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Athashri Prayag Katha by Lalit Mohan Rayal
हर शहर का अपना एक रंग और मिजाज होता है। शहर के आस्वादन के तरीके भी अलग-अलग होते हैं। प्रयाग (इलाहाबाद नहीं! लेखक ने इसे सायास प्रयाग कहा है) अपनी तमाम ऐतिहासिकता के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते नौजवानों के लिए एक ख्यातिप्राप्त शहर है। लेखक ने मुख्यतः शहर के इस चरित्र को ही किताब का प्रतिपाद्य बनाया है।
यहाँ नौजवान प्रतियोगियों की एक भरी-पूरी दुनिया है, जिसमें अध्ययन, किताबें, नोट्स के अतिरिक्त जीवन की वह तमाम जद्दोजहद है, जो इस शहर की अंदरूनी लय में एकमएक हो जाती है। चूँकि यहाँ आनेवाले प्रतियोगियों में से अधिकांश हिंदी पट्टी के ग्रामीण क्षेत्रों से ताल्लुक रखते हैं, अतः नितांत मूलभूत कार्य-व्यवहार में उनके अनुभव दिलचस्प हो जाते हैं। यह वह दुनिया है, जिसमें सफलता-असफलता के बराबर उदाहरण मौजूद मिलते हैं। यह वह दुनिया है, जिसमें पूर्व से निवासरत कथित सीनियर अपने ज्ञान और अनुभव से आतंकित करता है, जहाँ प्रेम भी आता है तो नितांत एकतरफा; जहाँ अंधकार में भटकता युवा ज्योतिष-सामुद्रिक-हस्तरेखा ज्ञान में भी समाधान ढूँढ़ता है; जहाँ भटकन भी है, भोलापन भी और चालाकी भी।
रयाल निस्संदेह तैयार लेखक हैं। संस्मरणात्मक शैली में उन्होंने घटनाओं से चरित्र, व्यक्तित्व से विचार, मनोविज्ञान से दर्शन, सामाजिक व्यवहार से संस्कृति, इतिहास से मिथक जैसे बहुत से आयामों में कुशलतापूर्वक आवाजाही की है।
Atmadeep Banen by Manoj Srivastava
आज के भौतिकवादी व उपभोगतावादी युग में हम आत्मिक रूप से कमजोर पड़ते जा रहे हैं। इससे हमारा मनोबल गिर रहा है। मनोबल की कमी के कारण आज हम वह उपलब्धि प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं, जिसके हम वास्तविक हकदार हैं। आज प्रत्येक व्यक्ति अपनी मानसिक कमजोरी को दूर करने के लिए जागरूक होकर प्रयास कर रहा है, लेकिन उसको सफलता नहीं मिल रही। आजकल हर बच्चा कहता है कि सकारात्मक सोचें, बाजार में सबसे अधिक पुस्तकें स्वयं-सुधार (सेल्फ इंप्रूवमेंट) की ही बिक रही हैं। लोग तनाव-प्रबंधन के लिए ट्रेनिंग कैंपों में भाग लेते हैं, प्रवचन और लैक्चर सुनते हैं, किंतु उन्हें वांछित लाभ नहीं मिल रहा है।
प्रस्तुत पुस्तक में वर्णित अध्याय हमारे भीतर भाव एवं मनोविकार के मध्य चलनेवाले सकारात्मक विचारों पर केंद्रित हैं। प्रत्येक अध्याय एक-दूसरे से गुँथा है। अतः प्रयास यह किया गया है कि एक लय में रहकर मूल विचार से जुड़ा रहा जाए।
स्वीकार भाव, माफ करना या माफी माँगना, स्वाभिमान होना, क्रोध पर नियंत्रण, शांति व खुशी इत्यादि, वे अवधारणाएँ हैं, जिनके सहारे हम नकारात्मक जीवन से दूर हो जाते हैं, साथ ही सकारात्मक जीवन अपनाकर सफलता अर्जित करते हैं।
