काव्य की रचना न किसी विशेष समाज, प्रांत या देश विशेष के लिए है। यह महाकाव्य मानव संस्कृति एवं सभ्यता के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
किसी महाकाव्य का अनुवाद दूसरी भाषा में करना तथा उसी भाषा में उसका शाब्दिक अर्थ मात्र करना काफी नहीं होता। अनुवाद से पूर्व यह आवश्यक है कि उस महाकाव्य में अंतर्निहित भावों को समझकर सम्यक् रूप में उसका मंथन किया जाए।
गीतांजलि, जिसका अनुवाद विश्व की सभी प्रमुख भाषाओं एवं सभी भारतीय भाषाओं में हो चुका है, ऐसे महाकाव्य का फिर से अनुवाद करने का साहस जुटाना अपने आप में अत्यंत प्रशंसनीय कार्य है।
Gitashastram by C. Radhakrishnan
हिंदू वाङ्मय की समृद्ध परंपरा में सबसे प्रमुख श्रीमद्भगवद्गीता की बहुत सारी व्याख्याएँ मिल सकती हैं। पर मनुष्य के विकास के साथ उसके प्रति दृष्टिकोण और उसकी व्याख्या में परिवर्तन होते ही रहते हैं। नहीं तो एकमात्र व्याख्या पर्याप्त थी। व्याख्याओं की परंपरा में इस एक नई व्याख्या का आधार यह है कि इसमें गीता के प्रति एक वैज्ञानिक का दृष्टिकोण हमें प्राप्त होता है। गीता को ‘गीताशास्त्रम्’ कहा जाता है, पर यह शास्त्र अध्यात्म शास्त्र है। लेकिन उस अध्यात्म शास्त्र के पीछे भी कुछ विज्ञान छिपा हुआ है तो वह क्या हो सकता है, इसी की खोज सी. राधाकृष्णन ने की है। गीता में अध्यात्म, काव्य, योग, भक्ति आदि बहुत सारे शास्त्र हैं, उनके साथ-साथ भौतिक विज्ञान की दृष्टि से अवलोकन और व्याख्या अत्यंत रोचक और आकर्षक बन पड़ी है।
Gk Quiz by Anish Bhasin
सवाल करना और उनके जवाब पाने की उत्सुकता व्यक्ति में सहज ही खोजी जा सकती है। पृथ्वी कैसे बनी? महासागर कहाँ से आए? महाद्वीप कैसे बने? मनुष्य का क्रमविकास कैसे हुआ? पृथ्वी पर जंतु ज्यादा हैं या मनुष्य? मनुष्य को दहलानेवाले जलजले, सुनामी, ज्वालामुखी कैसे बनते हैं? इस प्रकार के प्रश्नों के प्रति व्यक्ति आरंभ से ही जिज्ञासु रहा है। प्रश्न करने और उनका समुचित समाधान पाने से व्यक्ति की मेधा और तर्क शक्ति को बल मिलता है। इसी ज्ञानार्जन से व्यक्ति जीवन में सफलता प्राप्त करता है। आज के युग में हर क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्द्धा है और प्रतियोगी को हर परीक्षा में नएनए प्रकार के प्रश्नों का सामना करना पड़ता है।
प्रस्तुत पुस्तक भी प्रश्नोत्तरी द्वारा ज्ञानवर्द्धन की कड़ी में एक महती प्रयास है। इसके अध्ययन से पाठक लाभान्वित होकर सफलता के नए सोपान चढ़ेंगे। इसका एकएक प्रश्न उत्तर के साथ जुड़कर आपकी जानकारी में श्रीवृद्धि कर सकता है।
Goals by Chandralekha Maitra
लक्ष्य की प्राप्ति बेहद आवश्यक है। यदि आपके जीवन में कोई लक्ष्य न हो तो आप जीवन में क्या पाना चाहते हैं? लक्ष्य वे उपलब्धि हैं, जो आप अपने लिए हासिल करते हैं। यदि आपके अंदर दृढ़ विश्वास हो तो आप कुछ भी हासिल कर सकते हैं।
यदि आप पूरे मन से प्रयास करेंगे तो कोई भी लक्ष्य हासिल करना मुश्किल नहीं होता। अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए बार-बार प्रयास कीजिए। लक्ष्य को पूरा करने में मुश्किल तभी आती है, जब आप पूरी मेहनत नहीं करते हैं।
अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए बहिर्मुखी बनिए और हर वक्त कुछ नया सीखने के लिए तत्पर रहिए। आपके लक्ष्य आपसे उतनी ही दूरी पर हैं, जितना आप सोचते हैं। यदि अपने लक्ष्य को पाने के लिए आप मेहनत नहीं करेंगे तो आपका गोलपोस्ट आपसे दूर होता रहेगा।
