Dada-Dadi Ki Kahaniyon Ka Pitara by Sudha Murty
हर दिन एक कहानी
मुश्किलों के बिन जिंदगानी!
यह वर्ष 2020 की बात है, जब बच्चे घरों में कैद होकर रह गए; क्योंकि नोवेल कोरोना वायरस भारत में आ धमका है। पूरे देश में लॉकडाउन घोषित हो चुका है, और इस बढ़ते संकट के बीच अज्जा और अज्जी अपने पोते-पोतियों और कमलु अज्जी का शिग्गाँव स्थित अपने घर में स्वागत करते हैं।
मास्क सिलने से लेकर, घर के काम में हाथ बँटाने और श्रमिकों के लिए खाना तैयार करने से लेकर कालातीत कहानियों में खो जाने तक बच्चों के लिए लॉकडाउन का समय यादगार बन जाता है, जब वे देवी-देवताओं, राजाओं, राजकुमारों, साँपों, जादुई फलियों, चोरों, साम्राज्यों और महलों की दिलचस्प दुनिया में कदम रखते हैं। दादा-दादी की सुनाई अनगिनत कहानियाँ उनके जीवन में खुशियाँ भर देती हैं, जिनसे बच्चे दुनियादारी को लेकर पहले से कहीं अधिक दयालु और समझदार हो जाते हैं।
भारत की लोकप्रिय लेखिका सुधा मूर्ति आपके लिए नैतिक गुणों से भरी ‘दादा-दादी की कहानियों का पिटारा’ का ऐसा संग्रह लेकर आई हैं, जिसे उन्होंने लॉकडाउन के दौरान बड़े प्यार से सँजोया है, ताकि नन्हे-मुन्ने पाठकों को सुकून मिले और वे दूसरों की देखरेख तथा उनके साथ चीजों को साझा करने के चमत्कार का अनुभव प्राप्त कर सकें। उनकी चिर-परिचित शैली में बेहतरीन ढंग से बुनी गई पुस्तक को आप पढ़ने लगें तो उसे छोड़ने का मन नहीं करेगा और यह हर बच्चे के बुकशेल्फ के लिए एक आवश्यकता तो
है ही!
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Hindi |
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