यह पुस्तक विकार दूर करके सत्वृत्तियाँ उत्पन्न कर जीवन का उत्कर्ष करने का मार्ग दिखानेवाली अनुपमेय कृति है।
Atmadrishti by Mehrunnisa Parvez
जानी-मानी कथाकार एवं ‘समर लोक’ साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका की संपादक।
रचना-संसार : आँखों की देहलीज, उसका घर, कोरजा, अकेला पलाश, समरांगण, पासंग (उपन्यास); आदम और हव्वा, उसका घर, गलत पुरुष, फाल्गुनी, अंतिम चढ़ाई, सोने का बेसर, अयोध्या से वापसी, ढहता कुतुबमीनार, रिश्ते, अम्माँ, समर, मेरी बस्तर की कहानियाँ तथा लाल गुलाब (कहानी-संग्रह)।
पुरस्कार-सम्मान : ‘पद्मश्री’, ‘अखिल भारतीय महाराज वीरसिंह जूदेव’, ‘सुभद्राकुमारी चौहान’, ‘साहित्य भूषण सम्मान’, ‘भारतभूषण सम्मान’ एवं ‘रामेश्वर गुरु पुरस्कार’।
लंबी कहानी ‘जूठन’ तथा ‘सोने का बेसर’ पर धारावाहिक प्रसारित। वेश्यावृत्ति जैसे सामाजिक अभिशाप पर टेलीफिल्म ‘लाजो बिटिया’ और स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित लोकप्रिय धारावाहिक ‘वीरांगना रानी अवंतिबाई’ का स्वयं निर्माण एवं निर्देशन किया। लंदन, फ्रांस, रूस आदि का भ्रमण कर कई सम्मेलनों में भाग लिया। साहित्य एवं समाज-सेवा में निरंतर सक्रिय। अंग्रेजी, उर्दू, मलयालम, पंजाबी, गुजराती, ओडि़या, मराठी आदि भाषाओं में कृतियाँ अनूदित। देश के विश्वविद्यालयों में इनके साहित्य पर पी-एच.डी.। सामाजिक समस्याओं पर कहानियाँ तथा साक्षात्कार दूरदर्शन एवं अन्य बहुआयामी माध्यमों से प्रसारित हुए हैं।
Atmakatha by Ramprasad Bismil
आत्मकथा—रामप्रसाद बिस्मिल
अंतिम समय निकट है। दो फाँसी की सजाएँ सिर पर झूल रही हैं। पुलिस को साधारण जीवन में और समाचार-पत्रों तथा पत्रिकाओं में खूब जी भर के कोसा है। खुली अदालत में जज साहब, खुफिया पुलिस के अफसर, मजिस्ट्रेट, सरकारी वकील तथा सरदार को खूब आड़े हाथों लिया है। हरेक के दिल में मेरी बातें चुभ रही हैं। कोई दोस्त, आशना अथवा यार मददगार नहीं, जिसका सहारा हो। एक परमपिता परमात्मा की याद है। गीता पाठ करते हुए संतोष है—
जो कुछ किया सो तैं किया,
मैं खुद की हा नाहिं,
जहाँ कहीं कुछ मैं किया,
तुम ही थे मुझ माहिं।
‘जो फल की इच्छा को त्याग करके कर्मों को ब्रह्म में अर्पण करके कर्म करता है, वह पाप में लिप्त नहीं होता। जिस प्रकार जल में रहकर भी कमलपत्र जलमय नहीं होता।’ जीवनपर्यंत जो कुछ किया, स्वदेश की भलाई समझकर किया। यदि शरीर की पालना की तो इसी विचार से कि सुदृढ़ शरीर से भली प्रकार स्वदेश-सेवा हो सके। बड़े प्रयत्नों से यह शुभ दिन प्राप्त हुआ। संयुक्त प्रांत में इस तुच्छ शरीर का ही सौभाग्य होगा। जो सन् 1857 के गदर की घटनाओं के पश्चात् क्रांतिकारी आंदोलन के संबंध में इस प्रांत के निवासी का पहला बलिदान मातृ-वेदी पर होगा।
—इसी पुस्तक से