God Is A Gamer by Ravi Subramanian
‘गॉड इज अ गेमर’ एक दिलचस्प कहानी है, जो पाठक को मुंबई की गलियों से गोवा के समुद्र तट तक और वॉशिंगटन की आलीशान इमारतों से न्यूयॉर्क की वित्तीय राजधानी तक ले जाती है। एक ऐसी कहानी, जो पाठक को अज्ञात स्थानों की, जिन्हें किसी ने नहीं देखा, सैर कराती है, लेकिन उनका एहसास कइयों ने किया है—वह स्याह वेब। इंटरनेट का नाजुक हिस्सा। और इन सबके बीच, मानव भावनाओं की एक कहानी है। एक पिता, जिसका बेटा लौट आता है, एक राजनेता जो बेबाक है, एक बैंक का सीईओ, जिसे एक राज सीने में दफन रखना है। इस दलदल में फँसा है एक पुराना बैंकर, जिसकी गेमिंग कंपनी तबाह होनेवाली है; एक बीस वर्षीय जोड़ा, जो प्यार की तलाश में है; और एक एफबीआई एजेंट, जो अपने परिवार को भूलने के लिए अपने आपको काम में डुबो देना चाहता है।
इन सारी कहानियों के बीच बुनी गई है बिटकॉयन्स की कहानी—वह आभासी मुद्रा, जिसने दुनिया में तहलका मचा दिया है। अगर इस किताब के कुछ हिस्से आपको डरा दें, दहशत पैदा कर दें और आपको ऐसा लगे कि क्या वास्तव में ऐसी बातें होती हैं तो यकीन मानिए, इस किताब के कई चौंका देनेवाले क्षण वास्तविक जीवन की घटनाओं से प्रेरित हैं।
रहस्य, रोमांच और सर्वशक्तिमान ईश्वर की उपस्थिति का प्रतिपल अहसास करानेवाला अत्यंत पठनीय उपन्यास।
Godan by Premchand
प्रेमचंद आधुनिक हिंदी साहित्य के कालजयी कथाकार हैं। कथा-कुल की सभी विधाओं—कहानी, उपन्यास, लघुकथा आदि सभी में उन्होंने लिखा और अपनी लगभग पैंतीस वर्ष की साहित्य-साधना तथा लगभग चौदह उपन्यासों एवं तीन सौ कहानियों की रचना करके ‘प्रेमचंद युग’ के रूप में स्वीकृत होकर सदैव के लिए अमर हो गए।
प्रेमचंद का ‘सेवासदन’ उपन्यास इतना लोकप्रिय हुआ कि वह हिंदी का बेहतरीन उपन्यास माना गया। ‘सेवासदन’ में वेश्या-समस्या और उसके समाधान का चित्रण है, जो हिंदी मानस के लिए नई विषयवस्तु थी। ‘प्रेमाश्रम’ में जमींदार-किसान के संबंधों तथा पश्चिमी सभ्यता के पड़ते प्रभाव का उद्घाटन है। ‘रंगभूमि’ में सूरदास के माध्यम से गांधी के स्वाधीनता संग्राम का बड़ा व्यापक चित्रण है। ‘कायाकल्प’ में शारीरिक एवं मानसिक कायाकल्प की कथा है। ‘निर्मला’ में दहेज-प्रथा तथा बेमेल-विवाह के दुष्परिणामों की कथा है। ‘प्रतिज्ञा’ उपन्यास में पुनः ‘प्रेमा’ की कथा को कुछ परिवर्तन के साथ प्रस्तुत किया गया है। ‘गबन’ में युवा पीढ़ी की पतन-गाथा है और ‘कर्मभूमि’ में देश के राजनीति संघर्ष को रेखांकित किया गया है। ‘गोदान’ में कृषक और कृषि-जीवन के विध्वंस की त्रासद कहानी है।
उपन्यासकार के रूप में प्रेमचंद का महान् योगदान है। उन्होंने हिंदी उपन्यास को भारतीय मुहावरा दिया और उसे समाज और संस्कृति से जोड़ा तथा साधारण व्यक्ति को नायक बनाकर नया आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने हिंदी भाषा को मानक रूप दिया और देश-विदेश में हिंदी उपन्यास को भारतीय रूप देकर सदैव के लिए अमर बना दिया।
—डॉ. कमल किशोर गोयनका
Good Vibes, Good Life by Good Vibes, Good Life
आप जितना हो सकता है, उतना बेहतर इनसान बनने की कोशिश करें।
आप खुद से प्यार करने की कला में पारंगत कैसे हो सकते हैं? आप किस तरह से अपने मन में आनेवाले नकारात्मक विचारों को सकारात्मक विचारों में बदल सकते हैं? क्या कभी न समाप्त होनेवाली खुशी को प्राप्त कर लेना संभव है?
