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Amir Khan by Pradeep Chandra
अभिनेता, निर्माता, निर्देशक आमिर खान के इतने रूप हैं कि इन्हें किसी एक पुस्तक में समेटना लगभग असंभव है। लेखक व फोटोग्राफर प्रदीप चंद्रा ने आमिर के कॅरियर की उस राह को समझने का दुर्गम प्रयास किया है, जिस पर चलकर वह भारतीय फिल्म कला में महत्तम योगदान देने के साथ ही बड़ी आबादी को प्रभावित करनेवाले व्यक्ति के रूप में उभरे।
यह पुस्तक लेखक की ओर से उस सुपर स्टार तथा उसके पीछे के व्यक्ति को एक भेंट है। आमिर के शुरुआती दिनों से ही उनकी तसवीरें लेनेवाले फोटोग्राफर चंद्र ने इसमें वे शानदार तसवीरें, पेंटिंग, स्कैच और अविस्मरणीय तसवीरें शामिल की हैं, जो आमिर की उनकी कला के प्रति गंभीरता व समर्पण दरशाती हैं। चंद्र ने आमिर के कॅरियर का अध्ययन उनकी यात्रा का निर्माण करने में महत्त्वपूर्ण रहे लोगों, स्थानों व हालात को समझने की दृष्टि से किया है। उन्होंने आमिर की उस तकनीक को खँगाला, जिससे उन्होंने इस अनुमान-आश्रित कारोबार में कला व व्यापार दोनों का मिश्रण कर आलोचकों को प्रसन्न करने के साथ ही दर्शकों को भी आकर्षित करने का असाधारण कार्य कर दिखाया।
इस पुस्तक की भूमिका के लेखक रजत शर्मा हैं।
Amrut Manthan (Hindi)
The three worlds of the universe were reeling from shock: the asuras had taken control! Even the plants were withering away. Only the great Lord Vishnu could make tHings right again. He got both devas and asuras to churn up life-giving nectar from the ocean of milk and then ensured that the asuras were kept away from this gift of immortality.
Anand Prakash Jain Ki Lokpriya Kahaniyan by Anand Prakash Jain
श्री आनंद प्रकाश जैन हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक रहे हैं। पचास से अस्सी के दशक तक उनके नाम की खूब धूम थी। उनकी सभी सामाजिक और ऐतिहासिक रचनाओं को दिल खोलकर पाठकों ने सराहा। इस संग्रह में उनकी तेरह चुनी हुई ऐतिहासिक, सामाजिक और हास्य कहानियों का संग्रह है। एक अंतराल के बाद इस कृति को उनके प्रशंसकों के सामने रखते हुए हमें प्रसन्नता हो रही है। ‘रथ के पहिए’, ‘काली बेगम’, ‘अग्निपुरुष’, ‘गिरिजे का कंगूरा’, ‘अंतिम नग’, ‘अंतिम अस्त्र’, ‘हर्ष के आँसू’ और ‘पीले हाथ’ उनकी ऐतिहासिक कहानियाँ हैं। ‘बोलने वाला बुत’ एक हास्य-कथा है। अपनी ऐतिहासिक कहानियों में उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों की सत्यता को बरकरार रखा। ‘रथ के पहिए’ में अहिंसा धर्म के पालक सम्राट् अशोक का हिंसक चेहरा, ‘अंतिम नग’ में बानों की सहेली बदरुन्निसा का उसके प्रति निश्छल प्रेम इसके उदाहरण हैं। इनमें से ज्यादातर कहानियों में नायिकाएँ पत्नी, दासी, नर्तकी रानी या विषकन्या हर रूप में नारी अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाती नजर आती हैं। इन मार्मिक कहानियों में नारी पात्रों में अपने आदर्शों, सिद्धांतों, कर्तव्यों व अधिकारों के लिए अपने प्राणों की आहुति देते सशक्त नारी के दर्शन होते हैं।
ये सभी कहानियाँ आपको आधुनिक समस्याओं में घिरे समाज से परिचित कराती हैं। श्री जैन के शारीरिक अवसान के बाईस साल हो गए। लेकिन आज भी इस उनकी कहानियाँ आधुनिक समाज का प्रतिनिधित्व करती हैं। सभी पाठकों के लिए यह संग्रह उनकी एक अनुपम भेंट ही तो हैं।
Anand-Lehar by Ramchandra Dwivedi
यह सृष्टि द्वंद्वमय है। जीवन के प्रत्येक क्रिया-कलाप के साथ सम-विषम भाव जुडे़ हुए हैं। लेखनी या वाणी तो सीमित साधनमात्र है।
पद्यमय रचना पाठकों को अच्छी लगती है, अतः तुकांत पदों में रचना होने लगी। हर्ष, आनंद, खुशी, उल्लास, आमोद-प्रमोद, प्रसन्नता के ही पर्याय हैं। आनंद की अनुभूति केवल ठहाके लगाने या मुसकराने से ही नहीं होती। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में खुशी की खोज की जा सकती है। प्रस्तुत पुस्तक में हम व्यावहारिक जगत् के कुछ विषयों का संक्षेप में उल्लेख कर रहे हैं, जो आनंद-प्राप्ति में साधनरूप हैं—हास्य के स्रोत, हँसी का महत्त्व, काल और स्थान, मानव-स्वभाव, श्रम का महत्त्व, सांसारिक संबंध, प्राचीन साधन, सुख की खोज, आशा का बंधन, मन की पहचान, सज्जन-दुर्जन, जड़-चेतन में हास्य, वाणी का महत्त्व, परसेवा, परिश्रम तथा भाग्य, सुख-साधन, जगत्-धर्म, प्रकृति के वरदान, कृत्रिमता, कंप्यूटर-युग आदि।
व्यक्ति के उत्थान-पतन से जुड़े ये विचार पठनीय तो हैं ही, संग्रहणीय भी हैं। हर आयु-वर्ग के पाठकों के लिए यह पुस्तक रोचक, ज्ञानवर्धक और आनंददायक है।