Akhil Bhartiya Sainik School Pravesh Pariksha (Kaksha-10 k Liye)

SKU: Mag-18789

A Modern Approach to pass various competitive exams based on the current syllabus and helpful to excel in Akhil Bhartiya Sainik School Pravesh Pariksha (Kaksha-10 k Liye)
exams and perform best in their career and comes with detailed solutions, not just the answer key, for each and every question included in it. It promotes self-evaluation by enabling you to not only practice and revise concepts but also keep track of your progress. This book allows you to clarify your doubts and remove the fears generally associated with exams, improve your concentration and hone your time management skills, enabling you to answer the questions within the given time frame.

Akhil Bhartiya Sainik School Pravesh Pariksha (Kaksha-VI k Liye)

SKU: Mag-18553

A Modern Approach to pass various competitive exams based on the current syllabus and helpful to excel in “Akhil Bhartiya Sainik School Pravesh Pariksha (Kaksha-VI k Liye)” exams and perform best in their career and comes with detailed solutions, not just the answer key, for each and every question included in it. It promotes self-evaluation by enabling you to not only practice and revise concepts but also keep track of your progress. This book allows you to clarify your doubts and remove the fears generally associated with exams, improve your concentration and hone your time management skills, enabling you to answer the questions within the given time frame.

Akhiri Daon by Nilamber Kaushik

SKU: 9789386054852

नीलांबरजी में वह सृजनात्मक ऊर्जा है, जो किसी भी रचनाकार के लिए आवश्यक होती है। वस्तुतः यह ऊर्जा ही पाठकों को अपनी ओर खींचती है। घटनाओं, पात्रों, उनके चरित्रों और लेखक के विचारों से उनका तादात्म्य कराती है।
नीलांबरजी की कहानियाँ विषय-वस्तु और रूप-विधान के स्तर पर विशुद्ध कहानियों की श्रेणी में आती हैं। वे परंपरावादी होकर भी विषय-वस्तु की दृष्टि से यथार्थवादी हैं। उनकी कहानियों में समकालीन सामाजिक यथार्थ के सभी पक्ष, तथ्य, जीवन के अनुभव और मनःस्थितियाँ हैं। उन्होंने अपनी रचना को जीवन से जोड़ने की भरपूर कोशिश की है। ये कहानियाँ बोझिल या ऊबाऊ नहीं हैं। सहज, सरस, किस्सागोई से भरपूर और अनुभूति प्रधान हैं।
संग्रह की कहानियाँ अलग-अलग कालखंडों में लिखी गईं, जो अलग-अलग विषय-वस्तु की हैं। बावजूद इसके वे डेटेड नहीं लगतीं, क्योंकि उनमें निहित मानवीय संवदेना और सांस्कृतिक चेतना के स्वर सार्वकालिक हैं।
नीलांबरजी की अधिकांश कहानियाँ अपनी कहन शक्ति, रोचकता, कुतूहल और कथातत्त्व से भरपूर हैं। भाषा सहज और संप्रेष्य है। सामाजिक समस्याओं और जीवंत चरित्रों के कारण ये कहानियाँ पाठकों के दिल में अपनी जगह बनाएगी, ऐसी आशा है।

Akram Express – Hindi

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An exclusive magazine “Akram Express” just for young Kids. It contains Moral Stories, Mythological Stories, Puzzles, Activities and Golden Moments with Gnani, which is published every month.

Aksharpath

SKU: Mag-17367

a hindi magazine monthly with poetry -stories -political-social articals-fim reviews

Akshaya Gaurav

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अक्षय गौरव एक सामाजिक एवं साहित्यिक वेब पत्रिका है। जिसका प्रबंधन एवं सम्पादन उत्तर प्रदेश के जिला मेरठ से किया जाता है। अक्षय गौरव की शुरूआत नये लेखकों, साहित्यकारों, कवियों को एक मंच उपलब्ध कराने के लिए किया गया है। ताकि उनकी उभरती हुई नई सोच और नजरिये को सामाजिक बुराईयों व कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए बुलंद किया जा सके। इस पत्रिका का उद्देश्य साहित्यिक एवं सामाजिक लेखों को निष्पक्ष रूप से प्रकाशित करना है। इस मंच पर आप सभी ब्लॉगरो, लेखकों, साहित्यकार, कवियों एवं व्यंग्यकारों का स्वागत है।

Akshaya Gaurav – Patrika

SKU: Mag-19467

अक्षय गौरव त्रैमासिक ई-पत्रिका है। अक्षय गौरव ई-पत्रिका का प्रकाशन पूर्णतया अव्यवसायिक एवं साहित्य को समर्पित है।
अक्षय गौरव त्रैमासिक ई-पत्रिका है, जिसकी स्थापना सन् 2011 में साहित्य के उत्थान के उद्देश्य से की गई थी। शुरूवात में पत्रिका को प्रिन्ट वर्जन में प्रकाशित किया गया और 2014 में ऑनलाइन कर दिया। वर्तमान में मई 2017 से अक्षय गौरव ई-पत्रिका का संचालन प्राची डिजिटल पब्लिकेशन द्वारा किया जा रहा है।
अक्षय गौरव ई-पत्रिका का प्रकाशन पूर्णतया अव्यवसायिक एवं साहित्य को समर्पित है। इसका संपादन साहित्य को समर्पित साहित्यकारों व कवियों और लेखकों के द्वारा किया जा रहा है। इस ई-पत्रिका के संपादक मंडल अवैतनिक रूप से साहित्य के लिए समपर्ण भाव के साथ संपादन की जिम्मेदारी उठा रहे है।
आईये! साहित्य की सेवा में अपना सहयोग प्रदान करें।