इस पुस्तक में, इंस्टाग्राम गुरु वेक्स किंग ने इन सभी और ऐसे ही मन में उठनेवाले अन्य अनेक सवालों का जवाब दिया है। वेक्स अपने जीवन की कठिनाइयों से उबरकर आज हजारों युवा लोगों के लिए आशा की किरण बन चुके हैं और अब अपने व्यक्तिगत अनुभव और आंतरिक ज्ञान भंडार से इस पुस्तक के माध्यम से आपको भी प्रेरित करने के लिए प्रस्तुत हैं—
• खुद का ध्यान रखने, जहरीले वातावरण से बाहर निकलने और अपने कल्याण को सर्वोपरि रखने का अभ्यास करें।
• जीवन में आगे बढ़ने के और भी सुनहरे अवसरों को आमंत्रित करने के लिए स्वयं को पीछे धकेलनेवाली मान्यताओं से छुटकारा पाएँ।
• जाँची-परखी तकनीकों का उपयोग कर अपने लक्ष्यों को प्राप्त करें।
• अपने डर से बाहर आएँ और इस संसार की गति के साथ आगे बढ़ते चले जाएँ।
इस पुस्तक में, वेक्स के व्यावहारिक अनुभव से आप जान पाएँगे कि जब आप अपने सोचने, महसूस करने, बोलने और काम करने के तरीकों में बदलाव करते हैं तो आपकी सकारात्मकता बढ़ती है और आप जीवन में तेजी से बढ़ने लगते हैं।
Google Nirmata Sergey & Larry by Pradeep Thakur
मार्च 1996 में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के दो पी-एच.डी. के शोधार्थी लॉरेंस (लैरी) पेज व सर्गेई ब्रिन ने वेब सर्च इंजन शोध-परियोजना बैक रब पर एक साथ काम शुरू किया था। तब किसी को भी नहीं पता था कि निकट भविष्य में यह गूगल का रूप धारण कर विश्वव्यापी होनेवाला है।
लैरी पेज ने सपनों को पालना सीखा था—उतना बड़ा सपना, जो बहुत ही कम लोग देख पाते हैं। विश्व के सबसे युवा अरबपतियों में शामिल होने के बाद भी लैरी पेज ने न तो उसपनों को पालना छोड़ा है और न ही अपनी बचपन की शिक्षा-दीक्षा को धूमिल होने दिया।
गूगल की महारथी जोड़ी का अभिन्न हिस्सा हैं सर्गेई ब्रिन। वैसे तो लैरी व सर्गेई दोनों यहूदी हैं; लेकिन जातीयता ने लैरी के मुकाबले सर्गेई के परिवार को बहुत ज्यादा प्रभावित किया था। तत्कालीन सोवियत संघ की राजधानी मास्को में यहूदियों से किए जा रहे विकट भेदभावपूर्ण वातावरण में सर्गेई ब्रिन का लालन-पालन हुआ था। संभवतः यही कारण रहा कि अपने मित्र लैरी की तरह सर्गेई ने भी अपने पारिवारिक संघर्ष को भुलाया नहीं, वरन् वैचारिक शक्ति बना लिया। यदि लैरी पेज ने अपने दादा के हथौड़े को स्मरण-प्रतीक बनाया तो सर्गेई ब्रिन ने हँसिया को।
विश्वास है कि गूगल के संस्थापकों की यह कहानी सभी सुधी पाठकों के लिए प्रेरणादायी सिद्ध होगी।
Google Success Story by Pradeep Thakur
