Pyari Astha Ko Pita Ki Paati by Kaajal Oza Vaidya

पिछला वर्ष पूरा हो गया और साथ ही समाप्त हो गईं कितनी कठिनाइयाँ, कितने प्रश्न!
मैंने तुझे कहा था न, हर नया सूर्योदय नए आनंद के साथ आता है! ईश्वर भी मनुष्य की हिम्मत और उसके संजोगों के सामने लड़ने की तैयारी कितनी है, इसकी जाँच करता है कभी। हमारे साथ भी ऐसा ही
हुआ है।
हमने साथ मिलकर परिस्थिति के सामने जो हिम्मत भरी लड़ाई लड़ी है, उसे देखकर शायद भगवान् को भी समझ में आ गया होगा कि वह हमें इससे अधिक दुःखी नहीं कर सकता।
जिंदगी कभी भी हम सहन न कर सकें, उससे ज्यादा तकलीफ देती ही नहीं है।
तू समझी? हमें अपनी सहन-शक्ति को बढ़ाना है, अर्थात् जिंदगी ने जो तकलीफ दी है, वह हर बार हम सहन कर सकें, उससे कम ही लगती है।
बेटा! मुझे तुझसे कहना चाहिए कि तू इन परिस्थितियों की लड़ाई में जिस तरह मेरे साथ रही और तूने जिस तरह मेरा साथ दिया, उस बात ने मुझे बहुत हिम्मत और शक्ति दी है। बेटा, मैंने तुझे कभी-कभी रोल रिवर्स करके तेरी मम्मी की माँ बनते हुए तुझे देखा है। इन थोड़े से दिनों में ही तू मानो अचानक ही कुछ वर्ष बड़ी हो गई हो, ऐसा मुझे
लगता है।
—इसी पुस्तक से
——1——
पिता द्वारा पुत्री को लिखीं ममत्व भरीं, जीवन के मर्म को समझातीं, सकारात्मकता जाग्रत् करतीं पातियाँ, जो हर बालिका को संदेश देती प्रतीत होती हैं।
एक अत्यंत भावुक पुस्तक!

Language

Hindi

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