इस अंक में

1. संपादकीय

2. शाश्वत प्रश्न (कविता) – गोपेश मोहन जैसवाल

3. बसंत अभिराम (कविता) – पुष्पा मेहरा

4. बुद्ध की यशोधरा (कविता) – रेणुबाला

5. वह मासूम पगली (कविता) – अनीता लागुरी “अनु”

6. पिता के जाने के बाद (कविता) – सतीश राठी

7. आज भी (कविता) – सचिन पुरी

8. ख़ूबसूरत देखने की आदत (कविता) – ऋतु असूजा

9. जीवन गीत – प्रेमलता चसवाल ‘प्रेमपुष्प”

10. गीत : स्तुति – पुष्प राज चसवाल

11. मैं नारी हूँ (कविता) – डॉ. ललिता यादव

12. प्यार बहुत करते थे मगर हम-सफ़र न बन सके (कविता) – डॉ. ज़फर ऐरोली

13. कुंडलिया – शशि पुरवार

14. मुझे इश्क़ है (कविता) – डा० कनिका वर्मा

15. भयादोहन (कविता) – रवीन्द्र सिंह यादव

16. होली (गीत) – पुष्पा मेहरा

17. नारी (कविता) – शारदा अरोरा

18. चित्तवेदना (कविता) – कुन्दन कुमार

19. दिल की बात (कविता) – मनोज कायल

20. ज़माना बदल गया है (लेख) – साधना वैद

21. ताड़ना के अधिकारी (लेख) – विश्वमोहन

22. डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी की तीन लघु कथाएँ (लघुकथाएं)

23. अमीरी की सीमा तय किये बिना ग़रीबों का कल्याण नहीं (लेख) – राजेन्द्र वर्मा

24. हे स्पीड प्रेमी बाइकरों… राहगीरों पर रहम करो…!! – तारकेश कुमार ओझा

25. बेढंगा मेढक (कहानी) – ध्रुव सिंह ‘एकहानी)

Al Risala Hindi

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To give full expression to positive ideas, Maulana Wahiduddin Khan established the Islamic Centre at New Delhi in 1970. Subsequently, in 1976, he launched the voice of the mission, Al-Risala – the monthly magazine. This journal, consisting entirely of his own articles, quickly acquired a wide circulation throughout the Urdu-speaking world, and has done much to make people understand the peaceful face of Islam, to awaken in Muslims a new awareness of their social responsibilities and to promote positive thinking and action. The first issues of the English and Hindi versions of Al-Risala were launched respectively in February 1984, and December 1990. The English version is now being published under the title of Spirit of Islam.

Alaukik Yogini by Shambhuratna Tripathi

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विद्रोह, वैराग्य, विद्वत्ता की
विलक्षण विभूति
योगिनी राधाबाई
रूसी योगिनी
मदाम एच.पी. ब्लावतस्की
रूसी योगिनी राधाबाई (मदाम एच.पी. ब्लावतस्की) विश्व-इतिहास की अप्रतिम महिला हैं। रूस में जन्म लिया, लेकिन भारतीय योग और ब्रह्मविद्या के लिए जीवन अर्पित किया; सामंती परिवार की सदस्य थीं, लेकिन वैराग्यपूर्ण जीवन अपनाया; अल्पशिक्षित थीं, लेकिन पांडित्यपूर्ण ग्रंथ लिखे; महिला थीं, लेकिन तिब्बत में रहकर योग-साधना द्वारा अलौकिक शक्तियों पर अधिकार किया। लगभग एक शताब्दी पूर्व उनके तेज और ओज से संसार का प्रबुद्ध जगत् आंदोलित हो उठा था। महात्मा गांधी, महाकवि डब्ल्यू.वी. यीट्स, वैज्ञानिक डॉ. सी. कार्टर ब्लैक, कांग्रेस के संस्थापक सर ओ.ए. ह्यूम, दार्शनिक लीड बीटर आदि उनसे बहुत प्रभावित हुए थे तथा डॉ. एनी बेसेंट ने उनको अपना गुरु बनाकर अपने को धन्य माना था। उनका संपूर्ण जीवन साहस और संघर्ष, अलौकिकता और विलक्षणताओं, विद्रोह और वैराग्य, तप और त्याग से आपूरित रहा है। भारतीय संस्कृति की इस अनन्य सेविका और संपोषिका के जीवन का प्रत्येक पृष्ठ उपन्यास से अधिक रोचक, कविता से अधिक सम्मोहक तथा नीति-ग्रंथ से अधिक उद्बोधक है। हिंदी के पाठक इस विराट् व्यक्तित्व के महान् जीवन का पहली बार विस्तृत परिचय प्राप्त करेंगे।