गूगल लोगों को सूचनाओं के साथ जुड़ने के तरीके में सुधार लाने पर ध्यान केंद्रित करता है। यह सभी आकार के संस्थानों हेतु विभिन्न प्रकार की सेवाएँ व सामग्री प्रक्रिया साधन (सॉफ्टवेयर टूल) प्रदान करता है। कंपनी मुख्य रूप से खोज, विज्ञापन, परिचालन प्रणाली (ऑपरेटिंग सिस्टम), अनुप्रयोग मंच (एप्लीकेशन प्लेटफॉर्म), उद्यम व हार्डवेयर उत्पाद आदि क्षेत्रों में कार्यरत हैं। विश्व की संपूर्ण जानकारियों को सर्वसुलभ बनाने के व्यापक उद्देश्य से गूगल ने वेबसाइटों व अन्य ऑनलाइन सामग्री की विशाल अनुक्रमणिका (इंडेक्स) बनाई है, जिन्हें गूगल सर्च इंजन के माध्यम से इंटरनेट संयोजकता वाले किसी भी कंप्यूटर उपकरण पर खोजा जा सकता है। गूगल इन खोजों के विषयों के साथ ही उपयोगकर्ताओं को ‘गूगल एडसेंस’, ‘गूगल एडवर्ड्स’, ‘गूगल डिस्प्ले’, ‘गूगल लोकल’, ‘एडमोब’ आदि सॉफ्टवेयर साधनों के माध्यम से विभिन्न उत्पादों के विज्ञापन प्रदर्शित करने की सुविधा भी प्रदान करता है।
आज अपनी सरलीकृत उपयोगिता के कारण इसे ‘गूगल बाबा’ भी कहा जाने लगा है, क्योंकि इसके पास प्रायः सभी जानकारियों का भंडार है।
यह पुस्तक श्रेष्ठतम शोध और अनुसंधान के बल पर प्रामाणिक जानकारियाँ उपलब्ध करानेवाली कंपनी ‘गूगल’ की सक्सेस स्टोरी है।
Gopalram Gahmari Ki Jasoosi Kahaniyan by Gopalram Gahmari
मूर्धन्य साहित्यकार गोपालराम गहमरी हिंदी साहित्य में उपेक्षित हैं। कई विधाओं में उन्होंने प्रचुर साहित्य लिखा, लेकिन अपने देश के कॉलेज से लेकर विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में वे कहीं नहीं हैं। न उनके संस्मरण, न कहानियाँ, न कविताएँ, न उपन्यास, न अनुवाद। उन पर एक जासूसी लेखक का ठप्पा लगाकर उनके पूरे रचनाकर्म से ही हमारे कथित आलोचकों ने किनारा कर लिया, जैसे ये जासूसी उपन्यास घोर पाप हों। फिर धीरे-धीरे उन्हें जान-बूझकर बिसरा दिया गया; लेकिन अब फिर उनके साहित्य की खोज होने लगी है। फिर से लोग अब गहमरीजी की रचनाओं से परिचित होने को बेताब दिख रहे हैं। यह अच्छी बात है। राख के भीतर छिपी आग अब बाहर आ रही है। साहित्य पाठकों के भरोसे जिंदा रहता है, आलोचकों के भरोसे नहीं। कबीर, तुलसी, रैदास अपनी रचनाओं के बूते जिंदा हैं, आलोचकों के भरोसे नहीं। गोपालराम गहमरी अब पुस्तकालयों से बाहर आ
रहे हैं।
उनकी जासूसी कहानियों में रहस्य और रोमांच है; गुत्थियाँ हैं, जिन्हें सुलझाने के रोचक प्रसंग भी हैं, जो पाठक को बाँध लेंगे।
Gopi Ki Diary by Sudha Murty
आधुनिक दोहा शिल्प और आकार में पारंपरिक होकर भी अपने कथ्य और संवेदन में अत्यंत अर्वाचीन और तरोताजा है, जो समकालीन हिंदी कविता के यथार्थ रूपों और उसकी संवेदना को पकड़ने में सक्षम है। डॉ. दिनेश चन्द्र अवस्थी दोहा छंद के एक समर्थ एवं सशक्त हस्ताक्षर हैं। ईश्वर, धर्म, दर्शन, परिवार, पत्नी, बच्चे, माता-पिता, घर, गली, शहर, कार्यालय, पशु-पक्षी, राजनीति, व्यंग्य, अवसरवादिता, न्याय, मक्कारी, भ्रष्टाचार, मनोविकार, देशभक्ति, आतंक, अफसर, नेता, श्रमजीवी, जीवन, नीति, व्यवहार, सिद्धांत, प्रेम, मित्रता, विश्वजनीन