अमर शहीद, क्रांतिकारियों के प्रेरणा-ग्रंथ पं. रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की आत्मकथा मात्र आत्मकथा नहीं है। उनके जीवन के सद्गुणों का सार है, जो भावी पीढ़ियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी है। हर आयु वर्ग के पाठकों के लिए पठनीय एवं संग्रहणीय पुस्तक।
Atmavishvas (Self Confidence) by P.K. Arya
अगर आप आत्मविश्वास से भरपूर हैं और फौलादी इरादोंवाले हैं, फिर किसी की जुर्रत नहीं जो आपके मार्ग की बाधा बने। आत्मविश्वास वह सुरक्षा कवच है, जो हर तरह की बाधाओं के विरुद्ध आपकी रक्षा करता है, और सदैव आपको सफलता के मार्ग की ओर अग्रसर करता है।
प्रश्न उठता है कि आत्मविश्वास पैदा कैसे हो? उत्तर है—इसके लिए हमारे इरादे मजबूत होंने चाहिए। मजबूत इरादे ही आत्मविश्वास पैदा करते हैं। इरादों का लचीलापन, सोच की कमजोरी, असमंजसता आदि वे अवगुण हैं, जो हमारे आत्मविश्वास को दरकाते हैं, अस्थिरता लाते हैं और हमें अवनति की ओर धकेलते हैं। इसलिए हमें पूरे आत्मविश्वास के साथ समर्पित भाव से अपने कर्म करने चाहिए, फिर निश्चित ही परिणाम सकारात्मक होंगे।
जो लोग यह कहते हैं कि मैं अमुक काम नहीं कर सकता, उनका आत्मविश्वास निश्चित ही डिगा हुआ है। वे लोग जीवन में सफलता से कोसों दूर हैं। जिनके पास आत्मविश्वास रूपी किला होता है, वह कभी भी स्वयं को असुरक्षित महसूस नहीं करता।
आत्मविश्वास विकसित करने की प्रेरणा देने वाली पठनीय पुस्तक ।
Atulya Bharat Ki Khoj by Rishi Raj
समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, विविध पर्यटक आकर्षण, कई धार्मिक तीर्थ केंद्रों का घर तथा कई बड़ी पवित्र नदियों का समागम है भारत। वर्षों से इसकी संस्कृति अलग, अनोखी एवं अद्वितीय रही है। बहुधार्मिक, बहुभाषी तथा पारंपरिक भारतीय पारिवारिक मूल्यों से सम्मिलित इस देश को रचनाकार आदर से प्रणाम करते हैं। लेखक को भारत के 31 राज्यों को जानने और समझने का मौका मिला। भारत की गरिमामयी मिट्टी से प्राप्त अनुभवों को लेखक ने इस पुस्तक में सँजोया है। भारत की सांस्कृतिक विरासत की सुगंध से मन आज भी महक उठता है, परंतु मोक्ष एवं ज्ञान का प्रवेशद्वार कहे जानेवाले भारत की विरासत के रहस्य को एक तरफ समस्त संसार देखने आता है तो दूसरी तरफ खुद भारतीय ही इसे भूलते जा रहे हैं। लेखक अपनी इस पुस्तक में भारत की अनूठी सांस्कृतिक उपलब्धियों तथा अपने अनुभवों का सुंदर वर्णन करते हुए अत्यंत गौरवान्वित हैं। अपनी इस भ्रमण यात्रा को इस पुस्तक में ‘अतुल्य भारत की खोज’ का नामकरण दिया गया है, जो स्वयं में इस उपमा को चरितार्थ करता है कि भारत जैसा अनुपम देश दुनिया में दूसरा नहीं है।
भाग्यशाली हूँ मैं जो इस पावन धरा पर मेरा जन्म हुआ, भारत माँ की गोद में खेलकर जीवन मेरा धन्य हुआ, काश! कभी चुका पाऊँ कर्ज इस धरा का, रातदिन ध्यान रहता सी का।