Bundelkhand Ke Agradoot by Rakesh Kumar Agrawal
आज हर क्षेत्र में इज्जत, शोहरत और पैसा है लेकिन अतीत में ऐसा नहीं था। फिर भी ऐसे समय में भी कुछ लोगों ने साहित्य, कला और खेल के क्षेत्र में पूर्ण निष्ठा से जी-जान लगाकर काम किया। यह उनका जुनून समझ लें या उनकी लगन, जिसकी वजह से उन्होंने अपनी आखिरी साँस तक मिट्टी के लगाव को वृद्ध नहीं होने दिया।
आजकल सोशल मीडिया और इलैक्ट्रॉनिक मीडिया के जमाने में कोई भी बात या खबर बिजली की रफ्तार से फैलती है। लेकिन हम कल्पना कर सकते हैं कि उस दौर में कैसे बुंदेलखंड के अग्रदूतों—मुंशी प्रेमचंद, मैथिलीशरण गुप्त, बाबू केदारनाथ अग्रवाल, वृंदावनलाल वर्मा, हॉकी के जादूगर दद्दा ध्यानचंद, बाबू श्यामलाल ‘इंदीवर’, महारानी लक्ष्मीबाई, मिर्जा गालिब, रायप्रवीण और मस्तानी ने अपनी यशकीर्ति की पताका पूरी दुनिया में फहराई होगी?
हर क्षेत्र का अपना एक एवरेस्ट होता है। स्टार और सुपरस्टार केवल सिनेमा में ही नहीं होते। वर्तमान समय में हर क्षेत्र में काम करनेवाले लोगों के पास अकूत संपत्तियाँ हैं। लेकिन उन लोगों के कला प्रेम का कोई मूल्य नहीं लगाया जा सकता जिन्होंने जिंदगी के उतार-चढ़ाव और फाकाकशी के चलते भी अपने कर्म से समझौता नहीं किया। इसलिए लेखक को अपनी जन्मभूमि बुंदेलखंड के ये अग्रदूत मिथकीय पात्रों से बिल्कुल भी कम नहीं लगते।
बुंदेलखंड की प्रमुख महान् विभूतियों को एक पुस्तक में सहेजने का यह पहला अभिनव प्रयास है। निश्चित तौर पर छात्रों, शोधार्थियों एवं अन्य पाठकों को यह पुस्तक लाभान्वित करेगी।
| Language |
Hindi |
|---|
Kindly Register and Login to Lucknow Digital Library. Only Registered Users can Access the Content of Lucknow Digital Library.