घटनाएँ और चिंतन को जिस मानवीय दृष्टिकोण से डॉ. अवस्थीजी ने देखने का यत्न किया है, वह सब छोटे-छोटे सांस्कृतिक चित्रों के रूप में सहज ही मन को विमुग्ध करती है। डॉ. अवस्थी के दोहे अभिधा की नींव पर प्रतिष्ठित होते हुए भी लाक्षणिकता के सोपानों पर आरूढ़ होते हुए व्यंजना की ऊँचाइयों को सहज ही संस्पर्श करते हैं।
डॉ. दिनेश चन्द्र अवस्थीजी द्वारा विरचित प्रस्तुत कृति ‘दोहा-वल्लरी’ सुधी साहित्यकारों, विचारकों एवं सहृदयों के मध्य लोकप्रिय एवं समादृत होगी।
Govind Mishra Ki Lokpriya Kahaniyan by Govind Mishra
साहित्य मनीषी गोविन्द मिश्र के कथालेखन में नारीविमर्श का पुख्ता इतिहास रहा है, जिसकी याद बनाए रखना जरूरी है। स्त्रीपुरुष संबंध, विवाह जैसी सामाजिक संस्थाएँ और स्त्रीव्यक्तित्व के विकास से जुड़ी तमाम समस्याएँ उनकी चिंता के केंद्र में हमेशा से रही हैं।
लगभग 50 वर्षों में फैली उनकी साहित्ययात्रा अत्यंत समृद्ध एवं वैविध्यपूर्ण है। वे अपनी प्रत्येक रचना में एक नई भावभूमि, नया परिवेश और एक नई कथा को प्रस्तुत करते हैं। उनके कथालोक में पाठक भारत के गाँवकस्बे, नगरमहानगरों की ही नहीं वरन् विदेशी धरती तक की यात्रा कर आते हैं। उनकी रचनाओं में जीवनसंघर्ष की द्वंद्वात्मकता के साथ मनुष्यमन को आलोकित करती प्रेमानुभूति की अत्यंत सशक्त अभिव्यक्ति हुई है।
गोविन्द मिश्र अपनी कहानियों की लोकप्रियता के फेर में कभी नहीं पड़े। पूरी शिद्दत और पैनेपन के साथ लिखी उनकी ये लोकप्रिय कहानियाँ पाठकों को अवश्य पसंद आएँगफे
Grahakon Ko Khush Rakhna Seekhen by Promod Batra
ग्राहक की खुशी को सुनिश्चित करना या यूँ कहें कि ग्राहक की संतुष्टि उसके प्रति उत्तरदायित्व का मूल तत्त्व है। जिस व्यवसाय में ग्राहक के प्रति जितना ज्यादा उत्तरदायित्व होगा, वह व्यवसाय उतना ही अधिक सफल होगा। इसलिए ग्राहकों की बात सुनिए, अपने उनकी इज्जत कीजिए, उनकी जरूरतों का आदर कीजिए, उनसे मिले अनुभवों पर ध्यान (आलोचना नहीं) दीजिए, उनकी प्रशंसा कीजिए कि आप उनकी वजह से ही यहाँ हैं, और सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण बात कि नम्र बनिए, तब आप किसी भी व्यवसाय के लिए ‘श्रेष्ठ व्यक्ति’ हैं।
यह पुस्तक सलाह देती है कि अपने ग्राहकों की आवश्यकताओं और दुविधाओं के प्रति मित्रतापूर्ण व्यवहार प्रदर्शित कीजिए। ग्राहक की अधिक खुशी के लिए कम वादे करें और अधिक काम करें। महात्मा गांधी ने भी कहा था कि ‘ग्राहक भगवान् का रूप होता है।’ व्यवसाय की सफलता भी इसी ग्राहक-रूपी भगवान् की मुसकान में छिपी है। सरल-सुबोध भाषा में ग्राहकों/कस्टमर्स को खुश करके व्यावसायिक उन्नति के मूलमंत्र बताती एक रोचक एवं पठनीय पुस्तक।
Gram Swarajya by Mahatma Gandhi
ग्राम स्वराज्य—महात्मा गांधी
यह सोचना गलत है कि गांधीजी आज के उद्योगीकरण के बारे में बहुत पुराने विचार रखते थे। सच पूछा जाए तो वे उद्योगों के यंत्रीकरण के विरुद्ध नहीं थे। गाँवों के लाखों कारीगरों को काम दे सकनेवाले छोटे यंत्रों में जो भी सुधार किया जाए, उसका वे स्वागत करते थे। गांधीजी बड़े-बड़े कारखानों में विपुल मात्रा में माल पैदा करने के बजाय देश के विशाल जन-समुदायों द्वारा अपने घरों और झोंपड़ों में माल का उत्पादन करने की हिमायत करते थे। वे भारत के प्रत्येक सबल व्यक्ति को पूरा काम देने के बारे में बहुत अधिक चिंतित रहते थे और मानते थे कि यह ध्येय तभी सिद्ध होगा जब गाँवों में सुचारु रूप से ग्रामोद्योगों तथा कुटीर उद्योगों का संगठन और संचालन किया जाएगा।
महात्मा गांधी ग्राम-पंचायतों के संगठन द्वारा आर्थिक और राजनीतिक सत्ता के विकेंद्रीकरण का जोरदार समर्थन करते थे।
दुर्भाग्य से आर्थिक जीवन के नैतिक और आध्यात्मिक पहलू की हमेशा उपेक्षा की गई है, जिसके फलस्वरूप सच्चे मानव-कल्याण को बड़ी हानि पहुँची है। आधुनिक अर्थशास्त्री अब इस महत्त्वपूर्ण आवश्यकता पर जोर देने लगे हैं कि यदि हमें विशाल पैमाने पर तीव्र गति से आर्थिक विकास साधना है तो ‘वस्तुओं की गुणवत्ता’ बढ़ाने के साथ ‘मनुष्यता की गुणवत्ता’ भी बढ़ानी चाहिए। अतः वर्तमान परिस्थिति में गांधीजी के ‘ग्राम स्वराज्य’ की अवधारणा के पठन-पाठन की महती आवश्यकता है।
Grameen Swavlamban by Deepak Banka
औद्योगीकरण की गलत नीतियों से परंपरागत खेती एवं पशुपालन की बलि चढ़ गई है। इसके परिणामस्वरूप अत्यंत कम खर्च में आत्मनिर्भर होने का भारत का सपना भी ध्वस्त हो गया। औद्योगीकरण का प्रभाव खेती पर भी पड़ा। रसायनों, उर्वरकों और कीटनाशकों के साथ सिंचाई के आधुनिक तरीकों ने कृषि का खर्च बढ़ाया, जमीन की उर्वरा-शक्ति नष्ट की, भूजल के स्तर का सत्यानाश किया। जो खेती हमारा पेट भरने, तन ढकने, हमारी बीमारी का उपचार करने और हमारे सिर ढकने का आधार होने के साथ पर्यावरण संतुलन को कायम रखनेवाली थी, वही आज पर्यावरण बिगाडऩे वाली बन चुकी है। खेती महँगी होने के कारण छोटे किसानों के लिए अब खेती करना दूभर हो चुका है। इससे गाँवों की अर्थव्यवस्था चरमरा गई, अपने संसाधनों और ज्ञान के आधार वाला आत्मनिर्भर तंत्र खत्म हो गया।
यह पुस्तक देश की समस्याओं का विवेचन कर स्वदेशी की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देती है। इतना ही नहीं, भारत को बचाने तथा असली भारत बनाने का रास्ता भी सुझाती है।
जो कोई भी अपने आपको, अपने गाँव-समाज और देश को बचाने के लिए काम करना चाहते हैं, कृपया वे इस पुस्तक को अवश्य पढ़ें।